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BaरKaट्ठा Ki आwaज
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- प्रयागराज महाकुंभ-2025 से वायरल हुई माला बेचने वाली मोनालिसा भोसले ने केरल में फरमान खान के साथ शादी कर ली है। एक वीडियो सामने आया है, जो एक मंदिर का है। मोनालिसा ने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। उन्होंने फरमान के साथ मंदिर में दर्शन किए। हालांकि यह रिश्ता मोनालिसा के परिवार को मंजूर नहीं है। मोनालिसा ने अपने परिवार से ही अपनी जान को खतरा बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनालिसा ने 9 मार्च को केरल पुलिस से सुरक्षा की मांग की। पुलिस से कहा- वह फरमान के साथ रहना चाहती हैं। अलग-अलग धर्म से होने के कारण परिवार की तरफ से उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके परिवार, खासकर उनके पिता जयसिंह भोसले, उसके रिश्ते का विरोध कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।1
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- हजारीबाग की रामनवमी ईनटरनेशनल है । पर आज तक सरकार से ईस वो मानयता नही मीली जो मीलनी चाहिऐ । उपर से सरकार ने डीजे पर रोक लगा दी है जो दुखद है ।1
- बगोदर थाना क्षेत्र के बगोदर बाजार में प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों और वाहन सवार लोगों के बीच विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना बुधवार की बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, सरिया थाना क्षेत्र के करंबा गांव निवासी दिलीप कुमार गुप्ता अपने परिजनों के साथ भाड़े की बोलेरो से तिलक कार्यक्रम में शामिल होने निमियाघाट जा रहे थे। आरोप है कि बगोदर बाजार में फल लेने के लिए गाड़ी रुकने के दौरान कुछ रिकवरी एजेंट वहां पहुंचे और बोलेरो पर लोन बकाया होने की बात कहकर वाहन सवार लोगों के साथ मारपीट करने लगे। इस घटना में शिवनंदन कुमार घायल हो गए, जबकि बीच-बचाव कर रहे रंजीत और जागेश्वर के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। पीड़ित पक्ष ने बगोदर थाना में दिए आवेदन में रिकवरी एजेंट अमीर अली, मटन विक्रेता अफजल सहित करीब दस अज्ञात लोगों पर मारपीट और 51 हजार रुपये नकद व आभूषण छीनने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर पकड़े गए अफजल का कहना है कि वह सड़क किनारे मटन की दुकान चलाता है और इस विवाद से उसका कोई लेना-देना नहीं है। उसके अनुसार, वाहन सवार लोगों ने उसके साथ भी मारपीट की और जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जा रहे थे। घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए अफजल को थाना लाया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद कथित रिकवरी एजेंट मौके से फरार हो गए। इस संबंध में थाना प्रभारी विनय कुमार यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं की छानबीन के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- *हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने रामनवमी पर डीजे प्रतिबंध का झारखंड विधानसभा में किया कड़ा विरोध* हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने पवित्र पर्व राम नवमी के अवसर पर शोभा यात्रा में डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर झारखंड सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस निर्णय को धार्मिक परंपराओं और जनता की आस्था के विरुद्ध बताते हुए उन्होंने झारखंड विधानसभा परिसर में सदन के बाहर धरना देकर अपना विरोध प्रकट किया। विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि रामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की गहरी आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। विशेष रूप से हजारीबाग की रामनवमी पूरे देश में अपनी भव्यता, अनुशासन और ऐतिहासिक परंपरा के लिए जानी जाती है। हर वर्ष यहां निकलने वाले भव्य शोभा यात्रा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और पूरा शहर भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर पर डीजे बजाने पर रोक लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह सीधे-सीधे लोगों की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के साथ खिलवाड़ है। विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंदू पर्वों और परंपराओं के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रदीप प्रसाद ने यह भी मांग की कि हजारीबाग में आयोजित होने वाले ख्याति प्राप्त इंटरनेशनल श्री चैत्र रामनवमी महोत्सव को राज्य सरकार द्वारा राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया जाए। साथ ही उन्होंने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया कि रामनवमी के जुलूसों में परंपरा के अनुरूप डीजे बजाने की अनुमति प्रदान की जाए, ताकि श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार उत्सव मना सकें। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को जनता की धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता है, तब भी हजारीबाग में रामनवमी के अवसर पर परंपरा के अनुसार डीजे बजाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रामनवमी का पर्व सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और धार्मिक आस्था का प्रतीक है, और इस पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक प्रतिबंध स्वीकार नहीं किया जाएगा।3
- Post by Boltajharkhand1
- -- किसान संगठनों और जनसंघर्ष मंचों का संयुक्त आंदोलन, 11 सूत्री मांगों को लेकर बिरसा चौक से विधानसभा तक प्रदर्शन -- पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता के नेतृत्व में हजारीबाग से सैंकड़ों आंदोलनकारी हुए शरीक ___ हजारीबाग। जल, जंगल और जमीन की रक्षा, विस्थापन नीति की घोषणा तथा सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार को किसान और जन आंदोलनकारी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में विशाल धरना-प्रदर्शन एवं विधानसभा मार्च का आयोजन किया गया। इस आंदोलन में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीर सागर, राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड के.डी. सिंह, झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं झारखंड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सांसद भूवनेश्वर प्रसाद मेहता सहित किसान सभा के विभिन्न पदाधिकारियों के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में किसान सभा के महासचिव एवं झारखण्ड आन्दोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक कॉमरेड पुष्कर महतो, संगठन सचिव अजय सिंह, झारखण्ड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता तथा खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मो. हकीम सहित कई सामाजिक और किसान नेताओं ने भाग लिया। झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता के नेतृत्व में हजारीबाग से सैंकड़ों आंदोलनकारी इस आंदोलन में शरीक हुए। यह संयुक्त आंदोलन झारखण्ड राज्य किसान सभा, झारखण्ड राज्य आन्दोलनकारी संघर्ष मोर्चा, झारखण्ड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा, झारखण्ड राज्य स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच और खतियानी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। आंदोलन का उद्देश्य राज्य में किसानों, आन्दोलनकारियों और आम जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से़ उठाना था। आंदोलनकारियों ने 11 सूत्री मांगों को लेकर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रमुख मांगों में जल, जंगल और जमीन की लूट पर रोक लगाने तथा विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही अंचलों में दाखिल-खारिज भूमि की विवरणी को ऑनलाइन करने और एल.पी.सी. में हो रही घूसखोरी पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। आंदोलनकारी संगठनों ने विस्थापन आयोग के गठन, स्पष्ट नियोजन और व्यापक विस्थापन नीति की घोषणा की मांग की। साथ ही भूमि बैंक को समाप्त कर गैर मजरूआ जमीन की रसीद काटने, अधिग्रहण की स्थिति में रैयतों को रैयती की मान्यता देते हुए उचित दर से मुआवजा देने तथा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को सख्ती से लागू करने की मांग भी की गई। उन्होंने उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने की भी मांग की। धरना-प्रदर्शन में ग्रामीण विकास विभाग, आर.ई.ओ. तथा पीडब्ल्यूडी के सड़क और भवन निर्माण कार्यों में कथित टेंडर घोटालों की जांच की मांग भी उठाई गई। इसके अतिरिक्त हजारीबाग में वर्षों से निर्मित सिलवार पॉलिटेक्निक कॉलेज को चालू करने, चंदवारा और सुर्यकुण्ड में डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसरों की बहाली शुरू करने तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति शीघ्र करने की मांग शामिल है। आंदोलनकारियों ने गोन्दलपुरा, बादम और मोईत्रा सहित उपजाऊ जमीन वाले कोल ब्लॉकों को रद्द करने तथा इन परियोजनाओं के विरोध में दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही झारखण्ड आन्दोलनकारियों पर लगे जेल की बाध्यता समाप्त कर छत्तीसगढ़ और उत्तराखण्ड की तर्ज पर सभी आन्दोलनकारियों को समान रूप से पेंशन देने की मांग भी उठाई। इस दौरान आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के झारखंड से बाहर रहने के कारण झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्णन किशोर, नगर विकास मंत्री सोनु कुमार सुदिव्य और मंत्री योगेंद्र महतो से मिलकर 11 सूत्री मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपा झारखंड सरकार के मंत्रियों ने सभी मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। आंदोलनकारी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो राज्यव्यापी जनआंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आंदोलन में हजारीबाग से पूर्व सांसद के साथ निजाम अंसारी, शमीम अनवर, मोहम्मद इम्तियाज, अनवार उल हक, अखिलेश कुमार, अधिवक्ता शंभू कुमार, खतियानी परिवार जिला अध्यक्ष अशोक राम, कामरेड अनंत कमार आर्या, राजेश कुमार, मिश्रजीत, मेहता आनंद कुमार, प्रदीप कमार, प्रकाश मेहता, अनिल कुमार, भीम मेहता, उमेश मेहता, श्रीकांत मेहता, ईश्वर मेहता, जय नारायण मेहता, बिंदेश्वरी प्रसाद मेहता सहित हजारों आंदोलनकारी नेता शामिल हुए। वहीं पूरे झारखंड राज्य से तकरीबन दस हजार के करीब आंदोलनकारी शरीक हुए।1
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