राजस्थान की सूफियाना परंपरा की एक रूहानी आवाज़ खामोश, कोक स्टूडियो से मिली थी पहचान, 50 से ज्यादा देशों में बिखेरा था सिंधी कलाम का जादू अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार सावन खान दबड़ी 70 वर्ष निधन हो गया। जैसलमेर के दबड़ी गांव के निवासी और लोक संगीत व सिंधी कलाम परंपरा के दिग्गज गायक सावन खान का सोमवार शाम को निधन हो गया। वे पिछले 2 सालों से लीवर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। सोमवार शाम तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जवाहिर अस्पताल लाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।सावन खान कोक स्टूडियो का हिस्सा भी रह चुके हैं। वे जैसलमेर के पहले ऐसे लोक कलाकार थे जिन्हें इस मंच पर जगह मिली। वहां उनके द्वारा गाए गए गीत 'साथी सलाम ने उन्हें वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता दिलाई। इसके अलावा बॉलीवुड फिल्म हाईवे में उनके द्वारा गाया गया गीत तकदीर तख्त चढ़ायो ने भी सुर्खियां बटोरी थी। मंगलवार को उनके पैतृक गांव दबड़ी में उन्हें गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। विरासत में मिला संगीत रोजे खान के पुत्र सावन खान को संगीत विरासत में मिला था। उनके पिता भी एक गायक थे जिनसे प्रेरणा लेकर सावन खान ने बचपन से ही सुरों की साधना शुरू कर दी थी। वे अपने पीछे तीन बेटों और एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को छोड़ गए हैं। सावन खान दबड़ी मांगणियार समुदाय के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने सिंधी कलाम और राजस्थानी लोक संगीत को एक नई ऊंचाई दी। 50 से ज्यादा देशों में गूंजी आवाज सावन खान केवल स्थानीय कलाकार नहीं थे बल्कि उन्होंने दुनिया के 50 से अधिक देशों की यात्रा की और वहां सिंधी कलाम और मारवाड़ी लोकगीतों का जादू बिखेरा। सिंधी भजन और सूफियाना कलाम पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। उनके गाए लोकप्रिय गीत-उमर माडू मिठो कांगलो और रांगार चैन है। ये गीत न केवल महफिलों की जान थे बल्कि यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काफी लोकप्रिय हैं। संगीत जगत में शोक की लहर सावन खान के निधन की खबर से पश्चिमी राजस्थान के लोक कलाकारों और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि सावन खान का जाना लोक संगीत के एक युग का अंत है। वे अपनी सादगी और सिंधी गायकी की बारीकियों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। सावन खान की मृत्यु से मांगणियार कला जगत को ऐसी क्षति हुई है जिसकी भरपाई नामुमकिन है।
राजस्थान की सूफियाना परंपरा की एक रूहानी आवाज़ खामोश, कोक स्टूडियो से मिली थी पहचान, 50 से ज्यादा देशों में बिखेरा था सिंधी कलाम का जादू अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार सावन खान दबड़ी 70 वर्ष निधन हो गया। जैसलमेर के दबड़ी गांव के निवासी और लोक संगीत व सिंधी कलाम परंपरा के दिग्गज गायक सावन खान का सोमवार शाम को निधन हो गया। वे पिछले 2 सालों से लीवर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। सोमवार शाम तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जवाहिर अस्पताल लाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।सावन खान कोक स्टूडियो का हिस्सा भी रह चुके हैं। वे जैसलमेर के पहले ऐसे लोक कलाकार थे जिन्हें इस मंच पर जगह मिली। वहां उनके द्वारा गाए गए गीत 'साथी सलाम ने उन्हें वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता दिलाई। इसके अलावा बॉलीवुड फिल्म हाईवे में उनके द्वारा गाया गया गीत तकदीर तख्त चढ़ायो ने भी सुर्खियां बटोरी थी। मंगलवार को उनके पैतृक गांव दबड़ी में उन्हें गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। विरासत में मिला संगीत रोजे खान के पुत्र सावन खान को संगीत विरासत में मिला था। उनके पिता भी एक गायक थे जिनसे प्रेरणा लेकर सावन खान ने बचपन से ही सुरों की साधना शुरू
कर दी थी। वे अपने पीछे तीन बेटों और एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को छोड़ गए हैं। सावन खान दबड़ी मांगणियार समुदाय के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने सिंधी कलाम और राजस्थानी लोक संगीत को एक नई ऊंचाई दी। 50 से ज्यादा देशों में गूंजी आवाज सावन खान केवल स्थानीय कलाकार नहीं थे बल्कि उन्होंने दुनिया के 50 से अधिक देशों की यात्रा की और वहां सिंधी कलाम और मारवाड़ी लोकगीतों का जादू बिखेरा। सिंधी भजन और सूफियाना कलाम पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। उनके गाए लोकप्रिय गीत-उमर माडू मिठो कांगलो और रांगार चैन है। ये गीत न केवल महफिलों की जान थे बल्कि यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काफी लोकप्रिय हैं। संगीत जगत में शोक की लहर सावन खान के निधन की खबर से पश्चिमी राजस्थान के लोक कलाकारों और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि सावन खान का जाना लोक संगीत के एक युग का अंत है। वे अपनी सादगी और सिंधी गायकी की बारीकियों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। सावन खान की मृत्यु से मांगणियार कला जगत को ऐसी क्षति हुई है जिसकी भरपाई नामुमकिन है।
- अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार सावन खान दबड़ी 70 वर्ष निधन हो गया। जैसलमेर के दबड़ी गांव के निवासी और लोक संगीत व सिंधी कलाम परंपरा के दिग्गज गायक सावन खान का सोमवार शाम को निधन हो गया। वे पिछले 2 सालों से लीवर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। सोमवार शाम तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जवाहिर अस्पताल लाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।सावन खान कोक स्टूडियो का हिस्सा भी रह चुके हैं। वे जैसलमेर के पहले ऐसे लोक कलाकार थे जिन्हें इस मंच पर जगह मिली। वहां उनके द्वारा गाए गए गीत 'साथी सलाम ने उन्हें वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता दिलाई। इसके अलावा बॉलीवुड फिल्म हाईवे में उनके द्वारा गाया गया गीत तकदीर तख्त चढ़ायो ने भी सुर्खियां बटोरी थी। मंगलवार को उनके पैतृक गांव दबड़ी में उन्हें गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। विरासत में मिला संगीत रोजे खान के पुत्र सावन खान को संगीत विरासत में मिला था। उनके पिता भी एक गायक थे जिनसे प्रेरणा लेकर सावन खान ने बचपन से ही सुरों की साधना शुरू कर दी थी। वे अपने पीछे तीन बेटों और एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को छोड़ गए हैं। सावन खान दबड़ी मांगणियार समुदाय के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने सिंधी कलाम और राजस्थानी लोक संगीत को एक नई ऊंचाई दी। 50 से ज्यादा देशों में गूंजी आवाज सावन खान केवल स्थानीय कलाकार नहीं थे बल्कि उन्होंने दुनिया के 50 से अधिक देशों की यात्रा की और वहां सिंधी कलाम और मारवाड़ी लोकगीतों का जादू बिखेरा। सिंधी भजन और सूफियाना कलाम पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। उनके गाए लोकप्रिय गीत-उमर माडू मिठो कांगलो और रांगार चैन है। ये गीत न केवल महफिलों की जान थे बल्कि यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काफी लोकप्रिय हैं। संगीत जगत में शोक की लहर सावन खान के निधन की खबर से पश्चिमी राजस्थान के लोक कलाकारों और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि सावन खान का जाना लोक संगीत के एक युग का अंत है। वे अपनी सादगी और सिंधी गायकी की बारीकियों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। सावन खान की मृत्यु से मांगणियार कला जगत को ऐसी क्षति हुई है जिसकी भरपाई नामुमकिन है।2
- विधायक भाटी ने कहा कि शहरों का विकास तभी संभव है जब मजबूत इच्छाशक्ति और सही विजन हो — न कि केवल तेवरों से। उन्होंने कहा कि आज हर शहर में मूलभूत सुविधाओं — पेयजल, सीवरेज, साफ हवा — की भारी कमी है, फिर भी सरकार ओरण और गोचर भूमि को समाप्त करती जा रही है, जो न केवल पर्यावरण बल्कि पशुधन और किसानों के लिए भी विनाशकारी है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जहाँ बिजली परियोजनाओं के नाम पर जमीनें ली जा रही हैं, वहाँ के लोगों को न मुफ्त बिजली मिल रही है, न पूरा मुआवजा, न रोजगार — यह अनैतिक अलॉटमेंट बंद होना चाहिए। विधायक भाटी ने खेजड़ी संरक्षण विधेयक न लाने पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने प्राइवेट मेंबर बिल दिया था, सरकार उसे देखती तो सही — इच्छाशक्ति की जरूरत है, कॉर्पोरेट के दबाव में नहीं आना चाहिए। साथ ही उन्होंने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा की नगर परिषद / नगरपालिकाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की जाँच की माँग की और सोनी समाज के व्यापारियों को पुलिस प्रशासन द्वारा अनैतिक रूप से परेशान किए जाने का मुद्दा भी उठाया। विधायक भाटी ने स्पष्ट कहा — "आज के समय में कोई भी नगरपालिका ऐसी नहीं जहाँ बिना खर्चे के काम हो। भ्रष्टाचार दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। सरकार को मजबूत कदम उठाने होंगे।"1
- Post by Patel padamaram patel padamara2
- Post by Sachin vyas1
- Post by Pukhraj soni1
- सिवाना में श्रद्धा के साथ महिलाओं ने की शीतला माता की कथा, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना सिवाना कस्बे में शीतला माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कस्बे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से शीतला माता की कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान महिलाओं ने माता के भजन गाए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।कथा आयोजन में महिलाओं ने शीतला माता के जीवन प्रसंगों और उनके महत्व को सुनते हुए भक्ति भाव से भाग लिया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं ने भजन-कीर्तन कथा के पश्चात महिलाओं ने माता को प्रसाद अर्पित कर उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित की। महिलाओं का कहना है कि शीतला माता की पूजा से क्षेत्र में रोग-व्याधियों से मुक्ति और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महिलाएं शीतला माता की कथा व पूजा करती हैं।इस अवसर पर कस्बे की अनेक महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से माता की आराधना कर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की कामना की।1
- शहर के भीतरी क्षेत्र में कुमारिया कुआं से जूनी मंडी तक यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मुख्य कारण सड़क किनारे दुकानों द्वारा बाहर टेबल लगाकर दुकानें चलाना बताया जा रहा है, जिससे सड़क संकरी हो गई है और आए दिन जाम की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अतिक्रमण के कारण जूनी मंडी क्षेत्र में रोजाना वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। बावजूद इसके न तो पुलिस प्रशासन और न ही नगर निगम प्रशासन इस ओर कोई ठोस कार्रवाई करता नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं की गई तो जूनी मंडी का हाल भी सिवांची गेट क्षेत्र जैसा हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या पर कब ध्यान देता है।1
- शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने विधानसभा में उठाया शिव कस्बे के जलभराव का मुद्दा आज राजस्थान विधानसभा के सत्र में रविन्द्र सिंह भाटी ने विशेष उल्लेख के माध्यम से शिव उपखंड मुख्यालय में वर्षों से चली आ रही जलभराव की गंभीर समस्या को सदन के समक्ष उठाया। विधायक भाटी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 68 कस्बे के आवासीय क्षेत्रों से ऊंचाई पर स्थित होने के कारण बरसाती पानी का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है। इसके चलते पुरानी तहसील परिसर, पुराना पुलिस थाना, मुख्य बाजार और कई आवासीय मोहल्लों में महीनों तक पानी भरा रहता है। उन्होंने कहा कि इससे सड़कें, भवन और सरकारी परिसरों को नुकसान होता है तथा क्षेत्र में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। विधायक भाटी ने सरकार से मांग की कि शिव कस्बे में आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली और नालों के निर्माण के साथ एक व्यापक कार्य योजना बनाकर उसे शीघ्र लागू किया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को इस दीर्घकालीन समस्या से स्थायी राहत मिल सके।1