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हसपुरा औरंगाबाद सीआरपीएफ के जवान को अंतिम संस्कार किया गया हसपुरा थाना क्षेत्र के सोनहथु पंचायत के धमनी गांव टोले शम्भो पर निवासी राकेश कुमार जो सीआरपीएफ में कार्यरत थे उनकी ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मौत हो गई
Prem Singh
हसपुरा औरंगाबाद सीआरपीएफ के जवान को अंतिम संस्कार किया गया हसपुरा थाना क्षेत्र के सोनहथु पंचायत के धमनी गांव टोले शम्भो पर निवासी राकेश कुमार जो सीआरपीएफ में कार्यरत थे उनकी ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मौत हो गई
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- Post by Sukhendra kumar1
- प्रखंड कार्यालय में लगा जनता दरबार, बीडीओ ने सुनीं जन समस्याएं गया जी जिले के कोंच प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित सभागार में शुक्रवार को साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी विपुल भारद्वाज ने की। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवेदन सौंपे।जनता दरबार में मुख्य रूप से पेयजल की समस्या गूँजी। केर पंचायत के लोदीपुर गाँव वार्ड नंबर 9 में नल-जल योजना पूरी तरह बाधित होने का मामला सामने आया। पंचायत समिति प्रतिनिधि सुभाष शर्मा ने लिखित आवेदन देकर बीडीओ को बताया कि गाँव के लोग पानी के लिए परेशान हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ विपुल भारद्वाज ने तत्काल संज्ञान लिया और पीएचडी विभाग के जेई सुनिल कुमार को निर्देश दिया कि बाधित जलापूर्ति को जल्द से जल्द दुरुस्त कर चालू कराया जाए।जनता दरबार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़े दो आवेदन भी प्राप्त हुए। बीडीओ ने संबंधित कर्मियों को त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसके बाद दोनों आवेदनों का निष्पादन कर दिया गया। मौके पर बीडीओ ने कहा कि जनता दरबार का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान करना है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों या योजनाओं में कोताही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर प्रखंड के कई कर्मी और विभिन्न पंचायतों से आए ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- अरवल जिले के मदन सिंह टोला पर 20 साल में पहली बार किराने की दुकान में हुई चोरी। वीडियो पूरा देखें.....1
- एक ओर सरकार शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई बयां कर रही है। अरवल प्रखंड क्षेत्र के दिरपाल विगहा स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय इसका ताजा उदाहरण है, जहां विद्यालय भवन के अभाव में बच्चों की पढ़ाई मंदिर के चबूतरे पर कराई जा रही है। यह दृश्य न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सरकारी दावों की पोल भी खोलता नजर आता है। मामला तब और गंभीर हो गया जब नक्षत्र न्यूज की टीम विद्यालय का जायजा लेने पहुंची। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि विद्यालय में पदस्थापित एक शिक्षिका बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थीं। जब इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य से पूछा गया, तो उन्होंने भी अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें शिक्षिका के बारे में कोई जानकारी नहीं है। विद्यालय के प्राचार्य जगन्नाथ खत्री ने बताया कि नामांकन पंजी में कुल 49 छात्रों का नाम दर्ज है और उन्हें पढ़ाने के लिए 4 शिक्षक पदस्थापित हैं। बावजूद इसके, भवन के अभाव में बच्चों को उचित शिक्षा उपलब्ध कराना बेहद मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब स्कूल के लिए भवन तक उपलब्ध नहीं है और शिक्षक भी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, तो आखिर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के सरकारी दावे कितने सार्थक हैं।1
- Post by Pawan Raj1
- Post by विकास कुमार3
- Post by Sukhendra kumar1
- Post by Pawan Raj1
- रोहतास जिले के तिलौथू मे सामाजिक सरोकार की एक बड़ी पहल देखने को मिलने जा रही है। आगामी 19 अप्रैल को बाबूगंज स्थित खेल मैदान में 101 जोड़ों का निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा। इस भव्य आयोजन का जिम्मा सर्वजन कल्याण संस्थान ने उठाया है, जिसके अध्यक्ष योगेंद्र कुशवाहा ने बताया कि यह कार्यक्रम का पांचवां वर्ष है। हर साल की तरह इस बार भी पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ बेटियों की शादी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है, जिसे लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। पूरे क्षेत्र में इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि जो भी अभिभावक अपने बेटे की शादी इस दिन दहेज मुक्त करने का संकल्प लेंगे, उन्हें मंच पर सम्मानित किया जाएगा। ऐसे परिवारों को चांदी का मेडल और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया जाएगा, जिससे समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश जा सके। सामूहिक विवाह का यह आयोजन न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सहारा बन रहा है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।4