सागर की धर्म और अध्यात्म की नगरी में आगामी 6 और 7 जून को दो दिवसीय भव्य श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। 'नाम महिमा' विषय पर आधारित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं को सत्संग की गंगा में डुबकी लगाने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में मुख्य कथावाचक के रूप में ओरछाधीश रामराजा सरकार के परम शिष्य, आध्यात्मिक विद्वान और पूर्व प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश अरुण जी उपस्थित रहेंगे। वे मानस की प्रसिद्ध चौपाई "सुमरी पवनसुत पवन नामु अपने बस करी राखे रामू..." के माध्यम से भगवान के नाम की महिमा और उसके प्रभाव पर प्रकाश डालेंगे। उल्लेखनीय है कि अरुण जी पूर्व में सागर में ही जिला जज के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं और उन्हें प्रतिष्ठित 'तुलसी सम्मान' तथा 'रामकिंकर भारत भूषण सम्मान' से भी नवाजा जा चुका है। यह दो दिवसीय आयोजन बमोरी रेगवा स्थित होटल रियार्थ इन के 'ब्रह्मऋषि देवराहा बाबा मंदिर' परिसर में होगा। कथा का समय प्रतिदिन शाम 5:30 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस भव्य कार्यक्रम के आयोजक विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अजय दुबे हैं, जबकि संयोजक अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अंकलेश्वर दुबे हैं। पत्रकार विपिन दुबे ने सागर के समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं और रामभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। आयोजकों ने यह भी बताया कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नहीं हो पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण 'अरुण जी जज साहब' यूट्यूब (YouTube) चैनल पर किया जाएगा।
सागर की धर्म और अध्यात्म की नगरी में आगामी 6 और 7 जून को दो दिवसीय भव्य श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। 'नाम महिमा' विषय पर आधारित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं को सत्संग की गंगा में डुबकी लगाने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में मुख्य कथावाचक के रूप में ओरछाधीश रामराजा सरकार के परम शिष्य, आध्यात्मिक विद्वान और पूर्व प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश अरुण जी उपस्थित रहेंगे। वे मानस की प्रसिद्ध चौपाई "सुमरी पवनसुत पवन नामु अपने बस करी राखे रामू..." के माध्यम से भगवान के नाम की महिमा और उसके प्रभाव पर प्रकाश डालेंगे। उल्लेखनीय है कि अरुण जी पूर्व में सागर में ही जिला जज के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं और उन्हें प्रतिष्ठित 'तुलसी सम्मान' तथा 'रामकिंकर भारत भूषण सम्मान' से भी नवाजा जा चुका है। यह दो दिवसीय आयोजन बमोरी रेगवा स्थित होटल रियार्थ इन के 'ब्रह्मऋषि देवराहा बाबा मंदिर' परिसर में होगा। कथा का समय प्रतिदिन शाम 5:30 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस भव्य कार्यक्रम के आयोजक विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अजय दुबे हैं, जबकि संयोजक अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अंकलेश्वर दुबे हैं। पत्रकार विपिन दुबे ने सागर के समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं और रामभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। आयोजकों ने यह भी बताया कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नहीं हो पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण 'अरुण जी जज साहब' यूट्यूब (YouTube) चैनल पर किया जाएगा।
- छतरपुर जिले के बड़ामलहरा स्थित प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थल भीमकुंड में डूबे एक व्यक्ति का शव SDRF टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार बाहर निकाल लिया है। गुरुवार को भीमकुंड में शव दिखाई देने की सूचना मिलने पर बक्सवाहा तहसीलदार भरत पांडे और बाजना थाना प्रभारी अयोध्या प्रसाद यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद SDRF की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बताया गया है कि पूरी रात चले इस ऑपरेशन के दौरान शव और अधिक गहराई में चला गया था, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। हालाँकि, SDRF टीम ने लगातार अपने प्रयास जारी रखे और आखिरकार शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन में सफलता हासिल कर शव को बाहर निकाल लिया। फिलहाल, मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। बाजना थाना प्रभारी अयोध्या प्रसाद यादव ने बताया कि पुलिस शव की शिनाख्त कराने के प्रयास कर रही है और आसपास के क्षेत्रों में भी पूछताछ की जा रही है। मामले की जांच जारी है।4
- छत्तरपुर जिले के बमोरी में एक सरपंच पर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना से व्यथित और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित पीड़ित व्यक्ति ने अब स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित ने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।1
- सागर जिले के केसली में एक निजी जगह से अतिक्रमण हटाया गया है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बिना किसी उचित पैमाइश के की गई है।1
- बीना में, बुंदेलखंड के महान संत विपिन बिहारी जी और नवीन बिहारी जी ने पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर के गृह निवास धनोरा पहुंचकर स्वर्गीय राम सिंह ठाकुर के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर, परिवार ने पारंपरिक तेरहवीं अनुष्ठान के बजाय स्वर्गीय राम सिंह ठाकुर की स्मृति में वृक्षों का वितरण करने का निर्णय लिया था। संत विपिन बिहारी जी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उधम सिंह दाऊ, पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर के बड़े भाई और अशोक सिंह, इंदर सिंह, राजेंद्र सिंह के पिता श्री राम सिंह जी की तेरहवीं न कर वृक्षों का वितरण करना पर्यावरण के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की, “जितना पानी आज हम कूलरों में डाल रहे हैं, यदि हमने उतने वृक्ष लगाए होते और वृक्ष कटे न होते तो आज हमें यह पेड़ लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।” संत ने सभी से अनुरोध किया कि वे इस परंपरा को अपनाकर 'हरि के नाम पर हरियाली' लगाएं, जिससे शुद्ध वातावरण और शुद्ध वायु मिल सके। उन्होंने धनोरा परिवार को “आडंबरों से बचकर वृक्षारोपण की ओर कदम बढ़ाने” के लिए साधुवाद दिया और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया। गौरतलब है कि स्वर्गीय राम सिंह ठाकुर स्वयं एक सुलझे हुए, पशु एवं प्रकृति प्रेमी व्यक्ति थे, और उनके परिवार ने इसी भावना के तहत श्रद्धांजलि सभा में वृक्ष वितरण का यह निर्णय लिया था।4
- सागर जिले के आगासौद थाना क्षेत्र में 30 मई 2026 को एक अंधे कत्ल का मामला सामने आया, जिसका 24 घंटे के भीतर ही पर्दाफाश कर दिया गया है। आगासौद पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।1
- राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि वे एक बार चुनाव जीत जाते हैं, तो नरेंद्र मोदी पर कार्रवाई की जाएगी।1
- बीना के मनोरमा वार्ड स्थित बीबीएम कॉलेज में भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दामोदर वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर एक पुष्पांजलि और विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मेरा युवा भारत (माय भारत) सागर और सामाजिक संस्था शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह एवं आजाद क्रांति युवा मण्डल बीना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल ओझा थे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व नगर संघ चालक और समाजसेवी मुरारी गोस्वामी उपस्थित रहे। सर्वप्रथम, सभी उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने वीर सावरकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि अनिल ओझा ने वीर सावरकर को एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी, लेखक और समाज सुधारक बताया, जिनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भागुर गाँव में हुआ था। उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए सशस्त्र क्रांति का मार्ग चुना और 'हिंदुत्व' की विचारधारा को मुख्यधारा में लाए। मुख्य वक्ता मुरारी गोस्वामी ने सावरकर जी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि अंग्रेजों ने उन्हें 'काला पानी' की सजा और दोहरा आजीवन कारावास दिया, जिसमें 50 वर्ष की कड़ी कैद शामिल थी। उन्हें 1911 में अंडमान निकोबार की कुख्यात सेलुलर जेल भेजा गया, जहाँ उन्हें असहनीय शारीरिक यातनाएं दी गईं। अन्य कैदियों की तरह, उन्होंने भी अपनी रिहाई के लिए ब्रिटिश सरकार को कई दया याचिकाएँ भेजीं, जिसके बाद 1921 में उन्हें भारत की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। शहीदों और क्रांतिकारियों के चित्र संग्रहकर्ता राम शर्मा ने बताया कि सावरकर जी 1906 में वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन गए, जहाँ उन्होंने 'इंडिया हाउस' की स्थापना कर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीतियाँ बनाईं। श्रीमती ज्योति सराफ, श्रीमती सुनीता राय और श्रीमती दमयंती ठाकुर ने उल्लेख किया कि वे 1905 में पुणे में विदेशी कपड़ों की होली जलाने वाले पहले व्यक्ति थे। पूर्व प्राचार्य आर.के. जैन ने बताया कि उन्हें 1910 में नासिक के कलेक्टर जैक्सन की हत्या की साजिश के आरोप में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। कवि मुलचंद सेन के अनुसार, सावरकर जी बहुत बहादुर थे; भारत लाते समय वे फ्रांस के मार्सिले बंदरगाह पर जहाज के शौचालय के रास्ते समुद्र में कूद गए, लेकिन अंततः पकड़े गए। पूर्व शिक्षक उदल सिंह यादव ने बताया कि 1924 में रिहा होने के बाद, उन्हें 1937 तक रत्नागिरी में नजरबंद रखा गया, जहाँ उन्होंने छुआछूत, जाति-प्रथा (जाति की सात बेड़ियाँ) के उन्मूलन, अंतरजातीय विवाह और मंदिर प्रवेश के लिए भारी सामाजिक संघर्ष किया। एडवोकेट श्याम लाल पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि सावरकर जी का पूरा जीवन ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष और हिंदू राष्ट्रवाद के दर्शन को समर्पित रहा। कार्यक्रम के दौरान मनोहर लाल दीक्षित ने 'वतन पे मिटने वालों तुम हमेशा अमर रहोगे' गीत गाया। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रोफेसर डालचंद पटेल ने किया, और अंत में कार्यक्रम संयोजक उमेश शर्मा ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अनिल ओझा, मुख्य वक्ता मुरारी गोस्वामी, श्रीमती सुनीता राय, श्रीमती ज्योति सराफ, श्रीमती ममता चौरसिया, श्रीमती दमयंती ठाकुर, श्रीमती रितु बुंदेला, सुश्री महक सोनी, पूर्व शिक्षक उदल यादव, पूर्व प्राचार्य आर.के. जैन, पूर्व लेक्चरर मूलचंद सेन, पूर्व शिक्षक देवेंद्र तिवारी, पूर्व शिक्षक रविशंकर अवस्थी, पूर्व शिक्षक मनोहर लाल दीक्षित, एडवोकेट श्याम लाल पटेल, प्रोफेसर डालचंद पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी राम शर्मा, पूर्व शिक्षक विनोद श्रीवास्तव, माता प्रसाद अहिरवार, प्रशांत विक्की दुलगज और विवेक रावत सहित अनेक लोग उपस्थित थे।4
- अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर सागर के यशोदा भवन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'काव्यायन' ने अपने स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामयी गोष्ठी एवं विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान संस्था ने मातृशक्ति को परिवार की रीढ़ मानते हुए सर्वसम्मति से ममता भूरिया का चयन काव्य परिवार की मुखिया (अध्यक्ष) के रूप में किया। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष व अधिवक्ता राम नरेश सिंह राजपूत ने वर्तमान सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि पश्चिमी सभ्यता में एकाकी परिवारों का चलन है, जिसके कारण वहां परिजनों से मिलने के लिए साल में एक दिन (15 मई) तय करना पड़ता है, जबकि भारत की मूल संस्कृति हमेशा से संयुक्त परिवारों की रही है। राजपूत ने चिंता व्यक्त की कि आधुनिकता और वैश्विक चकाचौंध की अंधी दौड़ में आज भारत में भी एकाकी परिवार तेजी से बढ़े हैं, जिससे नई पीढ़ी को कई व्यावहारिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन परिवेश में उन्होंने संयुक्त परिवारों की महती आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य वक्ता पीआर मलैया, हर्षिता राजपूत एवं टीकाराम त्रिपाठी ने यूरोपीय और एशियन साहित्य के विभिन्न कालखंडों व साहित्यकारों की रचनाओं के उदाहरण देते हुए संयुक्त परिवार की प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस साहित्यिक समागम में अंचल के लगभग 50 से अधिक रचनाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अधिवक्ता जगमोहन सिंह लोधी मुख्य अतिथि और अधिवक्ता रजनी सिंह राजपूत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थीं, जबकि डा. गजाधर सागर, महेंद्र कौरव और वृन्दावन राय सरल ने सारस्वत अतिथि के तौर पर मंच साझा किया। कार्यक्रम का सफल एवं क्रमिक संचालन अमित आठिया, अनिल श्रीवास्तव और डा. अभय सिंह ने किया। इस अवसर पर लखन शब्दाक्षरी (नरसिंहपुर), धर्मेंद्र "आज़ाद" तिजोरी वाले (तेंदूखेड़ा), वरिष्ठ साहित्यकार देवी सिंह राजपूत, मीता कनोजिया "सिम्मी", पुष्पेंद्र दुबे, पेट्रिस फुसकेले, कोमेश विश्वकर्मा, मुकेश तिवारी, मणिदेव सिंह ठाकुर, एम. शरीफ़, सुल्तान ख़ान, मधुर गोस्वामी "राही निर्मोही", महबूब ताज, शहज़ाद सागरी, आयुष मेहरा "आदि", जमुना प्रसाद "बेताब", शहज़ाद पेन्टर, मु. इरफ़ान (मुंगावली), नीरज रैकवार और जागेश्वर कुशवाहा सहित काव्यायन संस्था के स्थाई श्रोता व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।2
- आज तेजगढ़ स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अचानक बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। वहाँ उपस्थित भक्तों ने देखा कि मंदिर की प्रतिमा पर स्वयं ही अभिषेक हो रहा था, जिससे वे आश्चर्यचकित रह गए और तुरंत जयकारे लगाने लगे। इस अद्भुत घटना को देखकर लोगों में उत्साह भर गया, जैसा कि पोस्ट में कहा गया है कि यह एक ऐसा 'चमत्कार' है जिसे सुना तो सबने होगा, पर आज आँखों से देखा गया।1