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नहरों में पानी की भारी कमी के चलते किसानों पर गंभीर संकट आ गया है। इस जल संकट के कारण किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए पंपिंग सेट का सहारा लेने को मजबूर हैं।
MANOJ KUMAR YADAV
नहरों में पानी की भारी कमी के चलते किसानों पर गंभीर संकट आ गया है। इस जल संकट के कारण किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए पंपिंग सेट का सहारा लेने को मजबूर हैं।
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- नहरों में पानी की भारी कमी के चलते किसानों पर गंभीर संकट आ गया है। इस जल संकट के कारण किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए पंपिंग सेट का सहारा लेने को मजबूर हैं।1
- गोरखपुर के चौरी चौरा क्षेत्र में पीने का पानी योग्य नहीं है। घर के आसपास के लोगों को पानी पीने में समस्या हो रही है। निवासियों ने इस समस्या को सुधारे जाने की अपील की है।2
- देवरिया की भटनी पुलिस ने पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में वांछित चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देवरिया अभिजीत आर. शंकर के निर्देश पर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी भाटपाररानी अशुमन श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में, भटनी पुलिस ने शनिवार को मुखबिर की सूचना पर शिवबनकटा चौराहा से डुमरी जाने वाले मार्ग से आरोपी निखिल कुमार (18 वर्ष) को पकड़ा। निखिल कुमार पुत्र मोतीलाल राजभर, निवासी समुहती टोला चरखीया, थाना विजयीपुर, जनपद गोपालगंज (बिहार) का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, 19 मई 2026 को पीड़िता की मां ने भटनी थाने में तहरीर दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी उनकी नाबालिग पुत्री को 13 मई की रात बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। इस मामले में भटनी थाने में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही थी, और जांच के दौरान इसमें पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराएं बढ़ाई गई थीं। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है और उसे न्यायालय भेजने की प्रक्रिया जारी है।1
- आज कुशीनगर के पड़रौना नगर स्थित गायत्री मंदिर के समीप एक स्थानीय मैरेज हॉल में हिन्दी पत्रकार एसोसिएशन की मासिक बैठक संपन्न हुई। इस मासिक बैठक की अध्यक्षता अखिलेश पाठक जी ने की, जबकि संचालन आनंद मिश्रा जी ने संभाला। इस अवसर पर, एसोसिएशन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने तथा उसे आगे बढ़ाने हेतु एक सुर में अपनी हामी भरी। बैठक को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अखिलेश पाठक ने उपस्थित सभी पत्रकारगणों से कहा कि वे देश के चौथे स्तंभ हैं और उनकी निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता समाज के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इस दौरान सर्वेश सिंह, नवीन कुमार, अनुराग उपाध्याय, नवीन पांडे, नीरज साहा, रमन विश्वकर्मा, गणेश प्रसाद जायसवाल सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।1
- कुशीनगर के थाना कुबेरस्थान क्षेत्रान्तर्गत जंगल पचरुखिया के समीप 22 मई 2026 को दोपहर करीब 01:00 बजे एक सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें संदीप कुमार नामक व्यक्ति ट्रक की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलने पर जब पुलिस वाहन मौके पर पहुँचा, तो उत्तेजित ग्रामीण ट्रक में तोड़फोड़ और आगजनी का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर ग्रामीणों को शांत किया और दुर्घटना के संबंध में मिली तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया। बाद में, 29 मई 2026 को ट्रक मालिक द्वारा थाने पर शिकायत दर्ज कराई गई कि तोड़फोड़ के दौरान ट्रक के केबिन से ₹30,000 और उसकी बैटरी चोरी कर ली गई है। जब पुलिस टीम इस संबंध में पूछताछ करने गांव पहुँची, तो एक महिला सुगंती देवी और उनके पुत्र मुकेश कुमार ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और उनसे उलझ गए। जाँच में यह भी सामने आया है कि सुगंती देवी के खिलाफ पहले भी मारपीट के मामले दर्ज हैं। इस संदर्भ में थाना कुबेरस्थान पर सुसंगत धाराओं के तहत एक और अभियोग पंजीकृत कर आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है। उक्त जानकारी क्षेत्राधिकारी सदर डा. अजय कुमार सिंह ने दी।1
- जनपद कुशीनगर के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र से एक वायरल वीडियो सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में दो पुलिसकर्मी एक महिला को जबरन खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि मौके पर मौजूद ग्रामीण पुलिस पर अभद्रता, मारपीट और धमकी देने के आरोप लगा रहे हैं। इसी दौरान एक युवक आक्रोश में एक पुलिसकर्मी को थप्पड़ भी मार देता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है, जिससे पुलिस प्रशासन कटघरे में खड़ा हो गया है। यह पूरा विवाद 22 मई को जंगल पचरुखिया गांव में एक सड़क हादसे से शुरू हुआ था, जब बालू लदे एक ट्रक ने सड़क किनारे खड़े 33 वर्षीय संदीप को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल संदीप को पहले मेडिकल कॉलेज कुशीनगर और फिर गोरखपुर रेफर किया गया, जहां 1 जून को उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बालू लदे ट्रक को घेरकर कथित तौर पर उसमें तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद कुबेरस्थान थाने के दो सिपाही लगातार गांव में दबिश देने लगे। तोड़फोड़ के नाम पर 55 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी गई और बिना महिला पुलिसकर्मी के घरों में घुसकर छापेमारी की गई। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पुलिस ने घरों में घुसकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, गालियां दीं और कार्रवाई से बचाने के नाम पर पैसों की मांग की। गांव की नजमा खातून ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उनके घर में घुस आए, जबकि घर में केवल नई-नवेली दुल्हन मौजूद थी, और कथित तौर पर ₹25-25 हजार रुपये देने को कहा, नहीं तो जेल भेजने की धमकी दी। यदि ये आरोप सही हैं, तो ये कानून के रक्षक पर रिश्वतखोरी और कानून तोड़ने का गंभीर आरोप लगाते हैं। मामले का सबसे सनसनीखेज आरोप जब्त ट्रक में लदी बालू से संबंधित है। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली लगवाकर ट्रक की पूरी बालू उतरवाई और उसे एक निजी दुकानदार को बेच दिया, जिसके बाद खाली ट्रक को थाने ले जाया गया। विधि विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि यह आरोप सत्य हैं, तो यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी अभिरक्षा में रखी गई संपत्ति के कथित दुरुपयोग और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने जैसा गंभीर मामला बनता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि संतोष मद्धेशिया और दुर्गेश खटीक को पुलिस थाने ले गई, जहां उनसे भी पैसों की मांग की गई और रकम न मिलने पर उन्हें धारा 151 के तहत चालान कर जेल भेज दिया गया। यहां बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में तोड़फोड़ हुई थी और ट्रक मालिक ने तहरीर दी थी, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ? और यदि मामला गंभीर नहीं था, तो निजी मुचलके पर छोड़े जाने योग्य धारा में जेल भेजने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? वायरल वीडियो और ग्रामीणों के ये आरोप कुबेरस्थान पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं, और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है ताकि पुलिस की साख बनी रहे और इन यक्ष प्रश्नों के जवाब मिल सकें।2