दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मुकुंदरा टनल से वाहनों का आवागमन शुरू कोटा चेचट क्षेत्र से होकर निकल रहें देश के सबसे लम्बे भारत माला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा जिले के नयागांव के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनीं दोनों टनल से यातायात शुरू हो गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल के दोनों मार्ग चालू होने से एक्सप्रेस वें का यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब निर्बाध रूप से जुड़ गया है। दूसरी टनल के शुरू होने के बाद दिल्ली कोटा से मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की और जाने वाले वाहन चालकों को एक्सप्रेस-वे से बिना नीचे उतरे सीधा निकल सकेंगे, पहले कोटा दिल्ली कि तरफ़ से आने वाले वाहनों को गोपालपुरा से फोर-लेन पर उतारा जा रहा था जहां से वाहन दरा नाल मोड़क बाईपास रोड से होकर चेचट 8 लेने पर जाते थे, जिससे दरा अभ्यारण क्षेत्र में प्रतिदिन ज़ाम कि स्थिति बनी रहती थीं, टनल कि दोनों साइटों के शुरू होने से दरा नाल ज़ाम के साथ साथ मोड़क चेचट और ग्रामीणों से होकर निकलने वालें बाहरी वाहनों से भी बड़ी राहत मिलीं हैं, दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें बनीं यह टनल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के करीब 60 मीटर नीचे बनाई गईं हैं। इसके ऊपर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन जारी रहता हैं, जबकि नीचे एक्सप्रेस-वे का यातायात गुजरता है। परियोजना कों वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक सड़क निर्माण के संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टनल शुरू होने से दरा घाटी के पुराने मार्ग पर यातायात का दबाव और जाम कि समस्या क्या होगा समाधान। साथ हीं कोटा-झालावाड़ और हाड़ौती क्षेत्र की दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। कृषि उपज और औद्योगिक माल के परिवहन में भी समय की बचत होगी। हालांकि, टनल में मानसून के दौरान पानी भरने की घटना के बाद जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे थे। अगस्त में पानी निकालने के बाद यातायात बहाल किया गया था। लम्बे समय बाद आखिरकार दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें पर मुकन्दरा टनल का शुरू होना बड़ी सोगात है,
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मुकुंदरा टनल से वाहनों का आवागमन शुरू कोटा चेचट क्षेत्र से होकर निकल रहें देश के सबसे लम्बे भारत माला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा जिले के नयागांव के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनीं दोनों टनल से यातायात शुरू हो गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल के दोनों मार्ग चालू होने से एक्सप्रेस वें का यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब निर्बाध रूप से जुड़ गया है। दूसरी टनल के शुरू होने के बाद दिल्ली कोटा से मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की और जाने वाले वाहन चालकों को एक्सप्रेस-वे से बिना नीचे उतरे सीधा निकल सकेंगे, पहले कोटा दिल्ली कि तरफ़ से आने वाले वाहनों को गोपालपुरा से फोर-लेन पर उतारा जा रहा था जहां से वाहन दरा नाल मोड़क बाईपास रोड से होकर चेचट 8 लेने पर जाते थे, जिससे दरा अभ्यारण क्षेत्र में प्रतिदिन ज़ाम कि स्थिति बनी रहती थीं, टनल कि दोनों साइटों के शुरू होने से दरा नाल ज़ाम के साथ साथ मोड़क चेचट और ग्रामीणों से होकर निकलने वालें बाहरी वाहनों से भी बड़ी राहत मिलीं हैं, दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें बनीं यह टनल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के करीब 60 मीटर नीचे बनाई गईं हैं। इसके ऊपर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन जारी रहता हैं, जबकि नीचे एक्सप्रेस-वे का यातायात गुजरता है। परियोजना कों वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक सड़क निर्माण के संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टनल शुरू होने से दरा घाटी के पुराने मार्ग पर यातायात का दबाव और जाम कि समस्या क्या होगा समाधान। साथ हीं कोटा-झालावाड़ और हाड़ौती क्षेत्र की दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। कृषि उपज और औद्योगिक माल के परिवहन में भी समय की बचत होगी। हालांकि, टनल में मानसून के दौरान पानी भरने की घटना के बाद जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे थे। अगस्त में पानी निकालने के बाद यातायात बहाल किया गया था। लम्बे समय बाद आखिरकार दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें पर मुकन्दरा टनल का शुरू होना बड़ी सोगात है,
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मुकुंदरा टनल से वाहनों का आवागमन शुरू कोटा चेचट क्षेत्र से होकर निकल रहें देश के सबसे लम्बे भारत माला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा जिले के नयागांव के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनीं दोनों टनल से यातायात शुरू हो गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल के दोनों मार्ग चालू होने से एक्सप्रेस वें का यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब निर्बाध रूप से जुड़ गया है। दूसरी टनल के शुरू होने के बाद दिल्ली कोटा से मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की और जाने वाले वाहन चालकों को एक्सप्रेस-वे से बिना नीचे उतरे सीधा निकल सकेंगे, पहले कोटा दिल्ली कि तरफ़ से आने वाले वाहनों को गोपालपुरा से फोर-लेन पर उतारा जा रहा था जहां से वाहन दरा नाल मोड़क बाईपास रोड से होकर चेचट 8 लेने पर जाते थे, जिससे दरा अभ्यारण क्षेत्र में प्रतिदिन ज़ाम कि स्थिति बनी रहती थीं, टनल कि दोनों साइटों के शुरू होने से दरा नाल ज़ाम के साथ साथ मोड़क चेचट और ग्रामीणों से होकर निकलने वालें बाहरी वाहनों से भी बड़ी राहत मिलीं हैं, दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें बनीं यह टनल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के करीब 60 मीटर नीचे बनाई गईं हैं। इसके ऊपर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन जारी रहता हैं, जबकि नीचे एक्सप्रेस-वे का यातायात गुजरता है। परियोजना कों वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक सड़क निर्माण के संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टनल शुरू होने से दरा घाटी के पुराने मार्ग पर यातायात का दबाव और जाम कि समस्या क्या होगा समाधान। साथ हीं कोटा-झालावाड़ और हाड़ौती क्षेत्र की दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। कृषि उपज और औद्योगिक माल के परिवहन में भी समय की बचत होगी। हालांकि, टनल में मानसून के दौरान पानी भरने की घटना के बाद जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे थे। अगस्त में पानी निकालने के बाद यातायात बहाल किया गया था। लम्बे समय बाद आखिरकार दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें पर मुकन्दरा टनल का शुरू होना बड़ी सोगात है,1
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर मुकुंदरा की दोनों टनल हुए शुरू, अब कोटा-मुंबई आवागमन और सुगम हुआ, वाहन चालक यातायात नियमों का पालन करें।1
- दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें मुकन्दरा हिल्स कि दोनों तरफ टनल से होकर निकलने लगें वाहन , एक्सप्रेस वें अब सफ़र और सुगम दरा नाल ज़ाम से मिलेंगी निजात कोटा चेचट क्षेत्र से होकर निकल रहें देश के सबसे लम्बे भारत माला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा जिले के नयागांव के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनीं दोनों टनल से यातायात शुरू हो गया है। करीब 4.9 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल के दोनों मार्ग चालू होने से एक्सप्रेस वें का यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब निर्बाध रूप से जुड़ गया है। दूसरी टनल के शुरू होने के बाद दिल्ली कोटा से मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की और जाने वाले वाहन चालकों को एक्सप्रेस-वे से बिना नीचे उतरे सीधा निकल सकेंगे , पहले कोटा दिल्ली कि तरफ़ से आने वाले वाहनों को गोपालपुरा से फोर-लेन पर उतारा जा रहा था जहां से वाहन दरा नाल मोड़क बाईपास रोड से होकर चेचट 8 लेने पर जाते थे, जिससे दरा अभ्यारण क्षेत्र में प्रतिदिन ज़ाम कि स्थिति बनी रहती थीं,टनल कि दोनों साइटों के शुरू होने से दरा नाल ज़ाम के साथ साथ मोड़क चेचट और ग्रामीणों से होकर निकलने वालें बाहरी वाहनों से भी बड़ी राहत मिलीं हैं, दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें बनीं यह टनल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के करीब 60 मीटर नीचे बनाई गईं हैं। इसके ऊपर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन जारी रहता हैं, जबकि नीचे एक्सप्रेस-वे का यातायात गुजरता है। परियोजना कों वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक सड़क निर्माण के संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टनल शुरू होने से दरा घाटी के पुराने मार्ग पर यातायात का दबाव और जाम कि समस्या क्या होगा समाधान। साथ हीं कोटा-झालावाड़ और हाड़ौती क्षेत्र की दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। कृषि उपज और औद्योगिक माल के परिवहन में भी समय की बचत होगी। हालांकि, टनल में मानसून के दौरान पानी भरने की घटना के बाद जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे थे। अगस्त में पानी निकालने के बाद यातायात बहाल किया गया था। लम्बे समय बाद आखिरकार दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें पर मुकन्दरा टनल का शुरू होना बड़ी सोगात है,4
- दुष्यंत सिंह के जन्मदिन पर बालाजी की छतरी पर अखंड रामायण पाठ शुरू मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ, शुक्रवार को हवन व प्रसादी वितरण के साथ होगा समापन झालावाड़। शहर के प्रसिद्ध बालाजी की छतरी परिसर में गुरुवार को धार्मिक आयोजन के तहत अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया गया। यह आयोजन झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र के सांसद दुष्यंत सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ हुआ। आयोजन से जुड़े भाजपा नेता ओम जांगिड़ ने बताया कि सांसद दुष्यंत सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में गुरुवार सुबह बालाजी की छतरी परिसर स्थित मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पंडितों ने मंत्रोच्चार के बीच अखंड रामायण पाठ प्रारंभ कराया गया। रामायण पाठ के शुभारंभ के अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और बालाजी महाराज की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। आयोजन के दौरान रामायण की चौपाइयों और भजनों से मंदिर परिसर का वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। श्रद्धालु भी आज रामायण पाठ में शामिल हुए और धार्मिक आयोजन का लाभ लिया। भाजपा नेता ओम जांगिड़ ने बताया कि अखंड रामायण पाठ लगातार जारी रहेगा। इसका समापन शुक्रवार दोपहर को विधि-विधान से पूजा-अर्चना, हवन एवं आरती के साथ किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक आयोजन से सांसद दुष्यंत सिंह के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की जा रही है। साथ ही झालावाड़-बारां क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाएगी।आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। रामायण पाठ में श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार पहुंचकर शामिल हो रहे हैं। शुक्रवार को हवन और प्रसादी वितरण के साथ आयोजन का विधिवत समापन किया जाएगा।2
- बारां की चुनावी सभा में कमल राठौर का भाया पर तीखा हमला, सुनिए क्या कहा1
- भानपुरा मे खुदाई मे मिले पुराने सिक्के.... प्रकरण दर्ज.... *मकान निर्माण की खुदाई में मिले 100 साल पुराने सिक्के, आपस में बांटकर मामला दबाने की कोशिश, पुलिस ने किया प्रकरण दर्ज*1
- थाना क्षेत्र के करल गांव में करीब ढाई वर्ष पूर्व नरसिंह मंदिर में हुई चोरी की वारदात का अब तक पुलिस खुलासा नहीं कर पाई थी। लंबे समय से ग्रामीण चोरी का खुलासा करने की मांग कर रहे थे। इसी बीच बुधवार को मंदिर में चोरी हुआ चांदी का सामान टुकड़ों के रूप में वापस मिलने से गांव में चर्चा का माहौल बन गया। थाना क्षेत्र के करल गांव में करीब ढाई वर्ष पूर्व नरसिंह मंदिर में हुई चोरी की वारदात का अब तक पुलिस खुलासा नहीं कर पाई थी। लंबे समय से ग्रामीण चोरी का खुलासा करने की मांग कर रहे थे। इसी बीच बुधवार को मंदिर में चोरी हुआ चांदी का सामान टुकड़ों के रूप में वापस मिलने से गांव में चर्चा का माहौल बन गया। ग्रामीण इसे भगवान का चमत्कार मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार करीब ढाई वर्ष पूर्व गांव के बीच स्थित नरसिंह मंदिर में अज्ञात चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोर मंदिर से चांदी के तीन मुकुट, एक छत्र, करीब 400 ग्राम चांदी के आभूषण सहित पीतल का सिंहासन और आरती का सामान चोरी कर ले गए थे। घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से चोरी का जल्द खुलासा करने की मांग की थी, लेकिन करीब ढाई वर्ष बीत जाने के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो सका। मंदिर के पुजारी मोहनलाल बैरागी ने बताया कि गांव में मंदिर पर कथा का आयोजन चल रहा था। मंगलवार रात भजन संध्या के बाद बुधवार सुबह देव-देवी का विमान लेकर ग्रामीण बाहर गए थे। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर की सफाई की। इस दौरान उन्हें मंदिर परिसर में एक थैली पड़ी दिखाई दी। उन्होंने उसे प्रसादी समझकर एक तरफ रख दिया। बुधवार शाम करीब 5 बजे जब पुजारी मंदिर में पूजा-अर्चना की तैयारी कर रहे थे, तब उनकी नजर दोबारा उस थैली पर पड़ी। थैली खोलकर देखने पर उसमें मंदिर से चोरी किए गए मुकुट सहित अन्य चांदी के आभूषणों के टुकड़े मिले। साथ ही थैली में ₹2000 नकद और एक पत्र भी रखा हुआ था। बताया जा रहा है कि पत्र में चोरी करने वाले व्यक्ति ने शराब के नशे में चोरी करने की बात स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। साथ ही मंदिर के सामान की मरम्मत के लिए ₹2000 भी छोड़ने की बात सामने आई है।1
- भारत विकास परिषद झाला रानी शाखा द्वारा पौधारोपण एवं सीड बॉल्स कार्यक्रम आयोजित | झालावाड़। पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद, झाला रानी शाखा, झालावाड़ द्वारा 10 सितंबर 2026 को मिस्टीन रिजॉर्ट के फॉरेस्ट एरिया, झालावाड़ में पौधारोपण एवं सीड बॉल्स कार्यक्रम आयोजित किया गया। मिस्टीन रिजॉर्ट के पास स्थित फॉरेस्ट एरिया में लगभग 3,000 से 5,000 पौधे लगाने का संकल्प लिया गया साथ ही पौधारोपण किया गया । सभी के द्वारा सीड बॉल्स थ्रो की गई। शाखा अध्यक्ष श्रीमती अर्चना मालपानी ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। इसी हरित क्षेत्र के एक हिस्से में पौधारोपण करने के लिए श्रीमती भावना अग्रवाल द्वारा भारत विकास परिषद, झाला रानी शाखा को प्रेरित किया गया। वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन दिवस पर डॉ रश्मि ने सभी को शपथ दिलवाई। कार्यक्रम के साथ शाखा सदस्यों के लिए फन, गेम्स, मस्ती-धमाल एवं लजीज व्यंजनों से भरपूर गेट-टुगेदर का भी आयोजन किया गया। शाखा सचिव चेतना अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष सुमन खंडेलवाल द्वारा विभिन्न मनोरंजक गेम्स खिलाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य “आइए, प्रकृति को दें नया जीवन” के संदेश के साथ कार्यक्रम में शाखा के सदस्य एवं पर्यावरण प्रेमी रेनू गुप्ता, निधि खंडेलवाल, स्नेहा खंडेलवाल, नेहा व्यास, उपासना सिंह, निलेश जैन, रंजना सोनी, रानी झंवर, मधु अग्रवाल, शिल्पी यादव, डॉ रश्मि गुप्ता, ममता गुप्ता, श्वेता अग्रवाल उपस्थित रहे।1