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दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की एक सड़क की जर्जर हालत को दिखाया गया है। यह वीडियो स्थानीय सड़क की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालता है।
मो० साबिर अंसारी
दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की एक सड़क की जर्जर हालत को दिखाया गया है। यह वीडियो स्थानीय सड़क की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालता है।
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- दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की एक सड़क की जर्जर हालत को दिखाया गया है। यह वीडियो स्थानीय सड़क की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालता है।1
- दुमका जिले के धोबना हरिण बहाल पंचायत के पहाड़पुर गाँव में सरकार ने तीन जलमीनार तो लगा दिए हैं, पर उनमें पानी कब आएगा, इसका किसी को नहीं पता। इसके बावजूद, ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए अब भी चापानल पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ये जलमीनार सिर्फ दिखावे के लिए खड़े हैं, जिससे वे पीने के पानी के लिए बेबस महसूस कर रहे हैं।1
- जामताड़ा जिले के बिंदापाथर थाना क्षेत्र अंतर्गत चरकादाहा गांव में बुधवार को वज्रपात की चपेट में आने से दो लोगों की दुखद मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज जामताड़ा सदर अस्पताल में जारी है। मृतकों की पहचान 50 वर्षीय विनय सोरेन और 17 वर्षीय विश्वकर्मा टुडू के रूप में हुई है, जबकि शिवधान टुडू और राकेश मुर्मू गंभीर रूप से घायल हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये चारों लोग एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए चरकादाहा गांव पहुँचे थे। इसी दौरान अचानक तेज़ आंधी और बारिश शुरू हो गई, जिससे बचने के लिए सभी एक मिट्टी के घर के पास शरण लेने लगे। तभी अचानक वज्रपात हुआ, जिसकी चपेट में आने से विनय सोरेन और विश्वकर्मा टुडू की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं शिवधान टुडू और राकेश मुर्मू गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के तुरंत बाद, ग्रामीणों और बिंदापाथर थाना पुलिस की मदद से चारों को तत्काल जामताड़ा सदर अस्पताल पहुँचाया गया। वहाँ चिकित्सकों ने विनय सोरेन और विश्वकर्मा टुडू को मृत घोषित कर दिया, जबकि दोनों घायलों का उपचार जारी है। इस हृदयविदारक घटना से मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गाँव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।1
- झारखंड के जामताड़ा जिले में वज्रपात का कहर देखने को मिला है। इस भीषण वज्रपात ने दो परिवारों को पूरी तरह से उजाड़ दिया है।1
- पाकुड़ के महेशपुर में आगामी मोहर्रम पर्व को शांति, सौहार्द और भाईचारे के साथ संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। इसी कड़ी में बुधवार को महेशपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोहर्रम जुलूस निकालने वाले विभिन्न संवेदनशील और मुख्य ग्रामीण इलाकों में पुलिस प्रशासन द्वारा फ्लैग मार्च निकाला गया। थाना प्रभारी रवि शर्मा के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल और दंगा रोधी उपकरणों से लैस जवानों ने सड़क पर उतरकर अपनी मुस्तैदी का अहसास कराया। यह फ्लैग मार्च बलिया डंगाल, रोला ग्राम, छक्कू धारा, हाथी मारा और हरीशपुर जैसे प्रमुख गांवों में निकाला गया। फ्लैग मार्च के दौरान थाना प्रभारी रवि शर्मा ने स्वयं दल-बल के साथ मोहर्रम जुलूस के निर्धारित मार्गों का बारीकी से भौतिक सत्यापन किया, जिसमें सड़कों की स्थिति, संवेदनशील मोड़ और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया, ताकि जुलूस के दौरान कोई अव्यवस्था या अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। फ्लैग मार्च में महेशपुर थाने के कई पुलिस अधिकारी, सशस्त्र बल के जवान और दंगा रोधी दस्ता मुख्य रूप से शामिल थे। ग्रामीणों से बातचीत करते हुए महेशपुर थाना प्रभारी रवि शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि पुलिस प्रशासन क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वाले, शांति भंग करने की कोशिश करने वाले या असामाजिक तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा और हुड़दंगियों तथा उपद्रवियों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। प्रशासन ने विभिन्न अखाड़ा कमेटियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद कर मोहर्रम के जुलूस को निर्धारित रूट और नियमों के तहत ही निकालने के निर्देश दिए, साथ ही सभी से आपसी सौहार्द, शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की। इस फ्लैग मार्च से स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना पैदा हुई है, वहीं कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले तत्वों को कड़ा संदेश मिला है।4
- झारखंड के निरसा प्रखंड की रांगामटिया पंचायत में हड़क तोरिया से जैनरा आश्रम तक बन रही सड़क के निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग और अनियमितता का आरोप लगाते हुए संवेदक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, साथ ही शिकायत करने पर ठेकेदार के लोगों द्वारा धमकाने की भी बात कही है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, जिसमें खराब गुणवत्ता वाली गिट्टी, नाममात्र का सीमेंट और धूल मिश्रित बालू का उपयोग शामिल है। उनका आरोप है कि सड़क पूरी होने से पहले ही कई जगहों पर दरारें आ गई हैं और लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सड़क छह महीने भी नहीं टिकेगी। यह स्थिति तब है जब निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने इस परियोजना का उद्घाटन करते समय ग्रामीणों से स्वयं कार्य की निगरानी करने और गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे शिकायत करने की अपील की थी। शिकायत करने वाले एक ग्रामीण ने बताया कि जब वे गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं, तो ठेकेदार के लोग उन्हें 'ज्यादा बोलने पर अंजाम भुगतने' की धमकी देते हैं। अब ग्रामीण निर्माण कार्य से जुड़े सबूत इकट्ठा कर सीधे विधायक अरूप चटर्जी से मिलने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करने का फैसला कर चुके हैं। वे यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि काम मानकों के अनुरूप हो रहा है, तो जूनियर इंजीनियर की नियमित निगरानी क्यों नहीं है और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही, शिकायतकर्ताओं को धमकाने वाले लोगों की पहचान पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क क्षेत्र के लोगों और स्कूली बच्चों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि भरोसे और विकास की उम्मीदों का प्रतीक है। इसलिए, वे चाहते हैं कि निर्माण कार्य पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा हो, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।8
- भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि इस घटना से संबंधित एक वीडियो देखने के बाद सारी गलतफहमी पूरी तरह से दूर हो जाएगी। इस पूरे प्रकरण में मुख्य प्रश्न यह है कि वास्तविक दोषी कौन है – पुलिस या भरत।1
- झारखंड के दुमका जिले स्थित पहाड़पुर गडा टोला में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिसकी दयनीय स्थिति को देखकर लोग 21वीं सदी में होने पर सवाल उठा रहे हैं। इस गाँव तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है, जिसके कारण बीमार पड़ने पर मरीजों को खटिया पर टाँगकर ही मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। यह स्थिति क्षेत्र में गंभीर स्वास्थ्य संकट और विकास की जमीनी हकीकत को दर्शाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और नेता केवल चुनाव के दौरान वोट मांगने आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद किसी ने भी गाँव की सुध नहीं ली। वे आक्रोशित होकर सवाल उठाते हैं कि क्या उनका जीवन सुरक्षित नहीं है और इस व्यवस्था में आखिर कब सुधार होगा।1