सूरत में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहाँ सचिन चौगड़ी पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों पर 'लुटेरे' की भूमिका निभाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। अर्जुन नामक एक युवक जो कुत्ते को बिस्किट खिलाने निकला था, उसे पुलिसकर्मियों ने लहूलुहान कर दिया और उसकी जेब से ₹12,000 लूटकर फरार हो गए। आरोप है कि बन्नर शैतान सिंह, विनय, केसर और उनका निजी ड्राइवर सरकारी गाड़ी के बजाय ऑटो रिक्शा में शिकार की तलाश में निकले थे। वे अपने साथ गांजे की पुड़िया रखते थे और निर्दोष युवकों को नशे के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते थे। विरोध करने पर ड्राइवर ने डंडे से अर्जुन की आँख के ऊपर जानलेवा वार किया, जिससे खून बहने लगा, लेकिन ऑटो में बैठे खाकीधारी तमाशा देखते रहे। लूटपाट के बाद, युवक के दोस्त सलमान को धमकाया गया कि यदि उसने मुँह खोला तो उसे आजीवन जेल में सड़ा दिया जाएगा। घटना के बाद 112 नंबर पर मदद के लिए कॉल करने के बावजूद सिस्टम सोता रहा और कोई सहायता नहीं मिली। शर्मनाक बात यह है कि इस घटना की खबर वायरल होने के बावजूद, सचिन पुलिस स्टेशन अपने ही 'पापी' कर्मचारियों को बचाने के लिए 'खाकी कवच' प्रदान कर रहा है। पीड़ित अर्जुन की लाचार माँ ने न्याय की भीख मांगने के लिए एक-दो बार नहीं, बल्कि पाँच बार सचिन पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए हैं। हालाँकि, हर बार उन्हें एक ही घिसा-पिटा जवाब मिलता है: "साहब छुट्टी पर हैं, बाद में आना!" पीड़ितों को थाने के अंदर ही धक्के मारे जाने और पुलिस की इस लापरवाही और निष्क्रियता का एक लाइव वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जो सूरत पुलिस की 'कोई परवाह नहीं' वाली मानसिकता को उजागर करता है। इस मामले को लेकर सूरत पुलिस कमिश्नर से सीधा सवाल पूछा जा रहा है कि क्या सचिन पुलिस स्टेशन में कानून भी 'छुट्टी' पर चला गया है? दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में कौन सा 'गुप्त दबाव' आड़े आ रहा है? और ऑटो रिक्शा में घूमकर जबरन वसूली करने वाली यह 'स्पेशल स्क्वॉड' किसके इशारे पर काम करती है? यह केवल कोई छोटी-मोटी मारपीट नहीं, बल्कि खाकी वर्दी की आड़ में की गई लूट और सत्ता का दुरुपयोग है। वीडियो वायरल होने के बाद, अब सूरत के उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की जा रही है कि वे सचिन पुलिस स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर जेल भेजें।
सूरत में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहाँ सचिन चौगड़ी पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों पर 'लुटेरे' की भूमिका निभाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। अर्जुन नामक एक युवक जो कुत्ते को बिस्किट खिलाने निकला था, उसे पुलिसकर्मियों ने लहूलुहान कर दिया और उसकी जेब से ₹12,000 लूटकर फरार हो गए। आरोप है कि बन्नर शैतान सिंह, विनय, केसर और उनका निजी ड्राइवर सरकारी गाड़ी के बजाय ऑटो रिक्शा में शिकार की तलाश में निकले थे। वे अपने साथ गांजे की पुड़िया रखते थे और निर्दोष युवकों को नशे के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते थे।
विरोध करने पर ड्राइवर ने डंडे से अर्जुन की आँख के ऊपर जानलेवा वार किया, जिससे खून बहने लगा, लेकिन ऑटो में बैठे खाकीधारी तमाशा देखते रहे। लूटपाट के बाद, युवक के दोस्त सलमान को धमकाया गया कि यदि उसने मुँह खोला तो उसे आजीवन जेल में सड़ा दिया जाएगा। घटना के बाद 112 नंबर पर मदद के लिए कॉल करने के बावजूद सिस्टम सोता रहा और कोई सहायता नहीं मिली। शर्मनाक बात यह है कि इस घटना की खबर वायरल होने के बावजूद, सचिन पुलिस स्टेशन अपने ही 'पापी' कर्मचारियों को बचाने के लिए 'खाकी कवच' प्रदान कर रहा
है। पीड़ित अर्जुन की लाचार माँ ने न्याय की भीख मांगने के लिए एक-दो बार नहीं, बल्कि पाँच बार सचिन पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए हैं। हालाँकि, हर बार उन्हें एक ही घिसा-पिटा जवाब मिलता है: "साहब छुट्टी पर हैं, बाद में आना!" पीड़ितों को थाने के अंदर ही धक्के मारे जाने और पुलिस की इस लापरवाही और निष्क्रियता का एक लाइव वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जो सूरत पुलिस की 'कोई परवाह नहीं' वाली मानसिकता को उजागर करता है। इस मामले को लेकर सूरत पुलिस कमिश्नर से सीधा सवाल पूछा जा रहा है कि क्या
सचिन पुलिस स्टेशन में कानून भी 'छुट्टी' पर चला गया है? दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में कौन सा 'गुप्त दबाव' आड़े आ रहा है? और ऑटो रिक्शा में घूमकर जबरन वसूली करने वाली यह 'स्पेशल स्क्वॉड' किसके इशारे पर काम करती है? यह केवल कोई छोटी-मोटी मारपीट नहीं, बल्कि खाकी वर्दी की आड़ में की गई लूट और सत्ता का दुरुपयोग है। वीडियो वायरल होने के बाद, अब सूरत के उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की जा रही है कि वे सचिन पुलिस स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर जेल भेजें।
- प्रयागराज के यमुनानगर कौंधियारा थाना क्षेत्र के चौकी जारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा पहलूकापूरा जारी में दबंगों ने गरीब विधवा महिला सुनीता (स्वर्गीय ज्ञान चंद बिंद की पत्नी) के घर की दीवार तोड़ दी। एक तहरीर के आधार पर हुई इस घटना में, दबंगों ने सुनीता के साथ-साथ अनुराग गुप्ता, आशीष कुमार और रघुनाथ प्रसाद को बेरहमी से मारा-पीटा। आरोप है कि उन्होंने पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी है।1
- Post by Raju Yadav1
- प्रयागराज के मेजा स्थित कुकुरकटवा गांव में हुए सनसनीखेज ट्रिपल हत्याकांड के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’ गुरुवार को घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से बंद कमरे में मुलाकात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाते हुए उनकी मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया। मंत्री राठौर ने इस जघन्य घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए कड़े तेवर में कहा कि ऐसे अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी कराई जाएगी। मंत्री ने यह भी दोहराया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है और सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। अपने साहू समाज से जुड़ाव बताते हुए उन्होंने कहा कि वह साहू समाज के बेटे हैं और अपने समाज के सम्मान के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद और उनकी सभी जायज मांगों को पूरा कराने का पूरा प्रयास करने की बात कही। इस दौरान मंत्री ने पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये का चेक प्रदान किया, जबकि साहू समाज की ओर से 1.20 लाख रुपये नकद देकर आर्थिक सहायता की गई। इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय वैश्य महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद साहू, लोकपति गुप्ता, अशोक गुप्ता, संतोष गुप्ता, सुखलाल साहू, सेठ लाल गुप्ता, मदन गुप्ता और गिरिजा शंकर गुप्ता सहित कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।1
- लखनऊ में एक इमारत में लगी भीषण आग में लगभग डेढ़ दर्जन युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई। वहाँ मौजूद युवाओं की चीखें और गवाहियाँ इस घटना को महज़ एक हादसे से कहीं ज़्यादा, हमारे समय की एक भयावह सच्चाई बताती हैं। इस त्रासदी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जिन लोगों को युवाओं ने अपनी उम्मीदों और भविष्य की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्होंने उनके लिए क्या किया। पाठ्य में आरोप लगाया गया है कि रोज़गार, शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था देने के बजाय, समाज को धर्म और नफ़रत की आग में झोंका जा रहा है। यह तुलना की गई है कि जहाँ एक आग इमारतों को जलाती है, वहीं दूसरी आग पीढ़ियों के सपनों को नष्ट कर रही है। चेतावनी दी गई है कि नफ़रत की राजनीति का अंत कभी अच्छा नहीं होता, और अगर अब भी लोग नहीं संभले या असली मुद्दों पर सवाल नहीं पूछे, तो केवल इमारतें ही नहीं, बल्कि सपने और भविष्य भी जलकर राख हो जाएँगे, जिससे पूरा समाज नष्ट हो जाएगा। यह आह्वान किया गया है कि अभी भी समय है, और यह तय करना होगा कि हम आग बुझाने वालों के साथ खड़े होंगे या आग फैलाने वालों के साथ।1
- प्रयागराज के मेजा में हुए ट्रिपल हत्याकांड के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। इस घटना से जुड़ी एक लड़की का झूठा बयान सामने आया है, जिससे पूरे प्रकरण की परतें खुल सकती हैं। लोग अब इस पूरे मामले को विस्तार से समझने की उत्सुकता दिखा रहे हैं, खासकर इस झूठे बयान के निहितार्थों को लेकर।1
- सूरत में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहाँ सचिन चौगड़ी पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों पर 'लुटेरे' की भूमिका निभाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। अर्जुन नामक एक युवक जो कुत्ते को बिस्किट खिलाने निकला था, उसे पुलिसकर्मियों ने लहूलुहान कर दिया और उसकी जेब से ₹12,000 लूटकर फरार हो गए। आरोप है कि बन्नर शैतान सिंह, विनय, केसर और उनका निजी ड्राइवर सरकारी गाड़ी के बजाय ऑटो रिक्शा में शिकार की तलाश में निकले थे। वे अपने साथ गांजे की पुड़िया रखते थे और निर्दोष युवकों को नशे के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते थे। विरोध करने पर ड्राइवर ने डंडे से अर्जुन की आँख के ऊपर जानलेवा वार किया, जिससे खून बहने लगा, लेकिन ऑटो में बैठे खाकीधारी तमाशा देखते रहे। लूटपाट के बाद, युवक के दोस्त सलमान को धमकाया गया कि यदि उसने मुँह खोला तो उसे आजीवन जेल में सड़ा दिया जाएगा। घटना के बाद 112 नंबर पर मदद के लिए कॉल करने के बावजूद सिस्टम सोता रहा और कोई सहायता नहीं मिली। शर्मनाक बात यह है कि इस घटना की खबर वायरल होने के बावजूद, सचिन पुलिस स्टेशन अपने ही 'पापी' कर्मचारियों को बचाने के लिए 'खाकी कवच' प्रदान कर रहा है। पीड़ित अर्जुन की लाचार माँ ने न्याय की भीख मांगने के लिए एक-दो बार नहीं, बल्कि पाँच बार सचिन पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए हैं। हालाँकि, हर बार उन्हें एक ही घिसा-पिटा जवाब मिलता है: "साहब छुट्टी पर हैं, बाद में आना!" पीड़ितों को थाने के अंदर ही धक्के मारे जाने और पुलिस की इस लापरवाही और निष्क्रियता का एक लाइव वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जो सूरत पुलिस की 'कोई परवाह नहीं' वाली मानसिकता को उजागर करता है। इस मामले को लेकर सूरत पुलिस कमिश्नर से सीधा सवाल पूछा जा रहा है कि क्या सचिन पुलिस स्टेशन में कानून भी 'छुट्टी' पर चला गया है? दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में कौन सा 'गुप्त दबाव' आड़े आ रहा है? और ऑटो रिक्शा में घूमकर जबरन वसूली करने वाली यह 'स्पेशल स्क्वॉड' किसके इशारे पर काम करती है? यह केवल कोई छोटी-मोटी मारपीट नहीं, बल्कि खाकी वर्दी की आड़ में की गई लूट और सत्ता का दुरुपयोग है। वीडियो वायरल होने के बाद, अब सूरत के उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की जा रही है कि वे सचिन पुलिस स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर जेल भेजें।4