जबलपुर के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में स्थित चुंगी नाका की एक शराब दुकान के संचालक और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने एमआरपी रेट से अधिक पैसा ना देने पर एक युवक को दुकान के अंदर कमरे में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, जिससे उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। इस घटना की जानकारी देते हुए माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि ऋषि नगर निवासी अमित यादव ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, उनका चचेरा भाई आकाश यादव शराब लेने दुकान गया था, जहाँ बियर की बोतल पर प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूले जाने का उसने विरोध किया। विरोध करने पर दुकान कर्मचारियों ने आकाश का मोबाइल छीन लिया। अमित यादव का आरोप है कि जब वह इस मामले में बातचीत करने दुकान पहुंचा, तो दुकान मालिक के कहने पर कर्मचारियों ने उन दोनों भाइयों को अंदर खींच लिया। इसके बाद दुकान संचालक और कर्मचारियों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से पीटा, जिससे दोनों को गंभीर चोटें आईं।
जबलपुर के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में स्थित चुंगी नाका की एक शराब दुकान के संचालक और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने एमआरपी रेट से अधिक पैसा ना देने पर एक युवक को दुकान के अंदर कमरे में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, जिससे
उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। इस घटना की जानकारी देते हुए माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि ऋषि नगर निवासी अमित यादव ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, उनका चचेरा भाई आकाश यादव शराब
लेने दुकान गया था, जहाँ बियर की बोतल पर प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूले जाने का उसने विरोध किया। विरोध करने पर दुकान कर्मचारियों ने आकाश का मोबाइल छीन लिया। अमित यादव का आरोप है कि जब वह इस मामले में बातचीत करने दुकान
पहुंचा, तो दुकान मालिक के कहने पर कर्मचारियों ने उन दोनों भाइयों को अंदर खींच लिया। इसके बाद दुकान संचालक और कर्मचारियों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से पीटा, जिससे दोनों को गंभीर चोटें आईं।
- दमोह जिले के बांदकपुर में कॉरिडोर और विकास परियोजनाओं को लेकर गहरा विवाद सामने आया है। एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बांदकपुर की जनता, व्यापारियों और सरपंच ने कई अहम राज खोले हैं, जिसमें विकास के नाम पर चल रही गतिविधियों पर बड़े सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में यह गंभीर आरोप सामने आया है कि बांदकपुर जैसे पूरे गांव के फैसले कथित तौर पर सिर्फ दो व्यक्तियों द्वारा लिए जा रहे हैं। इसी एकाधिकारवादी निर्णय प्रक्रिया के चलते विकास कार्यों के नाम पर विवाद खड़ा हो गया है। विशेष रूप से, बाबा जागेश्वरनाथ धाम में चल रही गतिविधियों पर भी संदेह व्यक्त किया गया है, जिसकी सच्चाई पर जनता ने खुलकर अपनी बेबाक आवाज उठाई है। यह ग्राउंड रिपोर्ट बांदकपुर में आखिर क्या हो रहा है, इस पर सीधा प्रकाश डालती है और विकास के नाम पर उठ रहे इन बड़े सवालों का जवाब मांगती है।1
- नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा तहसील और चांवरपाठा ब्लॉक के लगभग 40 गांवों में भीषण जल संकट गहरा गया है। इस गंभीर स्थिति के चलते ग्रामवासियों ने आगामी चुनावों में मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि जल्द पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे गांव में किसी भी राजनेता के प्रवेश का विरोध करेंगे। ग्राम बिजोरा सहित कई गांवों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने हजार-हजार फीट तक बोर करवाए हैं, लेकिन अब उनसे केवल हवा निकल रही है और पानी नहीं मिल रहा। भीषण गर्मी में पानी की समस्या से परेशान महिलाएं, पुरुष और बच्चे रोजाना दूसरे गांवों से पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। उनका कहना है कि वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन ही मिलते रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्या वैसी ही बनी हुई है। इस लगातार उपेक्षा से नाराज होकर ग्रामवासियों ने एकजुट होकर यह बड़ा फैसला लिया है, क्योंकि अब पानी की समस्या उनके लिए सबसे बड़ा संकट बन चुकी है।1
- मंडला जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रही। इस आंदोलन के कारण पूरे मंडला जिले सहित ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह लडख़ड़ा गई हैं। आंदोलन को और मजबूती देते हुए, नारायणगंज और बीजाडांडी ब्लॉक के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी भी बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर शामिल हो गए हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अमित तिवारी ने बताया कि नारायणगंज और बीजाडांडी से आए कर्मचारियों के सहयोग से यह आंदोलन अब और उग्र हो गया है। अमित तिवारी के अनुसार, फील्ड स्तर से लेकर अस्पतालों तक का काम पूरी तरह ठप पड़ा है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें समान कार्य समान वेतन लागू करना और पूर्व में की गई नियमितीकरण की घोषणा को पूरा कराना है। इस बेमियादी हड़ताल के चलते ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बच्चों का टीकाकरण, ओपीडी सेवाएं और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह बाधित हो रहे हैं।1
- मंडला जिले की मोहगांव बुडनेर नदी पर गंभीर संकट गहरा गया है। अवैध ईंट भट्टों के लगातार संचालन के कारण नदी का मूल अस्तित्व धीरे-धीरे मिटता जा रहा है। इन गतिविधियों के चलते नदी में 50 फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे आगामी बारिश के मौसम में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।1
- जन शिक्षण संस्थान के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता का एक नया आधार मिल रहा है। संस्थान गाँवों तक पहुँचकर महिलाओं को निःशुल्क सिलाई, कंप्यूटर और कढ़ाई का रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, प्रतिभागियों को मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र भी दिए जा रहे हैं।1
- ग्रामीणों ने पंचायत में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस संबंध में शिकायतें किए जाने के बावजूद भी अधिकारी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं।1
- दमोह की कृषि उपज मंडी में मंगलवार को समय पर उपज की तुलाई न होने से नाराज किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में किसानों ने मंडी परिसर में जाम लगाकर अपना विरोध जताया। किसानों का आरोप था कि लंबे समय से तुलाई कार्य प्रभावित होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय और आर्थिक दोनों तरह का नुकसान हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने व्यापारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम भी नारे लगाए। स्थिति की सूचना मिलने पर एसडीएम और मंडी के भारसाधक अधिकारी सौरभ गंधर्व तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बातचीत की, उनकी समस्याओं को सुना और मंडी प्रशासन के साथ-साथ व्यापारियों को तुलाई व्यवस्था को सुचारू करने के स्पष्ट निर्देश दिए। एसडीएम गंधर्व ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी उपज की तुलाई शीघ्र करवाई जाएगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। एसडीएम के इस भरोसे के बाद किसानों ने अपना जाम समाप्त कर दिया, जिसके उपरांत मंडी में आवागमन और तुलाई का कार्य धीरे-धीरे सामान्य हो सका। प्रशासन ने किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया है।1
- नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में एकाग्रवाल परिवार से जुड़ा पैतृक जमीन विवाद अब स्थानीय स्तर से निकलकर भोपाल तक चर्चा का विषय बन गया है, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में दोनों पक्षों ने गोटेगांव में अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं, जहाँ उन्होंने मीडिया के सामने अपनी-अपनी बात रखी और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस वार्ता के दौरान, दोनों पक्षों ने जमीन के स्वामित्व, दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया से संबंधित अपने-अपने दावे प्रस्तुत किए। इस दौरान उनके बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी रहा, जिसने विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है। दोनों पक्षों का दावा है कि उनके पास अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है। फिलहाल, विवादित जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, और इस पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक एवं राजस्व प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएगा।1
- मंडला जिले के नारायणगंज में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने नीट परीक्षा पेपर लीक और लगातार बढ़ती कमरतोड़ महंगाई के विरोध में एक उग्र प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के प्रति अपना गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए नगर में महंगाई की 'अर्थी' निकाली और इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की। इस प्रदर्शन में निवास विधायक चैन सिंह वरकड़े ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज रसोई से लेकर ईंधन तक हर चीज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा का पेपर लीक होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार निष्पक्ष परीक्षा कराने में पूरी तरह विफल रही है। विधानसभा प्रभारी राजेश तिवारी और जगदीश सैनी ने इस मौके पर कहा कि कांग्रेस जनता के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी। यह प्रदर्शन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ज्योतिषी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष रितेश सोनी और प्रियांश अग्रवाल के नेतृत्व में हुआ, जिसमें क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं, मंडलम अध्यक्षों सहित भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के बाद, कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन नारायणगंज तहसीलदार को सौंपा। कार्यकर्ताओं ने अंत में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे भविष्य में और भी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।1