जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है।
जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है।
- रियान बड़ी नगर पालिका के उपाध्यक्ष बने जगदीश माली, 6 मतों से जीत छीतर सिंह को मिले 7 वोट, सभी 20 पार्षदों ने किया मतदान; पंचायत समिति सभागार में संपन्न हुई चुनाव प्रक्रिया रियान बड़ी नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद के लिए मंगलवार को चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई। उपाध्यक्ष पद के लिए दो प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। इनमें छीतर सिंह और जगदीश माली शामिल थे। दोपहर 2.30 बजे मतदान शुरू हुआ। नगर पालिका के सभी 20 वार्डों के निर्वाचित पार्षदों ने मतदान में हिस्सा लिया। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतगणना की गई। इसमें जगदीश माली को कुल 13 मत मिले, जबकि छीतर सिंह के पक्ष में 7 मत आए। इस प्रकार जगदीश माली ने 6 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर नगर पालिका के उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। चुनाव को लेकर पंचायत समिति सभागार में प्रशासन की ओर से पूरी व्यवस्थाएं की गई थीं। उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचन अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया के निर्देशन में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई गई। नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक सभी कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुसार की गई। चुनाव के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी तैनात रहा। पंचायत समिति सभागार और आसपास के क्षेत्र में पुलिस जवानों ने व्यवस्था संभाली। मतदान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति नहीं बनी और चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। जगदीश माली की जीत के बाद समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। नगर पालिका के गठन के बाद हुए पहले उपाध्यक्ष पद के चुनाव में 20 में से 13 पार्षदों का समर्थन हासिल कर जगदीश माली उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। वहीं छीतर सिंह को 7 मत मिले। रियान बड़ी नगर पालिका के उपाध्यक्ष बने जगदीश माली, 6 मतों से जीत छीतर सिंह को मिले 7 वोट, सभी 20 पार्षदों ने किया मतदान; पंचायत समिति सभागार में संपन्न हुई चुनाव प्रक्रिया रियान बड़ी नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद के लिए मंगलवार को चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई। उपाध्यक्ष पद के लिए दो प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। इनमें छीतर सिंह और जगदीश माली शामिल थे। दोपहर 2.30 बजे मतदान शुरू हुआ। नगर पालिका के सभी 20 वार्डों के निर्वाचित पार्षदों ने मतदान में हिस्सा लिया। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतगणना की गई। इसमें जगदीश माली को कुल 13 मत मिले, जबकि छीतर सिंह के पक्ष में 7 मत आए। इस प्रकार जगदीश माली ने 6 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर नगर पालिका के उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। चुनाव को लेकर पंचायत समिति सभागार में प्रशासन की ओर से पूरी व्यवस्थाएं की गई थीं। उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचन अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया के निर्देशन में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई गई। नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक सभी कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुसार की गई। चुनाव के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी तैनात रहा। पंचायत समिति सभागार और आसपास के क्षेत्र में पुलिस जवानों ने व्यवस्था संभाली। मतदान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति नहीं बनी और चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। जगदीश माली की जीत के बाद समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। नगर पालिका के गठन के बाद हुए पहले उपाध्यक्ष पद के चुनाव में 20 में से 13 पार्षदों का समर्थन हासिल कर जगदीश माली उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। वहीं छीतर सिंह को 7 मत मिले।1
- अशोक भाटी बनने मेड़ता नगरपालिका के उपाध्यक्ष 26 मत प्राप्त हुवे भाटी को मेड़ता नगरपालिका उपाध्यक्ष बने भाजपा के अशोक भाटी मेड़ता सिटी, 22 सितंबर 2026: मेड़ता नगरपालिका उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अशोक भाटी निर्वाचित हुए। आपके दिए चुनाव परिणाम के अनुसार अशोक भाटी को 26 मत, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी नंदू श्री मंत्री को 14 मत प्राप्त हुए। अशोक भाटी के उपाध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद मेड़ता नगरपालिका के बाहर समर्थकों ने विशाल जुलूस निकालकर भव्य अभिनंदन किया। इस दौरान नवनिर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष कंचन देवी सांखला, धर्मपत्नी राजेंद्र सांखला का भी स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मेड़ता नगरपालिका में 40 पार्षदों का सदन है और 14 सितंबर के वार्ड परिणामों में भाजपा के 21, कांग्रेस के 12, निर्दलीय 6 तथा RLP के 1 पार्षद निर्वाचित हुए थे। � MyCorporator +1 नोट: मुझे मिले सार्वजनिक वेब स्रोतों में आज के उपाध्यक्ष चुनाव के 26–14 वोटों का स्वतंत्र आधिकारिक सत्यापन नहीं मिला है; ऊपर के 26–14 आंकड़े आपके दिए विवरण के आधार पर लिखे गए हैं।2
- Ajmer जश्ने ईद मिलादुन्नबी खादिम मोहल्ला इमामबाड़ा में सजाई महफिल Dainik News AJMER Ajmer जश्ने ईद मिलादुन्नबी खादिम मोहल्ला इमामबाड़ा में सजाई महफिल Dainik News AJMER1
- अजमेर में आज रात भव्य राज्य स्तरीय जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी जलसा | 25 साल की परंपरा अजमेर के खादिम मोहल्ला स्थित इमाम बारगाह में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के उपलक्ष्य में अन्जुमन मोहिब्बाने अहलेबैत की ओर से भव्य राज्य स्तरीय जलसे का आयोजन किया गया। 25 वर्षों की परंपरा वाले इस कार्यक्रम में तिलावत, शिजराखानी, नात, मनकबत और देशभर के शायरों ने नजराने-ए-अकीदत पेश किए।1
- जैतारण नगर पालिका उपाध्यक्ष पद पर नाजी देवी पत्नी मांगीलाल सीरवी निर्विरोध निर्वाचित हुई कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने मुंह मीठा कर जता या आभार जैतारण से राधेश्याम दाधीच वरिष्ठ पत्रकार की सूचना जैतारण नगर पालिका उपाध्यक्ष पद पर नाजी देवी पत्नी मांगीलाल सीरवी निर्विरोध निर्वाचित हुई कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने मुंह मीठा कर जता या आभार इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष भेनाराम गहलोत पार्षद सुखलाल सरगरा भागीरथ सोनी बिट्टू सोनी विशाल तंवर अशोक सोलंकी माली समाज के अध्यक्ष मदनलाल रुणिचा कालूराम भाटी भाजपा शहर अध्यक्ष कमलेश सोनी हीरा देवी जांगिड़ विजेंद्र जांगिड़ कुंज बिहारी दाधीच धर्मेंद्र उपाध्याय अन्नाराम सीरवी प्रभु राम सीरवी प्रेमचंद जोशी स हित अनेक सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद रहे1
- अजमेर की शिव रेजिडेंसी में गणपति उत्सव की धूम | बच्चों से बड़ों तक गरबे में झूमे 150 परिवार शिव रेजिडेंसी सोसायटी में हर वर्ष की तरह इस बार भी गणपति उत्सव उत्साह के साथ मनाया गया। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पारंपरिक गरबा खेलकर गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया। रात 11 बजे तक चले इस आयोजन में करीब 150 परिवार शामिल हुए। अंतिम दिन प्रसाद एवं सामूहिक भोजन का भी आयोजन रखा गया।1
- Hiring Company / Shop : LEADSGURU AFFILIATED DIGITAL MARKETING JAIPUR RAJASTHAN Job Field : WORK FROM HOME Salary Offered : 35000,50000 Locality : All INDIA Job Type : Part Time Required Work Experience : Fresher यहां पर कॉलिंग का काम रहता है और दूसरा काम रहता है कस्टमर को डिजिटल स्किल के बारे में जानकारी देना।2
- जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जिंदा पिता का कर दिया अंतिम संस्कार, तीसरे दिन फोन आया तो गांव में काम करते मिले रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव का मामला: जेब में मिली पर्ची के आधार पर शव की पहचान बताई, बेटे ने अस्पताल में आपत्ति भी जताई थी पुष्कर में पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा, परिजन ने अंतिम संस्कार कर तीसरे की रस्म भी कर दी; बाद में पिंचोलिया गांव में जिंदा मिले नाथूराम रियान बड़ी के पास पीपलिया गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जेब में मिली एक पर्ची के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में करते हुए उसके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया। बेटे का कहना है कि उसने अस्पताल में शव देखकर पुलिस और वार्ड बॉय को बताया था कि शव उसके पिता का नहीं है, लेकिन पर्ची में नाम होने की बात कहकर उसे शव की पहचान करने को कहा गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव उसे सौंप दिया गया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। तिलोक राम ने बताया कि उसकी मां ने शाम को फोन कर कहा था कि उसके पिता का शव मिला है। इसके बाद उसने फोन करने वाले नंबर पर संपर्क किया। फोन पर उसकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह राजकीय चिकित्सालय पुष्कर पहुंचा और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उसके पिता नहीं हैं। इसके बावजूद जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही गई। तिलोक राम ने बताया कि उसके पिता पिछले कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी कारण वह शव को लेकर असमंजस में था। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय चिकित्सालय पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार ने समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया कि उसके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचा, जहां नाथूराम जीवित मिले और उनके साथ काम कर रहे थे। परिजन उन्हें घर लेकर आए। तिलोक राम का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की गलती के कारण किसी अन्य व्यक्ति के शव का उसके पिता के नाम पर अंतिम संस्कार हो गया। वहीं थाना अधिकारी अशोक बिशु ने बताया कि शव की जेब से मिली पर्ची के आधार पर परिजनों से संपर्क किया गया था। बेटे द्वारा पहचान किए जाने के बाद पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध होने का उल्लेख है।1