गाँव में इस समय पानी का भीषण संकट गहरा गया है, जहाँ सरकार की “हर घर जल” योजना के तहत पाइपलाइनें तो बिछाई गई हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। हालात इतने खराब हैं कि दो घंटे तक लाइन चलने के बाद भी मुश्किल से केवल 500 लीटर पानी ही मिलता है, जो एक परिवार के पूरे महीने के लिए कतई पर्याप्त नहीं है। इस भीषण गर्मी में इंसान और पशु दोनों ही प्यास से बुरी तरह तड़प रहे हैं। गाँव वालों का सीधा आरोप है कि प्रशासन के कर्मचारी पानी का दबाव पूरा नहीं खोलते, जिस कारण पानी आखिरी घरों तक पहुँच ही नहीं पाता। इसके ऊपर, नई पाइपलाइन के बिछने से गाँव की पुरानी पानी की व्यवस्था और पुराने कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे अब लोगों के पास पानी का कोई दूसरा सहारा भी नहीं बचा है। इस विकट स्थिति में, पशुओं को साफ पानी नसीब नहीं हो रहा और उन्हें मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है। कई परिवारों को तो महंगे पानी के टैंकर मँगवाने पड़ रहे हैं, लेकिन गरीब लोग हर बार हज़ारों रुपये खर्च करके पानी खरीदने में असमर्थ हैं। सबसे दुखद बात यह है कि अभी तक गाँव में कोई आपातकालीन सरकारी टैंकर भी नहीं पहुँचा है। ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद प्रशासन उनकी समस्या सुनेगा, मगर हर दिन यह परेशानी बढ़ती ही जा रही है, और गाँव का हर व्यक्ति यही सवाल पूछ रहा है कि अगर पानी ही नहीं मिलेगा तो “हर घर जल” योजना का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
गाँव में इस समय पानी का भीषण संकट गहरा गया है, जहाँ सरकार की “हर घर जल” योजना के तहत पाइपलाइनें तो बिछाई गई हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। हालात इतने खराब हैं कि दो घंटे तक लाइन चलने के बाद भी मुश्किल से केवल 500 लीटर पानी ही मिलता है, जो एक परिवार के पूरे महीने के लिए कतई पर्याप्त नहीं है। इस भीषण गर्मी में इंसान और पशु दोनों ही प्यास से बुरी तरह तड़प रहे हैं। गाँव वालों का सीधा आरोप है कि प्रशासन के कर्मचारी पानी का दबाव पूरा नहीं खोलते, जिस कारण पानी आखिरी घरों तक पहुँच ही नहीं पाता। इसके ऊपर, नई पाइपलाइन के बिछने से गाँव की पुरानी पानी की व्यवस्था और पुराने कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे अब लोगों के पास पानी का कोई दूसरा सहारा भी नहीं बचा है। इस विकट स्थिति में, पशुओं को साफ पानी नसीब नहीं हो रहा और उन्हें मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है। कई परिवारों को तो महंगे पानी के टैंकर मँगवाने पड़ रहे हैं, लेकिन गरीब लोग हर बार हज़ारों रुपये खर्च करके पानी खरीदने में असमर्थ हैं। सबसे दुखद बात यह है कि अभी तक गाँव में कोई आपातकालीन सरकारी टैंकर भी नहीं पहुँचा है। ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद प्रशासन उनकी समस्या सुनेगा, मगर हर दिन यह परेशानी बढ़ती ही जा रही है, और गाँव का हर व्यक्ति यही सवाल पूछ रहा है कि अगर पानी ही नहीं मिलेगा तो “हर घर जल” योजना का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
- गाँव में इस समय पानी का भीषण संकट गहरा गया है, जहाँ सरकार की “हर घर जल” योजना के तहत पाइपलाइनें तो बिछाई गई हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। हालात इतने खराब हैं कि दो घंटे तक लाइन चलने के बाद भी मुश्किल से केवल 500 लीटर पानी ही मिलता है, जो एक परिवार के पूरे महीने के लिए कतई पर्याप्त नहीं है। इस भीषण गर्मी में इंसान और पशु दोनों ही प्यास से बुरी तरह तड़प रहे हैं। गाँव वालों का सीधा आरोप है कि प्रशासन के कर्मचारी पानी का दबाव पूरा नहीं खोलते, जिस कारण पानी आखिरी घरों तक पहुँच ही नहीं पाता। इसके ऊपर, नई पाइपलाइन के बिछने से गाँव की पुरानी पानी की व्यवस्था और पुराने कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे अब लोगों के पास पानी का कोई दूसरा सहारा भी नहीं बचा है। इस विकट स्थिति में, पशुओं को साफ पानी नसीब नहीं हो रहा और उन्हें मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है। कई परिवारों को तो महंगे पानी के टैंकर मँगवाने पड़ रहे हैं, लेकिन गरीब लोग हर बार हज़ारों रुपये खर्च करके पानी खरीदने में असमर्थ हैं। सबसे दुखद बात यह है कि अभी तक गाँव में कोई आपातकालीन सरकारी टैंकर भी नहीं पहुँचा है। ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद प्रशासन उनकी समस्या सुनेगा, मगर हर दिन यह परेशानी बढ़ती ही जा रही है, और गाँव का हर व्यक्ति यही सवाल पूछ रहा है कि अगर पानी ही नहीं मिलेगा तो “हर घर जल” योजना का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?1
- डॉ. प्रियंका जी चौधरी और स्वरूप सिंह खारा बाड़मेर में चल रहे धरना स्थल पर पहुंचे हैं।1
- बाजार में बिक रहे कथित 'शुद्ध देसी घी' की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। चिंता व्यक्त की गई है कि क्या लोगों की थालियों तक नकली घी पहुँच रहा है और क्या 'शुद्ध देसी घी' के नाम पर धीरे-धीरे ज़हर परोसा जा रहा है। ये सवाल हर चमकदार टिन और हर नामी ब्रांड पर उठते हैं, जिनकी शुद्धता के दावों पर संदेह किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों के भरोसे, स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।1
- सायला उपखंड क्षेत्र के सांगाना ग्राम स्थित यात ख़ान की ढाणी में एक विद्यालय के पास बने ट्यूबवेल के चारों ओर अचानक मिट्टी धंस गई, जिससे वहां एक बड़ा खड्डा बन गया। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंता काफी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, लगभग एक साल पहले इस विद्यालय के समीप ट्यूबवेल खोदा गया था। मंगलवार को अचानक हुई इस घटना के दौरान जमीन खिसक कर गहरा खड्डा बन गया। गनीमत रही कि इन दिनों विद्यालय में छुट्टियां चल रही हैं, जिससे कोई बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों ने इस प्रकार विद्यालय के पास जमीन धंसने को गंभीर लापरवाही का संकेत बताया है। उनका कहना है कि यदि समय पर सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में बच्चों और राहगीरों के लिए खतरा बढ़ सकता है। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत मौके का निरीक्षण करवाने, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और जमीन धंसने के कारणों की विस्तृत जांच करवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।1
- मोतीसरा ग्राम पंचायत में सोमवार को ‘गंगा दशमी’ के पावन अवसर पर “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के तहत एक ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय आदर्श गवाई तालाब पर अधिकारियों और स्कूली बालिकाओं द्वारा पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद अमृत सरोवर की भी पूजा की गई। इस अभियान में सिवाना तहसीलदार रायचंद देवासी, विकास अधिकारी दिनेश सिंह भाटी, अतिरिक्त विकास अधिकारी गणेशाराम चौधरी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार, रेंजर भोमाराम सह प्रभारी, जलदाय विभाग से अशोक कुमार, विद्युत विभाग से गजेंद्र कुमार, ब्लॉक परियोजना अधिकारी दयाराम मीणा (राजीविका), पोकरराम देवासी, कृषि पर्यवेक्षक अर्जुन राणा, प्रिंसिपल रामलाल पंवार, फतेह सिंह डाबली प्रशासक मोतीसरा, ग्राम विकास अधिकारी नरपत सिंह देवड़ा, कनिष्ठ सहायक रूपाराम विराश, जबरा राम देवड़ा सुरक्षा गार्ड, निर्मल कुमार ईमित्र प्लस ऑपरेटर सहित उप सरपंच प्रतिनिधि जोधाराम तरक, पूर्व सरपंच गिरधारी लाल, पोलाराम बग, भगाराम भील तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संकल्प लिया। अभियान के तहत जल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर विविध जन जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने प्रभात फेरी निकालकर गांव में जल बचाओ एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जिसके बाद जल संरक्षण तथा जागरूकता रैली के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित किया गया। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) ने अपने संबोधन में कहा कि “जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जल संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के माध्यम से गांव-गांव तक जल बचाने एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचा रही है। उन्होंने लोगों से नशामुक्त समाज के निर्माण का आह्वान करते हुए शरीर और प्रकृति दोनों को पवित्र रखने की आवश्यकता पर बल दिया। ग्राम विकास अधिकारी ने गंगा दशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां गंगा का धरती पर अवतरण भागीरथ के अथक प्रयासों से संभव हुआ था और आज हमें भी जल संरक्षण के लिए उसी प्रकार के “भागीरथी प्रयास” करने होंगे। उन्होंने भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन को अत्यंत आवश्यक बताया, साथ ही कहा कि पूर्वजों द्वारा जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों को पूजनीय मानकर संरक्षित करने की परंपरा को आगे बढ़ाना आज की आवश्यकता है। विकास अधिकारी दिनेश सिंह भाटी ने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने बढ़ते जल संकट को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति से पानी की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि गंगा दशमी से प्रारंभ होकर विश्व पर्यावरण दिवस तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा, क्योंकि जल संरक्षण के बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से जनसहभागिता के साथ जल स्रोतों के जीर्णोद्धार, साफ-सफाई और जल संग्रहण को हमेशा स्वच्छ रखने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, ग्रामीणजन, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस दौरान अपनी स्थानीय समस्याओं को भी ब्लॉक अधिकारियों के समक्ष रखा, जिन पर अधिकारियों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया।1
- दवाडा के लुबाली फीडर क्षेत्र में एक नई ट्यूबवेल होल की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी होने पर गहरा आभार और बधाई व्यक्त की गई है। इस कार्य के लिए भगवान सिंह और सुजान सिंह को विशेष रूप से धन्यवाद दिया गया है।1
- जालोर में राजस्थान माइनिंग संगठन के अध्यक्ष एवं समाजसेवी राजवीर सिंह देवड़ा और भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष रतन सिंह कानीवाड़ा ने मंगलवार को सुंदेलाव तालाब, सामतीपुरा रोड स्थित आर्य वीर दल हनुमान व्यायामशाला की गतिविधियों और मुक्केबाजी प्रतियोगिता का अवलोकन किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने आर्य वीर दल की मुक्तिकंठ से प्रशंसा की। राजवीर सिंह देवड़ा ने अपने संबोधन में बताया कि वे भी बचपन में आर्य वीर दल की शाखा में नियमित रूप से आते थे और उन्होंने यहां से जीवन में बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि उनके समय में यहां इतनी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन आज का विकास देखकर मन प्रसन्न हुआ। देवड़ा ने आर्य वीरों की बड़ी संख्या और उनकी मेहनत देखकर यह उम्मीद जताई कि वे एक दिन बड़ा नाम करेंगे। वहीं, किसान नेता रतन सिंह कानीवाड़ा ने मुक्केबाजी के खेल को सनातन काल से दमखम का खेल बताते हुए इसे नियमित रूप से खेलने की सलाह दी, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का निवास होता है। उन्होंने खेलों में आर्य वीर दल के योगदान को सराहनीय बताया। इससे पहले, आर्य वीर दल के संरक्षक दलपत सिंह आर्य ने संगठन की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह शाखा 50 साल से भी अधिक समय से संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां से प्रशिक्षित होकर कई लोगों ने जालोर का नाम ऊंचा किया है, और इसलिए उन्होंने अभिभावकों से अपने बालक-बालिकाओं को नियमित रूप से संगठन में भेजने का आग्रह किया। दलपत सिंह आर्य ने यह भी बताया कि संगठन बालक-बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए तत्पर है। इस अवसर पर किसान नेता नरपत सिंह आन्वलोज, आहोर किसान संघ के चक्रवर्ती सिंह, हिंदू राम आर्य, हर्षवर्धन सिंह राठौड़ और भावेश सुंदेशा सहित कई आर्य वीर और वीरांगनाएं उपस्थित थे।4
- राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित शिव शक्ति धाम पर निर्जला एकादशी मेले का आयोजन किया गया।1