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बाजार में बिक रहे कथित 'शुद्ध देसी घी' की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। चिंता व्यक्त की गई है कि क्या लोगों की थालियों तक नकली घी पहुँच रहा है और क्या 'शुद्ध देसी घी' के नाम पर धीरे-धीरे ज़हर परोसा जा रहा है। ये सवाल हर चमकदार टिन और हर नामी ब्रांड पर उठते हैं, जिनकी शुद्धता के दावों पर संदेह किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों के भरोसे, स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।
Gopal singh jodha
बाजार में बिक रहे कथित 'शुद्ध देसी घी' की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। चिंता व्यक्त की गई है कि क्या लोगों की थालियों तक नकली घी पहुँच रहा है और क्या 'शुद्ध देसी घी' के नाम पर धीरे-धीरे ज़हर परोसा जा रहा है। ये सवाल हर चमकदार टिन और हर नामी ब्रांड पर उठते हैं, जिनकी शुद्धता के दावों पर संदेह किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों के भरोसे, स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।
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- बाजार में बिक रहे कथित 'शुद्ध देसी घी' की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। चिंता व्यक्त की गई है कि क्या लोगों की थालियों तक नकली घी पहुँच रहा है और क्या 'शुद्ध देसी घी' के नाम पर धीरे-धीरे ज़हर परोसा जा रहा है। ये सवाल हर चमकदार टिन और हर नामी ब्रांड पर उठते हैं, जिनकी शुद्धता के दावों पर संदेह किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों के भरोसे, स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।1
- गाँव में इस समय पानी का भीषण संकट गहरा गया है, जहाँ सरकार की “हर घर जल” योजना के तहत पाइपलाइनें तो बिछाई गई हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। हालात इतने खराब हैं कि दो घंटे तक लाइन चलने के बाद भी मुश्किल से केवल 500 लीटर पानी ही मिलता है, जो एक परिवार के पूरे महीने के लिए कतई पर्याप्त नहीं है। इस भीषण गर्मी में इंसान और पशु दोनों ही प्यास से बुरी तरह तड़प रहे हैं। गाँव वालों का सीधा आरोप है कि प्रशासन के कर्मचारी पानी का दबाव पूरा नहीं खोलते, जिस कारण पानी आखिरी घरों तक पहुँच ही नहीं पाता। इसके ऊपर, नई पाइपलाइन के बिछने से गाँव की पुरानी पानी की व्यवस्था और पुराने कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे अब लोगों के पास पानी का कोई दूसरा सहारा भी नहीं बचा है। इस विकट स्थिति में, पशुओं को साफ पानी नसीब नहीं हो रहा और उन्हें मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है। कई परिवारों को तो महंगे पानी के टैंकर मँगवाने पड़ रहे हैं, लेकिन गरीब लोग हर बार हज़ारों रुपये खर्च करके पानी खरीदने में असमर्थ हैं। सबसे दुखद बात यह है कि अभी तक गाँव में कोई आपातकालीन सरकारी टैंकर भी नहीं पहुँचा है। ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद प्रशासन उनकी समस्या सुनेगा, मगर हर दिन यह परेशानी बढ़ती ही जा रही है, और गाँव का हर व्यक्ति यही सवाल पूछ रहा है कि अगर पानी ही नहीं मिलेगा तो “हर घर जल” योजना का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?1
- दवाडा के लुबाली फीडर क्षेत्र में एक नई ट्यूबवेल होल की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी होने पर गहरा आभार और बधाई व्यक्त की गई है। इस कार्य के लिए भगवान सिंह और सुजान सिंह को विशेष रूप से धन्यवाद दिया गया है।1
- डॉ. प्रियंका जी चौधरी और स्वरूप सिंह खारा बाड़मेर में चल रहे धरना स्थल पर पहुंचे हैं।1
- जिला चिकित्सालय फलोदी में साफ-सफाई की दैनिक स्थिति बेहद खराब है। अस्पताल परिसर में चिकित्सालय की सफाई बहुत बुरी हालत में है, विशेष रूप से शौचालयों की स्थिति तो अत्यंत बदहाल है।1
- मोतीसरा ग्राम पंचायत में सोमवार को ‘गंगा दशमी’ के पावन अवसर पर “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के तहत एक ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय आदर्श गवाई तालाब पर अधिकारियों और स्कूली बालिकाओं द्वारा पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद अमृत सरोवर की भी पूजा की गई। इस अभियान में सिवाना तहसीलदार रायचंद देवासी, विकास अधिकारी दिनेश सिंह भाटी, अतिरिक्त विकास अधिकारी गणेशाराम चौधरी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार, रेंजर भोमाराम सह प्रभारी, जलदाय विभाग से अशोक कुमार, विद्युत विभाग से गजेंद्र कुमार, ब्लॉक परियोजना अधिकारी दयाराम मीणा (राजीविका), पोकरराम देवासी, कृषि पर्यवेक्षक अर्जुन राणा, प्रिंसिपल रामलाल पंवार, फतेह सिंह डाबली प्रशासक मोतीसरा, ग्राम विकास अधिकारी नरपत सिंह देवड़ा, कनिष्ठ सहायक रूपाराम विराश, जबरा राम देवड़ा सुरक्षा गार्ड, निर्मल कुमार ईमित्र प्लस ऑपरेटर सहित उप सरपंच प्रतिनिधि जोधाराम तरक, पूर्व सरपंच गिरधारी लाल, पोलाराम बग, भगाराम भील तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संकल्प लिया। अभियान के तहत जल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर विविध जन जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने प्रभात फेरी निकालकर गांव में जल बचाओ एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जिसके बाद जल संरक्षण तथा जागरूकता रैली के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित किया गया। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) ने अपने संबोधन में कहा कि “जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जल संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के माध्यम से गांव-गांव तक जल बचाने एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचा रही है। उन्होंने लोगों से नशामुक्त समाज के निर्माण का आह्वान करते हुए शरीर और प्रकृति दोनों को पवित्र रखने की आवश्यकता पर बल दिया। ग्राम विकास अधिकारी ने गंगा दशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां गंगा का धरती पर अवतरण भागीरथ के अथक प्रयासों से संभव हुआ था और आज हमें भी जल संरक्षण के लिए उसी प्रकार के “भागीरथी प्रयास” करने होंगे। उन्होंने भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन को अत्यंत आवश्यक बताया, साथ ही कहा कि पूर्वजों द्वारा जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों को पूजनीय मानकर संरक्षित करने की परंपरा को आगे बढ़ाना आज की आवश्यकता है। विकास अधिकारी दिनेश सिंह भाटी ने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने बढ़ते जल संकट को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति से पानी की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि गंगा दशमी से प्रारंभ होकर विश्व पर्यावरण दिवस तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा, क्योंकि जल संरक्षण के बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से जनसहभागिता के साथ जल स्रोतों के जीर्णोद्धार, साफ-सफाई और जल संग्रहण को हमेशा स्वच्छ रखने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, ग्रामीणजन, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस दौरान अपनी स्थानीय समस्याओं को भी ब्लॉक अधिकारियों के समक्ष रखा, जिन पर अधिकारियों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया।1
- जैसलमेर में कचरा संग्रहण केंद्रों पर दूषित कचरा और प्लास्टिक खाने से हज़ारों की संख्या में गायों की मौत का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर पूर्व जिला प्रमुख अब्दुल्ला फकीर ने नगर परिषद और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए इस पूरी घटना के लिए नगर परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया। पूर्व जिला प्रमुख फकीर ने बताया कि मीडिया के माध्यम से यह मामला पूरे देश के संज्ञान में आ चुका है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी कचरा केंद्रों पर लगभग 300 से 400 गायें बेसहारा खड़ी हैं और दूषित कचरा खाने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह केवल ठेकेदार पर दोष मढ़कर अपनी ज़िम्मेदारी से भागना चाहता है। इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी दल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा गाय के नाम पर सिर्फ राजनीति की है, जबकि ज़मीनी स्तर पर गोवंश की हालत बेहद दयनीय है। अब्दुल्ला फकीर ने राजस्थान और केंद्र सरकार से मांग की है कि इस मामले में लिप्त दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पार्टी और उनके संगठनों की ओर से मांग रखी कि गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित किया जाए ताकि गोवंश को संवैधानिक संरक्षण और सम्मान मिल सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गायों के साथ हुई इस घटना के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।1
- राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित शिव शक्ति धाम पर निर्जला एकादशी मेले का आयोजन किया गया।1