करौली जिले में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है, जो 7 जून तक चलेगा। इस दौरान जिलेभर में पर्यावरण जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर उनकी गहन समीक्षा की जाएगी। इसी क्रम में, सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना ने 'हीट एक्शन डे' पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुड़गांव का दौरा किया और वहाँ की स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर शीतल पेयजल व्यवस्था, ओआरएस व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन प्रबंधन प्रावधान, नैदानिक तैयारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधा और एंबुलेंस सेवाओं की समीक्षा की। डॉ. मीना ने सीएचसी प्रभारी को जागरूकता सप्ताह के तहत पर्यावरण जागरूकता संबंधी गतिविधियों के आयोजन के लिए निर्देशित भी किया। डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ डॉ. ओमप्रकाश ने मंगलवार शाम 4:00 बजे जानकारी दी कि स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता परक गतिविधियों का आयोजन निरंतर जारी है, जिनकी नियमित रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जा रही है। इस दौरान कई कार्मिक भी मौजूद रहे।
करौली जिले में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है, जो 7 जून तक चलेगा। इस दौरान जिलेभर में पर्यावरण जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर उनकी गहन समीक्षा की जाएगी। इसी क्रम में, सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना ने 'हीट एक्शन डे' पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुड़गांव का दौरा किया और वहाँ की स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर शीतल पेयजल व्यवस्था, ओआरएस व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन प्रबंधन प्रावधान, नैदानिक तैयारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधा और एंबुलेंस सेवाओं की समीक्षा की। डॉ. मीना ने सीएचसी प्रभारी को जागरूकता सप्ताह के तहत पर्यावरण जागरूकता संबंधी गतिविधियों के आयोजन के लिए निर्देशित भी किया। डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ डॉ. ओमप्रकाश ने मंगलवार शाम 4:00 बजे जानकारी दी कि स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता परक गतिविधियों का आयोजन निरंतर जारी है, जिनकी नियमित रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जा रही है। इस दौरान कई कार्मिक भी मौजूद रहे।
- गंगापुर सिटी के नंगेश्रर बाबा की धूनी दीवान का बाग बाढ़ रायल कैमला नयागांव स्थित स्थान पर संत नागा बाबा श्री प्रमोद गिरी जी महाराज द्वारा धूनी तपस्या की जा रही है। आज इस धूनी तपस्या का 19वां दिन है।1
- हिंडौन सिटी में बयाना रोड चुंगी नाका के पास शराब का ठेका हटाने की मांग को लेकर मंगलवार सुबह 9:30 बजे से जाटव समाज की महिलाएं धरने पर बैठ गई हैं। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा उनकी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें शराब की दुकान के सामने प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को हिंडौन के एसडीएम और करौली के जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर यह ठेका हटाने की मांग की थी। उस समय भी प्रशासन को शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। महिलाओं का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठी हैं, लेकिन यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो उन्हें मजबूरन आंदोलन को उग्र करना पड़ेगा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जाटव समाज की महिलाएं मौजूद रहीं और इस दौरान आबकारी निरीक्षक त्रिलोक चंद अग्रवाल सहित कोतवाली और नई मंडी थाने का पुलिस जाप्ता भी तैनात रहा।2
- धौलपुर जिले के सरमथुरा में पूर्वी राजस्थान के निवासियों और युवाओं ने मारवाड़ी भाषा के विरोध में बड़ा आक्रोश व्यक्त किया है, जहाँ ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए ब्रज भाषा के अस्तित्व को बचाने और उसे उचित सम्मान दिलाने की गुहार लगाई। यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे पूर्वी राजस्थान के लगभग 8 जिलों के 16 लाख बच्चों के सामने अपनी भाषागत पहचान को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। बसेड़ी के पूर्व विधायक सुखराम कोली ने बताया कि ब्रज, ढूंढाढ़ी, मारवाड़ी, मेवाती और मालवी जैसी भाषाएँ हिंदी की ही बोलियाँ हैं। उन्होंने आगाह किया कि किसी एक भाषा को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानीय भाषाओं को अतिरिक्त विषय के रूप में शामिल किया जा सकता है। मनोज राजावत ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वी राजस्थान में लगभग 12 लाख विद्यार्थी और 4 लाख प्रतियोगी परीक्षार्थी हैं, जिनके लिए राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा को समझना मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं या प्रशासनिक कार्यों में राजस्थानी (मारवाड़ी) को विशेष महत्व दिया जाता है, तो पूर्वी राजस्थान के बच्चे शिक्षा और नौकरियों में पिछड़ जाएंगे। यह आंदोलन इस बात पर जोर देता है कि ब्रज भाषा को संवैधानिक दर्जा मिले ताकि पूर्वी राजस्थान के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में किसी भी तरह के पिछड़ेपन का सामना न करना पड़े, और क्षेत्र की भाषाई पहचान बनी रहे।1
- करौली जिले की नादौती तहसील स्थित धोलेटा ग्राम पंचायत में पिछले 12 महीनों से नरेगा के तहत कोई 'मिस्ट्रोल' नहीं चलाया गया है। इस स्थिति के कारण ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को कोई रोजगार नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण श्रीमान जी से निवेदन कर रहे हैं कि धोलेटा ग्राम पंचायत में नरेगा 'मिस्ट्रोल' चलवाने का आदेश प्रदान किया जाए।1
- धौलपुर के बाड़ी में नगरपालिका की सफाई व्यवस्था कार्यवाहकों के भरोसे चलने के कारण पूरी तरह बदहाल है, जहाँ करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। शहर के चौराहों, तिराहों और मुख्य रास्तों पर कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे स्वच्छता की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। स्थिति इतनी खराब है कि सफाईकर्मियों ने रेलवे फाटक के रास्ते को ही कचराघर बना दिया है। इस गंदगी और बदबू के कारण स्थानीय निवासियों का रहना दुश्वार हो गया है। इन कचरे के ढेरों पर गोवंश दिन-रात मुंह मार रहा है, जिससे वे 'काल का ग्रास' बन रहे हैं। नगरपालिका में दिन और रात के लिए सफाई के अलग-अलग ठेके होने के बावजूद, मुख्य मार्गों से कचरे के ढेर नहीं उठाए जाते। आरोप है कि कार्यवाहक सफाई निरीक्षक शहर की सफाई व्यवस्था देखने तक की ज़हमत नहीं उठाते। यह भी कहा गया है कि राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त इन कार्यवाहकों को जनता की परेशानियों की कोई चिंता नहीं है।1
- मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित बल्लू टी स्टॉल सफर के दौरान अचानक रुक जाने वाली गाड़ियों, पंचर होने या किसी अन्य परेशानी में फंसे राहगीरों और यात्रियों की मदद के लिए सबसे पहले आगे आता है। उनका मुख्य प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मुश्किल घड़ी में यात्रियों को अकेला महसूस न हो। बल्लू टी स्टॉल की पहचान एक कप गर्म चाय के साथ सहयोग, अपनापन और इंसानियत का हाथ बढ़ाना है। वे मानते हैं कि सड़क यात्रा के दौरान छोटी-बड़ी परेशानियाँ कभी भी आ सकती हैं, ऐसे में समय पर मिली मदद और हौसला सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सड़क यात्रा के दौरान सहायता और सहयोग को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बल्लू टी स्टॉल सभी यात्रियों को सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएँ देता है और मदद करने को सबसे बड़ी मानवता बताता है।1
- राजस्थान के करौली जिले में स्थित प्रसिद्ध पांचना बांध पर गुर्जर समाज के लोगों का धरना लगातार 17वें दिन भी जारी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इस मांग पर अडिग हैं कि पांचना बांध से नहरों और नदी में पानी नहीं खोला जाए। मंगलवार शाम 6:00 बजे कैप्टन हरिकेश गुर्जर ने स्पष्ट किया कि पांचना बांध का पानी पहले 39 गांवों को मिलना चाहिए, अन्यथा किसी भी कीमत पर पानी नहीं खुलने दिया जाएगा। धरना स्थल पर आगामी 4 जून को 'ठड्डा गीत' कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा, जिसकी जानकारी हिम्मत सिंह खेडला ने दी। इस कार्यक्रम में खेडाला खटाना, नंगला तुला, निसूरा, गाजीपुर और खानाका गांवों की 'ठड्डा पार्टियां' अपने गीतों की प्रस्तुति देंगी। प्रदर्शनकारी किसानों ने एक बार फिर दोहराया है कि जब तक 39 गांवों को पानी नहीं मिलता, वे पांचना बांध से पानी नहीं खुलने देंगे।1
- गंगापुर सिटी विधायक और उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीना जी ने किसानों को 5 जून को होने वाली किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को पीले चावल बांटकर यह न्योता पहुंचाया है।1
- बाड़ी नगर पालिका में नाले की सफाई के एक टेंडर को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके कारण यह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि जिस कार्य को 15 लाख रुपये में पूरा किया जा सकता था, उसके लिए लगभग 70 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसके साथ ही, टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्त जोड़ी गई है — 'पिछले पाँच साल में दो साल का नाले सफाई का अनुभव' — जो प्रतिस्पर्धा को सीमित करती है और बाड़ी नगर पालिका से जुड़े ठेकेदारों में केवल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास ही यह अनुभव है। गौरतलब है कि सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पिछले साल यही कार्य बी.एस.आर. रेट से 55 प्रतिशत कम दर पर पूरा किया था, जिसे तकनीकी अधिकारियों ने संतोषजनक मानते हुए फर्म का भुगतान भी किया था। मौजूदा टेंडर की शर्तों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इस बार दरें कम नहीं होने वाली हैं। यदि पिछली वाली फर्म को ही यह टेंडर मिलता है, तो यह देखना होगा कि वह पिछले साल की तुलना में कितनी कम दरों पर इसे प्राप्त करती है; पिछली दर और इस वर्ष की दर का अंतर, ऑडिट की भाषा में, वित्तीय अनियमितता कहलाएगा। इस मामले में नगरपालिका से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को इसके दूरगामी परिणामों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। फिलहाल उन्हें शायद यह बात समझ में न आए, लेकिन जैसे-जैसे निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जानबूझकर की गई गलती का अंजाम स्पष्ट होता चला जाएगा।1