धौलपुर जिले के सरमथुरा में पूर्वी राजस्थान के निवासियों और युवाओं ने मारवाड़ी भाषा के विरोध में बड़ा आक्रोश व्यक्त किया है, जहाँ ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए ब्रज भाषा के अस्तित्व को बचाने और उसे उचित सम्मान दिलाने की गुहार लगाई। यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे पूर्वी राजस्थान के लगभग 8 जिलों के 16 लाख बच्चों के सामने अपनी भाषागत पहचान को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। बसेड़ी के पूर्व विधायक सुखराम कोली ने बताया कि ब्रज, ढूंढाढ़ी, मारवाड़ी, मेवाती और मालवी जैसी भाषाएँ हिंदी की ही बोलियाँ हैं। उन्होंने आगाह किया कि किसी एक भाषा को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानीय भाषाओं को अतिरिक्त विषय के रूप में शामिल किया जा सकता है। मनोज राजावत ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वी राजस्थान में लगभग 12 लाख विद्यार्थी और 4 लाख प्रतियोगी परीक्षार्थी हैं, जिनके लिए राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा को समझना मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं या प्रशासनिक कार्यों में राजस्थानी (मारवाड़ी) को विशेष महत्व दिया जाता है, तो पूर्वी राजस्थान के बच्चे शिक्षा और नौकरियों में पिछड़ जाएंगे। यह आंदोलन इस बात पर जोर देता है कि ब्रज भाषा को संवैधानिक दर्जा मिले ताकि पूर्वी राजस्थान के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में किसी भी तरह के पिछड़ेपन का सामना न करना पड़े, और क्षेत्र की भाषाई पहचान बनी रहे।
धौलपुर जिले के सरमथुरा में पूर्वी राजस्थान के निवासियों और युवाओं ने मारवाड़ी भाषा के विरोध में बड़ा आक्रोश व्यक्त किया है, जहाँ ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए ब्रज भाषा के अस्तित्व को बचाने और उसे उचित सम्मान दिलाने की गुहार लगाई। यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे पूर्वी राजस्थान के लगभग 8 जिलों के 16 लाख बच्चों के सामने अपनी भाषागत पहचान को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। बसेड़ी के पूर्व विधायक सुखराम कोली ने बताया कि ब्रज, ढूंढाढ़ी, मारवाड़ी, मेवाती और मालवी जैसी भाषाएँ हिंदी की ही बोलियाँ हैं। उन्होंने आगाह किया कि किसी एक भाषा को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानीय भाषाओं को अतिरिक्त विषय के रूप में शामिल किया जा सकता है। मनोज राजावत ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वी राजस्थान में लगभग 12 लाख विद्यार्थी और 4 लाख प्रतियोगी परीक्षार्थी हैं, जिनके लिए राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा को समझना मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं या प्रशासनिक कार्यों में राजस्थानी (मारवाड़ी) को विशेष महत्व दिया जाता है, तो पूर्वी राजस्थान के बच्चे शिक्षा और नौकरियों में पिछड़ जाएंगे। यह आंदोलन इस बात पर जोर देता है कि ब्रज भाषा को संवैधानिक दर्जा मिले ताकि पूर्वी राजस्थान के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में किसी भी तरह के पिछड़ेपन का सामना न करना पड़े, और क्षेत्र की भाषाई पहचान बनी रहे।
- धौलपुर जिले के सरमथुरा में पूर्वी राजस्थान के निवासियों और युवाओं ने मारवाड़ी भाषा के विरोध में बड़ा आक्रोश व्यक्त किया है, जहाँ ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए ब्रज भाषा के अस्तित्व को बचाने और उसे उचित सम्मान दिलाने की गुहार लगाई। यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे पूर्वी राजस्थान के लगभग 8 जिलों के 16 लाख बच्चों के सामने अपनी भाषागत पहचान को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। बसेड़ी के पूर्व विधायक सुखराम कोली ने बताया कि ब्रज, ढूंढाढ़ी, मारवाड़ी, मेवाती और मालवी जैसी भाषाएँ हिंदी की ही बोलियाँ हैं। उन्होंने आगाह किया कि किसी एक भाषा को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानीय भाषाओं को अतिरिक्त विषय के रूप में शामिल किया जा सकता है। मनोज राजावत ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वी राजस्थान में लगभग 12 लाख विद्यार्थी और 4 लाख प्रतियोगी परीक्षार्थी हैं, जिनके लिए राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा को समझना मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं या प्रशासनिक कार्यों में राजस्थानी (मारवाड़ी) को विशेष महत्व दिया जाता है, तो पूर्वी राजस्थान के बच्चे शिक्षा और नौकरियों में पिछड़ जाएंगे। यह आंदोलन इस बात पर जोर देता है कि ब्रज भाषा को संवैधानिक दर्जा मिले ताकि पूर्वी राजस्थान के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में किसी भी तरह के पिछड़ेपन का सामना न करना पड़े, और क्षेत्र की भाषाई पहचान बनी रहे।1
- मासलपुर ब्लॉक स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नरायणा में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक मनमोहक दृश्य देखने को मिला है। यह विद्यालय अपने सुरम्य परिवेश और मोहक दृश्यों के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।1
- बाड़ी शहर में पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष राजकुमार भारद्वाज के नेतृत्व में वरिष्ठ कांग्रेसियों ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है। यह ज्ञापन तहसील कार्यालय में टीआरए सौरभ गर्ग को सौंपा गया। ज्ञापन में नगर पालिका द्वारा निकाली गई नाला सफाई कार्य की निविदा में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उसे तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार भारद्वाज ने बताया कि नाला साफ-सफाई का कार्य हर वर्ष कराया जाता है, जिसका अनुमानित मैनुअल खर्च लगभग 15 लाख रुपये आता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिताभ मीणा कुछ महीने पहले ही बसेड़ी रोड, सरमथुरा रोड, अलीगढ़ रोड, कहार गली और रेलवे स्टेशन स्थित नालों की सफाई करा चुके हैं, जिससे अब सफाई के लिए केवल एक-दो नाले ही शेष बचे हैं, जबकि यह निविदा 81 लाख रुपये की निकाली गई है। कांग्रेसियों ने इस 81 लाख रुपये के टेंडर को लेकर नगर पालिका के ईओ का घेराव किया और उन पर सवाल उठाए।4
- करौली जिले में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है, जो 7 जून तक चलेगा। इस दौरान जिलेभर में पर्यावरण जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर उनकी गहन समीक्षा की जाएगी। इसी क्रम में, सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना ने 'हीट एक्शन डे' पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुड़गांव का दौरा किया और वहाँ की स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर शीतल पेयजल व्यवस्था, ओआरएस व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन प्रबंधन प्रावधान, नैदानिक तैयारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधा और एंबुलेंस सेवाओं की समीक्षा की। डॉ. मीना ने सीएचसी प्रभारी को जागरूकता सप्ताह के तहत पर्यावरण जागरूकता संबंधी गतिविधियों के आयोजन के लिए निर्देशित भी किया। डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ डॉ. ओमप्रकाश ने मंगलवार शाम 4:00 बजे जानकारी दी कि स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता परक गतिविधियों का आयोजन निरंतर जारी है, जिनकी नियमित रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जा रही है। इस दौरान कई कार्मिक भी मौजूद रहे।1
- श्योपुर में नामांतरण संबंधी अपनी समस्या का समाधान न होने से परेशान एक व्यक्ति जन सुनवाई के दौरान दंडवत यात्रा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। व्यक्ति का कहना है कि वह वर्षों से कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसकी समस्या का कोई हल नहीं निकला। इसी वजह से, जब उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो उसने मजबूरी में न्याय की गुहार लगाने के लिए यह अनोखा तरीका अपनाया।1
- करौली जिले में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 7 जून तक चलने वाले एक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान जिलेभर में पर्यावरण जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी और उनकी समीक्षा भी की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. सतीश चंद मीना ने 'हीट एक्शन डे' के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुड़गांव का दौरा किया और स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर शीतल पेयजल व्यवस्था, ओआरएस व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, और आपातकालीन प्रबंधन प्रावधानों की पड़ताल की। डॉ. मीना ने नैदानिक तैयारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधा और एंबुलेंस सेवाओं की समीक्षा की, और प्रभारी को जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत पर्यावरण जागरूकता संबंधी गतिविधियां आयोजित करने का निर्देश दिया। उप सीएमएचओ (स्वास्थ्य) डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के तहत जागरूकता परक गतिविधियों का संचालन जारी है, जिनकी नियमित रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जा रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे पर्यावरण प्रदूषण के कारणों और कारकों पर विशेष ध्यान दें तथा जल, वायु और भूमि प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूक होकर सहयोग करें। डॉ. ओमप्रकाश ने इस बात पर जोर दिया कि लगातार बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण जलवायु परिवर्तन देखा जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सर्दी, गर्मी और बरसात के समय में बदलाव आ गया है। उन्होंने आमजन से जलवायु परिवर्तन को स्थिर करने के लिए पानी का अत्यधिक दोहन रोकने, वर्षा जल का संचय करने, वृक्षारोपण करने, सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने, ऊर्जा की बचत करने और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने सहित कचरा प्रबंधन में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।4
- राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन में एक झोलाछाप द्वारा किए गए गलत उपचार के कारण एक 5 वर्षीय मासूम बच्चे की जान चली गई है। इस गंभीर घटना ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है, और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर करौली जिले में ऐसे झोलाछापों पर लगाम कब लगेगी, जिनके गलत इलाज से मासूमों की जान जा रही है।1
- बाड़ी नगर पालिका में नाले की सफाई के एक टेंडर को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके कारण यह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि जिस कार्य को 15 लाख रुपये में पूरा किया जा सकता था, उसके लिए लगभग 70 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसके साथ ही, टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्त जोड़ी गई है — 'पिछले पाँच साल में दो साल का नाले सफाई का अनुभव' — जो प्रतिस्पर्धा को सीमित करती है और बाड़ी नगर पालिका से जुड़े ठेकेदारों में केवल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास ही यह अनुभव है। गौरतलब है कि सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पिछले साल यही कार्य बी.एस.आर. रेट से 55 प्रतिशत कम दर पर पूरा किया था, जिसे तकनीकी अधिकारियों ने संतोषजनक मानते हुए फर्म का भुगतान भी किया था। मौजूदा टेंडर की शर्तों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इस बार दरें कम नहीं होने वाली हैं। यदि पिछली वाली फर्म को ही यह टेंडर मिलता है, तो यह देखना होगा कि वह पिछले साल की तुलना में कितनी कम दरों पर इसे प्राप्त करती है; पिछली दर और इस वर्ष की दर का अंतर, ऑडिट की भाषा में, वित्तीय अनियमितता कहलाएगा। इस मामले में नगरपालिका से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को इसके दूरगामी परिणामों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। फिलहाल उन्हें शायद यह बात समझ में न आए, लेकिन जैसे-जैसे निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जानबूझकर की गई गलती का अंजाम स्पष्ट होता चला जाएगा।1