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मध्य प्रदेश के धुलकोट के सुदूर आदिवासी बाहुल्य गांवों से विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक भयावह तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें 'हर घर जल' और 'जल जीवन मिशन' जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं। सामने आई तस्वीरों के अनुसार, पानी के भीषण संकट ने ग्रामीणों को इस कदर बेबस कर दिया है कि महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे बिना किसी सुरक्षा के गहरे और जानलेवा गड्ढों तथा कुओं में उतरने पर विवश हैं। पहाड़ों की ढलानों पर पैर फिसलने के डर के बावजूद, गले की प्यास इस खतरे पर भारी पड़ रही है। दुखद बात यह है कि इतनी जोखिम उठाने के बाद जो पानी उनके हिस्से आता है, वह ज़हर से कम नहीं है—यह पानी इतना गंदा, मटमैला और बदबूदार है कि जिसे देखकर कोई जानवर भी मुंह फेर ले। सिस्टम की लापरवाही के कारण आदिवासी परिवार भीषण गर्मी में इसी दूषित पानी को पीने और खाना पकाने के लिए मजबूर हैं, जिससे गांवों में जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। एक स्थानीय ग्रामीण महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें योजनाओं के बारे में नहीं पता; उनके लिए तो रोज़ सुबह ज़िंदा बचकर पानी घर लाना ही सबसे बड़ी जंग है। यह भयावह स्थिति प्रशासन और स्थानीय सिस्टम की घोर संवेदनहीनता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि आख़िर ज़िम्मेदार अधिकारियों की नज़र इन हालातों पर कब पड़ेगी और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि भी आज इन दूरस्थ इलाकों की सुध लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं का गहरा अकाल पड़ा हुआ है। यह केवल पानी की किल्लत का मामला नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का खुला हनन है। शासन की यह पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि धुलकोट के इन दूरस्थ गांवों तक साफ पेयजल, बुनियादी सुविधाएं और पक्की सड़कें पहुंचाई जाएं। इस खबर को मज़बूती से उठाने की अपील की गई है, ताकि इन मासूमों की सिसकियाँ ज़िम्मेदारों तक पहुँच सकें और उन्हें उनका हक मिल सके।

20 hrs ago
user_Deepak Vishawakarma
Deepak Vishawakarma
Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
20 hrs ago

मध्य प्रदेश के धुलकोट के सुदूर आदिवासी बाहुल्य गांवों से विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक भयावह तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें 'हर घर जल' और 'जल जीवन मिशन' जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं। सामने आई तस्वीरों के अनुसार, पानी के भीषण संकट ने ग्रामीणों को इस कदर बेबस कर दिया है कि महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे बिना किसी सुरक्षा के गहरे और जानलेवा गड्ढों तथा कुओं में उतरने पर विवश हैं। पहाड़ों की ढलानों पर पैर फिसलने के डर के बावजूद, गले की प्यास इस खतरे पर भारी पड़ रही है। दुखद बात यह है कि इतनी जोखिम उठाने के बाद जो पानी उनके हिस्से आता है, वह ज़हर से कम नहीं है—यह पानी इतना गंदा, मटमैला और बदबूदार है कि जिसे देखकर कोई जानवर भी मुंह फेर ले। सिस्टम की लापरवाही के कारण आदिवासी परिवार भीषण गर्मी में इसी दूषित पानी को पीने और खाना पकाने के लिए मजबूर हैं, जिससे गांवों में जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। एक स्थानीय ग्रामीण महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें योजनाओं के बारे में नहीं पता; उनके लिए तो रोज़ सुबह ज़िंदा बचकर पानी घर लाना ही सबसे बड़ी जंग है। यह भयावह स्थिति प्रशासन और स्थानीय सिस्टम की घोर संवेदनहीनता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि आख़िर ज़िम्मेदार अधिकारियों की नज़र इन हालातों पर कब पड़ेगी और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि भी आज इन दूरस्थ इलाकों की सुध लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं का गहरा अकाल पड़ा हुआ है। यह केवल पानी की किल्लत का मामला नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का खुला हनन है। शासन की यह पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि धुलकोट के इन दूरस्थ गांवों तक साफ पेयजल, बुनियादी सुविधाएं और पक्की सड़कें पहुंचाई जाएं। इस खबर को मज़बूती से उठाने की अपील की गई है, ताकि इन मासूमों की सिसकियाँ ज़िम्मेदारों तक पहुँच सकें और उन्हें उनका हक मिल सके।

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  • जबलपुर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक वीडियो ने खलबली मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पार्षद महेश राजपूत को शराब पार्टी करते हुए दर्शाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ऐसी चर्चा है कि इस वीडियो को किसी राजनीतिक विरोधी ने नहीं, बल्कि महेश राजपूत के ही किसी बेहद करीबी व्यक्ति ने लीक किया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही शहर की राजनीति गरमा गई है, और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले महेश राजपूत फिलहाल इस मामले को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं।
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    जबलपुर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक वीडियो ने खलबली मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पार्षद महेश राजपूत को शराब पार्टी करते हुए दर्शाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ऐसी चर्चा है कि इस वीडियो को किसी राजनीतिक विरोधी ने नहीं, बल्कि महेश राजपूत के ही किसी बेहद करीबी व्यक्ति ने लीक किया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही शहर की राजनीति गरमा गई है, और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले महेश राजपूत फिलहाल इस मामले को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • यह संदेश बताता है कि संघर्ष ही वास्तविक जीवन है, और इसी भावना के साथ धर्म संगठन को सच्चाई के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया गया है। संदेश में दृढ़ता से कहा गया है कि व्यक्ति को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि ऊपरवाला सदैव उनके साथ खड़ा रहेगा और हर कदम पर उनका समर्थन करेगा। यह प्रेरणादायक संदेश बार-बार 'जय श्री राम' के उद्घोष के साथ भक्ति और अटूट विश्वास की भावना को पुष्ट करता है।
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    यह संदेश बताता है कि संघर्ष ही वास्तविक जीवन है, और इसी भावना के साथ धर्म संगठन को सच्चाई के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया गया है। संदेश में दृढ़ता से कहा गया है कि व्यक्ति को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि ऊपरवाला सदैव उनके साथ खड़ा रहेगा और हर कदम पर उनका समर्थन करेगा। यह प्रेरणादायक संदेश बार-बार 'जय श्री राम' के उद्घोष के साथ भक्ति और अटूट विश्वास की भावना को पुष्ट करता है।
    user_टेकेशवर गिरी गोस्वामी
    टेकेशवर गिरी गोस्वामी
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • जबलपुर की बकरा मंडी में एक मोबाइल चोर को रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस चोर ने चोरी करने के बाद कुल छह मोबाइल अपनी जेब में छिपा रखे थे। इस घटना के मद्देनजर, बकरा खरीदने जाने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी गई है।
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    जबलपुर की बकरा मंडी में एक मोबाइल चोर को रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस चोर ने चोरी करने के बाद कुल छह मोबाइल अपनी जेब में छिपा रखे थे। इस घटना के मद्देनजर, बकरा खरीदने जाने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी गई है।
    user_Rishi Rajak
    Rishi Rajak
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • जबलपुर के घमापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत चांदमारी इलाके से एक पुलिसकर्मी द्वारा अवैध वसूली का वीडियो सामने आया है, जो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि इस पुलिसकर्मी का नाम राकेश पांडे है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक युवक राकेश पांडे को पैसे दे रहा है। आरोप है कि यह पुलिसकर्मी अवैध कामों में लिप्त या ऐसे काम छोड़ चुके लोगों से रोजाना वसूली करने पहुँच जाता है। पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस खुद अपने क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है और उनका "हफ्ता" (साप्ताहिक वसूली) बंधा हुआ है। पैसे न देने पर थाने में बंद करने की धमकी भी दी जाती है।
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    जबलपुर के घमापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत चांदमारी इलाके से एक पुलिसकर्मी द्वारा अवैध वसूली का वीडियो सामने आया है, जो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि इस पुलिसकर्मी का नाम राकेश पांडे है।

वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक युवक राकेश पांडे को पैसे दे रहा है। आरोप है कि यह पुलिसकर्मी अवैध कामों में लिप्त या ऐसे काम छोड़ चुके लोगों से रोजाना वसूली करने पहुँच जाता है। पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस खुद अपने क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है और उनका "हफ्ता" (साप्ताहिक वसूली) बंधा हुआ है। पैसे न देने पर थाने में बंद करने की धमकी भी दी जाती है।
    user_Kartik Gupta
    Kartik Gupta
    Jabalpur, Madhya Pradesh•
    17 hrs ago
  • जबलपुर की एक 8 दिन की बच्ची, जिसके दिल में जन्मजात छेद था, उसे विशेष उपचार के लिए मुंबई भेजा गया था। जानकारी के अनुसार, यह बच्ची अब सुरक्षित है।
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    जबलपुर की एक 8 दिन की बच्ची, जिसके दिल में जन्मजात छेद था, उसे विशेष उपचार के लिए मुंबई भेजा गया था। जानकारी के अनुसार, यह बच्ची अब सुरक्षित है।
    user_Deepak Vishwakarma
    Deepak Vishwakarma
    Photographer जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • दमोह के जबेरा में महेंद्र लोधी के निधन से उनका परिवार गहरे दुख और आर्थिक संकट में घिर गया है। उनके पीछे उनकी 23 वर्षीय पत्नी सपना बाई लोधी और एक 8 महीने का मासूम बच्चा रह गए हैं, जो अब आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस कठिन समय में, इस टूटे हुए परिवार को सहारे की सख्त ज़रूरत है, और एक छोटा सा सहयोग भी उनके लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है। समाज से मानवता निभाने, इस संदेश को साझा करने और महेंद्र लोधी के मासूम बच्चे का सहारा बनने की भावुक अपील की गई है। इच्छुक व्यक्ति सपना बाई लोधी के नाम से भारतीय स्टेट बैंक, हटा शाखा में खाता संख्या 35856988428 (IFSC: SBIN0001332) पर संपर्क नंबर 93024 77558 के माध्यम से सहायता भेज सकते हैं।
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    दमोह के जबेरा में महेंद्र लोधी के निधन से उनका परिवार गहरे दुख और आर्थिक संकट में घिर गया है। उनके पीछे उनकी 23 वर्षीय पत्नी सपना बाई लोधी और एक 8 महीने का मासूम बच्चा रह गए हैं, जो अब आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस कठिन समय में, इस टूटे हुए परिवार को सहारे की सख्त ज़रूरत है, और एक छोटा सा सहयोग भी उनके लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है।

समाज से मानवता निभाने, इस संदेश को साझा करने और महेंद्र लोधी के मासूम बच्चे का सहारा बनने की भावुक अपील की गई है। इच्छुक व्यक्ति सपना बाई लोधी के नाम से भारतीय स्टेट बैंक, हटा शाखा में खाता संख्या 35856988428 (IFSC: SBIN0001332) पर संपर्क नंबर 93024 77558 के माध्यम से सहायता भेज सकते हैं।
    user_Pushpendra Lodhi
    Pushpendra Lodhi
    जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया। हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।
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    नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया।

हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • एक ओर जहाँ इंदौर स्वच्छता में अपनी पहचान बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्ड क्रमांक 75 (पालदा) के निवासी भीषण गर्मी में पानी की बूँद-बूँद को तरस रहे हैं। जलसंकट और प्रशासन की बेरुखी से परेशान होकर आज पालदा क्षेत्र के नागरिकों का सब्र टूट गया और वे सड़कों पर उतर आए, जहाँ उन्होंने उग्र प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया। रहवासियों का आरोप है कि वे लंबे समय से पानी की समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास जा रहे हैं, लेकिन उन्हें हमेशा केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद जब उन्हें घर चलाने के लिए पर्याप्त पानी नसीब नहीं हुआ, तो महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित सभी को मजबूरन खाली बाल्टी-बर्तन लेकर सड़क पर बैठना पड़ा। चक्काजाम के दौरान जनता का गुस्सा इंदौर के विधायकों, सांसद और नगर निगम प्रशासन पर साफ देखा गया, जहाँ उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी टैंकरों की सुचारू व्यवस्था नहीं की जा रही है, जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की सुध लेने नहीं आते, और 'नर्मदा मैया' का पानी हर घर तक पहुँचाने के दावे पालदा में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। आक्रोशित रहवासियों ने यह सवाल भी उठाया कि जब वे पूरा टैक्स भरते हैं, तो उन्हें पानी के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है और उनकी सुनवाई करने वाला कोई क्यों नहीं है।
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    एक ओर जहाँ इंदौर स्वच्छता में अपनी पहचान बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्ड क्रमांक 75 (पालदा) के निवासी भीषण गर्मी में पानी की बूँद-बूँद को तरस रहे हैं। जलसंकट और प्रशासन की बेरुखी से परेशान होकर आज पालदा क्षेत्र के नागरिकों का सब्र टूट गया और वे सड़कों पर उतर आए, जहाँ उन्होंने उग्र प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया।

रहवासियों का आरोप है कि वे लंबे समय से पानी की समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास जा रहे हैं, लेकिन उन्हें हमेशा केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद जब उन्हें घर चलाने के लिए पर्याप्त पानी नसीब नहीं हुआ, तो महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित सभी को मजबूरन खाली बाल्टी-बर्तन लेकर सड़क पर बैठना पड़ा। चक्काजाम के दौरान जनता का गुस्सा इंदौर के विधायकों, सांसद और नगर निगम प्रशासन पर साफ देखा गया, जहाँ उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी टैंकरों की सुचारू व्यवस्था नहीं की जा रही है, जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की सुध लेने नहीं आते, और 'नर्मदा मैया' का पानी हर घर तक पहुँचाने के दावे पालदा में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। आक्रोशित रहवासियों ने यह सवाल भी उठाया कि जब वे पूरा टैक्स भरते हैं, तो उन्हें पानी के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है और उनकी सुनवाई करने वाला कोई क्यों नहीं है।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
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