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जबलपुर की बकरा मंडी में एक मोबाइल चोर को रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस चोर ने चोरी करने के बाद कुल छह मोबाइल अपनी जेब में छिपा रखे थे। इस घटना के मद्देनजर, बकरा खरीदने जाने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

3 hrs ago
user_Rishi Rajak
Rishi Rajak
जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

जबलपुर की बकरा मंडी में एक मोबाइल चोर को रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस चोर ने चोरी करने के बाद कुल छह मोबाइल अपनी जेब में छिपा रखे थे। इस घटना के मद्देनजर, बकरा खरीदने जाने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • एक ओर जहाँ इंदौर स्वच्छता में अपनी पहचान बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्ड क्रमांक 75 (पालदा) के निवासी भीषण गर्मी में पानी की बूँद-बूँद को तरस रहे हैं। जलसंकट और प्रशासन की बेरुखी से परेशान होकर आज पालदा क्षेत्र के नागरिकों का सब्र टूट गया और वे सड़कों पर उतर आए, जहाँ उन्होंने उग्र प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया। रहवासियों का आरोप है कि वे लंबे समय से पानी की समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास जा रहे हैं, लेकिन उन्हें हमेशा केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद जब उन्हें घर चलाने के लिए पर्याप्त पानी नसीब नहीं हुआ, तो महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित सभी को मजबूरन खाली बाल्टी-बर्तन लेकर सड़क पर बैठना पड़ा। चक्काजाम के दौरान जनता का गुस्सा इंदौर के विधायकों, सांसद और नगर निगम प्रशासन पर साफ देखा गया, जहाँ उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी टैंकरों की सुचारू व्यवस्था नहीं की जा रही है, जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की सुध लेने नहीं आते, और 'नर्मदा मैया' का पानी हर घर तक पहुँचाने के दावे पालदा में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। आक्रोशित रहवासियों ने यह सवाल भी उठाया कि जब वे पूरा टैक्स भरते हैं, तो उन्हें पानी के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है और उनकी सुनवाई करने वाला कोई क्यों नहीं है।
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    एक ओर जहाँ इंदौर स्वच्छता में अपनी पहचान बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्ड क्रमांक 75 (पालदा) के निवासी भीषण गर्मी में पानी की बूँद-बूँद को तरस रहे हैं। जलसंकट और प्रशासन की बेरुखी से परेशान होकर आज पालदा क्षेत्र के नागरिकों का सब्र टूट गया और वे सड़कों पर उतर आए, जहाँ उन्होंने उग्र प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया।

रहवासियों का आरोप है कि वे लंबे समय से पानी की समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास जा रहे हैं, लेकिन उन्हें हमेशा केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद जब उन्हें घर चलाने के लिए पर्याप्त पानी नसीब नहीं हुआ, तो महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित सभी को मजबूरन खाली बाल्टी-बर्तन लेकर सड़क पर बैठना पड़ा। चक्काजाम के दौरान जनता का गुस्सा इंदौर के विधायकों, सांसद और नगर निगम प्रशासन पर साफ देखा गया, जहाँ उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी टैंकरों की सुचारू व्यवस्था नहीं की जा रही है, जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की सुध लेने नहीं आते, और 'नर्मदा मैया' का पानी हर घर तक पहुँचाने के दावे पालदा में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। आक्रोशित रहवासियों ने यह सवाल भी उठाया कि जब वे पूरा टैक्स भरते हैं, तो उन्हें पानी के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है और उनकी सुनवाई करने वाला कोई क्यों नहीं है।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें रामायण पढ़ रहे एक व्यक्ति और एक युवक के बीच तीखी बहस हो रही है। इस वायरल वीडियो में युवक, रामायण का पाठ कर रहे व्यक्ति को खुले तौर पर धमकी देता हुआ दिखाई दे रहा है। इस घटना को लेकर वीडियो सामने आने के बाद से ही लोग अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। यह वीडियो किस पूरे मामले से जुड़ा है, यह जानने के लिए लोग उत्सुक हैं।
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    सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें रामायण पढ़ रहे एक व्यक्ति और एक युवक के बीच तीखी बहस हो रही है। इस वायरल वीडियो में युवक, रामायण का पाठ कर रहे व्यक्ति को खुले तौर पर धमकी देता हुआ दिखाई दे रहा है। इस घटना को लेकर वीडियो सामने आने के बाद से ही लोग अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। यह वीडियो किस पूरे मामले से जुड़ा है, यह जानने के लिए लोग उत्सुक हैं।
    user_Pushpendra Lodhi
    Pushpendra Lodhi
    जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया। हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।
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    नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया।

हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • मंडला जिले के घुघरी थाना क्षेत्र के ग्राम घोरेघाट में कल देर रात नर्मदा बोरवेल के कर्मचारियों ने हैवानियत की सभी हदें पार कर दीं, जब एक मामूली विवाद के चलते उन्होंने मंडला से आधा दर्जन गाड़ियों में गुंडे बुलाकर एक परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर हमले में संतोष पड़वार के भाई अनिल पड़वार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार की महिलाओं और मासूम बच्चों समेत कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कथित तौर पर नशे में धुत बोरवेल कर्मचारियों ने एक किराना दुकान के संचालक संतोष से सामान के पैसे मांगने पर गाली-गलौज की। इसके बाद उन्होंने धारदार हथियारों से लैस बदमाशों को बुलाकर हमला कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में गहरा तनाव व्याप्त है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघरी में उपचार करा रहे घायलों के परिजनों ने साफ कर दिया है कि वे तब तक मृतक के शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे, जब तक कि सभी हमलावरों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता। पुलिस प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेकर एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की धरपकड़ के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।
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    मंडला जिले के घुघरी थाना क्षेत्र के ग्राम घोरेघाट में कल देर रात नर्मदा बोरवेल के कर्मचारियों ने हैवानियत की सभी हदें पार कर दीं, जब एक मामूली विवाद के चलते उन्होंने मंडला से आधा दर्जन गाड़ियों में गुंडे बुलाकर एक परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर हमले में संतोष पड़वार के भाई अनिल पड़वार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार की महिलाओं और मासूम बच्चों समेत कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कथित तौर पर नशे में धुत बोरवेल कर्मचारियों ने एक किराना दुकान के संचालक संतोष से सामान के पैसे मांगने पर गाली-गलौज की। इसके बाद उन्होंने धारदार हथियारों से लैस बदमाशों को बुलाकर हमला कर दिया।

इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में गहरा तनाव व्याप्त है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघरी में उपचार करा रहे घायलों के परिजनों ने साफ कर दिया है कि वे तब तक मृतक के शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे, जब तक कि सभी हमलावरों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता। पुलिस प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेकर एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की धरपकड़ के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।
    user_Prahlad Kachhwaha
    Prahlad Kachhwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मंडला स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में दो बाघों का सफलतापूर्वक स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया गया है। सफल इलाज के उपरांत इन दोनों बाघों को वापस जंगल में छोड़ दिया गया है।
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    मंडला स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में दो बाघों का सफलतापूर्वक स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया गया है। सफल इलाज के उपरांत इन दोनों बाघों को वापस जंगल में छोड़ दिया गया है।
    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी से आम जनता की कमर टूट गई है। ताजा वृद्धि में पेट्रोल लगभग ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर तक महंगा हो गया है, जो हाल की रिपोर्टों के अनुसार कीमतों में लगातार चौथी बार हुई बढ़ोतरी है। इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि ग्रामीण भारत के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल मिल ही नहीं रहा है। इस किल्लत के कारण किसान, व्यापारी, मजदूर और आम ग्रामीण 50-100 किलोमीटर दूर तक भटक रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस स्थिति से खेती-किसानी ठप हो गई है, व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और आवागमन भी गंभीर संकट में है। देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की इस गंभीर किल्लत ने ग्रामीण भारत को गहरे संकट में डाल दिया है, जबकि सरकार सिर्फ तमाशा देख रही है। आम जनता कब तक इस बढ़ते बोझ को उठाएगी, यह एक गंभीर प्रश्न बन गया है।
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    आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी से आम जनता की कमर टूट गई है। ताजा वृद्धि में पेट्रोल लगभग ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर तक महंगा हो गया है, जो हाल की रिपोर्टों के अनुसार कीमतों में लगातार चौथी बार हुई बढ़ोतरी है।

इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि ग्रामीण भारत के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल मिल ही नहीं रहा है। इस किल्लत के कारण किसान, व्यापारी, मजदूर और आम ग्रामीण 50-100 किलोमीटर दूर तक भटक रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस स्थिति से खेती-किसानी ठप हो गई है, व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और आवागमन भी गंभीर संकट में है।

देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की इस गंभीर किल्लत ने ग्रामीण भारत को गहरे संकट में डाल दिया है, जबकि सरकार सिर्फ तमाशा देख रही है। आम जनता कब तक इस बढ़ते बोझ को उठाएगी, यह एक गंभीर प्रश्न बन गया है।
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    Mandla, Madhya Pradesh•
    2 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के धुलकोट के सुदूर आदिवासी बाहुल्य गांवों से विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक भयावह तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें 'हर घर जल' और 'जल जीवन मिशन' जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं। सामने आई तस्वीरों के अनुसार, पानी के भीषण संकट ने ग्रामीणों को इस कदर बेबस कर दिया है कि महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे बिना किसी सुरक्षा के गहरे और जानलेवा गड्ढों तथा कुओं में उतरने पर विवश हैं। पहाड़ों की ढलानों पर पैर फिसलने के डर के बावजूद, गले की प्यास इस खतरे पर भारी पड़ रही है। दुखद बात यह है कि इतनी जोखिम उठाने के बाद जो पानी उनके हिस्से आता है, वह ज़हर से कम नहीं है—यह पानी इतना गंदा, मटमैला और बदबूदार है कि जिसे देखकर कोई जानवर भी मुंह फेर ले। सिस्टम की लापरवाही के कारण आदिवासी परिवार भीषण गर्मी में इसी दूषित पानी को पीने और खाना पकाने के लिए मजबूर हैं, जिससे गांवों में जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। एक स्थानीय ग्रामीण महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें योजनाओं के बारे में नहीं पता; उनके लिए तो रोज़ सुबह ज़िंदा बचकर पानी घर लाना ही सबसे बड़ी जंग है। यह भयावह स्थिति प्रशासन और स्थानीय सिस्टम की घोर संवेदनहीनता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि आख़िर ज़िम्मेदार अधिकारियों की नज़र इन हालातों पर कब पड़ेगी और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि भी आज इन दूरस्थ इलाकों की सुध लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं का गहरा अकाल पड़ा हुआ है। यह केवल पानी की किल्लत का मामला नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का खुला हनन है। शासन की यह पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि धुलकोट के इन दूरस्थ गांवों तक साफ पेयजल, बुनियादी सुविधाएं और पक्की सड़कें पहुंचाई जाएं। इस खबर को मज़बूती से उठाने की अपील की गई है, ताकि इन मासूमों की सिसकियाँ ज़िम्मेदारों तक पहुँच सकें और उन्हें उनका हक मिल सके।
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    मध्य प्रदेश के धुलकोट के सुदूर आदिवासी बाहुल्य गांवों से विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक भयावह तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें 'हर घर जल' और 'जल जीवन मिशन' जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं।

सामने आई तस्वीरों के अनुसार, पानी के भीषण संकट ने ग्रामीणों को इस कदर बेबस कर दिया है कि महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे बिना किसी सुरक्षा के गहरे और जानलेवा गड्ढों तथा कुओं में उतरने पर विवश हैं। पहाड़ों की ढलानों पर पैर फिसलने के डर के बावजूद, गले की प्यास इस खतरे पर भारी पड़ रही है। दुखद बात यह है कि इतनी जोखिम उठाने के बाद जो पानी उनके हिस्से आता है, वह ज़हर से कम नहीं है—यह पानी इतना गंदा, मटमैला और बदबूदार है कि जिसे देखकर कोई जानवर भी मुंह फेर ले। सिस्टम की लापरवाही के कारण आदिवासी परिवार भीषण गर्मी में इसी दूषित पानी को पीने और खाना पकाने के लिए मजबूर हैं, जिससे गांवों में जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। एक स्थानीय ग्रामीण महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें योजनाओं के बारे में नहीं पता; उनके लिए तो रोज़ सुबह ज़िंदा बचकर पानी घर लाना ही सबसे बड़ी जंग है।

यह भयावह स्थिति प्रशासन और स्थानीय सिस्टम की घोर संवेदनहीनता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि आख़िर ज़िम्मेदार अधिकारियों की नज़र इन हालातों पर कब पड़ेगी और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि भी आज इन दूरस्थ इलाकों की सुध लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं का गहरा अकाल पड़ा हुआ है।

यह केवल पानी की किल्लत का मामला नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का खुला हनन है। शासन की यह पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि धुलकोट के इन दूरस्थ गांवों तक साफ पेयजल, बुनियादी सुविधाएं और पक्की सड़कें पहुंचाई जाएं। इस खबर को मज़बूती से उठाने की अपील की गई है, ताकि इन मासूमों की सिसकियाँ ज़िम्मेदारों तक पहुँच सकें और उन्हें उनका हक मिल सके।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • गोटेगांव के समीप भड़री में श्रीमद् भागवत कथा की एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया। यह शोभा यात्रा गोटेगांव बाईपास से शुरू होकर गोटेगांव नगर देवता ठाकुर बाबा से भड़री चौराहा तक पहुंची। इस दौरान ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और डीजे के साथ 'जय श्री राम' के नारों से महाराज श्री का स्वागत सत्कार किया गया। यात्रा गांव के खेड़ापति प्रांगण पहुंची, जहाँ महाराज श्री ने पूजन अर्चन किया और फिर गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए कथा स्थल पर पहुंचे। कथा स्थल पर कन्या पूजन और ब्राह्मण पूजन के साथ महाराज श्री ने प्रथम दिन श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताया। अपने प्रवचन में महाराज श्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर गहरा विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी को अपने धर्म और कर्तव्य के मार्ग से कभी भटकना या कमजोर नहीं होना चाहिए, क्योंकि हिंदू सनातन धर्म एक राष्ट्रीय धर्म है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है। इसके साथ ही, महाराज श्री ने 'वीआईपी कल्चर' की कड़ी निंदा की, जिसे उन्होंने भ्रष्टाचार का कारण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सिस्टम को खत्म करना चाहिए, चाहे वह मंदिरों में हो या साधु-संतों से मिलने में। महाराज श्री के अनुसार, भगवान की नजरों में सभी भक्त बराबर हैं और उनकी चौखट पर कोई अमीर या गरीब नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि वीआईपी कल्चर से गरीब लोगों में गलत संदेश जाता है, क्योंकि वे पैसे देकर वीआईपी पंक्ति में शामिल होकर भगवान के दर्शन नहीं कर पाते, जबकि दूसरे धर्मों में वीआईपी कल्चर न होने के कारण आसानी से दर्शन हो जाते हैं, जिससे धर्मांतरण को बढ़ावा मिलता है। महाराज श्री ने भड़री गांव को भाग्यशाली बताया कि उसे परसोत्तम माह (पुरुषोत्तम मास) में भगवान की कथा सुनने का सौभाग्य मिला, जबकि यह कथा मूल रूप से 2027 में होनी थी। यह भगवान की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से संभव हुआ है। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान चौधरी यशवंत सिंह ने महाराज श्री का तिलक और फूलमाला से स्वागत किया। आयोजन समिति भड़री मनकवारा भाड़ी ने सभी से कथा में शामिल होने की अपील की है। प्रवचन प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक होंगे और यह आयोजन 30 मई तक चलेगा।
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    गोटेगांव के समीप भड़री में श्रीमद् भागवत कथा की एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया। यह शोभा यात्रा गोटेगांव बाईपास से शुरू होकर गोटेगांव नगर देवता ठाकुर बाबा से भड़री चौराहा तक पहुंची। इस दौरान ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और डीजे के साथ 'जय श्री राम' के नारों से महाराज श्री का स्वागत सत्कार किया गया। यात्रा गांव के खेड़ापति प्रांगण पहुंची, जहाँ महाराज श्री ने पूजन अर्चन किया और फिर गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए कथा स्थल पर पहुंचे। कथा स्थल पर कन्या पूजन और ब्राह्मण पूजन के साथ महाराज श्री ने प्रथम दिन श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताया।

अपने प्रवचन में महाराज श्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर गहरा विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी को अपने धर्म और कर्तव्य के मार्ग से कभी भटकना या कमजोर नहीं होना चाहिए, क्योंकि हिंदू सनातन धर्म एक राष्ट्रीय धर्म है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है। इसके साथ ही, महाराज श्री ने 'वीआईपी कल्चर' की कड़ी निंदा की, जिसे उन्होंने भ्रष्टाचार का कारण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सिस्टम को खत्म करना चाहिए, चाहे वह मंदिरों में हो या साधु-संतों से मिलने में। महाराज श्री के अनुसार, भगवान की नजरों में सभी भक्त बराबर हैं और उनकी चौखट पर कोई अमीर या गरीब नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि वीआईपी कल्चर से गरीब लोगों में गलत संदेश जाता है, क्योंकि वे पैसे देकर वीआईपी पंक्ति में शामिल होकर भगवान के दर्शन नहीं कर पाते, जबकि दूसरे धर्मों में वीआईपी कल्चर न होने के कारण आसानी से दर्शन हो जाते हैं, जिससे धर्मांतरण को बढ़ावा मिलता है।

महाराज श्री ने भड़री गांव को भाग्यशाली बताया कि उसे परसोत्तम माह (पुरुषोत्तम मास) में भगवान की कथा सुनने का सौभाग्य मिला, जबकि यह कथा मूल रूप से 2027 में होनी थी। यह भगवान की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से संभव हुआ है। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान चौधरी यशवंत सिंह ने महाराज श्री का तिलक और फूलमाला से स्वागत किया। आयोजन समिति भड़री मनकवारा भाड़ी ने सभी से कथा में शामिल होने की अपील की है। प्रवचन प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक होंगे और यह आयोजन 30 मई तक चलेगा।
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • मंडला जिले के मवई विकासखंड के अमवार गाँव में जल जीवन मिशन पर 97 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद, स्थानीय बैगा परिवार अपनी प्यास बुझाने के लिए नाले के पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। यह चौंकाने वाली स्थिति पीएचई मंत्री संपतिया उइके के गृह जिले मंडला से सामने आई है, जहाँ जल जीवन मिशन के तहत पूरे जिले में करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी लोगों को मूलभूत आवश्यकता के लिए ऐसी दयनीय हालत से जूझना पड़ रहा है।
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    मंडला जिले के मवई विकासखंड के अमवार गाँव में जल जीवन मिशन पर 97 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद, स्थानीय बैगा परिवार अपनी प्यास बुझाने के लिए नाले के पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

यह चौंकाने वाली स्थिति पीएचई मंत्री संपतिया उइके के गृह जिले मंडला से सामने आई है, जहाँ जल जीवन मिशन के तहत पूरे जिले में करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी लोगों को मूलभूत आवश्यकता के लिए ऐसी दयनीय हालत से जूझना पड़ रहा है।
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    Mandla, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
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