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जंतर-मंतर पर कौन-कौन जाता है, यह सवाल पूछते हुए दोस्तों से सब्सक्राइब करने की अपील की गई है। इस दौरान राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और खान सर का जिक्र किया गया है।
Salman Choudhary
जंतर-मंतर पर कौन-कौन जाता है, यह सवाल पूछते हुए दोस्तों से सब्सक्राइब करने की अपील की गई है। इस दौरान राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और खान सर का जिक्र किया गया है।
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- जंतर-मंतर पर कौन-कौन जाता है, यह सवाल पूछते हुए दोस्तों से सब्सक्राइब करने की अपील की गई है। इस दौरान राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और खान सर का जिक्र किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मंगलवार दोपहर 12 बजे मां शाकंभरी विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस गरिमामयी समारोह में कुल 22,315 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 19,069 स्नातक और 3,246 परास्नातक स्तर के छात्र-छात्राएं शामिल रहे। इसके अलावा, विभिन्न संकायों के छह विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक तथा कुल 99 मेधावियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। उपाधि और पदक पाकर विद्यार्थियों ने अपनी इस बड़ी उपलब्धि का उत्साहपूर्वक जश्न मनाया। स्वास्थ्य कारणों के चलते उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल समारोह स्थल पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकीं, जिसके कारण उन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डिग्री नहीं, बल्कि उनका चरित्र ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। राज्यपाल ने युवाओं से नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, एआई, स्टार्टअप और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इसके साथ ही, उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं से अपनी डिग्री और अंकपत्र को डीजी लॉकर से जोड़ने की अपील की ताकि दुनिया के किसी भी कोने से इन्हें आसानी से हासिल किया जा सके। राज्यपाल ने छात्रों को नशे से दूर रहने, पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने और मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेने का भी संदेश दिया।1
- सहारनपुर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने राष्ट्रीय आह्वान पर जिला मुख्यालय पर सैकड़ों किसानों के साथ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने और चुनाव के दौरान किए गए वादों से मुकरकर वादाखिलाफी करने का गंभीर आरोप लगाया है। धरने के दौरान किसान नेताओं ने गन्ना भुगतान में हो रही देरी, और खाद, बीज, डीजल व कृषि उपकरणों की लगातार बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन सब के बावजूद किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़कों के कारण किसानों को मंडी तक अपनी उपज पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और खेतों से ट्यूबवेल व कृषि उपकरणों की लगातार हो रही चोरियों को रोकने में पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। किसान नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार के रवैये को तानाशाहीपूर्ण बताया और कहा कि जनता तथा किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई और जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मंदिर-मस्जिद की राजनीति कर रही है। किसानों ने दोटूक चेतावनी दी कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में वे केवल उसी दल का समर्थन करेंगे, जो उनके हितों की रक्षा करेगा और उनकी समस्याओं का समाधान करेगा। जिला अध्यक्ष नरेश स्वामी और किसान नेता विनय कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को जल्द लागू करने, फसलों की कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी देने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।1
- एक रेलवे स्टेशन पर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आरोप है कि कुछ यात्रियों ने एक चिप्स बेचने वाले का ठेला लूट लिया और उसका सारा सामान तहस-नहस कर दिया। इस घिनौनी हरकत के कारण पीड़ित विक्रेता की पूरी कमाई और उसकी रोज़ी-रोटी का एकमात्र जरिया पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग इस कृत्य की कड़ी निंदा कर रहे हैं और पीड़ित विक्रेता के लिए मदद की मांग उठा रहे हैं। यह दर्दनाक वाकया एक बार फिर सार्वजनिक जगहों पर छोटे व्यापारियों की सुरक्षा की आवश्यकता पर गंभीर सवाल उठाता है।1
- भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चडूनी की गिरफ्तारी के विरोध में किसानों ने करनाल से दिल्ली के लिए अपना पैदल मार्च शुरू कर दिया है। किसान चडूनी की गिरफ्तारी को लेकर पैदल ही दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस प्रशासन द्वारा लाठीचार्ज किया गया है। अपने हक की आवाज उठा रहे इन छात्रों पर जिस तरह से पुलिस ने लाठियां चलाई हैं, उसे लेकर भारी आक्रोश है। प्रदर्शन कर रहे इन छात्रों की सिर्फ यही एक गूंज है कि वे सिर्फ पढ़ना चाहते हैं। इस कार्रवाई को लेकर सरकार के दोहरे रवैये पर तीखा हमला बोला गया है। एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है, तो दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर शांति से बैठे छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज करवा रही है। छात्रों पर हुए इस लाठीचार्ज के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अपने हक की बात करना भी कोई अपराध है।1