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पाताल भैरवी मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव, भक्तों का लगा तांता
Aishwary Shyam
पाताल भैरवी मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव, भक्तों का लगा तांता
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- sector 4ka Welfare society ki halat govt silent hai RDA silent hai ye hai kamal vihar sector 4ka Welfare society ki halat lakho rs ka govt se flat le kar gandagi me rahne per majboor hai or RDA silent hai govt silent hai1
- जनता से सीधा संवाद एवं समस्याओं का शत-प्रतिशत निराकरण करने चलेगा मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 जनता से सीधा संवाद एवं समस्याओं का शत-प्रतिशत निराकरण करने चलेगा मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी 2027 तक चलेगा अभियान मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेस में दिये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश की जनता से सीधा संवाद एवं जुड़ाव स्थापित करने और समस्याओं का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 आगामी 7 अगस्त से प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान आगामी 8 जनवरी 2027 तक संचालित होगा। इस अभियान को लेकर मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल ने 29 जुलाई को वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से सभी कलेक्टर्स एवं कमिश्नर्स की बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिये। इस बैठक में कलेक्टर श्री मृणाल मीना, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ एवं अपर कलेक्टर श्री जी एस धुर्वे उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि यह अभियान सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने की पहल है। अभियान का उद्देश्य केवल शिकायतों का निराकरण करना नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास एवं सहभागिता को मजबूत करते हुए सुशासन की अवधारणा को व्यवहार में उतारना है। प्रत्येक शुक्रवार जनता के बीच रहेगा प्रशासन अभियान के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार को प्रदेश भर में विशेष फील्ड भ्रमण किया जाएगा। इस दिन अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित नहीं होंगी तथा पूरा दिन केवल मैदानी भ्रमण, जनसंवाद एवं समस्याओं के निराकरण के लिए समर्पित रहेगा। भोपाल से लेकर संभाग एवं जिला स्तर तक सभी वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे। मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, मुख्य सचिव तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर नागरिकों से सीधा संवाद करेंगे और शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। जिला कलेक्टर प्रत्येक भ्रमण क्षेत्र का चयन एक सप्ताह पूर्व करेंगे तथा इसकी जानकारी जनप्रतिनिधियों को देंगे। अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार मीडिया के माध्यम से किया जाएगा, जिससे अधिकाधिक नागरिक अभियान से जुड़ सकें। भ्रमण से पहले होगी लंबित प्रकरणों की समीक्षा भ्रमण से पूर्व संबंधित क्षेत्र में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनसुनवाई तथा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा कर उनके शत-प्रतिशत निराकरण का प्रयास किया जाएगा। भ्रमण के दौरान प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का भी यथासंभव मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। भ्रमण से पूर्व एवं भ्रमण के बाद लंबित प्रकरणों की तुलना कर जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा तथा अभियान की नियमित समीक्षा मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव स्तर पर की जाएगी। जन संवाद और उद्योग संवाद पर रहेगा विशेष फोकस प्रत्येक शुक्रवार जिला कलेक्टर अपने जिले के अधिकारियों के साथ फील्ड भ्रमण करेंगे। इस दौरान जन संवाद एवं उद्योग संवाद आयोजित किए जाएंगे। उद्योग संवाद में वृहद, एमएसएमई तथा कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न जिलों का भ्रमण करेंगे। मुख्यमंत्री के भ्रमण वाले जिले में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। अभियान के प्रथम चरण में अगस्त माह के लिए बड़वानी, सीधी, श्योपुर तथा पांढुर्ना जिले निर्धारित किए गए हैं। प्रमुख विषयों पर होगी व्यापक समीक्षा अभियान के दौरान मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं जनसुनवाई की लंबित शिकायतों, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रकरणों, अविवादित नामांतरण, सीमांकन एवं बंटवारे, न्यायालयीन आदेशों के पालन, किसान फार्मर आईडी निर्माण, आयुष्मान कार्ड, समग्र आईडी की ई-केवाईसी, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आंगनवाड़ी सेवाओं, स्वास्थ्य संस्थानों, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों, खाद-बीज उपलब्धता, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं की व्यापक समीक्षा कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों का होगा निरीक्षण इसके साथ ही सड़कों, तालाबों, अमृत सरोवरों, बांधों, जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्मित संरचनाओं, शासकीय भवनों तथा अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निरीक्षण किया जाएगा। आईटीआई, मेडिकल कॉलेज, प्राथमिक सहकारी समितियों, तहसीलों, कृषि उपज मंडियों, मदिरा दुकानों, पुलिस थानों, लोक सेवा केन्द्रों, शासकीय देवस्थानों एवं औद्योगिक क्षेत्रों सहित विभिन्न शासकीय संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। खाद-बीज विक्रेताओं, गैस गोदामों, पेट्रोल पम्पों, विस्फोटक एवं पटाखा लाइसेंसधारियों, अधिकृत शस्त्र विक्रेताओं तथा निजी विद्यालयों का भी निरीक्षण किया जाएगा। कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी विशेष नजर अभियान के अंतर्गत क्षेत्र में कानून-व्यवस्था एवं अपराध नियंत्रण की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दिव्यांग पेंशन सहित विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंच रहा है अथवा नहीं, इसका भी आकलन किया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर चिन्हित प्रमुख समस्याओं, शिकायतों एवं चुनौतियों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। सादगी और मितव्ययिता होगी अभियान की विशेषता मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान सादगी एवं मितव्ययिता के सिद्धांतों पर संचालित होगा। अभियान के दौरान अनावश्यक साज-सज्जा एवं गैर-जरूरी व्यय से परहेज किया जाएगा। वाहनों की पूलिंग व्यवस्था अपनाई जाएगी तथा संवाद कार्यक्रम शासकीय संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए आयोजित किए जाएंगे।1
- डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में अनोखा विरोध प्रदर्शन, दस्तावेज सत्यापन हेतु पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर अपना अनोखा विरोध प्रकट किया रायपुर। नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को राजधानी रायपुर में एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर स्वागत किया और इसी अनूठे तरीके से भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वंचित अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी उम्मीदवार से नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ है। उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित किए बिना भर्ती आगे बढ़ाना हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में पात्रता निर्धारण, मेरिट सूची तैयार करने और अंतिम चयन के आधार को लेकर अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन उसके बाद भी अनेक पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं दिया गया और कई योग्य उम्मीदवारों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम मेरिट सूची और चयन की प्रक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किए जाने से भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी, तब तक अभ्यर्थियों के मन में संदेह बना रहेगा। "व्यवस्था से लड़ाई, अभ्यर्थियों से नहीं" विरोध प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन कराने पहुंचे उम्मीदवार उनके साथी हैं और वे उनके खिलाफ नहीं हैं। इसी भावना को व्यक्त करने के लिए उन्होंने चाय पिलाकर उनका स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस प्रतीकात्मक विरोध का उद्देश्य सरकार और संबंधित विभाग तक यह संदेश पहुंचाना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। ये हैं प्रमुख मांगें वंचित अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई मांगें रखीं। उनका कहना है कि विभाग को पूरी मेरिट सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक अभ्यर्थी के प्राप्तांक, पात्र एवं अपात्र सूची, दावा-आपत्ति के निराकरण का विस्तृत विवरण और अंतिम चयन का आधार भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। इसके अलावा सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करने और यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसका निष्पक्ष समाधान करने की भी मांग की गई। लगातार तेज हो रहा आंदोलन डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार नए-नए रूप में सामने आ रहा है। इससे पहले भी अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन, ज्ञापन और धरना जैसे कार्यक्रम आयोजित किए थे। अब चाय पिलाकर किए गए इस शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक विरोध ने भर्ती विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और सभी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने तथा विवाद का जल्द समाधान करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।4
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- उद्घाटन से पहले ही टूटी रायपुर-विशाखापट्टनम सड़क, नालियां धंसी भ्रष्टाचार का नया नमूना बना रायपुर विशाखापत्तनम रोड नवापारा राजिम।रायपुर से विशाखापट्टनम तक बन रही सड़क परियोजना एक बार फिर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की वजह से सुर्खियों में है। इस रोड का उद्घाटन तक नहीं हुआ, लेकिन जगह-जगह सड़क उखड़ गई है और बड़ी-बड़ी दरारें नजर आ रही हैं। सड़क के दोनों ओर बनी नालियां भी जगह-जगह धंसकर गिर चुकी हैं। यह वही बहुचर्चित परियोजना है जिसमें पहले भी गड़बड़ी को लेकर कई अधिकारी निलंबित हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों की लागत से बनी सड़क कागजों में ही मजबूत दिख रही है, जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। बारिश शुरू होते ही सड़क की पोल खुल गई और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणो आरोप है कि ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री लगाई गई है। कुछ लोगों ने कहा कि उद्घाटन से पहले ही टूट गई, तो 5 साल कैसे चलेगी? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासन इस मामले में संबंधित कंपनी ठेकेदार और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है। क्या गुणवत्ता सुधारने के लिए रोड को फिर से बनाया जाएगा या यह भी फाइलों में ही दफन हो जाएगी। जनता को अब ठोस जवाब और जवाबदेही चाहिए।1
- शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती की मांग को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थियों द्वारा जोरदार प्रदर्शन रायपुर। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती की मांग और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के कथित पालन नहीं किए जाने को लेकर राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज में बुधवार को नर्सिंग अभ्यर्थियों और यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में घेराव कर चिकित्सा शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया के तहत सबसे पहले लगभग 2,000 आवेदकों के आधार पर प्राविण्य (मेरिट) सूची जारी की गई। इसके बाद पात्र-अपात्र सूची जारी कर अभ्यर्थियों से दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई और अंतिम सूची तैयार की गई। लेकिन इसके बावजूद अंतिम मेरिट सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया। संगठन का आरोप है कि मेरिट सूची को सार्वजनिक नहीं करने से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं तथा अभ्यर्थियों में भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है। हाईकोर्ट के आदेश के पालन नहीं होने का आरोप इस पूरे मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियमित भर्ती से जुड़े मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया (आईएएस) को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अवमानना याचिका अभय किशोरसिंह, डॉ. अजय त्रिपाठी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना, आयुतोष मिश्रा और रूपेश साहू के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा 9 मार्च 2023 को दिए गए महत्वपूर्ण फैसले का तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी विधि सम्मत पालन नहीं किया गया। 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को हाईकोर्ट ने माना था असंवैधानिक मामला वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ मेडिकल एजुकेशन राजपत्रित सेवा भर्ती नियम, 2013 की अनुसूची-3 के नोट-2 तथा 8 दिसंबर 2021 की भर्ती विज्ञप्ति के क्लॉज-5 को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 9 मार्च 2023 को अपने फैसले में इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक पदों पर सीधी भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं है। सीजीपीएससी ने मांगा था संशोधित अधियाचन याचिका में उल्लेख किया गया है कि हाईकोर्ट के फैसले के कुछ दिनों बाद ही 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर न्यायालय के निर्णय से अवगत कराया था। आयोग ने विभाग से अनुरोध किया था कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप संशोधित अधियाचन भेजा जाए, ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। याचिकाकर्ता अभय किशोरसिंह का आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा। परिणामस्वरूप नियमित भर्ती प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रही। नियमित भर्ती के बजाय संविदा भर्ती का आरोप याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस संविदा भर्ती विज्ञापन को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी 15 मार्च 2023 को सीजीपीएससी द्वारा भेजे गए पत्र का उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग को हाईकोर्ट के निर्णय की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद आदेश के अनुपालन में कथित देरी को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अभ्यर्थियों में बढ़ता आक्रोश जेएनएम मेडिकल कॉलेज में हुए प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने नियमित भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने, अंतिम मेरिट सूची सार्वजनिक करने तथा हाईकोर्ट के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। न्यायालय के आगामी आदेश इस बहुचर्चित भर्ती विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।3
- एक जिद ने ले ली उसकी जान नदी पार करते हुए बहा किसान, कुछ घंटे बाद दूसरे गांव में मिला उसका शव राजिम/फिंगेश्वर :- गरियाबंद जिले में लगातार हो रही बारिश से नदी और नाले उफान पर है। उफनती नदियों और नालों के बीच बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आया है, जहां एक किसान की नदी के तेज बहाव में बहने से मौत हो गई है। ग्रामीणों के काफी तलाश के बाद उनका शव खुटेरी गांव के पास नदी से बाहर निकाला गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह करीब 7.30 बजे थनवार यादव सहसपुर नदी पार कर घुरसा रोड की ओर जा रहे थे। लगातार बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव सामान्य से काफी अधिक था। नदी पार करने के दौरान अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे तेज धारा की चपेट में आकर बह गए। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने तत्काल उनकी तलाश शुरू कर दी और आसपास के गांवों में भी सूचना दी गई। कुछ समय बाद खुटेरी गांव के पास ग्रामीणों ने नदी में एक शव बहते हुए देखा। गांव के युवाओं ने साहस का परिचय देते हुए पानी में उतरकर शव को बाहर निकाला। पहचान होने पर मृतक की शिनाख्त सहसपुर निवासी थनवार यादव के रूप में हुई। ग्रामीणों के अनुसार जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सूचना मिलते ही फिंगेश्वर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। *चेतावनी के बाद भी नहीं माना थनवार* इस दर्दनाक हादसे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है. उसने किसी की बात नहीं मानी। जैसे ही वह नाले के बीच पहुंचा, तेज धारा ने उसका संतुलन बिगाड़ दिया और देखते ही देखते वह पानी के बहाव में बह गया। इस हादसे के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ लोगों में नाराजगी भी है। चेतावनी के बावजूद थोड़ी सी लापरवाही एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए उजाड़ दी। *बारिश में जोखिम न लें – प्रशासन की अपील* लगातार बारिश के कारण जिले की अधिकांश नदियां और नाले उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बहाव वाले नदी-नालों को पार करने का प्रयास न करें तथा आवश्यक होने पर सुरक्षित मार्ग का ही उपयोग करें। यह हादसा बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही के गंभीर परिणामों की एक और दर्दनाक याद दिलाता है।2