डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में अनोखा विरोध प्रदर्शन, दस्तावेज सत्यापन हेतु पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर अपना अनोखा विरोध प्रकट किया रायपुर। नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को राजधानी रायपुर में एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर स्वागत किया और इसी अनूठे तरीके से भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वंचित अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी उम्मीदवार से नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ है। उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित किए बिना भर्ती आगे बढ़ाना हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में पात्रता निर्धारण, मेरिट सूची तैयार करने और अंतिम चयन के आधार को लेकर अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन उसके बाद भी अनेक पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं दिया गया और कई योग्य उम्मीदवारों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम मेरिट सूची और चयन की प्रक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किए जाने से भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी, तब तक अभ्यर्थियों के मन में संदेह बना रहेगा। "व्यवस्था से लड़ाई, अभ्यर्थियों से नहीं" विरोध प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन कराने पहुंचे उम्मीदवार उनके साथी हैं और वे उनके खिलाफ नहीं हैं। इसी भावना को व्यक्त करने के लिए उन्होंने चाय पिलाकर उनका स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस प्रतीकात्मक विरोध का उद्देश्य सरकार और संबंधित विभाग तक यह संदेश पहुंचाना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। ये हैं प्रमुख मांगें वंचित अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई मांगें रखीं। उनका कहना है कि विभाग को पूरी मेरिट सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक अभ्यर्थी के प्राप्तांक, पात्र एवं अपात्र सूची, दावा-आपत्ति के निराकरण का विस्तृत विवरण और अंतिम चयन का आधार भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। इसके अलावा सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करने और यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसका निष्पक्ष समाधान करने की भी मांग की गई। लगातार तेज हो रहा आंदोलन डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार नए-नए रूप में सामने आ रहा है। इससे पहले भी अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन, ज्ञापन और धरना जैसे कार्यक्रम आयोजित किए थे। अब चाय पिलाकर किए गए इस शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक विरोध ने भर्ती विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और सभी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने तथा विवाद का जल्द समाधान करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में अनोखा विरोध प्रदर्शन, दस्तावेज सत्यापन हेतु पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर अपना अनोखा विरोध प्रकट किया रायपुर। नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को राजधानी रायपुर में एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर स्वागत किया और इसी अनूठे तरीके से भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वंचित अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी उम्मीदवार से नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ है। उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित किए बिना भर्ती आगे बढ़ाना हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। भर्ती प्रक्रिया
पर उठाए गंभीर सवाल प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में पात्रता निर्धारण, मेरिट सूची तैयार करने और अंतिम चयन के आधार को लेकर अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन उसके बाद भी अनेक पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं दिया गया और कई योग्य उम्मीदवारों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम मेरिट सूची और चयन की प्रक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किए जाने से भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी, तब तक अभ्यर्थियों के मन में संदेह बना रहेगा। "व्यवस्था से लड़ाई, अभ्यर्थियों से नहीं" विरोध प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन कराने पहुंचे
उम्मीदवार उनके साथी हैं और वे उनके खिलाफ नहीं हैं। इसी भावना को व्यक्त करने के लिए उन्होंने चाय पिलाकर उनका स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस प्रतीकात्मक विरोध का उद्देश्य सरकार और संबंधित विभाग तक यह संदेश पहुंचाना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। ये हैं प्रमुख मांगें वंचित अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई मांगें रखीं। उनका कहना है कि विभाग को पूरी मेरिट सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक अभ्यर्थी के प्राप्तांक, पात्र एवं अपात्र सूची, दावा-आपत्ति के निराकरण का विस्तृत विवरण और अंतिम चयन का आधार भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। इसके अलावा सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करने और यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार
की त्रुटि पाई जाती है तो उसका निष्पक्ष समाधान करने की भी मांग की गई। लगातार तेज हो रहा आंदोलन डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार नए-नए रूप में सामने आ रहा है। इससे पहले भी अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन, ज्ञापन और धरना जैसे कार्यक्रम आयोजित किए थे। अब चाय पिलाकर किए गए इस शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक विरोध ने भर्ती विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और सभी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने तथा विवाद का जल्द समाधान करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
- डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में अनोखा विरोध प्रदर्शन, दस्तावेज सत्यापन हेतु पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर अपना अनोखा विरोध प्रकट किया रायपुर। नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को राजधानी रायपुर में एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों का वंचित अभ्यर्थियों ने चाय पिलाकर स्वागत किया और इसी अनूठे तरीके से भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वंचित अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी उम्मीदवार से नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ है। उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित किए बिना भर्ती आगे बढ़ाना हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डेमोंस्ट्रेटर भर्ती प्रक्रिया में पात्रता निर्धारण, मेरिट सूची तैयार करने और अंतिम चयन के आधार को लेकर अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन उसके बाद भी अनेक पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं दिया गया और कई योग्य उम्मीदवारों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम मेरिट सूची और चयन की प्रक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किए जाने से भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी, तब तक अभ्यर्थियों के मन में संदेह बना रहेगा। "व्यवस्था से लड़ाई, अभ्यर्थियों से नहीं" विरोध प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन कराने पहुंचे उम्मीदवार उनके साथी हैं और वे उनके खिलाफ नहीं हैं। इसी भावना को व्यक्त करने के लिए उन्होंने चाय पिलाकर उनका स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस प्रतीकात्मक विरोध का उद्देश्य सरकार और संबंधित विभाग तक यह संदेश पहुंचाना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। ये हैं प्रमुख मांगें वंचित अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई मांगें रखीं। उनका कहना है कि विभाग को पूरी मेरिट सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक अभ्यर्थी के प्राप्तांक, पात्र एवं अपात्र सूची, दावा-आपत्ति के निराकरण का विस्तृत विवरण और अंतिम चयन का आधार भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। इसके अलावा सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करने और यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसका निष्पक्ष समाधान करने की भी मांग की गई। लगातार तेज हो रहा आंदोलन डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार नए-नए रूप में सामने आ रहा है। इससे पहले भी अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन, ज्ञापन और धरना जैसे कार्यक्रम आयोजित किए थे। अब चाय पिलाकर किए गए इस शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक विरोध ने भर्ती विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और सभी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने तथा विवाद का जल्द समाधान करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।4
- ब्रेकिंग | सिमगा शासकीय आदर्श इग्नाइट स्कूल इंग्लिश मीडियम प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर पालकों ने बीईओ को ज्ञापन सौंपा। एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने पर शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी। पालकों का कहना है कि शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी। ब्रेकिंग | सिमगा शासकीय आदर्श इग्नाइट स्कूल इंग्लिश मीडियम प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर पालकों ने बीईओ को ज्ञापन सौंपा। एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने पर शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी। पालकों का कहना है कि शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।1
- आकाश से गिरता हुआ संकल्प गगन की गहराइयों से छिटककर धरती की ओर दौड़ती बारिश की ये बूंदें महज़ पानी के कतरे नहीं हैं। ये एक-एक बूंद उस अटूट संघर्ष की कहानी कह रही है, जो हर जीवित चीज़ इस सृष्टि में कर रही है। तपते हुए पत्थरों पर गिरकर भाप बन जाना, तूफानों की हवाओं से टकराना और फिर भी ज़मीन को भिगोने की अपनी ज़िद पर अड़े रहना—क्या यह युद्ध से कम है? "हम गिरे हैं, मिटे हैं, फिर भी बहे हैं। हमारी हर एक छाप यह गवाही देती है—हम लड़ रहे हैं।" जीवन की जद्दोजहद का प्रतीक अंधेरे से जंग: घटाओं के घने अंधेरे को चीरकर बाहर आना बूंदों का पहला संघर्ष है। अस्तित्व की लड़ाई: मिट्टी में मिलकर विलीन हो जाना उनका अंत नहीं, बल्कि एक नए बीज को जीवन देने का संकल्प है। अविराम गति: वे रुकती नहीं, थकती नहीं। हवाएँ उन्हें मोड़ने की कोशिश करती हैं, पर उनका लक्ष्य ज़मीन ही रहता है। हौसले की एक गूँज जब ये बूंदें आपकी खिड़की के शीशों से टकराती हैं या सूखी पत्तियों पर गिरकर संगीत पैदा करती हैं, तो ध्यान से सुनिए... वह आवाज़ निराशा की नहीं, बल्कि जी-जान से लड़े जा रहे एक युद्ध का नाद है। यह बारिश हमें याद दिलाती है कि गिरना हारना नहीं है। असली जीत इस बात में है कि गिरकर भी हम किसी बंज़र को हरा करने का हौसला रखते हैं या नहीं। हाँ, बारिश की हर एक बूंद मुस्कुराते हुए पुकार रही है—"हम लड़ रहे हैं, और हम रुकेंगे नहीं।"1
- सिकासेर से 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से राजिम त्रिवेणी संगम में बढ़ा जलस्तर, कुलेश्वर नाथ मंदिर परिसर हुआ जलमग्न गोबरा नवापारा। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और सिकासेर जलाशय से पानी छोड़े जाने के कारण राजिम त्रिवेणी संगम में महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने आज फिर जलाशय से 15 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक सिकासेर से कुल 44 हजार से अधिक क्यूसेक पानी धीरे-धीरे छोड़ा जा चुका है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राजिम एसडीएम विशाल महाराणा, राजिम थाना प्रभारी अमृत साहू सहित प्रशासनिक दल ने त्रिवेणी संगम पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। वहीं धमतरी पुलिस प्रशासन की टीम भी बेलाही स्थित लोमश ऋषि आश्रम क्षेत्र में तैनात रही। अधिकारियों ने नदी किनारे बसे गांवों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। कल से पवित्र श्रावण मास शुरू हो रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने राजिम में चल रही तैयारियों का भी निरीक्षण किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और बैरिकेडिंग के इंतजाम जांचे गए। लेकिन सुप्रसिद्ध श्री कुलेश्वर नाथ मंदिर के चारों ओर पानी भर जाने से श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी हो रही है। मंदिर परिसर पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। नगर के तटीय इलाकों में अलर्ट नगर के तटीय क्षेत्रों में जलभराव को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि और जलभराव हुआ तो बड़ी दिक्कत हो सकती है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गोबरा नवापारा नगर के वार्ड 15, 16, 17, 18 और 19 में अलर्ट जारी कर दिया है। इन वार्डों में निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है।जल संसाधन विभाग के ईई एस के बर्मन ने बताया कि बारिश की स्थिति को देखते हुए बांध से नियंत्रित ढंग से पानी छोड़ा जा रहा है ताकि बांध की सुरक्षा बनी रहे। इधर लगातार बारिश और जलभराव से क्षेत्र के खेत-खलिहान पूरी तरह डूब गए हैं। धान की फसल पानी में डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई गांवों में निचले इलाकों में भी पानी भर गया है। प्रशासन ने नदी-नालों के तटीय इलाकों में न जाने, बच्चों और मवेशियों को नदी किनारे न ले जाने की अपील की है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में भी भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके कारण प्रशासन ने स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की बात कही है।1
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- डेमोंस्ट्रेटर वेरिफिकेशन के बीच अनोखा विरोध: वंचित अभ्यर्थियों ने सत्यापन कराने पहुंचे अभ्यर्थियों को पिलाई चाय डेमोंस्ट्रेटर वेरिफिकेशन के बीच अनोखा विरोध: वंचित अभ्यर्थियों ने सत्यापन कराने पहुंचे अभ्यर्थियों को पिलाई चाय रायपुर। नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज दस्तावेज सत्यापन के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों के बीच वंचित अभ्यर्थियों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वेरिफिकेशन के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों को चाय पिलाकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। वंचित अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पात्रता, मेरिट सूची और चयन के आधार को लेकर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं। उनका आरोप है कि दावा-आपत्ति के बाद भी सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं मिला और कई अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका विरोध किसी अभ्यर्थी के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग को लेकर है। चाय पिलाकर विरोध जताने का उद्देश्य यह संदेश देना था कि जिन अभ्यर्थियों का सत्यापन हो रहा है, उनके प्रति व्यक्तिगत विरोध नहीं है, बल्कि व्यवस्था से सवाल है। वंचित अभ्यर्थियों ने मांग की कि पूरी मेरिट सूची, प्राप्तांक, पात्र-अपात्र सूची, दावा-आपत्ति के निराकरण और चयन का आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की मांग भी उठाई गई। डेमोंस्ट्रेटर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन अब लगातार नए तरीके से सामने आ रहा है, जिससे शासन-प्रशासन पर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।3
- शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती की मांग को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थियों द्वारा जोरदार प्रदर्शन रायपुर। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती की मांग और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के कथित पालन नहीं किए जाने को लेकर राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज में बुधवार को नर्सिंग अभ्यर्थियों और यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में घेराव कर चिकित्सा शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया के तहत सबसे पहले लगभग 2,000 आवेदकों के आधार पर प्राविण्य (मेरिट) सूची जारी की गई। इसके बाद पात्र-अपात्र सूची जारी कर अभ्यर्थियों से दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई और अंतिम सूची तैयार की गई। लेकिन इसके बावजूद अंतिम मेरिट सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया। संगठन का आरोप है कि मेरिट सूची को सार्वजनिक नहीं करने से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं तथा अभ्यर्थियों में भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है। हाईकोर्ट के आदेश के पालन नहीं होने का आरोप इस पूरे मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक के पदों पर नियमित भर्ती से जुड़े मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया (आईएएस) को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अवमानना याचिका अभय किशोरसिंह, डॉ. अजय त्रिपाठी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना, आयुतोष मिश्रा और रूपेश साहू के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा 9 मार्च 2023 को दिए गए महत्वपूर्ण फैसले का तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी विधि सम्मत पालन नहीं किया गया। 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को हाईकोर्ट ने माना था असंवैधानिक मामला वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ मेडिकल एजुकेशन राजपत्रित सेवा भर्ती नियम, 2013 की अनुसूची-3 के नोट-2 तथा 8 दिसंबर 2021 की भर्ती विज्ञप्ति के क्लॉज-5 को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 9 मार्च 2023 को अपने फैसले में इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक पदों पर सीधी भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं है। सीजीपीएससी ने मांगा था संशोधित अधियाचन याचिका में उल्लेख किया गया है कि हाईकोर्ट के फैसले के कुछ दिनों बाद ही 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर न्यायालय के निर्णय से अवगत कराया था। आयोग ने विभाग से अनुरोध किया था कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप संशोधित अधियाचन भेजा जाए, ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। याचिकाकर्ता अभय किशोरसिंह का आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा। परिणामस्वरूप नियमित भर्ती प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रही। नियमित भर्ती के बजाय संविदा भर्ती का आरोप याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस संविदा भर्ती विज्ञापन को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी 15 मार्च 2023 को सीजीपीएससी द्वारा भेजे गए पत्र का उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग को हाईकोर्ट के निर्णय की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद आदेश के अनुपालन में कथित देरी को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अभ्यर्थियों में बढ़ता आक्रोश जेएनएम मेडिकल कॉलेज में हुए प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने नियमित भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने, अंतिम मेरिट सूची सार्वजनिक करने तथा हाईकोर्ट के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। न्यायालय के आगामी आदेश इस बहुचर्चित भर्ती विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।3
- AI और 1000 CCTV फुटेज से बेनकाब हुआ अंतरराज्यीय डकैत गिरोह, 12 लाख की ज्वेलरी लूट का खुलासा AI और 1000 CCTV फुटेज से बेनकाब हुआ अंतरराज्यीय डकैत गिरोह, 12 लाख की ज्वेलरी लूट का खुलासा भाटापारा। बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने आधुनिक तकनीक और साइबर इंटेलिजेंस की मदद से 16 जुलाई को हुई 12 लाख रुपये की ज्वेलरी लूट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चार कुख्यात अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से हथियार, वाहन, चांदी के जेवर, मोबाइल फोन और नकदी सहित करीब 26 लाख रुपये मूल्य की सामग्री बरामद की है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार गिरोह तीन राज्यों में लूट, डकैती, चोरी, हत्या और आर्म्स एक्ट समेत 100 से अधिक संगीन अपराधों में शामिल रहा है। पुलिस के अनुसार, 16 जुलाई 2026 की सुबह ग्राम रोहरा निवासी एवं दीपक ज्वेलर्स के संचालक बलराम सोनी अपनी एक्टिवा से तरेंगा से रोहरा जा रहे थे। रोहरा हाई स्कूल के समीप दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें घेरकर हमला किया और उनके पास मौजूद 13 किलोग्राम चांदी तथा 70 ग्राम सोना, जिसकी कीमत लगभग 12 लाख रुपये बताई गई है, लूटकर फरार हो गए थे। मामले में थाना भाटापारा ग्रामीण में अपराध दर्ज कर विशेष जांच शुरू की गई। नवागत पुलिस अधीक्षक गौरव राय (आईपीएस) के निर्देशन में गठित विशेष जांच दल ने एक हजार से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया। पुलिस के मुताबिक, वीडियो विश्लेषण के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा एनालिटिक्स और साइबर इंटेलिजेंस का उपयोग कर आरोपियों की गतिविधियों का रूट मैप तैयार किया गया, जिसके आधार पर विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में बबलू पाण्डेय उर्फ शत्रुघ्न (चित्रकूट, उत्तर प्रदेश), जयदीप गुप्ता (रीवा, मध्य प्रदेश), जिया उल हक (गोंडा, उत्तर प्रदेश) और गंगासागर पाण्डेय (चित्रकूट, उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। प्रारंभिक पूछताछ में इनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 100 से अधिक गंभीर अपराध दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का यह भी दावा है कि यही गिरोह वर्ष 2022 और 2024 में भाटापारा क्षेत्र के दो ज्वेलर्स से हुई लूट की घटनाओं में भी शामिल रहा है। आरोपियों के कब्जे से एक पिस्तौल, एक देशी कट्टा, 14 जिंदा कारतूस, एक लोहे की तलवार, एक महिंद्रा स्कॉर्पियो, दो मोटरसाइकिलें, लगभग एक लाख रुपये मूल्य के चांदी के जेवर, पांच मोबाइल फोन, नकद राशि तथा अन्य सामान जब्त किया गया है। पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री का कुल मूल्य लगभग 26 लाख रुपये है। पुलिस ने व्यापारियों और आम नागरिकों से अपने प्रतिष्ठानों एवं घरों में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने, किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि जनसहयोग और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से संगठित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।1