मैहर कोतवाली पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कटनी की ओर से एक स्कॉर्पियो वाहन में भारी मात्रा में अवैध शराब लाई जा रही है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने बेरमा नदी के पास घेराबंदी की और देर रात संदिग्ध स्कॉर्पियो को रोककर उसकी तलाशी ली। वाहन से 10 कार्टन में रखी कुल 90 लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 67 हजार 500 रुपये बताई गई है। इसके साथ ही, लगभग 16 लाख रुपये मूल्य की वह स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली गई जिसका उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंचन उर्फ कल्पना चौरसिया, गोलू उर्फ वीर सिंह सेंगर और सचिन पटेल के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान, तीनों आरोपियों ने अवैध बिक्री के इरादे से शराब लाने की बात कबूल की। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कंचन का पति आशीष चौरसिया लंबे समय से शराब तस्करी के एक मामले में फरार चल रहा है, और उसकी गैरमौजूदगी में कंचन ही अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, इन तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी अवैध शराब से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। मैहर कोतवाली पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मैहर पुलिस का कहना है कि अवैध शराब तस्करी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ उनकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
मैहर कोतवाली पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कटनी की ओर से एक स्कॉर्पियो वाहन में भारी मात्रा में अवैध शराब लाई जा रही है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने बेरमा नदी के पास घेराबंदी की और देर रात संदिग्ध स्कॉर्पियो को रोककर उसकी तलाशी ली। वाहन से 10 कार्टन में रखी कुल 90 लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 67 हजार 500 रुपये बताई गई है। इसके साथ ही, लगभग 16 लाख रुपये मूल्य की वह स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली गई जिसका उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंचन उर्फ कल्पना चौरसिया, गोलू उर्फ वीर सिंह सेंगर और सचिन पटेल के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान, तीनों आरोपियों ने अवैध बिक्री के इरादे से शराब लाने की बात कबूल की। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कंचन का पति आशीष चौरसिया लंबे समय से शराब तस्करी के एक मामले में फरार चल रहा है, और उसकी गैरमौजूदगी में कंचन ही अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, इन तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी अवैध शराब से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। मैहर कोतवाली पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मैहर पुलिस का कहना है कि अवैध शराब तस्करी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ उनकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
- मैहर कोतवाली पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कटनी की ओर से एक स्कॉर्पियो वाहन में भारी मात्रा में अवैध शराब लाई जा रही है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने बेरमा नदी के पास घेराबंदी की और देर रात संदिग्ध स्कॉर्पियो को रोककर उसकी तलाशी ली। वाहन से 10 कार्टन में रखी कुल 90 लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 67 हजार 500 रुपये बताई गई है। इसके साथ ही, लगभग 16 लाख रुपये मूल्य की वह स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली गई जिसका उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंचन उर्फ कल्पना चौरसिया, गोलू उर्फ वीर सिंह सेंगर और सचिन पटेल के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान, तीनों आरोपियों ने अवैध बिक्री के इरादे से शराब लाने की बात कबूल की। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कंचन का पति आशीष चौरसिया लंबे समय से शराब तस्करी के एक मामले में फरार चल रहा है, और उसकी गैरमौजूदगी में कंचन ही अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, इन तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी अवैध शराब से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। मैहर कोतवाली पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मैहर पुलिस का कहना है कि अवैध शराब तस्करी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ उनकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।1
- मध्य प्रदेश के सतना शहर स्थित सेमरिया चौक के चौरसिया पेट्रोल पंप पर एक ग्राहक के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित वाहन मालिक का आरोप है कि उन्होंने अपनी गाड़ी में ₹250 का पेट्रोल भरवाया था, लेकिन उन्हें शक होने पर जब पेट्रोल को बोतल में निकालकर जांचा गया, तो उसमें सिर्फ ₹150 का ही पेट्रोल निकला। ग्राहक को तेल की मात्रा पर संदेह होने के बाद वह तुरंत पेट्रोल पंप वापस आए और पाइप के ज़रिए पेट्रोल को एक बोतल में निकलवाकर उसकी जाँच की। बोतल में पेट्रोल की कम मात्रा देखकर ग्राहक का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने पेट्रोल पंप कर्मचारियों के खिलाफ जमकर हंगामा किया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने पेट्रोल पंप की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और माप-तौल विभाग से इस पेट्रोल पंप की तत्काल जांच करने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि आम जनता को ऐसी लूट से बचाया जा सके और उनके उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा हो।1
- राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र से जुड़े विवाद में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर, शुक्रवार को सतना जिले की नागौद तहसील के ग्राम बसुधा और हरदुआ मझगवां सहित अन्य संबंधित क्षेत्रों में डुगडुगी बजवाकर आम लोगों को इस संबंध में सूचना दी गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास मंत्री की जाति से संबंधित कोई भी तथ्य, दस्तावेज या साक्ष्य मौजूद हों, तो वे उन्हें समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी करते हुए 6 जुलाई को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। समिति ने सतना कलेक्टर को विशेष निर्देश दिए थे ताकि इस नोटिस की तामील सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने इस मामले में नोटिस बोर्ड से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में डोंडी पिटवाकर कार्रवाई शुरू कर दी है। जारी निर्देशों के तहत, इश्तहार की प्रतियां तहसील कार्यालय नागौद, जनपद पंचायत कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की गई हैं। ग्राम पंचायत बसुधा और हरदुआ के सचिवों द्वारा डोंडी/डुगडुगी पिटवाकर वीडियोग्राफी भी कराई गई। वहीं, राजस्व निरीक्षक वृत्त डम्हा को ग्राम हरदुआ मझगवां और बसुधा में सूचना का सार्वजनिक प्रकाशन करने के साथ-साथ पंचनामा एवं फोटोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।1
- मैहर के उदयपुर वार्ड 2 निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग अमरनाथ दहिया, जो मां शारदा देवी मंदिर समिति में कर्मचारी हैं, ने रावेंद्र सिंह लोधी उर्फ मुंडी नामक एक दबंग व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुजुर्ग का कहना है कि यह व्यक्ति पिछले 12 वर्षों से लगातार उनकी मेहनत की कमाई छीन रहा है। अमरनाथ दहिया ने बताया कि रावेंद्र सिंह मुंडी एक जुआं माफिया है जो लोगों को आए दिन परेशान करता है। बुजुर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि मुंडी उनसे आए दिन मारपीट भी करता है। इस उत्पीड़न से तंग आकर अमरनाथ दहिया ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल दखल देने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।1
- मैहर जिले की ग्राम पंचायत बदेरा में मुख्य मार्ग से शासकीय महाविद्यालय तक बनाई जा रही पीसीसी सड़क के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के सरपंच ने इस निर्माणाधीन सड़क में गुणवत्ता मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके चलते सड़क की मजबूती और उसके टिकाऊपन को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है, बल्कि 6 एमएम और 12 एमएम गिट्टी के साथ अत्यधिक मात्रा में डस्ट (एम-सैंड) मिलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस घटिया निर्माण से सड़क बहुत जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे सरकारी धन की भारी बर्बादी होगी और क्षेत्र की जनता को खराब सड़क का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आरोप है कि निर्माण एजेंसी कोरदर नाथ एंड कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही है। स्थानीय लोगों द्वारा अनियमितता की जानकारी मिलने पर, सरपंच ने ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुँचकर कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार को इसकी सूचना दी और जांच होने तक कार्य रोकने की मांग की। हालांकि, ठेकेदार ने सरपंच की बात मानने के बजाय कथित तौर पर अपनी 'ऊंची पहुंच' का हवाला देते हुए कहा कि सड़क जैसी बन रही है, वैसी ही बनेगी। उसने सरपंच को चुनौती देते हुए यह भी कहा कि "आपको जो करना है कर लीजिए, हमारी पहुंच बहुत ऊपर तक है। आप भी सरपंच हैं, हम भी आपके कामों की जांच करवा देंगे।" ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कार्य के नमूने प्रयोगशाला भेजने और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। ग्रामीणों ने जोर दिया कि यह मार्ग शासकीय महाविद्यालय तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसका उपयोग विद्यार्थी, शिक्षक और सैकड़ों स्थानीय लोग करते हैं, और घटिया निर्माण से लाखों रुपये व्यर्थ जाएंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना होगा कि सरपंच और ग्रामीणों की इन गंभीर शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा कब तक जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।3
- बर्मा पंच द्वारा दिए गए बयान को सुनने के लिए दर्शकों से एक विशेष आग्रह किया गया है। पोस्ट में लोगों से पूरा बयान सुनने की अपील की गई है।1
- सतना के सेमरिया चौक स्थित चौरसिया पेट्रोल पंप पर एक वाहन मालिक ने अपनी गाड़ी में ₹250 का पेट्रोल भरवाया। हालांकि, उसे पेट्रोल कम मिलने का संदेह हुआ, जिसके बाद उसने पाइप की मदद से पेट्रोल को बोतल में निकालकर उसकी मात्रा जाँची। जाँच करने पर पता चला कि ग्राहक को केवल ₹150 का पेट्रोल दिया गया था, जिससे वह बेहद नाराज़ हो गया। इस गंभीर अनियमितता को लेकर वाहन मालिक ने पेट्रोल पंप पर जमकर हंगामा किया और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।1
- धार्मिक नगरी चित्रकूट धाम में जमीन और प्लॉट की खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बिना स्पष्ट रजिस्ट्रेशन, सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के और आवश्यक प्रशासनिक नियमों का पालन किए बिना ही प्लॉटिंग किए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। इन चर्चाओं के मुताबिक, कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर बिक्री की जा रही है। हालाँकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि चित्रकूट की सीमाएं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में फैली हुई हैं, जिसके कारण भूमि संबंधी कानून, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और लैंड यूज़ परिवर्तन के नियम अलग-अलग प्रावधानों के तहत आते हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ लोग इसी जटिल व्यवस्था का लाभ उठाकर कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। यदि इन दावों में सच्चाई पाई जाती है, तो भविष्य में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को कानूनी विवादों, रजिस्ट्री में अड़चनों और निर्माण अनुमति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय नागरिकों ने दोनों राज्यों के संबंधित प्रशासनिक विभागों से मांग की है कि क्षेत्र में चल रही सभी प्लॉटिंग योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं भी अनियमितता मिले, तो सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1