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धंबोला सीमलवाड़ा मुख्य मार्ग पर एक इक्को कार अनियंत्रित होकर एक घर का दरवाजा किया क्षतिग्रस्त,हादसे में चार घायल धंबोला पुलिस थाना क्षेत्र के सीमलवाड़ा धम्बोला मुख्य मार्ग पर स्थित यश आईटीआई केंद्र के पास एक अनियंत्रित इक्को कार लाला यादव के घर आंगन में घुस गई और घर का दरवाजा क्षतिग्रस्त कर दिया। हादसे में चालक सहित चार जने घायल हो गए। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची ओर घायलों को अस्पताल पहुंचाया वहीं इक्को कार को जब्त किया है। पीड़ित परिवार से अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं दी है।
Gunwant kalal
धंबोला सीमलवाड़ा मुख्य मार्ग पर एक इक्को कार अनियंत्रित होकर एक घर का दरवाजा किया क्षतिग्रस्त,हादसे में चार घायल धंबोला पुलिस थाना क्षेत्र के सीमलवाड़ा धम्बोला मुख्य मार्ग पर स्थित यश आईटीआई केंद्र के पास एक अनियंत्रित इक्को कार लाला यादव के घर आंगन में घुस गई और घर का दरवाजा क्षतिग्रस्त कर दिया। हादसे में चालक सहित चार जने घायल हो गए। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची ओर घायलों को अस्पताल पहुंचाया वहीं इक्को कार को जब्त किया है। पीड़ित परिवार से अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं दी है।
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- रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं. शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है. मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया. मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.3
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- रंगों के महोत्सव होली धुलंडी त्यौहार बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। सीमलवाड़ा कस्बे में कलालवाडी में युवाओं ओर महिलाओं के साथ बच्चों ने भी जमकर धुलंडी खेली। एक दूसरे पर रंग लगा कर शुभकामनाएं भी दी। जिसके बाद म्यूजिक गानों पर गुजराती गरबे भी खेले।3
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