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सीमलवाड़ा कस्बे में कलालवाडी में जमकर खेली धुलंडी, म्यूजिक गानों पर गुजराती गरबे भी खेले रंगों के महोत्सव होली धुलंडी त्यौहार बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। सीमलवाड़ा कस्बे में कलालवाडी में युवाओं ओर महिलाओं के साथ बच्चों ने भी जमकर धुलंडी खेली। एक दूसरे पर रंग लगा कर शुभकामनाएं भी दी। जिसके बाद म्यूजिक गानों पर गुजराती गरबे भी खेले।
Gunwant kalal
सीमलवाड़ा कस्बे में कलालवाडी में जमकर खेली धुलंडी, म्यूजिक गानों पर गुजराती गरबे भी खेले रंगों के महोत्सव होली धुलंडी त्यौहार बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। सीमलवाड़ा कस्बे में कलालवाडी में युवाओं ओर महिलाओं के साथ बच्चों ने भी जमकर धुलंडी खेली। एक दूसरे पर रंग लगा कर शुभकामनाएं भी दी। जिसके बाद म्यूजिक गानों पर गुजराती गरबे भी खेले।
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- Post by Bapulal Ahari1
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- रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं. शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है. मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया. मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.3
- छींच क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर में होली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में भव्य फागोत्सव का आयोजन किया गया। भक्ति और उल्लास के इस संगम में श्रद्धालु पूरी तरह सराबोर नजर आए। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में गुलाल के रंगों और भजनों की स्वर लहरियों ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। मंदिर समिति के वालेंग राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज भगवान गणेश के विशेष श्रृंगार और आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजित भजन संध्या में पुरुष वर्ग ने मोर्चा संभाला। पुरुष श्रद्धालुओं ने पारंपरिक होली गीतों और फाग के भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर 'गणपति बप्पा मोरया' और 'होली है' के जयकारों से गूंज उठा। चंग की थाप और ढोलक की जुगलबंदी पर गाए गए लोकगीतों ने वातावरण को पूरी तरह फागुनी रंग में रंग दिया। एक ओर जहाँ पुरुष वर्ग अपनी गायकी से भगवान को रिझा रहा था, वहीं दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं ने उत्साह और उमंग के साथ फागोत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया। महिलाओं ने पारंपरिक वागड़ी लोकगीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। केसरिया और फागुनी परिधानों में सजी महिलाओं ने गुलाल की होली खेलकर अपनी खुशी का इजहार किया। श्रद्धा और संस्कृति के इस अनूठे मेल ने उपस्थित सभी भक्तों का मन मोह लिया। फागोत्सव में उपस्थित महिलाओं ने बताया कि "फागोत्सव हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। भगवान गणेश के चरणों में भजनों और नृत्य के माध्यम से अपनी हाजिरी लगाना परम सुखद अनुभव है।" उत्सव के अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर मंडल की ओर से सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के समापन पर भगवान को विशेष भोग लगाया गया और उपस्थित सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया। इस फागोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और मेल-जोल का संदेश भी दिया। देर शाम तक चले इस उत्सव में छींच सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।4
- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी भाजपा मंडल डूंगरा छोटा का भव्य होली मिलन समारोह संपन्न 🌸 सज्जनगढ़ उपखंड के डूंगरा छोटा क्षेत्र के ग्राम कुशलीपाड़ा में दीप सिंह वसुनिया (जिला अध्यक्ष, युवा मोर्चा) के निवास पर भारतीय जनता पार्टी मंडल डूंगरा छोटा द्वारा भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूंजीलाल गायरी (भाजपा जिला अध्यक्ष) रहे तथा अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष हिम्मत मेरावत ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में पूर्व संसदीय सचिव बीमाबाई डामोर, जिला मंत्री सूर्य सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सभी कार्यकर्ताओं द्वारा एक-दूसरे को गुलाल लगाकर की गई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर गैर नृत्य एवं रंगों के उल्लास के साथ समारोह उत्साहपूर्वक मनाया गया। अतिथियों का पगड़ी पहनाकर एवं शब्दों के माध्यम से स्वागत किया गया। युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष दीप सिंह वसुनिया ने सभी कार्यकर्ताओं को होली की शुभकामनाएँ देते हुए संगठन को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि पूंजीलाल गायरी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर आह्वान किया कि डूंगरा छोटा नवगठित पंचायत समिति में भाजपा समर्थित पंच, सरपंच, प्रधान एवं जिला प्रमुख निर्वाचित हों, इसके लिए सभी कार्यकर्ता अभी से अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय होकर कार्य करें। कार्यक्रम को सूर्या भाई लबाना एवं बीमाबाई डामोर सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। समारोह में समस्त बूथ अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी, संयोजक एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संजय पचाल ने किया तथा आभार नवीन डांगर ने व्यक्त किया।4
- झाड़ोल तहसील कार्यालय में गिरा प्लास्टर, बड़ा हादसा टला1
- Post by Rajendra Tabiyar1
- Post by VAGAD news241
- वागड़ केसरी व वागड़ गौरव आचार्य 108 चंद्रगुप्त गुरुदेव का मंगल विहार वागोल जैन तीर्थ एवं अन्देश्वर तीर्थ की ओर श्रद्धा और भावनाओं के बीच प्रारंभ हुआ। विदाई के दौरान भक्तों की आंखों में आंसू छलक उठे और वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया। दिगंबर बीस पंथी जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव के सानिध्य में मूलनायक आदिनाथ भगवान का प्रातः बेला में विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक हुआ। सायंकाल गुरुदेव का विहार वागोल जैन तीर्थ के लिए हुआ, जहां समाजजनों ने नंगे पांव चलकर सहभागिता की तथा मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की आरती व गुरुभक्ति का आयोजन किया। महामंत्री हंसमुख लाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव का अगला विहार अन्देश्वर तीर्थ की ओर रहेगा तथा 10 मार्च को भिलूड़ा में उनका मंगल प्रवेश होगा, जहां पूज्य गुरु गुप्तुनंदी गुरुदेव से गुरु-शिष्य मिलन होगा। गुरुदेव ने संदेश दिया कि संयम, करुणा और क्षमा ही सच्चा धर्म है।1