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Pintu Dubey
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- मध्य प्रदेश के सतना स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल में एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ पैथोलॉजिस्ट की गैरमौजूदगी में ही मरीजों की जाँचें की जा रही हैं और रिपोर्टें भी जारी की जा रही हैं। यह खुलासा पूर्व में भी हुआ था, लेकिन तब स्वास्थ्य विभाग ने मामले पर लीपापोती की, जिससे अस्पताल के हौसले और बुलंद हो गए। इस लीपापोती का नतीजा यह हुआ है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर अवैध वसूली का यह गोरखधंधा दोबारा धड़ल्ले से शुरू हो चुका है। आयुष्मान अस्पताल की पैथोलॉजी में बिना किसी डॉक्टर के ही रिपोर्टें बनाई जा रही हैं, और इस गंभीर स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मौन बना हुआ है।1
- Post by Pintu Dubey2
- संत रामपाल जी महाराज ने एक असाधारण कार्य करते हुए 40 साल से चली आ रही पानी की गंभीर समस्या को खत्म कर दिया है। बताया गया है कि उन्होंने मात्र एक ही प्रार्थना के माध्यम से इस दीर्घकालिक परेशानी का समाधान कर दिया।1
- सतना जिले के जैतवार से खुतहा जाने वाले मार्ग पर आज सुबह एक बार फिर हादसा हो गया, जहां सड़क पर बने गड्ढों के कारण एक युवक ट्रैक्टर से टकरा गया। दूध लेकर सतना जा रहे एक युवक की टक्कर ईंट लादकर आ रहे एक ट्रैक्टर से हो गई। यह हादसा तब हुआ जब युवक सड़क पर बने एक गड्ढे से बचने की कोशिश कर रहा था और इसी दौरान ट्रैक्टर ने उसे धक्का मार दिया। टक्कर के बाद युवक अपने दोपहिया वाहन समेत सड़क किनारे गिर गया, जिससे उसका सारा दूध सड़क पर बिखर गया। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में युवक को कोई शारीरिक हानि नहीं हुई, हालांकि उसका पूरा दूध बर्बाद हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जैतवार-खुतहा मार्ग की हालत इतनी खराब है कि यहां लगभग हर दिन कोई न कोई दुर्घटना होती रहती है।1
- चित्रकूट जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ओरा के पांडेय घाट पर जमकर अवैध खनन का कार्य हो रहा है। यह जानकारी सामने आई है कि इस स्थान पर बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियाँ जारी हैं।1
- चित्रकूट जनपद के मऊ थाना क्षेत्र में शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। पश्चिम पताई टिकरा के पास अनियंत्रित होकर एक कार सड़क किनारे लगे पेड़ से टकरा गई, जिससे कार सवार 48 वर्षीय रामकिशोर की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी गुड़िया और पड़ोसी व कार चालक चंद्रप्रताप सिंह इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक रामकिशोर बेलहा बरियारी कला थाना मऊ, जनपद चित्रकूट के निवासी थे। परिजनों के अनुसार, रामकिशोर अपनी बेटी सुखमंती के ससुराल मऊ में हुए किसी लड़ाई-झगड़े के संबंध में अपनी पत्नी गुड़िया के साथ पड़ोसी चंद्रप्रताप सिंह की कार से वहां गए थे। बेटी के ससुराल से लौटते समय पश्चिम पताई के पास यह घटना हुई, जब कार अचानक अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। हादसे की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को मऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। वहां से चंद्रप्रताप को प्रयागराज रेफर किया गया है, जबकि गुड़िया का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मृतक रामकिशोर के शव को अपने कब्जे में लेकर आज शनिवार दोपहर 12 बजे जिला मुख्यालय में पोस्टमार्टम कराया है।1
- चित्रकूट जिले के तिरहार क्षेत्र में जनता का भारी गुस्सा देखने को मिला है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या रात के अंधेरे ने इलाके में हुए तथाकथित विकास की सच्चाई को उजागर कर दिया है, जिससे जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।2
- सतना में सिविल लाइन थाना परिसर स्थित पुलिस कॉलोनी में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक सरकारी आवास की छत का भारी प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। यह घटना तब हुई जब कुछ ही पल पहले उसी स्थान पर बच्चे खेल रहे थे, जिनका समय रहते वहां से हट जाने के कारण उनकी जान बच गई। इस घटना ने एक संभावित बड़ी जनहानि को टाल दिया, लेकिन पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलोनी में रहने वाले परिवारों में घटना के बाद दहशत का माहौल है। उनका आरोप है कि पुलिस कॉलोनी के अधिकांश आवास वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके हैं, जिनमें मरम्मत के अभाव में लगातार गिरावट आ रही है। छतों से प्लास्टर गिरना और दीवारों में दरारें पड़ना अब एक सामान्य बात बन गई है। निवासियों का कहना है कि संबंधित विभाग को कई बार इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मी खुद अपने परिवारों की असुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर बरसात के मौसम में इन खस्ताहाल मकानों में रहना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई, तो भविष्य में कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब पुलिसकर्मियों के परिवार ही असुरक्षित सरकारी आवासों में रहने को मजबूर हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है।1