बड़ामलहरा, छतरपुर के भगवां थाना क्षेत्र स्थित सुजारा बांध के सोरखी घाट पर दिनदहाड़े अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है, जहाँ बिना किसी वैध दस्तावेज के नियमों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। इस संगठित लूट के कारण रेत की कीमतें बढ़ रही हैं और सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया जा रहा है। स्वीकृत नियमों को ताक पर रखकर, जलस्रोत के सीने को छलनी करते हुए चार से पाँच भारी जेसीबी मशीनें गहराई तक खुदाई में जुटी हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँच रही है। रेत माफिया के गुर्गे इतने बेखौफ हैं कि वे खुलेआम मशीनों के ऊपर खड़े होकर रील बना रहे हैं, जो कानून के प्रति उनके डर की अनुपस्थिति को दर्शाता है। यह कोई छिटपुट चोरी नहीं, बल्कि कतार में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मिलकर सरकारी राजस्व की खुली डकैती है। क्षेत्र की जीवनदायिनी सुजारा बांध के डूब क्षेत्र में चल रहा यह अवैध खनन प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है, जो एक बड़े पर्यावरणीय संकट को न्योता दे रहा है। प्रशासन की इस चुप्पी के कारण बांध के अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा है।
बड़ामलहरा, छतरपुर के भगवां थाना क्षेत्र स्थित सुजारा बांध के सोरखी घाट पर दिनदहाड़े अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है, जहाँ बिना किसी वैध दस्तावेज के नियमों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। इस संगठित लूट के कारण रेत की कीमतें बढ़ रही हैं और सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया जा रहा है। स्वीकृत नियमों को ताक पर रखकर, जलस्रोत के सीने को छलनी करते हुए चार से पाँच भारी जेसीबी मशीनें गहराई तक खुदाई में जुटी हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँच रही है। रेत माफिया के गुर्गे इतने बेखौफ हैं कि वे खुलेआम मशीनों के ऊपर खड़े होकर रील बना रहे हैं, जो कानून के प्रति उनके डर की अनुपस्थिति को दर्शाता है। यह कोई छिटपुट चोरी नहीं, बल्कि कतार में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मिलकर सरकारी राजस्व की खुली डकैती है। क्षेत्र की जीवनदायिनी सुजारा बांध के डूब क्षेत्र में चल रहा यह अवैध खनन प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है, जो एक बड़े पर्यावरणीय संकट को न्योता दे रहा है। प्रशासन की इस चुप्पी के कारण बांध के अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा है।
- मनरेगा कार्मिकों, जिनमें ग्राम रोजगार सेवक भी शामिल हैं, ने मुख्यमंत्री द्वारा उनकी लंबित मांगों को लेकर की गई घोषणाओं को शासनादेश के रूप में लागू न किए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। अपनी इसी नाराजगी के चलते जनपद के समस्त रोजगार सेवक एवं मनरेगा कर्मी बुधवार को लखनऊ में धरना प्रदर्शन करेंगे। मंगलवार को मड़ावरा में ग्राम रोजगार सेवकों ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के नाम से एक ज्ञापन एडीओ पंचायत सचिन जैन को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि संगठन के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर ये सभी कर्मचारी 01 जुलाई को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और लखनऊ में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस दौरान ज्ञापन सौंपते समय ब्लॉक अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह, करनसिंह यादव, हिमांचल सिंह, भागीरथ साहू, भैयालाल, हरनाम सिंह, मकुंद सिंह, रामस्वरूप, हाकम गंधर्व, दिनेश यादव, ई. नसीर अहमद और सौरभ तिवारी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।1
- टीकमगढ़ जिला अस्पताल में ठेकेदार द्वारा पिछले 10-15 साल से सेवा दे रहे 13 सफाईकर्मियों को बिना किसी पूर्व सूचना और ठोस कारण बताए काम से हटाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इन कर्मचारियों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उन्हें दोबारा काम पर रखा जाए, क्योंकि भीषण महंगाई के इस दौर में उनसे उनके रोजगार का एकमात्र साधन छीन लिया गया है, जबकि वे कम वेतन पर भी ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों ने अपने आवेदन में बताया कि वे वर्षों से पूरी लगन के साथ जिला अस्पताल में सफाई का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुछ समय पहले भी ठेकेदार ने कुछ कर्मचारियों को बिना सूचना हटा दिया था, जिसके विरोध में सभी कर्मचारियों ने अस्पताल के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया था। तब ठेकेदार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को बिना सूचना या ठोस कारण के नहीं निकाला जाएगा। हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद सुरेन्द्र, रविकांत बाल्मीक, किशोरी, अभिजीत, रोहित, मयूर, राम, विमल, अक्षय, रूपेश, निहाल, संतोषी और गोपालकृष्ण सहित कुल 13 पुराने कर्मचारियों को फिर से काम से हटा दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को काम पर रखा गया। उन्होंने इस कार्रवाई को अपने साथ अन्याय बताया है और कहा कि कम वेतन व सुविधाओं के अभाव में भी उन्होंने कठिन समय में अस्पताल की सेवा की थी, लेकिन अब नौकरी जाने से उनके परिवारों पर संकट आ गया है। सफाईकर्मियों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि इस भीषण महंगाई के समय में नौकरी चले जाने से उनके परिवारों की माली हालत और भी खस्ताहाल हो जाएगी, क्योंकि यह उनका एकमात्र रोजगार का साधन था। हरिजन बस्ती, बाहरकोट निवासी इन कर्मचारियों ने 30 जून को कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए उनसे विनम्र निवेदन किया है कि उनके और उनके परिवारों के भविष्य को देखते हुए ठेकेदार को उन्हें पुनः काम पर रखने का निर्देश दिया जाए, जिसके लिए वे जीवनभर आभारी रहेंगे। इस घटना के बाद जिला अस्पताल में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।3
- छतरपुर जिले में मंगलवार को कलेक्टर पार्थ जैसवाल की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष में एक जिला स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया, एडीएम विनय द्विवेदी, एसडीएम प्रशांत अग्रवाल, डिप्टी कलेक्टर समेत विभागीय जिलाधिकारी मौजूद रहे, जबकि जिले के अनुभागों के एसडीएम और तहसीलदार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। जनसुनवाई में कुल 238 शिकायती आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर ने इन सभी आवेदनों का परीक्षण कर लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों को उनके तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। शिक्षा, राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, ग्रामीण विकास, विद्युत मण्डल, स्वास्थ्य, खाद्य, आदिम जाति, श्रम, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हुईं। विशेष रूप से, कलेक्टर ने दिव्यांगों की समस्याओं को अलग से सुना। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने पूर्व की जनसुनवाईयों के लंबित आवेदनों की भी समीक्षा की और उनके त्वरित निराकरण के साथ-साथ पोर्टल पर एंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अनुपस्थित रहने पर एसई एमपीईबी, जीएम सीसीबी और एजीएम पीएमजीएसवाई को एक-एक दिन का अवैतनिक करने के आदेश दिए गए, वहीं कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।4
- टीकमगढ़ नगर में बढ़ी हुई जलकर दर और खराब पेयजल व्यवस्था के खिलाफ नागरिकों का गुस्सा अब जिला कलेक्टर तक पहुंच गया है। नागरिकों ने कलेक्टर को एक विस्तृत अभ्यावेदन सौंपा है, जिसमें तत्काल प्रभाव से 260 रुपए प्रतिमाह की जलकर वसूली को स्थगित करने और नगर पालिका परिषद द्वारा निर्धारित 150 रुपए प्रतिमाह की दर लागू करने की मांग की गई है। अभ्यावेदन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021-22 तक जलकर 100 रुपए प्रतिमाह था, जिसे वर्ष 2022-23 में तत्कालीन प्रशासक ने बिना किसी ठोस वित्तीय आधार के एकमुश्त बढ़ाकर 260 रुपए प्रतिमाह कर दिया। यह लगभग 160 प्रतिशत की वृद्धि है, जिसे नागरिकों ने अनुचित और नियमों के विपरीत बताया है। उन्होंने इस वृद्धि को मध्यप्रदेश नगरपालिका (कराधान) नियम, 2016 के नियम 3 (2) का उल्लंघन बताया, जिसके अनुसार कर-शुल्क में वार्षिक वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। नागरिकों का कहना है कि यह 160% की बढ़ोतरी पूरी तरह से गैर-कानूनी है और संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के सिद्धांतों के खिलाफ है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जनहित को देखते हुए निर्वाचित नगर पालिका परिषद ने 2023 में सर्वसम्मति से जलकर घटाकर 150 रुपए प्रतिमाह करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन शासन की स्वीकृति न मिलने के कारण वह अभी तक लागू नहीं हो सका है। पेयजल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अभ्यावेदन में बताया गया कि शहर के लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है, जबकि 20 प्रतिशत क्षेत्रों में तीन दिन के अंतराल पर आपूर्ति हो रही है। इसके साथ ही, नागरिकों को लगातार दूषित और अस्वच्छ पानी मिलने की शिकायतें हैं, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। कलेक्टर से की गई मांगों में शासन की अंतिम स्वीकृति तक 260 रुपए प्रतिमाह जलकर की वसूली तत्काल स्थगित करने और नगर पालिका परिषद के प्रस्ताव के अनुसार 150 रुपए प्रतिमाह की दर से वसूली करने को कहा गया है। इसके अलावा, बरीघाट वॉटर फिल्टर प्लांट के सुदृढ़ीकरण, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और नियमित जल वितरण के लिए समय-सीमा तय कर एक प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। शहर में बढ़ते जल संकट और महंगे जलकर का यह मुद्दा अब जनचर्चा का विषय बन गया है, और नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हुई हैं।1
- चंदेरा और पलेरा में सेन समाज को संगठित करने तथा युवाओं में सामाजिक चेतना जगाने के उद्देश्य से 'सेन समाज युवा जागृति बैठक' का आयोजन किया गया। इस बैठक में समाज के विकास, युवाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों से संबंधित एक विस्तृत रणनीति तैयार की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर ओबीसी महासभा के जिला अध्यक्ष उत्तम नापित और हदेश सेन ने युवाओं को संबोधित किया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि समाज की उन्नति के लिए युवाओं का जागरूक और शिक्षित होना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक युवा आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी नहीं संभालेंगे, तब तक सामाजिक सुधार की गति को तेज़ करना मुश्किल होगा। इस गरिमामयी उपस्थिति वाली बैठक में समाज के सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। बैठक में वरिष्ठ पदाधिकारियों उत्तम नापित (जिला अध्यक्ष, ओबीसी महासभा) और हदेश सेन (युवा प्रदेश उपाध्यक्ष, सेन समाज) के साथ-साथ विनोद, अंकुश, विशाल, कुलदीप, सोनू, शिवानंद, अनूप, मोनू सेन, प्रवीण, राज नारायण, मोहित, कैलाश, रामलाल और रवि सेन जैसे कई सक्रिय सदस्य भी उपस्थित रहे। बैठक के समापन पर, उपस्थित सभी युवाओं ने समाज के आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तथा हर स्तर पर एक-दूसरे की मदद करने का सामूहिक संकल्प लिया।1
- जतारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरिशंकर खटीक ने मंगलवार को जतारा तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कई अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिस पर विधायक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के समय बड़ी संख्या में मौजूद किसानों और आम लोगों ने विधायक के सामने अपनी विभिन्न समस्याओं को रखा। उन्होंने जमीन से जुड़े मामलों के लंबित रहने, राजस्व संबंधी प्रकरणों में देरी होने और अन्य कार्यालयीन कार्यों में आ रही परेशानियों की शिकायत की। विधायक हरिशंकर खटीक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता और किसानों के सभी कार्य समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएँ। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सरकारी कार्यालयों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता को परेशान करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान विधायक ने तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली के बारे में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली और लंबित प्रकरणों का शीघ्र समाधान करने के आदेश दिए।1
- टीकमगढ़ जिले की दिगौड़ा तहसील के अंतर्गत बेदोरा गांव में बिजली की केबिलें महीनों से खतरनाक तरीके से बिल्कुल नीचे लटक रही हैं, जबकि उनमें बिजली की सप्लाई लगातार चालू है। गांव के निवासियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार लिधौरा पावर हाउस में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन बिजली विभाग ने अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है। ग्रामीणों ने बताया है कि इन नीचे लटक रही बिजली की केबिलों की वजह से अब तक दो से तीन गौवंश करेंट की चपेट में आ चुके हैं। उनकी चिंता है कि गांव में किसी भी वक्त कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, और अब बारिश का मौसम शुरू होने से यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए, स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग से इन केबिलों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की तत्काल मांग की है।1