टीकमगढ़ जिला अस्पताल में ठेकेदार द्वारा पिछले 10-15 साल से सेवा दे रहे 13 सफाईकर्मियों को बिना किसी पूर्व सूचना और ठोस कारण बताए काम से हटाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इन कर्मचारियों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उन्हें दोबारा काम पर रखा जाए, क्योंकि भीषण महंगाई के इस दौर में उनसे उनके रोजगार का एकमात्र साधन छीन लिया गया है, जबकि वे कम वेतन पर भी ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों ने अपने आवेदन में बताया कि वे वर्षों से पूरी लगन के साथ जिला अस्पताल में सफाई का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुछ समय पहले भी ठेकेदार ने कुछ कर्मचारियों को बिना सूचना हटा दिया था, जिसके विरोध में सभी कर्मचारियों ने अस्पताल के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया था। तब ठेकेदार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को बिना सूचना या ठोस कारण के नहीं निकाला जाएगा। हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद सुरेन्द्र, रविकांत बाल्मीक, किशोरी, अभिजीत, रोहित, मयूर, राम, विमल, अक्षय, रूपेश, निहाल, संतोषी और गोपालकृष्ण सहित कुल 13 पुराने कर्मचारियों को फिर से काम से हटा दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को काम पर रखा गया। उन्होंने इस कार्रवाई को अपने साथ अन्याय बताया है और कहा कि कम वेतन व सुविधाओं के अभाव में भी उन्होंने कठिन समय में अस्पताल की सेवा की थी, लेकिन अब नौकरी जाने से उनके परिवारों पर संकट आ गया है। सफाईकर्मियों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि इस भीषण महंगाई के समय में नौकरी चले जाने से उनके परिवारों की माली हालत और भी खस्ताहाल हो जाएगी, क्योंकि यह उनका एकमात्र रोजगार का साधन था। हरिजन बस्ती, बाहरकोट निवासी इन कर्मचारियों ने 30 जून को कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए उनसे विनम्र निवेदन किया है कि उनके और उनके परिवारों के भविष्य को देखते हुए ठेकेदार को उन्हें पुनः काम पर रखने का निर्देश दिया जाए, जिसके लिए वे जीवनभर आभारी रहेंगे। इस घटना के बाद जिला अस्पताल में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
टीकमगढ़ जिला अस्पताल में ठेकेदार द्वारा पिछले 10-15 साल से सेवा दे रहे 13 सफाईकर्मियों को बिना किसी पूर्व सूचना और ठोस कारण बताए काम से हटाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इन कर्मचारियों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उन्हें दोबारा काम पर रखा जाए, क्योंकि भीषण महंगाई के इस दौर में उनसे उनके रोजगार का एकमात्र साधन छीन लिया गया है, जबकि वे कम वेतन पर भी ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों ने अपने आवेदन में बताया कि वे वर्षों से पूरी लगन के साथ जिला अस्पताल में सफाई का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुछ समय पहले भी ठेकेदार
ने कुछ कर्मचारियों को बिना सूचना हटा दिया था, जिसके विरोध में सभी कर्मचारियों ने अस्पताल के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया था। तब ठेकेदार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को बिना सूचना या ठोस कारण के नहीं निकाला जाएगा। हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद सुरेन्द्र, रविकांत बाल्मीक, किशोरी, अभिजीत, रोहित, मयूर, राम, विमल, अक्षय, रूपेश, निहाल, संतोषी और गोपालकृष्ण सहित कुल 13 पुराने कर्मचारियों को फिर से काम से हटा दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को काम पर रखा गया। उन्होंने इस कार्रवाई को अपने साथ अन्याय बताया है और कहा कि कम वेतन व सुविधाओं के अभाव में भी उन्होंने कठिन समय में अस्पताल की सेवा की थी, लेकिन अब
नौकरी जाने से उनके परिवारों पर संकट आ गया है। सफाईकर्मियों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि इस भीषण महंगाई के समय में नौकरी चले जाने से उनके परिवारों की माली हालत और भी खस्ताहाल हो जाएगी, क्योंकि यह उनका एकमात्र रोजगार का साधन था। हरिजन बस्ती, बाहरकोट निवासी इन कर्मचारियों ने 30 जून को कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए उनसे विनम्र निवेदन किया है कि उनके और उनके परिवारों के भविष्य को देखते हुए ठेकेदार को उन्हें पुनः काम पर रखने का निर्देश दिया जाए, जिसके लिए वे जीवनभर आभारी रहेंगे। इस घटना के बाद जिला अस्पताल में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
- छतरपुर-सागर नेशनल हाईवे 39 पर बड़ामलहरा में आज दोपहर सैकड़ों ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। पुलिस की कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों के सड़क पर उतर आने से हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसके कारण यातायात घंटों तक बाधित रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछली रात एक गांव में चोरी के प्रयास की घटना हुई थी, जिसमें पुलिस ने एक व्यक्ति को पकड़ा था। लेकिन चोरी की वारदात में शामिल अन्य आरोपी अब भी फरार हैं, और बड़ामलहरा थाना, गोलगंज थाना तथा चौकी पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी पुलिसिया निष्क्रियता के विरोध में आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने मंगलवार को नेशनल हाईवे जाम कर दिया। जाम की सूचना मिलने पर पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद ही यातायात बहाल हो सका।1
- ललितपुर जिले के तालबेहट थाना क्षेत्र में पुलिस और एसओजी की बदमाशों के साथ पावागिरी जंगल के पास मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने पाँच बदमाशों को गिरफ्तार किया, जिनमें से दो घायल हुए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में झांसी निवासी राजकुमार कुशवाहा और दतिया निवासी भोला कुशवाहा घायल हो गए। इसके साथ ही दतिया निवासी रमाकांत पाल, शिवम पाल और झांसी निवासी सागर शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी बदमाश पूर्व में चोरी, हत्या और लूट जैसे गंभीर अपराधों में कई जिलों और राज्यों की जेलों में रह चुके हैं। बदमाशों के कब्जे से पाँच तमंचे, पाँच खोखा कारतूस, आठ जिंदा कारतूस, एक स्विफ्ट डिजायर कार, चार मोबाइल फोन और ₹2800 नकद बरामद किए गए हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है, और पुलिस द्वारा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।1
- टीकमगढ़ नगर में बढ़ी हुई जलकर दर और खराब पेयजल व्यवस्था के खिलाफ नागरिकों का गुस्सा अब जिला कलेक्टर तक पहुंच गया है। नागरिकों ने कलेक्टर को एक विस्तृत अभ्यावेदन सौंपा है, जिसमें तत्काल प्रभाव से 260 रुपए प्रतिमाह की जलकर वसूली को स्थगित करने और नगर पालिका परिषद द्वारा निर्धारित 150 रुपए प्रतिमाह की दर लागू करने की मांग की गई है। अभ्यावेदन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021-22 तक जलकर 100 रुपए प्रतिमाह था, जिसे वर्ष 2022-23 में तत्कालीन प्रशासक ने बिना किसी ठोस वित्तीय आधार के एकमुश्त बढ़ाकर 260 रुपए प्रतिमाह कर दिया। यह लगभग 160 प्रतिशत की वृद्धि है, जिसे नागरिकों ने अनुचित और नियमों के विपरीत बताया है। उन्होंने इस वृद्धि को मध्यप्रदेश नगरपालिका (कराधान) नियम, 2016 के नियम 3 (2) का उल्लंघन बताया, जिसके अनुसार कर-शुल्क में वार्षिक वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। नागरिकों का कहना है कि यह 160% की बढ़ोतरी पूरी तरह से गैर-कानूनी है और संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के सिद्धांतों के खिलाफ है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जनहित को देखते हुए निर्वाचित नगर पालिका परिषद ने 2023 में सर्वसम्मति से जलकर घटाकर 150 रुपए प्रतिमाह करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन शासन की स्वीकृति न मिलने के कारण वह अभी तक लागू नहीं हो सका है। पेयजल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अभ्यावेदन में बताया गया कि शहर के लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है, जबकि 20 प्रतिशत क्षेत्रों में तीन दिन के अंतराल पर आपूर्ति हो रही है। इसके साथ ही, नागरिकों को लगातार दूषित और अस्वच्छ पानी मिलने की शिकायतें हैं, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। कलेक्टर से की गई मांगों में शासन की अंतिम स्वीकृति तक 260 रुपए प्रतिमाह जलकर की वसूली तत्काल स्थगित करने और नगर पालिका परिषद के प्रस्ताव के अनुसार 150 रुपए प्रतिमाह की दर से वसूली करने को कहा गया है। इसके अलावा, बरीघाट वॉटर फिल्टर प्लांट के सुदृढ़ीकरण, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और नियमित जल वितरण के लिए समय-सीमा तय कर एक प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। शहर में बढ़ते जल संकट और महंगे जलकर का यह मुद्दा अब जनचर्चा का विषय बन गया है, और नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हुई हैं।1
- चंदेरा और पलेरा में सेन समाज को संगठित करने तथा युवाओं में सामाजिक चेतना जगाने के उद्देश्य से 'सेन समाज युवा जागृति बैठक' का आयोजन किया गया। इस बैठक में समाज के विकास, युवाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों से संबंधित एक विस्तृत रणनीति तैयार की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर ओबीसी महासभा के जिला अध्यक्ष उत्तम नापित और हदेश सेन ने युवाओं को संबोधित किया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि समाज की उन्नति के लिए युवाओं का जागरूक और शिक्षित होना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक युवा आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी नहीं संभालेंगे, तब तक सामाजिक सुधार की गति को तेज़ करना मुश्किल होगा। इस गरिमामयी उपस्थिति वाली बैठक में समाज के सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। बैठक में वरिष्ठ पदाधिकारियों उत्तम नापित (जिला अध्यक्ष, ओबीसी महासभा) और हदेश सेन (युवा प्रदेश उपाध्यक्ष, सेन समाज) के साथ-साथ विनोद, अंकुश, विशाल, कुलदीप, सोनू, शिवानंद, अनूप, मोनू सेन, प्रवीण, राज नारायण, मोहित, कैलाश, रामलाल और रवि सेन जैसे कई सक्रिय सदस्य भी उपस्थित रहे। बैठक के समापन पर, उपस्थित सभी युवाओं ने समाज के आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तथा हर स्तर पर एक-दूसरे की मदद करने का सामूहिक संकल्प लिया।1
- ललितपुर जिले में एल.यू.सी.सी. (LUCC) नामक चिटफंड कंपनी के माध्यम से आम लोगों को निवेश का प्रलोभन देकर, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र के तहत धोखाधड़ी करने के संबंध में थाना कोतवाली ललितपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 11, 318, 61(2), 352, और 351(3) के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इस प्रकरण में वांछित मुख्य अभियुक्त समीर अग्रवाल (चेयरमैन, सागा ग्रुप), जो स्वर्गीय राजेंद्र अग्रवाल के पुत्र हैं और मुंबई के निवासी हैं, वर्तमान में दुबई में बिजनेस बे बिल्डिंग नं. 10, चौथा तल, कार्यालय संख्या 404 पर रह रहे हैं तथा गिरफ्तारी से बचने हेतु फरार चल रहे हैं। प्रकरण की गंभीरता और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, ललितपुर के पुलिस अधीक्षक मुहम्मद मुश्ताक द्वारा अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। साथ ही, अभियुक्त की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, द्वारा अभियुक्त समीर अग्रवाल की गिरफ्तारी पर ₹1 लाख (एक लाख रुपये) की धनराशि का पुरस्कार घोषित किया गया है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त वांछित अभियुक्त के संबंध में कोई विश्वसनीय सूचना प्राप्त होती है, तो वह अपने निकटतम पुलिस थाने अथवा जनपद ललितपुर पुलिस से संपर्क कर सूचना प्रदान कर सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी और उसे नियमानुसार ₹1 लाख के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।1
- टीकमगढ़ जिले की दिगौड़ा तहसील के अंतर्गत बेदोरा गांव में बिजली की केबिलें महीनों से खतरनाक तरीके से बिल्कुल नीचे लटक रही हैं, जबकि उनमें बिजली की सप्लाई लगातार चालू है। गांव के निवासियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार लिधौरा पावर हाउस में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन बिजली विभाग ने अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है। ग्रामीणों ने बताया है कि इन नीचे लटक रही बिजली की केबिलों की वजह से अब तक दो से तीन गौवंश करेंट की चपेट में आ चुके हैं। उनकी चिंता है कि गांव में किसी भी वक्त कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, और अब बारिश का मौसम शुरू होने से यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए, स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग से इन केबिलों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की तत्काल मांग की है।1