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मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में आदिवासियों का महा आंदोलन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन बेतवा लिंक परियोजना. विकास के नाम पर विस्थापन के खिलाफ। न्याय के लिए संघर्ष।
राजेश कुमार मरावी रिपोर्टर
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में आदिवासियों का महा आंदोलन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन बेतवा लिंक परियोजना. विकास के नाम पर विस्थापन के खिलाफ। न्याय के लिए संघर्ष।
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- घुघरी कटंगी में भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की मौत एक गंभीर रूप से घायल1
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- उमरिया। जिला मुख्यालय में बाल श्रम का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में छोटे बच्चों को भारी सामान ट्रक में लोड करते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पाली रोड स्थित मंसूरी ट्रेडर्स, अब्दुल कबाड़ी का है। वीडियो के सामने आने के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे न सिर्फ अमानवीय बता रहे हैं, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी मान रहे हैं। भारत में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से इस तरह का काम करवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद खुलेआम बच्चों से मजदूरी करवाई जा रही है, जो जिम्मेदार विभागों की लापरवाही को उजागर करता है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात लेबर इंस्पेक्टर यश दत्त त्रिपाठी का बयान है। जब उनसे इस वायरल वीडियो को लेकर बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका यह जवाब अब सवालों के घेरे में है। जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, तो जिम्मेदार अधिकारी अनजान कैसे रह सकते हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब शहर में बाल श्रम के मामले सामने आए हों। पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ठोस कदम कम ही देखने को मिले हैं। अब यह वीडियो एक बार फिर पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। चाइल्डलाइन, पुलिस और श्रम विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कानून होने के बावजूद यदि बच्चों से इस तरह काम लिया जा रहा है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि निगरानी और कार्रवाई में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल, इस घटना ने बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।1
- शॉर्ट न्यूज़ (वायरल वीडियो): ताला–पनपथा मार्ग पर एक हाइवा के अचानक ब्रेकडाउन होने से सिंगल रोड पर करीब 4 घंटे लंबा जाम लग गया। भीषण 42°C की गर्मी में फंसे हजारों लोग पानी के लिए जंगल की ओर भटकते नजर आए। अधूरी सड़क पटरी और संकरे रास्ते ने हालात और बिगाड़ दिए। मौके पर जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी ने लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग प्रशासन से जवाब मांगते दिख रहे हैं।1
- मंडला जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां पोषण आहार संयंत्र के बंद होने से न सिर्फ रोजगार पर संकट गहराया है, बल्कि कुपोषण के खिलाफ चल रही व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जी हां… मंडला में संचालित पोषण आहार संयंत्र के बंद होने की खबर से स्वास्थ्य सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बेहद चिंतित नजर आ रही हैं। इन महिलाओं के सामने अब रोजगार का गंभीर संकट मंडराने लगा है। यह वही पोषण आहार संयंत्र है, जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष पिछले कई वर्षों से कार्यरत थे। इनके लिए यह संयंत्र सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन था। रविवार को शाम 4:00 बजे पोषण आहार संयंत्र में कार्यरत महिलाओं ने दी जानकारी1
- एक दम सही विचार है, समय तो आता जाता रहता है. पहले के समय में और अभी के समय में बहुत फर्क है पहले के समय में कोई कार्य कई दिनों होता था कई घंटे लगते थे. और आज के समय में चंद मिंटो में पूर्ण हो जाता है1
- Post by Akash Chakarwarti1
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