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अम्बिकापुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 का कार्य काफी जोरो पर चल रहा है।सड़को में जगह जगह पुल पुलिया निर्माण सहित सड़क समतलीकरण के लिए सड़को पर मिट्टी भरे जा रहे हैं बलरामपुर। जिले से अम्बिकापुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 का कार्य काफी जोरो पर चल रहा है।सड़को में जगह जगह पुल पुलिया निर्माण सहित सड़क समतलीकरण के लिए सड़को पर मिट्टी भरे जा रहे हैं। नए सड़क निर्माण के दौरान सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण के दौरान डाले गए कच्चे मिट्टी के कारण उड़ रहे भारी धूल से आम जनता काफी परेशान है। राष्ट्रीय राजमार्ग 343 में बलरामपुर से अम्बिकापुर जाने वाले सड़क पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान सड़क पर डाले गए मिट्टी के कारण काफी धूल उड़ रहा है और उड़ते धूल से लोग काफी परेशान हैं।धूल के कारण लोगो को अब कई बीमारियों का सामना करना लड़ रहा है।धूल के कारण दमे सहित खांसी सर्दी व अन्य सांस से संबंधित कई बीमारी होने लगा है।उन्होंने बताया कि सड़क पर ठेकेदार द्वारा पानी का भी छिड़काव नही किया जाता है जिससे लोग काफी परेशान हैं।बारिश होने पर सड़क पर कीचड़ होने से लोगो को आवागमन में काफी परेशानी होती है।

8 hrs ago
user_Puran Dewangan
Puran Dewangan
Rajpur, Balrampur•
8 hrs ago

अम्बिकापुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 का कार्य काफी जोरो पर चल रहा है।सड़को में जगह जगह पुल पुलिया निर्माण सहित सड़क समतलीकरण के लिए सड़को पर मिट्टी भरे जा रहे हैं बलरामपुर। जिले से अम्बिकापुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 का कार्य काफी जोरो पर चल रहा है।सड़को में जगह जगह पुल पुलिया निर्माण सहित सड़क समतलीकरण के लिए सड़को पर मिट्टी भरे जा रहे हैं। नए सड़क निर्माण के दौरान सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण के दौरान डाले गए कच्चे मिट्टी के कारण उड़ रहे भारी धूल से आम जनता काफी परेशान है। राष्ट्रीय राजमार्ग 343 में बलरामपुर से अम्बिकापुर जाने वाले सड़क पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान सड़क पर डाले गए मिट्टी के कारण काफी धूल उड़ रहा है और उड़ते धूल से लोग काफी परेशान हैं।धूल के कारण लोगो को अब कई बीमारियों का सामना करना लड़ रहा है।धूल के कारण दमे सहित खांसी सर्दी व अन्य सांस से संबंधित कई बीमारी होने लगा है।उन्होंने बताया कि सड़क पर ठेकेदार द्वारा पानी का भी छिड़काव नही किया जाता है जिससे लोग काफी परेशान हैं।बारिश होने पर सड़क पर कीचड़ होने से लोगो को आवागमन में काफी परेशानी होती है।

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  • एक दूल्हा, दो दुल्हन: कोंडागांव की अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय _सामाजिक परंपरा और आपसी सहमति के साथ संपन्न हुआ विवाह, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल कोंडागांव :- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के बैलगांव में हाल ही में एक अनोखी शादी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इस विवाह में एक दूल्हे ने दो दुल्हनों के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लिए, जो आम सामाजिक परंपराओं से अलग होने के कारण चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, इस विवाह में दूल्हा और दोनों दुल्हनों की आपसी सहमति थी। पूरे रीति-रिवाज और पारंपरिक विधि-विधान के साथ यह शादी संपन्न कराई गई, जिसमें गांव के लोग भी शामिल हुए और इस अनोखे आयोजन के साक्षी बने। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि मुख्यधारा के समाज में ऐसी शादियाँ कम देखने को मिलती हैं, लेकिन कुछ आदिवासी समुदायों में परंपराओं, सामाजिक संरचना और आपसी समझ के आधार पर ऐसी प्रथाएँ कभी-कभी स्वीकार की जाती हैं। यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं—कुछ इसे परंपरा और सहमति का सम्मान मान रहे हैं, तो कुछ इसे सामान्य सामाजिक मानकों से अलग मानकर आश्चर्य जता रहे हैं। फिलहाल, यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है और सामाजिक विविधता एवं परंपराओं की एक अनोखी मिसाल पेश कर रही है।
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    एक दूल्हा, दो दुल्हन: कोंडागांव की अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय
_सामाजिक परंपरा और आपसी सहमति के साथ संपन्न हुआ विवाह, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल
कोंडागांव :- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के बैलगांव में हाल ही में एक अनोखी शादी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इस विवाह में एक दूल्हे ने दो दुल्हनों के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लिए, जो आम सामाजिक परंपराओं से अलग होने के कारण चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, इस विवाह में दूल्हा और दोनों दुल्हनों की आपसी सहमति थी। पूरे रीति-रिवाज और पारंपरिक विधि-विधान के साथ यह शादी संपन्न कराई गई, जिसमें गांव के लोग भी शामिल हुए और इस अनोखे आयोजन के साक्षी बने।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि मुख्यधारा के समाज में ऐसी शादियाँ कम देखने को मिलती हैं, लेकिन कुछ आदिवासी समुदायों में परंपराओं, सामाजिक संरचना और आपसी समझ के आधार पर ऐसी प्रथाएँ कभी-कभी स्वीकार की जाती हैं।
यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं—कुछ इसे परंपरा और सहमति का सम्मान मान रहे हैं, तो कुछ इसे सामान्य सामाजिक मानकों से अलग मानकर आश्चर्य जता रहे हैं।
फिलहाल, यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है और सामाजिक विविधता एवं परंपराओं की एक अनोखी मिसाल पेश कर रही है।
    user_रामकुमार भारद्वाज
    रामकुमार भारद्वाज
    कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • शुक्रवार दोपहर छत्तीसगढ़ के बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम जामगांव (बी) में एक 25 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान भीषम ठाकुर, पुत्र रजउराम ठाकुर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, भीषम ठाकुर ने वर्ष 2022 में प्रेम विवाह किया था। दोनों का एक 3 वर्षीय पुत्र है, जो वर्तमान में अपने नाना के पास रह रहा है। पिछले साल नवरात्रि के दौरान उनकी पत्नी ने भी आत्महत्या कर ली थी। पत्नी की मौत के बाद से भीषम ठाकुर मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे और अकेलापन व गुमसुम रहने लगा था। शुक्रवार को दोपहर करीब 3 बजे भीषम ने अपने घर के कमरे की छत में लगे टीन शेड के लोहे के एंगल में फंदा बनाकर खुद को फांसी लगा ली। शाम करीब 4:30 बजे उनके छोटे भाई को इसकी जानकारी हुई, जिसने तुरंत ग्रामीणों को सूचना दी। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर शाम 5 बजे पंचनामा के बाद शव को नीचे उतारा। घर में केवल दोनों भाई ही रहते थे। उनकी मां का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि पिता बाहर मजदूरी पर जाते हैं। पत्नी की मौत के बाद भीषम अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बालोद के मॉर्चरी में रखवाया गया है। शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। बालोद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। द छत्तीसगढ़ - सच्ची खबर, सही समय पर
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    शुक्रवार दोपहर छत्तीसगढ़ के बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम जामगांव (बी) में एक 25 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान भीषम ठाकुर, पुत्र रजउराम ठाकुर के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, भीषम ठाकुर ने वर्ष 2022 में प्रेम विवाह किया था। दोनों का एक 3 वर्षीय पुत्र है, जो वर्तमान में अपने नाना के पास रह रहा है। पिछले साल नवरात्रि के दौरान उनकी पत्नी ने भी आत्महत्या कर ली थी। पत्नी की मौत के बाद से भीषम ठाकुर मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे और अकेलापन व गुमसुम रहने लगा था।
शुक्रवार को दोपहर करीब 3 बजे भीषम ने अपने घर के कमरे की छत में लगे टीन शेड के लोहे के एंगल में फंदा बनाकर खुद को फांसी लगा ली। शाम करीब 4:30 बजे उनके छोटे भाई को इसकी जानकारी हुई, जिसने तुरंत ग्रामीणों को सूचना दी। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर शाम 5 बजे पंचनामा के बाद शव को नीचे उतारा।
घर में केवल दोनों भाई ही रहते थे। उनकी मां का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि पिता बाहर मजदूरी पर जाते हैं। पत्नी की मौत के बाद भीषम अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे।
शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बालोद के मॉर्चरी में रखवाया गया है। शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बालोद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
द छत्तीसगढ़ - सच्ची खबर, सही समय पर
    user_YOGESH KUAMR SAHU
    YOGESH KUAMR SAHU
    News Anchor बालोद, बालोद, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
  • दुर्गूकोंदल, कांकेर छत्तीसगढ़ अवैध रेत खनन के खिलाफ खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मशीन को जब्त कर दिया है। जानकारी के अनुसार, खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नियम विरुद्ध चल रहे रेत खनन पर रोक लगाई और मशीन को सील किया गया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद की गई है। विभाग द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है। हमेशा की तरह खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के खिलाफ आगे भी लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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    दुर्गूकोंदल, कांकेर छत्तीसगढ़
अवैध रेत खनन के खिलाफ खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मशीन को जब्त कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नियम विरुद्ध चल रहे रेत खनन पर रोक लगाई और मशीन को सील किया गया।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद की गई है। विभाग द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।
हमेशा की तरह खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के खिलाफ आगे भी लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
    user_डिकेश शर्मा
    डिकेश शर्मा
    संवाददाता दुर्गकोंदल, कांकेर, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • Post by AKASH singh thakur
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    Post by AKASH singh thakur
    user_AKASH singh thakur
    AKASH singh thakur
    Narayanpur, Chhattisgarh•
    23 hrs ago
  • Post by लुकेश साहू दुर्ग
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    Post by लुकेश साहू दुर्ग
    user_लुकेश साहू दुर्ग
    लुकेश साहू दुर्ग
    Court reporter दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • *बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न* भानपुरी... ​बस्तर संभाग के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार को होटल अविनाश इंटरनेशनल, धरमपुरा जगदलपुर में "निपुण भारत मिशन: नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम" पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा शिक्षा विभाग, जिला प्रशिक्षण संस्थान बस्तर और समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। ​प्रमुख उपलब्धियां और कार्यक्रम की झलकियां ​कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद जे पी रथ,सुशील राठौर, बलिराम बघेल,अशोक पाण्डेय,नितिन डड़सेना, जयंती कश्यप ,सीमा सिरोही द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बस्तर में HCL-नींव कार्यक्रम की अब तक की सफल यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री और प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। ​अनुभव साझा करना: ब्लॉक और संकुल स्तर के अधिकारियों व शिक्षकों ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों और सफलताओं को साझा किया। ​बहुभाषी शिक्षण चर्चा का मुख्य केंद्र बच्चों की घरेलू भाषा का कक्षा में महत्व रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में सीखता है, तो उसके पढ़ने और समझने की गति में आश्चर्यजनक सुधार होता है। ​रणनीतियां: कार्यशाला में 'मल्टी-ग्रेड टीचिंग' की रणनीतियों, शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभाव और भाषा शिक्षा की चार खंडीय रूपरेखा पर गहन मंथन हुआ। ​जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बलिराम बघेल ,ने कार्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर जैसे भाषाई विविधता वाले क्षेत्र में 'नींव' संवाद कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने शिक्षकों द्वारा अपनाए गए कक्षा अवलोकन टूल क्लास रूम अवलोकन और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की सराहना की, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। ​इन विषयों पर हुआ विशेष मंथन: ​कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई: ​गणित शिक्षण: बुनियादी गणित को सरल और रोचक बनाने के तरीके। ​आकलन: बच्चों के सीखने के स्तर का सटीक मूल्यांकन। ​चुनौतियां और समाधान: कक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक बाधाएं और उनके प्रभावी समाधान। ​लैंग्वेज लर्निग फाउंडेशन प्रतिनिधियों ने सभी अतिथियों, जिला शिक्षा अधिकारियों ,जिला शिक्षा मिशन समन्यवक, सहायक कार्यक्रम समन्वयक और संकुल समन्वयक शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संभाग भर के ब्लाक शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, खंड स्रोत समन्वयक और संकुल स्रोत समन्वयक ने सक्रिय सहभागिता रही सबकी अनुभव बड़े मंच में साझा किया गया ।
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    *बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न*
भानपुरी...
​बस्तर संभाग के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार को होटल अविनाश इंटरनेशनल, धरमपुरा जगदलपुर में "निपुण भारत मिशन: नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम" पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा शिक्षा विभाग, जिला प्रशिक्षण संस्थान बस्तर और समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
​प्रमुख उपलब्धियां और कार्यक्रम की झलकियां
​कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद  जे पी रथ,सुशील राठौर, बलिराम बघेल,अशोक पाण्डेय,नितिन डड़सेना,  जयंती कश्यप ,सीमा सिरोही द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बस्तर में HCL-नींव कार्यक्रम की अब तक की सफल यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री और प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
​अनुभव साझा करना: ब्लॉक और संकुल स्तर के अधिकारियों व शिक्षकों ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों और सफलताओं को साझा किया।
​बहुभाषी शिक्षण चर्चा का मुख्य केंद्र बच्चों की घरेलू भाषा का कक्षा में महत्व रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में सीखता है, तो उसके पढ़ने और समझने की गति में आश्चर्यजनक सुधार होता है।
​रणनीतियां: कार्यशाला में 'मल्टी-ग्रेड टीचिंग' की रणनीतियों, शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभाव और भाषा शिक्षा की चार खंडीय रूपरेखा पर गहन मंथन हुआ।
​जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बलिराम बघेल ,ने कार्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर जैसे भाषाई विविधता वाले क्षेत्र में 'नींव' संवाद कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने शिक्षकों द्वारा अपनाए गए कक्षा अवलोकन टूल क्लास रूम अवलोकन और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की सराहना की, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।
​इन विषयों पर हुआ विशेष मंथन:
​कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई:
​गणित शिक्षण: बुनियादी गणित को सरल और रोचक बनाने के तरीके।
​आकलन: बच्चों के सीखने के स्तर का सटीक मूल्यांकन।
​चुनौतियां और समाधान: कक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक बाधाएं और उनके प्रभावी समाधान।
​लैंग्वेज लर्निग फाउंडेशन प्रतिनिधियों ने सभी अतिथियों, जिला शिक्षा अधिकारियों ,जिला शिक्षा मिशन समन्यवक, सहायक कार्यक्रम समन्वयक और संकुल समन्वयक शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संभाग भर के ब्लाक शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, खंड स्रोत समन्वयक और संकुल स्रोत समन्वयक  ने सक्रिय सहभागिता रही सबकी अनुभव बड़े मंच में साझा किया गया ।
    user_JASKETAN SETHIYA
    JASKETAN SETHIYA
    Local News Reporter भानपुरी, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • मक्के की खेत में हो रही थी गांजे की खेती, पुलिस ने गांजे का 686 पौधा जब्त किया
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    मक्के की खेत में हो रही थी गांजे की खेती,  पुलिस ने गांजे का 686 पौधा जब्त किया
    user_रामकुमार भारद्वाज
    रामकुमार भारद्वाज
    कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • नारायणपुर कलेक्टर अबूझमाड़ के अंतिम ग्राम रेका वाया पहुंचे । यह क्षेत्र कभी नक्सलियों द्वारा संचालित पाठ शाला के लिए जान जाता इस क्षेत्र अब शासन प्रशासन छात्रावास बना रहे हैं। बच्चों को अब संविधान की शिक्षा दी जाने की कवायद तेज की गई है। नक्सलियों की सुरक्षित पनाहगाह में दस्ता देने वाले पहली कलेक्टर बन गए हैं नम्रता जैन।
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    नारायणपुर कलेक्टर अबूझमाड़ के अंतिम ग्राम रेका वाया पहुंचे । यह क्षेत्र कभी नक्सलियों द्वारा संचालित पाठ शाला के लिए जान जाता इस क्षेत्र अब शासन प्रशासन छात्रावास बना रहे हैं। बच्चों को अब संविधान की शिक्षा दी जाने की कवायद तेज की गई है। नक्सलियों की सुरक्षित पनाहगाह में दस्ता देने वाले पहली कलेक्टर बन गए हैं नम्रता जैन।
    user_AKASH singh thakur
    AKASH singh thakur
    Narayanpur, Chhattisgarh•
    23 hrs ago
  • Post by लुकेश साहू दुर्ग
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    Post by लुकेश साहू दुर्ग
    user_लुकेश साहू दुर्ग
    लुकेश साहू दुर्ग
    Court reporter दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
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