बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न *बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न* भानपुरी... बस्तर संभाग के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार को होटल अविनाश इंटरनेशनल, धरमपुरा जगदलपुर में "निपुण भारत मिशन: नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम" पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा शिक्षा विभाग, जिला प्रशिक्षण संस्थान बस्तर और समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। प्रमुख उपलब्धियां और कार्यक्रम की झलकियां कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद जे पी रथ,सुशील राठौर, बलिराम बघेल,अशोक पाण्डेय,नितिन डड़सेना, जयंती कश्यप ,सीमा सिरोही द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बस्तर में HCL-नींव कार्यक्रम की अब तक की सफल यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री और प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। अनुभव साझा करना: ब्लॉक और संकुल स्तर के अधिकारियों व शिक्षकों ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों और सफलताओं को साझा किया। बहुभाषी शिक्षण चर्चा का मुख्य केंद्र बच्चों की घरेलू भाषा का कक्षा में महत्व रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में सीखता है, तो उसके पढ़ने और समझने की गति में आश्चर्यजनक सुधार होता है। रणनीतियां: कार्यशाला में 'मल्टी-ग्रेड टीचिंग' की रणनीतियों, शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभाव और भाषा शिक्षा की चार खंडीय रूपरेखा पर गहन मंथन हुआ। जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बलिराम बघेल ,ने कार्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर जैसे भाषाई विविधता वाले क्षेत्र में 'नींव' संवाद कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने शिक्षकों द्वारा अपनाए गए कक्षा अवलोकन टूल क्लास रूम अवलोकन और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की सराहना की, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। इन विषयों पर हुआ विशेष मंथन: कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई: गणित शिक्षण: बुनियादी गणित को सरल और रोचक बनाने के तरीके। आकलन: बच्चों के सीखने के स्तर का सटीक मूल्यांकन। चुनौतियां और समाधान: कक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक बाधाएं और उनके प्रभावी समाधान। लैंग्वेज लर्निग फाउंडेशन प्रतिनिधियों ने सभी अतिथियों, जिला शिक्षा अधिकारियों ,जिला शिक्षा मिशन समन्यवक, सहायक कार्यक्रम समन्वयक और संकुल समन्वयक शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संभाग भर के ब्लाक शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, खंड स्रोत समन्वयक और संकुल स्रोत समन्वयक ने सक्रिय सहभागिता रही सबकी अनुभव बड़े मंच में साझा किया गया ।
बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न *बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न* भानपुरी... बस्तर संभाग के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार को होटल अविनाश इंटरनेशनल, धरमपुरा जगदलपुर में "निपुण भारत मिशन: नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम" पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा शिक्षा विभाग, जिला प्रशिक्षण संस्थान बस्तर और समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने हिस्सा
लिया। प्रमुख उपलब्धियां और कार्यक्रम की झलकियां कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद जे पी रथ,सुशील राठौर, बलिराम बघेल,अशोक पाण्डेय,नितिन डड़सेना, जयंती कश्यप ,सीमा सिरोही द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बस्तर में HCL-नींव कार्यक्रम की अब तक की सफल यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री और प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। अनुभव साझा करना: ब्लॉक और संकुल स्तर के अधिकारियों व शिक्षकों ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों और सफलताओं को साझा किया। बहुभाषी शिक्षण चर्चा का मुख्य केंद्र बच्चों की घरेलू भाषा का कक्षा में महत्व रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में
सीखता है, तो उसके पढ़ने और समझने की गति में आश्चर्यजनक सुधार होता है। रणनीतियां: कार्यशाला में 'मल्टी-ग्रेड टीचिंग' की रणनीतियों, शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभाव और भाषा शिक्षा की चार खंडीय रूपरेखा पर गहन मंथन हुआ। जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बलिराम बघेल ,ने कार्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर जैसे भाषाई विविधता वाले क्षेत्र में 'नींव' संवाद कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने शिक्षकों द्वारा अपनाए गए कक्षा अवलोकन टूल क्लास रूम अवलोकन और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की सराहना की, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। इन विषयों पर हुआ विशेष मंथन: कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में
निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई: गणित शिक्षण: बुनियादी गणित को सरल और रोचक बनाने के तरीके। आकलन: बच्चों के सीखने के स्तर का सटीक मूल्यांकन। चुनौतियां और समाधान: कक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक बाधाएं और उनके प्रभावी समाधान। लैंग्वेज लर्निग फाउंडेशन प्रतिनिधियों ने सभी अतिथियों, जिला शिक्षा अधिकारियों ,जिला शिक्षा मिशन समन्यवक, सहायक कार्यक्रम समन्वयक और संकुल समन्वयक शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संभाग भर के ब्लाक शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, खंड स्रोत समन्वयक और संकुल स्रोत समन्वयक ने सक्रिय सहभागिता रही सबकी अनुभव बड़े मंच में साझा किया गया ।
- *बस्तर में शिक्षा की नई अलख: 'नींव' बहुभाषी कार्यक्रम पर संभाग स्तरीय भव्य सेमिनार संपन्न* भानपुरी... बस्तर संभाग के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार को होटल अविनाश इंटरनेशनल, धरमपुरा जगदलपुर में "निपुण भारत मिशन: नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम" पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा शिक्षा विभाग, जिला प्रशिक्षण संस्थान बस्तर और समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। प्रमुख उपलब्धियां और कार्यक्रम की झलकियां कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद जे पी रथ,सुशील राठौर, बलिराम बघेल,अशोक पाण्डेय,नितिन डड़सेना, जयंती कश्यप ,सीमा सिरोही द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान बस्तर में HCL-नींव कार्यक्रम की अब तक की सफल यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री और प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। अनुभव साझा करना: ब्लॉक और संकुल स्तर के अधिकारियों व शिक्षकों ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों और सफलताओं को साझा किया। बहुभाषी शिक्षण चर्चा का मुख्य केंद्र बच्चों की घरेलू भाषा का कक्षा में महत्व रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में सीखता है, तो उसके पढ़ने और समझने की गति में आश्चर्यजनक सुधार होता है। रणनीतियां: कार्यशाला में 'मल्टी-ग्रेड टीचिंग' की रणनीतियों, शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभाव और भाषा शिक्षा की चार खंडीय रूपरेखा पर गहन मंथन हुआ। जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बलिराम बघेल ,ने कार्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर जैसे भाषाई विविधता वाले क्षेत्र में 'नींव' संवाद कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने शिक्षकों द्वारा अपनाए गए कक्षा अवलोकन टूल क्लास रूम अवलोकन और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की सराहना की, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। इन विषयों पर हुआ विशेष मंथन: कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई: गणित शिक्षण: बुनियादी गणित को सरल और रोचक बनाने के तरीके। आकलन: बच्चों के सीखने के स्तर का सटीक मूल्यांकन। चुनौतियां और समाधान: कक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक बाधाएं और उनके प्रभावी समाधान। लैंग्वेज लर्निग फाउंडेशन प्रतिनिधियों ने सभी अतिथियों, जिला शिक्षा अधिकारियों ,जिला शिक्षा मिशन समन्यवक, सहायक कार्यक्रम समन्वयक और संकुल समन्वयक शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संभाग भर के ब्लाक शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, खंड स्रोत समन्वयक और संकुल स्रोत समन्वयक ने सक्रिय सहभागिता रही सबकी अनुभव बड़े मंच में साझा किया गया ।4
- Kondagaon अनोखी शादी बनी चर्चा विषय, एक दूल्हा ने दो दुल्हन संग लिए सात फेरे, आपसी सहमति से हुईं अनोखी शादी*1
- कोंडागांव 3 दिवसीय संत समागम के पहले दिन एक भव्य शोभायात्रा और कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें संतों के सानिध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यह कार्यक्रम आध्यात्मिक माहौल में शुरू हुआ, जहाँ भजन-कीर्तन के साथ यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।1
- Post by Tokiya News1
- विभिन्न समाजों द्वारा निकाली गई भव्य रामनवमी कलश शोभायात्रा बस्तर जिला धाकड़ समाज कल्याण समिति जिला बस्तर द्वारा निकाली गई भव्य रामनवमी शोभायात्रा कलश यात्रा1
- नारायणपुर जिले के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान अंतर्गत आने वाला ग्राम बोटेर (Boter) लंबे समय से अपनी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता के कारण चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता रहा है। 27 मार्च 2026 को इसी गांव से एक गर्भवती महिला की गंभीर स्थिति की सूचना सुरक्षा बलों को प्राप्त हुई, जिसके बाद तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। इस अभियान का नेतृत्व Indo-Tibetan Border Police (ITBP) की 29वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट अनिल कुमार ने किया। कमांडेंट के निर्देशन में एक त्वरित कार्रवाई दल (QRT) को मौके के लिए रवाना किया गया, जबकि COB ओरछा में एंबुलेंस को पहले से तैयार रखा गया। जवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—दुर्गम पहाड़ी रास्ते, घने जंगल, और सड़क जैसी किसी भी सुविधा का अभाव। ऐसे में ITBP जवानों ने मौके पर ही अस्थायी स्ट्रेचर तैयार किया और गर्भवती महिला को करीब 5 किलोमीटर तक पैदल उठाकर ले गए। रास्ते में ऊबड़-खाबड़ पगडंडियां, खड़ी चढ़ाइयां और प्राकृतिक बाधाएं थीं, लेकिन जवानों के हौसले और सेवा भावना के आगे ये सभी कठिनाइयां छोटी साबित हुईं। रेस्क्यू टीम ने महिला को बोटेर और कुदमेल के बीच तय किए गए प्वाइंट तक सुरक्षित पहुंचाया, जहां पहले से मौजूद एंबुलेंस द्वारा उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ओरछा ले जाया गया। डॉक्टरों की देखरेख में समय पर इलाज मिलने से महिला और उसके नवजात शिशु दोनों सुरक्षित हैं। यह पूरा अभियान ITBP और नारायणपुर पुलिस के बेहतरीन तालमेल, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण है।1
- बलरामपुर। जिले से अम्बिकापुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 का कार्य काफी जोरो पर चल रहा है।सड़को में जगह जगह पुल पुलिया निर्माण सहित सड़क समतलीकरण के लिए सड़को पर मिट्टी भरे जा रहे हैं। नए सड़क निर्माण के दौरान सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण के दौरान डाले गए कच्चे मिट्टी के कारण उड़ रहे भारी धूल से आम जनता काफी परेशान है। राष्ट्रीय राजमार्ग 343 में बलरामपुर से अम्बिकापुर जाने वाले सड़क पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान सड़क पर डाले गए मिट्टी के कारण काफी धूल उड़ रहा है और उड़ते धूल से लोग काफी परेशान हैं।धूल के कारण लोगो को अब कई बीमारियों का सामना करना लड़ रहा है।धूल के कारण दमे सहित खांसी सर्दी व अन्य सांस से संबंधित कई बीमारी होने लगा है।उन्होंने बताया कि सड़क पर ठेकेदार द्वारा पानी का भी छिड़काव नही किया जाता है जिससे लोग काफी परेशान हैं।बारिश होने पर सड़क पर कीचड़ होने से लोगो को आवागमन में काफी परेशानी होती है।1
- एक दूल्हा, दो दुल्हन: कोंडागांव की अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय _सामाजिक परंपरा और आपसी सहमति के साथ संपन्न हुआ विवाह, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल कोंडागांव :- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के बैलगांव में हाल ही में एक अनोखी शादी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इस विवाह में एक दूल्हे ने दो दुल्हनों के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लिए, जो आम सामाजिक परंपराओं से अलग होने के कारण चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, इस विवाह में दूल्हा और दोनों दुल्हनों की आपसी सहमति थी। पूरे रीति-रिवाज और पारंपरिक विधि-विधान के साथ यह शादी संपन्न कराई गई, जिसमें गांव के लोग भी शामिल हुए और इस अनोखे आयोजन के साक्षी बने। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि मुख्यधारा के समाज में ऐसी शादियाँ कम देखने को मिलती हैं, लेकिन कुछ आदिवासी समुदायों में परंपराओं, सामाजिक संरचना और आपसी समझ के आधार पर ऐसी प्रथाएँ कभी-कभी स्वीकार की जाती हैं। यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं—कुछ इसे परंपरा और सहमति का सम्मान मान रहे हैं, तो कुछ इसे सामान्य सामाजिक मानकों से अलग मानकर आश्चर्य जता रहे हैं। फिलहाल, यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है और सामाजिक विविधता एवं परंपराओं की एक अनोखी मिसाल पेश कर रही है।4