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बारात में रुपयों की बारिश का एक कथित वीडियो सोशल !! #news बारात में रुपयों की बारिश का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। हालांकि 'Chaupal tv' वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। बता दें कि पहासू के व्यस्त अलीगढ़ अड्डे पर जिस जगह पर यह सब कुछ हुआ पुलिस पिकेट के वहां पास ही स्थित है। पिकेट पर पुलिस की तैनाती रहती है। पुलिस ने इस मामले में ऐक्शन लिया है। वायरल वीडियो के बारे में थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वीडियो की जांच करने के बाद अज़मी, जुबेर, राजू खां और एक अज्ञात समेत चार युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिस थार गाड़ी की छत पर चढ़कर नोटों की बारिश की गई उसे भी सीज कर दिया गया है।
गुरु ज्ञान
बारात में रुपयों की बारिश का एक कथित वीडियो सोशल !! #news बारात में रुपयों की बारिश का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। हालांकि 'Chaupal tv' वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। बता दें कि पहासू के व्यस्त अलीगढ़ अड्डे पर जिस जगह पर यह सब कुछ हुआ पुलिस पिकेट के वहां पास ही स्थित है। पिकेट पर पुलिस की तैनाती रहती है। पुलिस ने इस मामले में ऐक्शन लिया है। वायरल वीडियो के बारे में थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वीडियो की जांच करने के बाद अज़मी, जुबेर, राजू खां और एक अज्ञात समेत चार युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिस थार गाड़ी की छत पर चढ़कर नोटों की बारिश की गई उसे भी सीज कर दिया गया है।
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- बारात में रुपयों की बारिश का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। हालांकि 'Chaupal tv' वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। बता दें कि पहासू के व्यस्त अलीगढ़ अड्डे पर जिस जगह पर यह सब कुछ हुआ पुलिस पिकेट के वहां पास ही स्थित है। पिकेट पर पुलिस की तैनाती रहती है। पुलिस ने इस मामले में ऐक्शन लिया है। वायरल वीडियो के बारे में थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वीडियो की जांच करने के बाद अज़मी, जुबेर, राजू खां और एक अज्ञात समेत चार युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिस थार गाड़ी की छत पर चढ़कर नोटों की बारिश की गई उसे भी सीज कर दिया गया है।1
- प्रयागराज: कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन्स में प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके रिक्रूट आरक्षियों की Passing Out Parade (POP) का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार ने परेड की सलामी ली और विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट आरक्षियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने नवप्रशिक्षित आरक्षियों को संवेदनशीलता,कर्तव्यनिष्ठा,निष्पक्षता,सत्यनिष्ठा,संविधान के प्रति आस्था और जनसेवा की शपथ दिलाई। इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।1
- प्रयागराज। करछना तहसील में अवैध खनन अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुला संगठित कारोबार बन चुका है। टोंस नदी के धरवाराघाट पर बिना किसी वैध पट्टे के दिन- दहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों से बालू निकासी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई शून्य है—जिससे मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं,बल्कि एक संगठित “खनन सिंडिकेट” है जो धरवाराघाट से लेकर धरवारा साहपुर, सुलमई, इसैटा और झरियही तक अपनी पकड़ बनाए हुए है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बृजेश सिंह उर्फ चंदन, विजय प्रताप सिंह उर्फ मोहन सिंह, संजय निषाद, राम सिंह, गोरेलाल और शुभम तिवारी जैसे नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रभाव के दम पर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारों का तेजी से कटाव हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। लेकिन इन गंभीर खतरों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आरोप यहां तक हैं कि हर महीने मोटी रकम “सेटिंग” के नाम पर पहुंचाई जाती है, जिसके चलते खनन विभाग और स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बचती नजर आती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो भी इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे डराया- धमकाया जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जान से मारने तक की धमकियां दी जाती हैं। इससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या करछना में कानून का राज है या फिर खनन माफियाओं का? क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो और अवैध खनन के इस जाल को जड़ से खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर टोंस नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा।1