उज्जैन जिले की ग्राम पंचायत गोगापुर महिदपुर रोड स्थित साईं मंदिर वाली गली में स्थानीय निवासी सड़क, स्ट्रीट लाइट और पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। यह स्थिति इतनी बदतर है कि सड़क दलदल में तब्दील हो गई है और पीने के पानी के लिए लगाए गए नल स्थापना के बाद से सूखे पड़े हैं, जिसके चलते बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। निवासियों के अनुसार, गली में पिछले पाँच दिनों से पानी भरा हुआ है, जबकि स्ट्रीट लाइटें एक महीने से बंद हैं। सरकारी नल योजना के तहत नल स्थापित तो हुए, लेकिन उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं आई, जिसे 'सबसे बड़ा धोखा' बताया जा रहा है। इस संबंध में पाँच दिन पहले सरपंच प्रतिदिनी जी से बात की गई थी, जिन्होंने 'कल तक काम करवा देने' का आश्वासन दिया था। हालांकि, पाँच दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब सरपंच द्वारा यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है कि 'यह कॉलोनी अवैध है'। इस पर निवासियों ने तीखे सवाल उठाए हैं कि यदि कॉलोनी अवैध है तो चुनाव के समय वोट मांगने क्यों आए थे, संपत्ति कर क्यों लिया जाता है और शासकीय नल क्यों स्थापित किए गए? उनका स्पष्ट कहना है कि चुनाव के समय गली वैध हो जाती है, पर काम के समय अवैध बता दी जाती है। नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि बिजली, सड़क और पानी हर नागरिक का मूल अधिकार है, और इसमें न तो नगर पालिका और न ही पंचायत अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकती है।
उज्जैन जिले की ग्राम पंचायत गोगापुर महिदपुर रोड स्थित साईं मंदिर वाली गली में स्थानीय निवासी सड़क, स्ट्रीट लाइट और पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। यह स्थिति इतनी बदतर है कि सड़क दलदल में तब्दील हो गई है और पीने के पानी के लिए लगाए गए नल स्थापना के बाद से सूखे पड़े हैं, जिसके चलते बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। निवासियों के अनुसार, गली में पिछले पाँच दिनों से पानी भरा हुआ है, जबकि स्ट्रीट लाइटें एक महीने से बंद हैं। सरकारी नल योजना के तहत नल स्थापित तो हुए, लेकिन उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं आई, जिसे 'सबसे बड़ा धोखा' बताया जा रहा है। इस संबंध में पाँच दिन पहले सरपंच प्रतिदिनी जी से बात की गई थी, जिन्होंने 'कल तक काम करवा देने' का आश्वासन दिया था। हालांकि, पाँच दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब सरपंच द्वारा यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है कि 'यह कॉलोनी अवैध है'। इस पर निवासियों ने तीखे सवाल उठाए हैं कि यदि कॉलोनी अवैध है तो चुनाव के समय वोट मांगने क्यों आए थे, संपत्ति कर क्यों लिया जाता है और शासकीय नल क्यों स्थापित किए गए? उनका स्पष्ट कहना है कि चुनाव के समय गली वैध हो जाती है, पर काम के समय अवैध बता दी जाती है। नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि बिजली, सड़क और पानी हर नागरिक का मूल अधिकार है, और इसमें न तो नगर पालिका और न ही पंचायत अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकती है।
- एक अनोखी मकड़ी के बारे में बताया गया है, जिसे गांव में एक विशेष नाम से जाना जाता है। यह मकड़ी दिखने में हूबहू ऐसी लगती है, जैसे इसे लकड़ी से बनाया गया हो। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि मकड़ी की बनावट बिल्कुल लकड़ी जैसी प्रतीत होती है, मानो यह सचमुच लकड़ी की ही बनी हुई हो।1
- पन्ना की धरती से एक बार फिर बहुमूल्य हीरा मिला है। यह बेशकीमती डायमंड 11 कैरेट 19 सेंट का है, जिसकी प्राप्ति से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।1
- आगर जिले के बड़ौद स्थित ग्राम महुडिया के किसान अमरसिंह ने इंसान और पशु के बीच अटूट प्रेम का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए, अपने बचपन से पाले हुए प्रिय बेल 'श्यामा' की स्मृति में एक बारहमासी कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने खेत पर विधि-विधान से बेल और गौ माता की प्रतिमाओं की स्थापना कर पूजा-अर्चना की, जिसके बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। किसान अमरसिंह ने बताया कि उन्होंने श्यामा को बचपन से पाला था और वह उनके परिवार का एक सदस्य था, न कि केवल एक पशु। वर्षों तक साथ रहने के कारण उनके बीच गहरा आत्मीय रिश्ता बन गया था। श्यामा के निधन के बाद उसका दाह संस्कार भी पूरे धार्मिक रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया था। श्यामा की प्रथम बरसी (बारहमासी) पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने स्थापित प्रतिमाओं के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और श्यामा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूजा-अर्चना के उपरांत हुए विशाल भंडारे में सैकड़ों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की, जिससे पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, आस्था और भावुकता का माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने किसान अमरसिंह और कुण्ड के पुत्र रघुराज सिंह की इस अनूठी पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पशुओं के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और सम्मान का एक प्रेरणादायी संदेश देता है।3
- सुसनेर के मैना गांव में पुलिया पर जलकुंभी का एक बड़ा ढेर जमा हो गया है। इस जलकुंभी के ढेर के कारण, स्थानीय ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुलिया को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।1
- शाजापुर जिले की मोहन बड़ोदिया तहसील में किसानों को जमीन न मिलने और उनके हक से वंचित रहने के कारण गहरा आक्रोश और परेशानी है। मोहन बड़ोदिया तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भंवरसा के गांव डूंगरी के किसान भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं, जहाँ उन्हें अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। इस पूरे तहसील क्षेत्र के किसान अपने अधिकारों से वंचित होने के कारण लगातार चिंतित हैं।1
- आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जनरल धीरज सेठ को एक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपी है। इस अवसर पर, जनरल द्विवेदी ने जनरल धीरज सेठ की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक अनुभवी सैनिक और एक काबिल लीडर बताया है। जनरल द्विवेदी ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि जनरल धीरज सेठ के कुशल नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी शानदार परंपराओं, प्रोफेशनलिज़्म और संकल्प को बनाए रखते हुए नई ऊंचाइयों को छूएगी। उन्होंने भारतीय सेना के भविष्य पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि सेना अपनी परंपराओं से जुड़ी रहेगी, मौजूदा चुनौतियों के प्रति सतर्क रहेगी और भविष्य में आने वाली किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।1
- उज्जैन जिले की ग्राम पंचायत गोगापुर महिदपुर रोड स्थित साईं मंदिर वाली गली में स्थानीय निवासी सड़क, स्ट्रीट लाइट और पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। यह स्थिति इतनी बदतर है कि सड़क दलदल में तब्दील हो गई है और पीने के पानी के लिए लगाए गए नल स्थापना के बाद से सूखे पड़े हैं, जिसके चलते बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। निवासियों के अनुसार, गली में पिछले पाँच दिनों से पानी भरा हुआ है, जबकि स्ट्रीट लाइटें एक महीने से बंद हैं। सरकारी नल योजना के तहत नल स्थापित तो हुए, लेकिन उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं आई, जिसे 'सबसे बड़ा धोखा' बताया जा रहा है। इस संबंध में पाँच दिन पहले सरपंच प्रतिदिनी जी से बात की गई थी, जिन्होंने 'कल तक काम करवा देने' का आश्वासन दिया था। हालांकि, पाँच दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब सरपंच द्वारा यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है कि 'यह कॉलोनी अवैध है'। इस पर निवासियों ने तीखे सवाल उठाए हैं कि यदि कॉलोनी अवैध है तो चुनाव के समय वोट मांगने क्यों आए थे, संपत्ति कर क्यों लिया जाता है और शासकीय नल क्यों स्थापित किए गए? उनका स्पष्ट कहना है कि चुनाव के समय गली वैध हो जाती है, पर काम के समय अवैध बता दी जाती है। नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि बिजली, सड़क और पानी हर नागरिक का मूल अधिकार है, और इसमें न तो नगर पालिका और न ही पंचायत अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकती है।1