जयतु संस्कृतम् श्रावणी पूर्णिमा एक तिथि नहीं, त्रिवेणी है। एक ही दिन तीन पर्वों का संगम क्यों रखा गया, इसका आध्यात्मिक हेतु बड़ा सूक्ष्म है। ---------`------ १. श्रावणी उपाकर्म - आत्म-शुद्धि का पर्व उपाकर्म का अर्थ है - उप + कर्म, अर्थात् स्वयं के समीप आना, अपने मूल स्वरूप के पास लौटना। शास्त्र में इसके चार अंग कहे गये हैं - **प्रायश्चित, संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय**। काशी में ऋग्वेदी ब्राह्मण आज भी इसी विधान से इसे करते हैं। आध्यात्मिक पक्ष: • प्रायश्चित: वर्ष भर में वाणी, मन और इन्द्रियों से जो दोष हुए, उनका दशविध स्नान और हेमाद्रि संकल्प से प्रक्षालन। यह आत्म-निरीक्षण है। • संस्कार: यज्ञोपवीत परिवर्तन। यज्ञोपवीतं परमं पवित्रम् - यह केवल सूत नहीं, तीन ऋणों (देवऋण, ऋषिऋण, पितृऋण) और तीन गुणों पर नियंत्रण का संकल्प है। • स्वाध्याय: वैदिक मंत्रों की आहुति के साथ फिर से वेदाध्ययन का आरम्भ। उपाकर्म के बिना वेद पढ़ने का अधिकार नहीं मिलता। यह बुद्धि की पुनः-दीक्षा है। इसलिए कहा गया - यह शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का प्रतीक है। यह पर्व वैदिक काल से शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का प्रतीक रहा है। ### २. संस्कृत दिवस - वाक्-शुद्धि का पर्व संस्कृत दिवस हमेशा श्रावणी पूर्णिमा को ही मनाया जाता है। यह संयोग नहीं, योग है। क्यों इसी दिन? क्योंकि श्रावणी को ऋषियों के स्मरण, पूजन और समर्पण का पर्व माना जाता है। ऋषि अर्थात् मंत्र-द्रष्टा। और मंत्र का शरीर है संस्कृत। आध्यात्मिक पक्ष: संस्कृत को देववाणी इसलिए कहते हैं क्योंकि यह लौकिक भाषा नहीं, शब्द-ब्रह्म की ध्वनि-विज्ञान है। • उपाकर्म में आपने आत्म-शुद्धि की, पर शुद्ध आत्मा की अभिव्यक्ति अशुद्ध वाणी से नहीं हो सकती। • संस्कृत सम् + कृत - जो सम्यक् रूप से संस्कारित की गई हो। जैसे यज्ञोपवीत से शरीर संस्कारित, वैसे संस्कृत से वाणी संस्कारित। • इसलिए पुरातन काल से चले आ रहे इस श्रावणी पर्व का सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व है और देव-वेद वाणी के दिवस के लिए यही दिन चुना गया। संस्कृत दिवस मनाना, ऋषि-चेतना को अपनी जिह्वा पर पुनः प्रतिष्ठित करना है। ३. रक्षाबन्धन - सम्बन्ध-शुद्धि का पर्व लोक में यह भाई-बहन का पर्व है, पर इसका वेदमूल बड़ा विराट है। रक्षा + बन्धन रक्षा का अर्थ केवल बाहरी शत्रु से बचाना नहीं। अध्यात्म में रक्षा है - अपने धर्म, अपने संकल्प, अपनी पवित्रता की रक्षा। श्रावणी पूर्णिमा पर ब्राह्मण वर्ग अपनी कर्म शुद्धि के लिए उपाकर्म करते हैं और इसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है। बहन भाई की कलाई पर जो सूत्र बाँधती है, वह उसी यज्ञोपवीत का स्त्री-रूप है। • यज्ञोपवीत व्यक्ति को धर्म से बाँधता है। • रक्षासूत्र व्यक्ति को प्रेम-धर्म से बाँधता है। पुराण में रक्षासूत्र को रक्षाबन्धनं परमं पवित्रम् कहा है। यह अभिमंत्रित संकल्प है - "मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा" नहीं, बल्कि "हम एक-दूसरे के धर्म की रक्षा करेंगे।" तीनों का एकत्व - त्रिसूत्र साधना देखिये कितना सुन्दर क्रम है: उपाकर्म = आत्मा से सम्बन्ध संस्कृत दिवस = ऋषियों और वेद से सम्बन्ध रक्षाबन्धन = समाज और परिवार से सम्बन्ध एक ही दिन आपको याद दिलाया जाता है - १. अपने भीतर के ब्रह्म से पवित्र रहो (उपाकर्म) २. अपनी वाणी को ब्रह्ममय रखो (संस्कृत) ३. अपने सम्बन्धों को ब्रह्म-बन्धन बनाओ (रक्षाबन्धन) इसलिए श्रावणी पूर्णिमा पर भारतीय संस्कृति के तीन अनमोल पर्व मनाये जाते हैं। इस पूर्णिमा पर साधना क्या करें? प्रातः संकल्प स्नान के बाद एक नया यज्ञोपवीत धारण करते हुए यह भाव करें कि मैं पुराने दोषों का त्याग करता हूँ। दिन में कम से कम एक श्लोक संस्कृत में कण्ठस्थ कर उसका अर्थ चिन्तन करें। और रक्षासूत्र बंधवाते/बाँधते समय केवल लौकिक रक्षा नहीं, अपितु एक दूसरे के जीवन में धर्म बना रहे, यही प्रार्थना करें। आचार्य देवेश अवस्थी 094568 25210
जयतु संस्कृतम् श्रावणी पूर्णिमा एक तिथि नहीं, त्रिवेणी है। एक ही दिन तीन पर्वों का संगम क्यों रखा गया, इसका आध्यात्मिक हेतु बड़ा सूक्ष्म है। ---------`------ १. श्रावणी उपाकर्म - आत्म-शुद्धि का पर्व उपाकर्म का अर्थ है - उप + कर्म, अर्थात् स्वयं के समीप आना, अपने मूल स्वरूप के पास लौटना। शास्त्र में इसके चार अंग कहे गये हैं - **प्रायश्चित, संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय**। काशी में ऋग्वेदी ब्राह्मण आज भी इसी विधान से इसे करते हैं। आध्यात्मिक पक्ष: • प्रायश्चित: वर्ष भर में वाणी, मन और इन्द्रियों से जो दोष हुए, उनका दशविध स्नान और हेमाद्रि संकल्प से प्रक्षालन। यह आत्म-निरीक्षण है। • संस्कार: यज्ञोपवीत परिवर्तन। यज्ञोपवीतं परमं पवित्रम् - यह केवल सूत नहीं, तीन ऋणों (देवऋण, ऋषिऋण, पितृऋण) और तीन गुणों पर नियंत्रण का संकल्प है। • स्वाध्याय: वैदिक मंत्रों की आहुति के साथ फिर से वेदाध्ययन का आरम्भ। उपाकर्म के बिना वेद पढ़ने का अधिकार नहीं मिलता। यह बुद्धि की पुनः-दीक्षा है। इसलिए कहा गया - यह शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का प्रतीक है। यह पर्व वैदिक काल से शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का प्रतीक रहा है। ### २. संस्कृत दिवस - वाक्-शुद्धि का पर्व संस्कृत दिवस हमेशा श्रावणी पूर्णिमा को ही मनाया जाता है। यह संयोग नहीं, योग है। क्यों इसी दिन? क्योंकि श्रावणी को ऋषियों के स्मरण, पूजन और समर्पण का पर्व माना जाता है। ऋषि अर्थात् मंत्र-द्रष्टा। और मंत्र का शरीर है संस्कृत। आध्यात्मिक पक्ष: संस्कृत को देववाणी इसलिए कहते हैं क्योंकि यह लौकिक भाषा नहीं, शब्द-ब्रह्म की ध्वनि-विज्ञान है। • उपाकर्म में आपने आत्म-शुद्धि की, पर शुद्ध आत्मा की अभिव्यक्ति अशुद्ध वाणी से नहीं हो सकती। • संस्कृत सम् + कृत - जो सम्यक् रूप से संस्कारित की गई हो। जैसे यज्ञोपवीत से शरीर संस्कारित, वैसे संस्कृत से वाणी संस्कारित। • इसलिए पुरातन काल से चले आ रहे इस श्रावणी पर्व का सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व है और देव-वेद वाणी के दिवस के लिए यही दिन चुना गया। संस्कृत दिवस मनाना, ऋषि-चेतना को अपनी जिह्वा पर पुनः प्रतिष्ठित करना है। ३. रक्षाबन्धन - सम्बन्ध-शुद्धि का पर्व लोक में यह भाई-बहन का पर्व है, पर इसका वेदमूल बड़ा विराट है। रक्षा + बन्धन रक्षा का अर्थ केवल बाहरी शत्रु से बचाना नहीं। अध्यात्म में रक्षा है - अपने धर्म, अपने संकल्प, अपनी पवित्रता की रक्षा। श्रावणी पूर्णिमा पर ब्राह्मण वर्ग अपनी कर्म शुद्धि के लिए उपाकर्म करते हैं और इसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है। बहन भाई की कलाई पर जो सूत्र बाँधती है, वह उसी यज्ञोपवीत का स्त्री-रूप है। • यज्ञोपवीत व्यक्ति को धर्म से बाँधता है। • रक्षासूत्र व्यक्ति को प्रेम-धर्म से बाँधता है। पुराण में रक्षासूत्र को रक्षाबन्धनं परमं पवित्रम् कहा है। यह अभिमंत्रित संकल्प है - "मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा" नहीं, बल्कि "हम एक-दूसरे के धर्म की रक्षा करेंगे।" तीनों का एकत्व - त्रिसूत्र साधना देखिये कितना सुन्दर क्रम है: उपाकर्म = आत्मा से सम्बन्ध संस्कृत दिवस = ऋषियों और वेद से सम्बन्ध रक्षाबन्धन = समाज और परिवार से सम्बन्ध एक ही दिन आपको याद दिलाया जाता है - १. अपने भीतर के ब्रह्म से पवित्र रहो (उपाकर्म) २. अपनी वाणी को ब्रह्ममय रखो (संस्कृत) ३. अपने सम्बन्धों को ब्रह्म-बन्धन बनाओ (रक्षाबन्धन) इसलिए श्रावणी पूर्णिमा पर भारतीय संस्कृति के तीन अनमोल पर्व मनाये जाते हैं। इस पूर्णिमा पर साधना क्या करें? प्रातः संकल्प स्नान के बाद एक नया यज्ञोपवीत धारण करते हुए यह भाव करें कि मैं पुराने दोषों का त्याग करता हूँ। दिन में कम से कम एक श्लोक संस्कृत में कण्ठस्थ कर उसका अर्थ चिन्तन करें। और रक्षासूत्र बंधवाते/बाँधते समय केवल लौकिक रक्षा नहीं, अपितु एक दूसरे के जीवन में धर्म बना रहे, यही प्रार्थना करें। आचार्य देवेश अवस्थी 094568 25210
- *इटावा से बड़ी खबर* इटावा सिविल लाइन थाना क्षेत्र में पुलिस और अभियुक्त के बीच मुठभेड़ गोली लगने से छात्रा का मोबाइल छीनने वाला अभियुक्त गोली लगने से घायल हुआ अभियुक्त के पास से तमंचा कारतूस लूटा मोबाइल,बाइक बरामद हुआ1
- तलाश गुमशुदा इटावा थाना सिविल लाइन क्षेत्र की घटना एक नाबालिक लड़की हुई लापता ऑटो में बैठकर जाते दिखी सीसीटीवी कैमरों में ऑटो रिक्शा की तस्वीर हुई कैद1
- इटावा में बारिश के बीच अकीदत व एहतराम से निकला जुलूसे मुहम्मदी डीएम का इमामा पहनाकर किया इस्तकबाल सभी चौराहों पर जाम लगने के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना भी करना पड़ा जश्ने ईद मिलादुन्नबी ﷺ के मुबारक मौके पर बुधवार को इटावा शहर में जुलूसे मुहम्मदी बारिश के बीच पूरे अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। उलेमा-ए-कराम की सरपरस्ती में निकले जुलूस का आगाज मौलाना जाहिद रज़ा साहब ने झंडी दिखाकर किया। जुलूस में बड़ी संख्या में आशिकान-ए-रसूल ﷺ ने शामिल होकर नात-ए-पाक, दरूद व सलाम पेश किए। जुलूस के मौके पर अंजुमन हुसैनिया के सदर जनाब सरफराज साहब, पूर्व चेयरमैन नगरपालिका फुरकान अहमद सहित कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। जुलूस के उद्घाटन अवसर पर जिलाधिकारी इटावा शुभ्रान्त कुमार शुक्ल भी पहुंचे। अंजुमन हुसैनिया कमेटी की ओर से डीएम का इमामा पहनाकर पुरखुलूस इस्तकबाल किया गया। इस दौरान जुलूस में शामिल लोगों ने आपसी भाईचारे, अमन, सौहार्द और मोहब्बत का संदेश दिया। बारिश के बावजूद जुलूस को लेकर लोगों में उत्साह और अकीदत में कोई कमी नहीं दिखाई दी। जुलूस के रास्ते में माहौल नात-ए-पाक और दरूद व सलाम की सदाओं से गूंजता रहा। जुलूस को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। एसपी सिटी अभय नाथ त्रिपाठी, एडीएम शंशाक श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर सिंह, सीओ सिटी अवनीश कुमार सिंह, शहर कोतवाल यशवंत सिंह, स्पेशल पुलिस अधिकारी आलोक दीक्षित, आफताब खान सहित भारी पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात रहे। यह जुलूस बड़ा होने के कारण शहर के मुख्य चौराहों नौरंगाबाद, साबित गंज, तहसील, बल्देब चौराहे से पचराहे तक सुबह 9 बजे से लेकर 12 बजे तक सभी मार्गो पर जाम व अवरोध हो जाने के कारण कचहरी जाने वाले अधिवक्ताओं, वायरल मरीजों को स्टेशन व बस से जानें वाले लोगों को आज काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जहां इस मार्गों पर दुपहिया वाहन नहीं निकल पाया। लोग पैदल जाने के लिए मजबूर होना पड़ा तथा चौराहों पर पुलिस मूकदर्शक बनी रही। पुलिस अधिकारियों ने जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए मार्ग पर निगरानी बनाए रखी। प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी के बीच जुलूस शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। रजत यादव पत्रकार मो.74171970644
- jitendra Kumar manikothi kudarkot arwakatra bilok jila Auraiya1
- सड़क पर पानी भरा हुआ हमारी सरकार से यही दरखास्त है मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है रोड पर बहुत ज्यादा पानी भरा हुआ है आने-जाने बहुत ज्यादा प्रॉब्लम हो रही है ग्राम पंचायत प्रधान से कहते हैं तो वह कहता है यह हमारे नीचे काम नहीं है यह सरकार का काम है बोलता है यह प की शतक चाहिए सर विधायक बनवाएंगे कोई भी हमारी सुनवाई नहीं कर रहा है1
- लगातार बारिश से दो भाइयों के कच्चे मकान भरभराकर गिरे बाल-बाल बचा परिवार, गृहस्थी का सामान मलबे में दबा; राजस्व टीम से नुकसान का आकलन कराने की मांग अजीतमल। क्षेत्र के ग्राम फूलपुर में लगातार हो रही बारिश के चलते दो सगे भाइयों के कच्चे मकान भरभराकर गिर गए। हादसे के समय एक मकान में बुजुर्ग महिला मौजूद थी, जबकि दूसरे मकान में परिवार के सदस्य अलग कमरे में सो रहे थे। गनीमत रही कि दोनों हादसों में कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि मकानों में रखा गृहस्थी का सामान मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया। ग्राम फूलपुर निवासी राशिद खान पुत्र अब्दुल्ला खान के परिवार के सदस्य बारिश के दौरान घर में मौजूद थे। रात में परिवार के लोग बाहरी कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान अचानक कच्चे मकान की छत और दीवार भरभराकर गिर पड़ी। तेज आवाज से परिवार में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि परिवार के लोग सुरक्षित बच गए। मकान में रखा गृहस्थी का सामान मलबे में दब गया। सुबह ग्रामीणों की मदद से मलबा हटाकर सामान बाहर निकाला गया। वहीं, कुछ दूरी पर राशिद के छोटे भाई जाकिर हुसैन पुत्र अब्दुल्ला खान का कच्चा मकान भी बारिश के चलते गिर गया। मकान के मलबे में गृहस्थी का सामान, आटा चक्की, दो बक्से समेत अन्य सामान दबकर क्षतिग्रस्त हो गया। तहसीलदार अविनाश कुमार ने बताया कि बारिश से मकान गिरने की सूचना मिली है। संबंधित राजस्व कर्मचारी को मौके पर भेजकर नुकसान का आकलन कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार पीड़ित परिवार को अनुमन्य सहायता दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।1
- “क्या आप जोड़ों के दर्द और जकड़न से परेशान हैं? to aap aake hume batay 🎙️ 10 सेकंड की स्क्रिप्ट: “क्या आप जोड़ों के दर्द और जकड़न से परेशान हैं? चलने-फिरने में तकलीफ़ हो रही है? अब दर्द को नज़रअंदाज़ न करें—सही जाँच और उचित उपचार के लिए आज ही हमसे मिलें!” डॉ. ब्रजेश सुदामा लाल सविता 📍 पता: ग्राम शमशेरगंज, जिला मैनपुरी प्राथमिक विद्यालय के ठीक पीछे एवं श्रीमान ओम जी के घर के पास 📞 मोबाइल: 96917 201611
- मुवीन खलीफा साहब वीर चमन ये मोहिउद्दीन कादिरी इटावा जनपद में दिखा1