आज पूरे देश में विकास और निजी स्वार्थ के नाम पर हो रही हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है, क्योंकि यह मानव जाति को एक भयानक विनाश की ओर धकेल रहा है। 'मनुज क्रांति न्यूज़' ने इसे एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह कटाई नहीं रुकी, तो आने वाले समय में भावी पीढ़ी ऑक्सीजन के एक-एक सिलेंडर के लिए तरसेगी। एक पेड़ को तैयार होने में सालों लगते हैं, जबकि उसे चंद मिनटों में काट दिया जाता है। इसी चिंताजनक स्थिति पर समाज को झकझोरने और लोगों को जागरूक करने के लिए 'मनुज क्रांति न्यूज़' के मुख्य संवाददाता अनुज चौहान ने एक विशेष वीडियो रिपोर्ट तैयार की है। अनुज चौहान ने पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर पौधे रोपे हैं। लखनऊ से विशेष रूप से लाए गए इन पौधों को उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को समर्पित किया। इनमें प्यारी बिटिया अनाया सिंह (शिवी) के नाम मोगरा (बेला) का पौधा, धर्मपत्नी शिवानी सिंह के नाम गुड़हल का पौधा, पूजनीय पिताजी के नाम अमरूद का वृक्ष और पूजनीय माताजी के नाम औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जबकि अनुज चौहान के नाम एक सुंदर छितवन का वृक्ष रोपा गया है। यह विवरण एक नए पोस्टर में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 'मनुज क्रांति न्यूज़' ने समाज और प्रशासन से सीधी अपील करते हुए कहा है कि यह वीडियो और रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि अगर आज हम नहीं संभले, तो कल बहुत देर हो जाएगी। शहर हो या गाँव, पर्यावरण को बचाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस मुहिम से जुड़ने और यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि हम न तो पेड़ कटने देंगे और अपने हर शुभ अवसर पर परिजनों के नाम एक पौधा जरूर लगाएंगे। "सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम!" के नारे के साथ यह पोस्ट सामाजिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से है, जिसमें किसी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया गया है।
आज पूरे देश में विकास और निजी स्वार्थ के नाम पर हो रही हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है, क्योंकि यह मानव जाति को एक भयानक विनाश की ओर धकेल रहा है। 'मनुज क्रांति न्यूज़' ने इसे एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह कटाई नहीं रुकी, तो आने वाले समय में भावी पीढ़ी ऑक्सीजन के एक-एक सिलेंडर के लिए तरसेगी। एक पेड़ को तैयार होने में सालों लगते हैं, जबकि उसे चंद मिनटों में काट दिया जाता है। इसी चिंताजनक स्थिति पर समाज को झकझोरने और लोगों को जागरूक करने के लिए 'मनुज क्रांति न्यूज़' के मुख्य संवाददाता अनुज
चौहान ने एक विशेष वीडियो रिपोर्ट तैयार की है। अनुज चौहान ने पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर पौधे रोपे हैं। लखनऊ से विशेष रूप से लाए गए इन पौधों को उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को समर्पित किया। इनमें प्यारी बिटिया अनाया सिंह (शिवी) के नाम मोगरा (बेला) का पौधा, धर्मपत्नी शिवानी सिंह के नाम गुड़हल का पौधा, पूजनीय पिताजी के नाम अमरूद का वृक्ष और पूजनीय माताजी के नाम औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जबकि अनुज चौहान के नाम एक सुंदर छितवन का वृक्ष रोपा गया है। यह विवरण एक नए पोस्टर में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 'मनुज क्रांति न्यूज़'
ने समाज और प्रशासन से सीधी अपील करते हुए कहा है कि यह वीडियो और रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि अगर आज हम नहीं संभले, तो कल बहुत देर हो जाएगी। शहर हो या गाँव, पर्यावरण को बचाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस मुहिम से जुड़ने और यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि हम न तो पेड़ कटने देंगे और अपने हर शुभ अवसर पर परिजनों के नाम एक पौधा जरूर लगाएंगे। "सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम!" के नारे के साथ यह पोस्ट सामाजिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से है, जिसमें किसी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया गया है।
- जनपद उन्नाव की तहसील बीघापुर में हो रहे अवैध कब्जों को लेकर अयांश न्यूज़ के संपादक अंकित सिंह राठौड़ ने तहसील के उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तहसील क्षेत्र में अवैध खनन और अवैध कब्जों से आहत होकर, उन्होंने क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने का संकल्प लिया और इसके लिए पैदल मार्च शुरू किया। मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे अंकित सिंह राठौड़ को रास्ते में पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ने उन्हें अवैध कब्जों के मामले में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।4
- रात में एक परिवार द्वारा हाइवे पर रील बनाने का मामला सामने आया है, जिसमें पति वीडियो शूट करते हुए रील्स बना रहे हैं और उनकी पत्नी डांस कर रही हैं। इस दौरान उनकी बच्ची कमेंट्री करती हुई दिख रही है। इस घटना पर तंज कसते हुए टिप्पणी की गई है कि देशवासियों को आखिर और कितना सुख चाहिए। व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा गया है कि अगर ‘विकास’ दिखाई नहीं पड़ रहा है, तो मोटे ग्लास का चश्मा लगा लेना चाहिए, क्योंकि ‘भारत बदल नहीं रहा, बल्कि बदल गया है’। इस पूरे प्रकरण को पैसे और प्रसिद्धि पाने के लिए लोगों द्वारा हद से ज़्यादा नीचे गिरने का एक उदाहरण बताया गया है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।1
- आज पूरे देश में विकास और निजी स्वार्थ के नाम पर हो रही हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है, क्योंकि यह मानव जाति को एक भयानक विनाश की ओर धकेल रहा है। 'मनुज क्रांति न्यूज़' ने इसे एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह कटाई नहीं रुकी, तो आने वाले समय में भावी पीढ़ी ऑक्सीजन के एक-एक सिलेंडर के लिए तरसेगी। एक पेड़ को तैयार होने में सालों लगते हैं, जबकि उसे चंद मिनटों में काट दिया जाता है। इसी चिंताजनक स्थिति पर समाज को झकझोरने और लोगों को जागरूक करने के लिए 'मनुज क्रांति न्यूज़' के मुख्य संवाददाता अनुज चौहान ने एक विशेष वीडियो रिपोर्ट तैयार की है। अनुज चौहान ने पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर पौधे रोपे हैं। लखनऊ से विशेष रूप से लाए गए इन पौधों को उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को समर्पित किया। इनमें प्यारी बिटिया अनाया सिंह (शिवी) के नाम मोगरा (बेला) का पौधा, धर्मपत्नी शिवानी सिंह के नाम गुड़हल का पौधा, पूजनीय पिताजी के नाम अमरूद का वृक्ष और पूजनीय माताजी के नाम औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जबकि अनुज चौहान के नाम एक सुंदर छितवन का वृक्ष रोपा गया है। यह विवरण एक नए पोस्टर में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 'मनुज क्रांति न्यूज़' ने समाज और प्रशासन से सीधी अपील करते हुए कहा है कि यह वीडियो और रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि अगर आज हम नहीं संभले, तो कल बहुत देर हो जाएगी। शहर हो या गाँव, पर्यावरण को बचाना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस मुहिम से जुड़ने और यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि हम न तो पेड़ कटने देंगे और अपने हर शुभ अवसर पर परिजनों के नाम एक पौधा जरूर लगाएंगे। "सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम!" के नारे के साथ यह पोस्ट सामाजिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से है, जिसमें किसी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया गया है।3
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के असरेन्दा में 25 मई 2026 से एक ट्रांसफार्मर जल गया है। बताया गया है कि ट्रांसफार्मर के जल जाने के बावजूद उसे अभी तक बदला नहीं गया है। इस संबंध में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने की मांग की गई है।1
- उत्तर प्रदेश से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार का प्रयास किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट के मुताबिक, जब पीड़ित परिवार मदद के लिए थाने पहुँचा, तो पुलिस ने सहयोग करने की बजाय कथित तौर पर उन्हें ही धमकाया। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि महिला पुलिस ने बेटी को रात 12 बजे तक थाने में बिठाए रखा, जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहा था। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने मजबूरन अपना मकान बेचकर गांव छोड़ने का फैसला कर लिया है। उनके घर पर लगे एक हस्तलिखित नोटिस में स्पष्ट रूप से 'मकान बिकाऊ है' लिखा है, जिसमें परिवार ने अपनी मजबूरी और पूरी घटना का ब्योरा दिया है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जहाँ लोग भावुक होकर इसे शेयर कर रहे हैं और योगी सरकार तक पहुंचाने की अपील कर रहे हैं। एक यूजर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया, “यह योगी जी के सुशासन की लोकतांत्रिक सच्चाई है?” इस घटना ने पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था, पुलिस तंत्र और नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम लोगों में गहरा गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है।1
- Post by Guddu Rawat1
- उत्तर प्रदेश में वृक्षारोपण अभियान को लेकर एक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें पिछले 9 वर्षों में लगाए गए करोड़ों पेड़ों के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है, क्योंकि कई जगहों पर पेड़ों की जगह केवल सूखी डंडियां लगा दी गई हैं। वायरल वीडियो में एक युवक इन्हीं सूखी टहनियों जैसी वस्तुओं को दिखाते हुए, खुले मैदान जैसे इलाके में वृक्षारोपण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। हालांकि, वीडियो में किए गए इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। कुछ उपयोगकर्ता इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कई यह सवाल उठा रहे हैं कि वृक्षारोपण के लिए भारी बजट खर्च होने के बावजूद उसकी निगरानी और सत्यापन किस प्रकार किया गया। वहीं, कुछ अन्य लोग इस पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक हिस्सा भी मान रहे हैं। अब बड़ा प्रश्न यह है कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे कितने सही हैं और क्या संबंधित विभाग इसकी गहन जांच करेगा। जनता को वृक्षारोपण अभियानों की वास्तविक स्थिति और वास्तविक आंकड़े कब बताए जाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।1
- कानपुर के रामादेवी चौराहे पर उस समय हड़कंप मच गया जब कार खींचने पहुंचे फाइनेंसर और कार मालिक के बीच एक विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। देखते ही देखते सड़क एक अखाड़ा बन गई और दोनों पक्षों में जमकर लात-घूंसे व ईंट-पत्थर चलने लगे। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा बवाल पुलिस की मौजूदगी में होता रहा। यह घटनाक्रम कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद कानपुर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1