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इंदौर शहर के पूर्वी क्षेत्र में स्थित स्कीम नंबर 136 के एक इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम में सुबह तड़के भीषण आग लग गई। इस घटना के कारण शोरूम में रखे कई वाहन जलकर खाक हो गए। आग इतनी भयावह थी कि शोरूम की ऊपरी मंजिल पर रहने वाले लोग नीचे नहीं उतर पा रहे थे और आग में फंस गए थे। हालांकि, आसपास के लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए ऊपरी मंजिल पर फंसे इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुँची और आग पर काबू पाया।
पत्रकार करीम खान H. p
इंदौर शहर के पूर्वी क्षेत्र में स्थित स्कीम नंबर 136 के एक इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम में सुबह तड़के भीषण आग लग गई। इस घटना के कारण शोरूम में रखे कई वाहन जलकर खाक हो गए। आग इतनी भयावह थी कि शोरूम की ऊपरी मंजिल पर रहने वाले लोग नीचे नहीं उतर पा रहे थे और आग में फंस गए थे। हालांकि, आसपास के लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए ऊपरी मंजिल पर फंसे इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुँची और आग पर काबू पाया।
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- मध्य प्रदेश के देवास से प्रशासनिक लापरवाही और गलत तरीके से बनाए गए स्पीड ब्रेकर का एक हैरान कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला देवास के राजोद रोड पर स्थित जिला जेल के ठीक सामने का है, जहाँ बना एक स्पीड ब्रेकर अब आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। इस गलत तरीके से बने स्पीड ब्रेकर के कारण आए दिन वाहन अनबैलेंस हो रहे हैं और लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक बाइक सवार जैसे ही इस स्पीड ब्रेकर को पार करने की कोशिश करता है, उसकी बाइक अचानक अनबैलेंस हो जाती है। इस झटके से बाइक के पीछे रखी बड़ी संख्या में मछलियां सड़क पर बिखर गईं और तड़पती हुई दिखाई दीं।1
- झाबुआ में पटवारी संघ ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए घोषणा की है कि यदि निलंबन वापस नहीं लिया गया तो कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि अपनी मांगें न माने जाने पर वे कलमबंद आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिससे सभी शासकीय कार्य प्रभावित होंगे।1
- देवास जिले के नेमावर के समीप नर्मदा नदी पर स्थित हंडिया बैराज परियोजना स्थल पर हुए एक भयानक विस्फोट के बाद स्थानीय ग्रामीण प्रशासन की लीपापोती से भड़क उठे हैं। पांच पटवारी, आरआई और एनवीडीए के इंजीनियरों की एक संयुक्त जांच टीम द्वारा मौके पर किए गए मुआयने और पंचनामे को ग्रामीणों ने मात्र दिखावा करार दिया है। उनका साफ आरोप है कि प्रशासन केवल टूटी हुई छतों और चद्दरों के मुआवजे के माध्यम से इस गंभीर मामले को रफा-दफा करना चाहता है, जबकि यह सीधे तौर पर ग्रामीणों की जान को जोखिम में डालने का प्रकरण है। आक्रोशित ग्रामीणों ने तीखे सवाल दागते हुए कहा कि ठेकेदार की घोर लापरवाही के कारण आसमान से बरसे भारी पत्थर अगर छतों की बजाय घरों के आंगन में खेल रहे बच्चों या बाहर बैठे लोगों के सिर पर गिरते, तो मौके पर ही मौत निश्चित थी। उन्होंने प्रशासन पर किसी की जान जाने का इंतजार करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि रिहायशी इलाके के इतने करीब बिना किसी सुरक्षा घेरे (मफिंग) के बारूद का इस्तेमाल करना एक सुनियोजित लापरवाही है, जिसे सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए। इस पूरे मामले में ग्रामीणों को नेमावर पुलिस और स्थानीय प्रशासन का रवैया सबसे विरोधाभासी लग रहा है। जब खुद प्रशासनिक जांच टीम यह ऑन-रिकॉर्ड मान चुकी है कि भारी पत्थरों के गिरने से कुल 21 घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, तो फिर संबंधित दोषी ठेकेदार और निर्माण कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत 'लापरवाही से जान जोखिम में डालने' का आपराधिक मुकदमा (FIR) क्यों दर्ज नहीं किया जा रहा? ग्रामीणों ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि प्रशासन और पुलिस एक बड़ी निर्माण कंपनी को बचाने के लिए बैकफुट पर हैं और केवल कागजी जांच का नाटक कर रहे हैं। विभागीय जांच से पूरी तरह असंतुष्ट ग्रामीणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल चद्दरों के मुआवजे से शांत होने वाले नहीं हैं। उनका आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक ठेकेदार का ब्लास्टिंग लाइसेंस रद्द नहीं किया जाता और नेमावर थाने में गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की जाती। ग्रामीणों द्वारा दिया गया दो दिनों के भीतर उग्र धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम का अल्टीमेटम अभी भी बरकरार है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।2
- एक चौकीदार ने शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण किया है। इस मामले में, जिसने सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी थी, वही उसका अतिक्रमण करके 'रक्षक से भक्षक' बन गया है।1
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- देवास में कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में हाटपीपल्या विधायक श्री मनोज चौधरी, बागली विधायक श्री मुरली भंवरा, विभिन्न नगर परिषदों के अध्यक्षों सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, निगमायुक्त श्री दलीप कुमार, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती अंशु जावला, जिला परियोजना अधिकारी सुश्री स्मिता रावल और सुश्री इंदु भारती, सभी नगर परिषदों के मुख्य नगरपालिका अधिकारी, उपयंत्री तथा जल निगम एवं एमपीयूडीसी के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान जिले की नगरीय निकायों में अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, जिनमें जलप्रदाय, ग्रीन स्पेस और वाटर बॉडी रेज्यूवेनेशन शामिल हैं, की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। कार्यों में सामने आ रही समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर श्री सिंह ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों के अनुपालन को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा की और मासिक बैठकें आयोजित कर शासन को रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए। इस दौरान, हाटपीपल्या विधायक श्री मनोज चौधरी और बागली विधायक श्री मुरली भंवरा ने जलप्रदाय से संबंधित कुछ समस्याओं को उठाया, जिन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए एमपीयूडीसी को उनके निराकरण के लिए निर्देशित किया गया। साथ ही, वर्षा ऋतु से पूर्व इन कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया गया। नेमावर नगर परिषद अध्यक्ष श्री कृष्णगोपाल अग्रवाल, कांटाफोड़ अध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र आमोदिया, करनावद अध्यक्ष श्री परसराम पाटीदार, हाटपिपल्या अध्यक्ष श्रीमती चंद्रकांता अरुण राठौर और बागली अध्यक्ष श्रीमती सीमा कमल यादव ने भी अपनी-अपनी निकाय से संबंधित समस्याओं को कलेक्टर श्री सिंह के समक्ष रखा, जिनके समाधान के लिए उपस्थित मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्देश दिए गए।4
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