उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा 2026 के तहत सुल्तानपुर जिले में परीक्षा अत्यंत शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल में संपन्न हो रही है। सूबे में नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शासन की नीति के अनुसार, इस बार अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद के बजाय गैर-जनपदों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। सुल्तानपुर में यह परीक्षा प्रक्रिया 7, 8 और 9 जून तक विभिन्न पालियों में संचालित की जा रही है। इसी क्रम में, कटका खानपुर स्थित राम रति कॉलेज परीक्षा केंद्र का जायजा लिया गया, जहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए। प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच अभ्यर्थियों ने बड़े ही शांत वातावरण में अपनी परीक्षा दी, और परीक्षा केंद्र के बाहर व भीतर सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क नजर आए। बाराबंकी, अमेठी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर और अयोध्या आदि जिलों के अभ्यर्थियों ने अनौपचारिक बातचीत में प्रशासन की व्यवस्थाओं को बेहतर बताया। कड़ी सुरक्षा और निष्पक्ष माहौल को देखते हुए, अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार परीक्षा का परिणाम बेहद सकारात्मक और अच्छा रहेगा।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा 2026 के तहत सुल्तानपुर जिले में परीक्षा अत्यंत शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल में संपन्न हो रही है। सूबे में नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शासन की नीति के अनुसार, इस बार अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद के बजाय गैर-जनपदों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। सुल्तानपुर में यह परीक्षा प्रक्रिया 7, 8 और 9 जून तक विभिन्न पालियों में संचालित की जा रही है। इसी क्रम में, कटका खानपुर स्थित राम रति कॉलेज परीक्षा केंद्र का जायजा लिया गया, जहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए। प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच अभ्यर्थियों ने बड़े ही शांत वातावरण में अपनी परीक्षा दी, और परीक्षा केंद्र के बाहर व भीतर सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क नजर आए। बाराबंकी, अमेठी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर और अयोध्या आदि जिलों के अभ्यर्थियों ने अनौपचारिक बातचीत में प्रशासन की व्यवस्थाओं को बेहतर बताया। कड़ी सुरक्षा और निष्पक्ष माहौल को देखते हुए, अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार परीक्षा का परिणाम बेहद सकारात्मक और अच्छा रहेगा।
- उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा 2026 के तहत सुल्तानपुर जिले में परीक्षा अत्यंत शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल में संपन्न हो रही है। सूबे में नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शासन की नीति के अनुसार, इस बार अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद के बजाय गैर-जनपदों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। सुल्तानपुर में यह परीक्षा प्रक्रिया 7, 8 और 9 जून तक विभिन्न पालियों में संचालित की जा रही है। इसी क्रम में, कटका खानपुर स्थित राम रति कॉलेज परीक्षा केंद्र का जायजा लिया गया, जहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए। प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच अभ्यर्थियों ने बड़े ही शांत वातावरण में अपनी परीक्षा दी, और परीक्षा केंद्र के बाहर व भीतर सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क नजर आए। बाराबंकी, अमेठी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर और अयोध्या आदि जिलों के अभ्यर्थियों ने अनौपचारिक बातचीत में प्रशासन की व्यवस्थाओं को बेहतर बताया। कड़ी सुरक्षा और निष्पक्ष माहौल को देखते हुए, अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार परीक्षा का परिणाम बेहद सकारात्मक और अच्छा रहेगा।1
- सुल्तानपुर के दुबेपुर ब्लॉक स्थित भाईं गाँव में प्रधानमंत्री के 'जल जीवन मिशन' के तहत बनी एक करोड़ों की पानी की टंकी पिछले छह महीने से कथित तौर पर लगातार लीक हो रही है, जिससे भारी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि यह पानी की टंकी एक झरने में तब्दील हो गई है और सड़कों पर पानी बहने से वे नदियाँ जैसी दिख रही हैं, जबकि अधिकारियों की फाइलों में 'सब कुछ ठीक' बताया जा रहा है। टंकी पर तैनात गार्ड ने खुलासा किया है कि पानी रिसने की यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। गार्ड का आरोप है कि हाल ही में DDO, BDO और सचिव जैसे अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान, इंजीनियर से जुड़े लोगों द्वारा वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया गया और उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई, जिसके कारण अधिकारियों को लीकेज दिखी ही नहीं। एक वायरल वीडियो में इस लीकेज से होता विकास स्पष्ट रूप से बहता दिख रहा है, जिससे सुल्तानपुर में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिदिन 10 हजार लीटर से अधिक पानी बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और तत्काल टंकी की मरम्मत की जाए ताकि पानी की यह बर्बादी रोकी जा सके। यह खबर वायरल वीडियो और गार्ड व ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित है।1
- उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के मद्देनजर, अयोध्या परिक्षेत्र में प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। इस परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। अयोध्या परिक्षेत्र के पांच जिलों में कुल 59 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ 30,500 से अधिक अभ्यर्थी दो शिफ्टों में परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और प्रत्येक केंद्र पर मजिस्ट्रेट की तैनाती शामिल है। इसके अतिरिक्त, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बाहरी जिलों से आने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर परिवहन विभाग ने अभ्यर्थियों को बस किराए में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है। पुलिस और प्रशासन ने दोहराया है कि भर्ती परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और सुव्यवस्थित माहौल में संपन्न कराया जाएगा।1
- अयोध्या के कोतवाली नगर स्थित नया घाट चौकी क्षेत्र में पंच तेरह आश्रम अखाड़ा जानकी ट्रस्ट महल के सामने स्थित आश्रम के महाराज रामचरण दास और उनके करीबी परीक्षार्थी विवेक मिश्रा पर जानलेवा हमला किया गया है। इस हमले में हमलावरों ने विवेक मिश्रा से मोबाइल फोन और नकदी छीन ली, साथ ही दोनों को जान से मार देने की धमकी भी दी है। ग्राम चांदपुर, पोस्ट बेलसर, गोंडा निवासी विवेक मिश्रा एक परीक्षा देने प्रयागराज जाने की तैयारी में थे और रात्रि विश्राम के लिए आश्रम आए थे। सूत्रों के अनुसार, आधी रात को शौच के लिए नीचे आने पर कुछ लोगों ने लाठी-डंडों से उन पर हमला कर दिया। पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक, हमलावरों ने विवेक मिश्रा से ₹4000 और उनका मोबाइल छीन लिया। महाराज रामचरण दास ने मीडिया को बताया कि कुछ लोग उन्हें जान से मारना चाहते हैं ताकि वे आश्रम छोड़कर चले जाएँ। इस घटना के संबंध में अयोध्या कोतवाली में तहरीर दी गई है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है। जब मीडिया ने दूसरे पक्ष से उनका पक्ष जानना चाहा तो वह नहीं मिले।3
- लखनऊ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने देशवासियों से भीषण गर्मी और लू से सावधान रहने तथा अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखने की अपील की है। मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी इस पर्यावरण जन-जागरण संदेश में 'हरा-भरा भारत, खुशहाल भारत' के ध्येय वाक्य के साथ भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के लिए उठाए जा रहे कदमों का पूर्ण समर्थन किया गया है। मोर्चा ने सभी देशवासियों से आह्वान किया है कि "आओ जागें, सुबह-सुबह पेड़-पौधे अधिक लगाएं, जीवन को सुंदर बनाएं।" मोर्चा ने इस बात पर जोर दिया है कि हरा-भरा जीवन एक अनमोल रत्न है, और शुद्ध पर्यावरण, शुद्ध वायु तथा शुद्ध जल ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला हैं। उन्होंने प्राकृतिक एवं नेचुरल संसाधनों के उपयोग को सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया। इस संदर्भ में, सभी नागरिकों का कर्तव्य है कि वे एक-दूसरे को जागरूक कर पर्यावरण को शुद्ध करें, प्रदूषण को "बाय-बाय" कहकर प्लास्टिक का त्याग करें, देश को स्वच्छ, हरा-भरा और खुशहाल धरोहर बनाएं, तथा "हर घर एक पेड़, हर हाथ एक संकल्प" के भाव से काम करें। यह संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए सुंदर पर्यावरण, सुंदर धरती, हरियाली युक्त ठंडक और संतुलित मौसम को सबसे बड़ी सौगात मानता है, और सभी से मिलकर दुनिया को प्राकृतिक धरती का खूबसूरत जीवन जीने का मार्गदर्शक बनने का आग्रह करता है। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा का संकल्प है "प्रकृति बचाओ, भविष्य बनाओ", जिसका ध्येय वाक्य "सशक्त समाज, समृद्ध राष्ट्र" है। इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा के मीडिया सलाहकार लाल चंद सोनी ने आज लखनऊ से आज सुबह टाइम्स टीम, लखनऊ के सौजन्य से जारी किया। इसमें यह भी कहा गया है कि "हम शोर नहीं मचाते, काम ऐसा करते हैं कि चर्चा खुद होने लगती है।"1
- समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि चंपत राय द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण अपने आप में ही स्पष्ट नहीं है। उन्होंने चंपत राय के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं।1
- लखनऊ में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगा। दरबार में उपस्थित लोगों ने अपने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए।1
- अपना दल (एस) के 276 विधानसभा गोसाईंगंज क्षेत्र के लोकप्रिय नेता प्रमोद सिंह की प्रशंसा करते हुए, जिन्होंने निरंतर लोगों के बीच पहुँचकर उनके सुख-दुःख में अपनी पहचान बनाई है, लेखक ने एक हृदय विदारक घटना साझा की है। लेखक ने बताया कि वे अक्सर लोगों के दुःख-दर्द में शामिल होते रहते हैं, लेकिन ग्यासपुर के एक गौड़ परिवार की बेबसी, बदनसीबी, गरीबी और लाचारी ने उन्हें बहुत पीड़ा दी। इस परिवार के इकलौते युवा कमाऊ बेटे का हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था। जब लेखक शोक संवेदना व्यक्त करने गए, तो दिवंगत बेटे की पत्नी ने अपनी तीन महीने की अबोध बेटी को उनकी गोद में रख दिया। उसने बताया कि उसके सास-ससुर वृद्ध हैं, उसके दोनों देवर आँखों से दिव्यांग हैं, और उसके पास खेती की कोई जमीन भी नहीं है। महिला ने लेखक को अपने पिता समान बताते हुए यह मार्मिक प्रश्न किया, “मेरा क्या होगा?” वहाँ से आने के बाद भी महिला के सवाल लेखक के मन में लगातार गूँजते रहे। इसके तीसरे दिन, लेखक फिर उस परिवार के पास गए और पूरे परिवार को अपनाया। उन्होंने यह वचन दिया कि वे हर संकट में अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ सदैव उनके साथ खड़े रहेंगे। (ब्यूरो रिपोर्ट, दुर्गा सिंह)1