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बाराबंकी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जब शादी की रस्में पूरी होने के बाद किन्नरों के एक समूह ने दूल्हे को पहचान लिया। किन्नरों ने दावा किया कि दूल्हा स्वयं किन्नर है और उसने अपनी असली पहचान छिपाकर शादी की है। यह सुनकर माहौल तनावपूर्ण हो गया, और दूल्हा घबराकर अपने साथ आए लोगों को देखकर स्थिति से बचने की कोशिश करने लगा। इसके बाद दोनों पक्षों में अफरा-तफरी मच गई, और बारातियों ने विदाई की रस्म छोड़कर वहां से जाने का फैसला किया। घटना के बाद वहां भारी भीड़ जमा हो गई और यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
Hari parihar
बाराबंकी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जब शादी की रस्में पूरी होने के बाद किन्नरों के एक समूह ने दूल्हे को पहचान लिया। किन्नरों ने दावा किया कि दूल्हा स्वयं किन्नर है और उसने अपनी असली पहचान छिपाकर शादी की है। यह सुनकर माहौल तनावपूर्ण हो गया, और दूल्हा घबराकर अपने साथ आए लोगों को देखकर स्थिति से बचने की कोशिश करने लगा। इसके बाद दोनों पक्षों में अफरा-तफरी मच गई, और बारातियों ने विदाई की रस्म छोड़कर वहां से जाने का फैसला किया। घटना के बाद वहां भारी भीड़ जमा हो गई और यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
- Amjad SheikhBalaghat, Madhya Pradesh💣31 min ago
- Amjad SheikhBalaghat, Madhya Pradesh💣31 min ago
- लियाकत अलीShajapur, Madhya Pradesh🙏57 min ago
- User6604India👏1 hr ago
- User6604India👏1 hr ago
- User6604India👏1 hr ago
- User6604India👏1 hr ago
More news from Barabanki and nearby areas
- बाराबंकी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जब शादी की रस्में पूरी होने के बाद किन्नरों के एक समूह ने दूल्हे को पहचान लिया। किन्नरों ने दावा किया कि दूल्हा स्वयं किन्नर है और उसने अपनी असली पहचान छिपाकर शादी की है। यह सुनकर माहौल तनावपूर्ण हो गया, और दूल्हा घबराकर अपने साथ आए लोगों को देखकर स्थिति से बचने की कोशिश करने लगा। इसके बाद दोनों पक्षों में अफरा-तफरी मच गई, और बारातियों ने विदाई की रस्म छोड़कर वहां से जाने का फैसला किया। घटना के बाद वहां भारी भीड़ जमा हो गई और यह मामला चर्चा का विषय बन गया।1
- yah ladai ka Purva ka Nala hai jo ki 3 sal se aise hi pada hai machhar kide makode badbu joki barabar Nikal Raha Hai ise saaf karne wala Koi nahin Pradhan Ji Se bataya Gaya unhone kaha khud Hi saaf kar lo1
- सरकारी दावे फेल, शाहमऊ बाजार में छुट्टा जानवर बने जानलेवा संकट जिम्मेदार अधिकारी मौन सरकार की लाख कोशिशों और योजनाओं के बावजूद छुट्टा जानवरों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। तिलोई तहसील के शाहमऊ बाजार क्षेत्र में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु राहगीरों, दुकानदारों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बाजार की मुख्य सड़क पर दिनभर छुट्टा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आवागमन बाधित होता है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर इन जानवरों की वजह से गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर पंचायत, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवर किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। और तो और खेतों में घुसकर ये पशु किसानों की महीनों की मेहनत चंद मिनटों में बर्बाद कर देते हैं। मजबूरी में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, जिससे उनका जीवन और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद न तो पशु पकड़ने की व्यवस्था दुरुस्त है और न ही गौशालाओं में पर्याप्त इंतजाम। छुट्टा जानवरों की समस्या से जहां व्यापार प्रभावित हो रहा है, वहीं किसानों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर किसानों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और स्थायी समाधान किया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे और क्या किसी बड़े हादसे या किसानों के और नुकसान के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?1
- Post by Anand Lodhi4
- बाराबंकी। शहर स्थित पल्हरी के निकट नेशनल हाईवे पर ट्रक में लगी भीषण आग, चालक ने कूदकर बचाई जान, भारी जाम रूट किया गया डायवर्जन जानकारी के अनुसार अयोध्या-लखनऊ हाईवे पर पल्हरी बाईपास के पास एक चलते ट्रक में मंगलवार करीब 12:30 बजे भीषण आग लग गई। इस घटना से हाईवे पर लंबा जाम लग गया और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 18 टायरों वाला यह डंपर अयोध्या से लखनऊ की ओर जा रहा था। अचानक उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। चालक ने तुरंत ट्रक को सड़क किनारे खड़ा कर दिया और कूदकर अपनी जान बचाई।कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे ट्रक को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें दूर से दिखाई दे रही थीं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को डायवर्ट किया। आग लगने के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे भीषण जाम की स्थिति बन गई। फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्राथमिक आशंका शॉर्ट सर्किट या इंजन में तकनीकी खराबी की जताई जा रही है। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।2
- *गाजीपुर में यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारियां पूरी* 🔹 1.37 लाख छात्र 196 केंद्रों पर देंगे परीक्षा, सुरक्षा के पुख्ता इयाम #Gazipur #UPBoardExams1
- बाराबंकी में हरियाली पर आरा कुल्हाड़ी: परमिट दो पेड़ों का, कटे सत्रह-वन विभाग और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप बाराबंकी। मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम करसंडा के पास स्थित बसवाड़ी बाग में प्रतिबंधित 17 जामुन के पेड़ों की कटान ने एक बार फिर वन विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई चोरी-छिपे हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुलेआम मिलीभगत से अंजाम दिया गया हरित संहार है, जिसकी शिकायत वन प्रभागीय निदेशक तक पहुंचाई जा चुकी है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रकरण में केवल दो पेड़ों का परमिट जारी हुआ था, लेकिन उसी की आड़ में 17 पेड़ काट दिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभागीय निगरानी सचमुच मौजूद होती तो इतनी बड़ी कटान दिनदहाड़े संभव ही नहीं थी। वन दरोगा श्याम लाल ने भी स्वीकार किया कि अनुमति सिर्फ दो पेड़ों की थी—ऐसे में बाकी पेड़ों की कटान किस संरक्षण में हुई, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है। सरकार एक ओर हर साल हरियाली बढ़ाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, पौधरोपण के दावे किए जाते हैं, पर्यावरण बचाने के संदेश दिए जाते हैं-लेकिन दूसरी ओर वही विभागीय तंत्र आरा और कुल्हाड़ी को संरक्षण देता दिखे तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर धब्बा माना जाएगा। हैरानी की बात यह भी है कि इस अवैध कटान से जुड़े ठेकेदार ने खुले तौर पर कहा कि बिना पुलिस और वन विभाग की जानकारी कोई काम नहीं कराया जाता। यह बयान पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सीधा आरोप है। ग्रामीणों का दावा है कि रामनगर रेंज का हाल और भी बदतर है, जहां विभागीय सह पर रोज पेड़ों का सीना चीरा जाता है और शिकायतें फाइलों में दफन होकर रह जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की फील्ड से दूरी और कर्मचारियों की मनमानी ने वन माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में केवल खानापूरी होगी या फिर वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई कर हरियाली के कातिलों को बेनकाब किया जाएगा। जब पेड़ ही सुरक्षित नहीं, तो पर्यावरण बचाने के सरकारी दावे कितने खोखले हैं-यह घटना उसी की कड़वी मिसाल बनकर सामने आई है।1
- Post by Anand Lodhi3