सरकारी दावे फेल, शाहमऊ बाजार में छुट्टा जानवर बने जानलेवा संकट जिम्मेदार अधिकारी मौन सरकार की लाख कोशिशों और योजनाओं के बावजूद छुट्टा जानवरों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। तिलोई तहसील के शाहमऊ बाजार क्षेत्र में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु राहगीरों, दुकानदारों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बाजार की मुख्य सड़क पर दिनभर छुट्टा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आवागमन बाधित होता है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर इन जानवरों की वजह से गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर पंचायत, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवर किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। और तो और खेतों में घुसकर ये पशु किसानों की महीनों की मेहनत चंद मिनटों में बर्बाद कर देते हैं। मजबूरी में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, जिससे उनका जीवन और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद न तो पशु पकड़ने की व्यवस्था दुरुस्त है और न ही गौशालाओं में पर्याप्त इंतजाम। छुट्टा जानवरों की समस्या से जहां व्यापार प्रभावित हो रहा है, वहीं किसानों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर किसानों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और स्थायी समाधान किया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे और क्या किसी बड़े हादसे या किसानों के और नुकसान के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?
सरकारी दावे फेल, शाहमऊ बाजार में छुट्टा जानवर बने जानलेवा संकट जिम्मेदार अधिकारी मौन सरकार की लाख कोशिशों और योजनाओं के बावजूद छुट्टा जानवरों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। तिलोई तहसील के शाहमऊ बाजार क्षेत्र में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु राहगीरों, दुकानदारों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बाजार की मुख्य सड़क पर दिनभर छुट्टा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आवागमन बाधित होता है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर इन जानवरों की वजह से गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर पंचायत, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवर किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। और तो और खेतों में घुसकर ये पशु किसानों की महीनों की मेहनत चंद मिनटों में बर्बाद कर देते हैं। मजबूरी में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, जिससे उनका जीवन और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद न तो पशु पकड़ने की व्यवस्था दुरुस्त है और न ही गौशालाओं में पर्याप्त इंतजाम। छुट्टा जानवरों की समस्या से जहां व्यापार प्रभावित हो रहा है, वहीं किसानों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर किसानों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और स्थायी समाधान किया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे और क्या किसी बड़े हादसे या किसानों के और नुकसान के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?
- सरकारी दावे फेल, शाहमऊ बाजार में छुट्टा जानवर बने जानलेवा संकट जिम्मेदार अधिकारी मौन सरकार की लाख कोशिशों और योजनाओं के बावजूद छुट्टा जानवरों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। तिलोई तहसील के शाहमऊ बाजार क्षेत्र में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु राहगीरों, दुकानदारों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बाजार की मुख्य सड़क पर दिनभर छुट्टा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आवागमन बाधित होता है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर इन जानवरों की वजह से गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर पंचायत, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवर किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। और तो और खेतों में घुसकर ये पशु किसानों की महीनों की मेहनत चंद मिनटों में बर्बाद कर देते हैं। मजबूरी में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, जिससे उनका जीवन और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद न तो पशु पकड़ने की व्यवस्था दुरुस्त है और न ही गौशालाओं में पर्याप्त इंतजाम। छुट्टा जानवरों की समस्या से जहां व्यापार प्रभावित हो रहा है, वहीं किसानों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर किसानों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और स्थायी समाधान किया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे और क्या किसी बड़े हादसे या किसानों के और नुकसान के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?1
- Post by Anand Lodhi4
- बाराबंकी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जब शादी की रस्में पूरी होने के बाद किन्नरों के एक समूह ने दूल्हे को पहचान लिया। किन्नरों ने दावा किया कि दूल्हा स्वयं किन्नर है और उसने अपनी असली पहचान छिपाकर शादी की है। यह सुनकर माहौल तनावपूर्ण हो गया, और दूल्हा घबराकर अपने साथ आए लोगों को देखकर स्थिति से बचने की कोशिश करने लगा। इसके बाद दोनों पक्षों में अफरा-तफरी मच गई, और बारातियों ने विदाई की रस्म छोड़कर वहां से जाने का फैसला किया। घटना के बाद वहां भारी भीड़ जमा हो गई और यह मामला चर्चा का विषय बन गया।1
- yah ladai ka Purva ka Nala hai jo ki 3 sal se aise hi pada hai machhar kide makode badbu joki barabar Nikal Raha Hai ise saaf karne wala Koi nahin Pradhan Ji Se bataya Gaya unhone kaha khud Hi saaf kar lo1
- अमेठी में एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी के फंदे से लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना अमेठी कोतवाली क्षेत्र के परसावा गांव की है। मिली जानकारी के अनुसार गांव के बाहर स्थित एक ट्यूबवेल के पास नीम के पेड़ पर युवक का शव फंदे से लटकता हुआ देखा गया। सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर गए तो उनकी नजर पेड़ से लटक रहे शव पर पड़ी। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और मृतक के परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही अमेठी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। मृतक युवक की पहचान राम शिरोमणि यादव पुत्र श्याम बिहारी निवासी परसावा गांव के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।1
- बेजुबान मछलियों की तड़प... बवाना गांव के जोहड़ का ये मंजर देखकर आपका दिल दहल जाएगा। 😢" "प्रदूषण की मार या कुछ और? महेंद्रगढ़ के बवाना में जल जीवन खत्म होने की कगार पर।"1
- "खेती-किसानी"😃😅🤣🤪 मजेदार फनी काॅमेडी1
- Post by Anand Lodhi3