धरमजयगढ़ के केराकोना गाँव स्थित माण्ड नदी में लगातार रेत उत्खनन और उसके परिवहन की गतिविधियाँ जारी हैं, जिससे खनिज संसाधनों के संरक्षण तथा निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धरमजयगढ़ अंचल की महत्वपूर्ण जलधाराओं में से एक माण्ड नदी से निरंतर रेत निकाले जाने से इसके प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित उत्खनन से नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है और तटों के कटाव का खतरा भी बढ़ सकता है। बताया गया है कि क्षेत्र में रेत की बढ़ती माँग के कारण उत्खनन गतिविधियों में तेजी आई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते माण्ड नदी में जारी रेत उत्खनन का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो माण्ड नदी के पर्यावरणीय एवं प्राकृतिक स्वरूप पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
धरमजयगढ़ के केराकोना गाँव स्थित माण्ड नदी में लगातार रेत उत्खनन और उसके परिवहन की गतिविधियाँ जारी हैं, जिससे खनिज संसाधनों के संरक्षण तथा निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धरमजयगढ़ अंचल की महत्वपूर्ण जलधाराओं में से एक माण्ड नदी से निरंतर रेत निकाले जाने
से इसके प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित उत्खनन से नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है और तटों के कटाव का खतरा भी बढ़ सकता है। बताया गया है
कि क्षेत्र में रेत की बढ़ती माँग के कारण उत्खनन गतिविधियों में तेजी आई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते माण्ड नदी में जारी रेत उत्खनन का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का
विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो माण्ड नदी के पर्यावरणीय एवं प्राकृतिक स्वरूप पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
- धरमजयगढ़ के केराकोना गाँव स्थित माण्ड नदी में लगातार रेत उत्खनन और उसके परिवहन की गतिविधियाँ जारी हैं, जिससे खनिज संसाधनों के संरक्षण तथा निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धरमजयगढ़ अंचल की महत्वपूर्ण जलधाराओं में से एक माण्ड नदी से निरंतर रेत निकाले जाने से इसके प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित उत्खनन से नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है और तटों के कटाव का खतरा भी बढ़ सकता है। बताया गया है कि क्षेत्र में रेत की बढ़ती माँग के कारण उत्खनन गतिविधियों में तेजी आई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते माण्ड नदी में जारी रेत उत्खनन का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो माण्ड नदी के पर्यावरणीय एवं प्राकृतिक स्वरूप पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।4
- रायगढ़ पुलिस का ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और अवैध जुआ नेटवर्क के खिलाफ चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन अंकुश’ लगातार तेज होता जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के सख्त निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, धरमजयगढ़ पुलिस ने आईपीएल मैच पर ऑनलाइन सट्टा खिलाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि सट्टेबाजों का नेटवर्क जहां तक फैला है, वहां तक कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। जानकारी के अनुसार, 24 मई 2026 की रात को धरमजयगढ़ थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि वर्षों से बंद पड़े भारत टॉकीज परिसर के सामने कुछ लोग आईपीएल क्रिकेट मैच पर हार-जीत का दांव लगाकर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। इस सूचना पर थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश जांगड़े के नेतृत्व में एएसआई मंजू मिश्रा, आरक्षक विजयानंद राठिया और कमलेश केरकेट्टा की टीम ने मौके पर दबिश दी। पुलिस टीम को देखते ही मौके पर मौजूद कई लोग अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, लेकिन एक व्यक्ति को मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मनीष भौमिक (38 वर्ष) निवासी धरमजयगढ़ कॉलोनी, खरसिया रोड, थाना धरमजयगढ़, जिला रायगढ़ बताया। पुलिस ने आरोपी मनीष भौमिक के कब्जे से आईपीएल टीमों के नाम और पैसों का हिसाब लिखी सट्टा-पट्टी, नकद रुपये और एक मोबाइल फोन जब्त किया है। पुलिस अब जब्त किए गए मोबाइल की गहन जांच कर रही है, जिसमें ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क, खाईवालों और अन्य जुड़े लोगों के डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है। आरोपी मनीष भौमिक के खिलाफ थाना धरमजयगढ़ में अपराध क्रमांक 149/2026 के तहत छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 6 के अंतर्गत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। धरमजयगढ़ पुलिस ने आरोपी को धरमजयगढ़ व्यवहार न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उसे जिला जेल भेजकर न्यायिक रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सटोरियों और खाईवालों की तलाश में गंभीरता से जुटी हुई है।1
- कोरबा जिले में भारी वाहनों की अव्यवस्था को दर्शाने वाला एक वीडियो कुछ समय पहले काफी वायरल हुआ था। अब उसी स्थान पर कुछ ही दिनों के भीतर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए हैं। यह घटना उसी जगह पर हुई है, जहाँ पहले भारी वाहनों के कारण उत्पन्न अव्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे।1
- बालको पावर प्लांट में नौकरी के अवसर होने की खबर सामने आ रही है, जहाँ काम के लिए वर्करों की तत्काल आवश्यकता है। प्लांट प्रबंधन बालको पावर प्लांट में आपका स्वागत करता है।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक पत्नी अपने पति के साथ हुए विवाद के बाद घर से निकल गई। जानकारी के अनुसार, घर छोड़ने के बाद यह महिला जंगल में गई, जहाँ उसने एक "बड़ा कांड" किया। इस घटना के बारे में सुनकर लोग कांप उठे हैं और इसे बेहद भयानक बताया जा रहा है।1
- कोरबा जिले के बरपाली J स्थित राशन दुकान में भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है, जहाँ ग्रामीणों को निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक दाम पर शक्कर बेची जा रही है। शासन द्वारा शक्कर का मूल्य ₹17 प्रति किलो निर्धारित किया गया है, लेकिन दुकान में इसे ₹20 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।1
- कोरबा जिले में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने आमजनों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने उपस्थित संबंधित अधिकारियों को सभी प्राप्त शिकायतों और समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।1
- रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल में आमामुड़ा तालाब में एक हाथी शावक की मृत्यु और वनमंडल क्षेत्र में कुल तीन शावकों की मौत की घटनाओं के बाद वन विभाग ने भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक विशेष कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करना है, जिसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। वन विभाग हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों और जल स्रोतों का चिन्हांकन कर उनकी सतत निगरानी कर रहा है। विशेष रूप से ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है जहाँ छोटे हाथी शावकों के फंसने अथवा दुर्घटना होने की आशंका हो सकती है। आवश्यकतानुसार ऐसे स्थलों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएंगे ताकि हाथियों को जल स्रोतों तक सुरक्षित पहुंच मिल सके। धरमजयगढ़ के वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए आमामुड़ा तालाब में हुई हाथी शावक की मृत्यु को अत्यंत संवेदनशील एवं दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरी रात स्थिति की निगरानी की गई, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति में सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की गई। शावक की मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को सैंपल भेजे गए हैं, और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। श्री उपाध्याय ने यह भी बताया कि हाथियों के विचरण वाले संवेदनशील क्षेत्रों एवं जल स्रोतों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा, और रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर एवं वन अमले की संयुक्त टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन एवं थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे किसी भी असामान्य गतिविधि की समय पर जानकारी प्राप्त हो सके और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके। वन विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय बढ़ाकर वैज्ञानिक अध्ययन एवं निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की पहल की है। विभाग हाथियों के व्यवहार, विचरण मार्ग एवं संवेदनशील स्थलों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार कर रहा है। वनमंडलाधिकारी श्री उपाध्याय ने कहा कि वन विभाग हाथियों की सुरक्षा एवं संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर कार्य कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें तथा किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन अमले को दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। धर्मजयगढ़ वनमंडल खासकर शावक हाथियों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट हो गया है।2