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6 hrs ago
user_Ajay yadav
Ajay yadav
Video Creator डुमरांव, बक्सर, बिहार•
6 hrs ago

More news from बिहार and nearby areas
  • बक्सर चौसा बाजार जय माला के समय प्रेमिका को फिल्मी स्टाईल मे गोली मार कर प्रेमी ने एजाम दिया।
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    बक्सर चौसा बाजार जय माला के समय  प्रेमिका को फिल्मी स्टाईल मे गोली मार कर प्रेमी ने एजाम दिया।
    user_Sushil kumar sharma संपादक
    Sushil kumar sharma संपादक
    Interior designer केसाठ, बक्सर, बिहार•
    17 hrs ago
  • दिल्ली शराब नीति मामले (एक्साइज पॉलिसी केस) में लेकर हाल के समय में कानूनी कार्यवाही हुई है। यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसमें कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) द्वारा की गई थी।
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    दिल्ली शराब नीति मामले (एक्साइज पॉलिसी केस) में लेकर हाल के समय में कानूनी कार्यवाही हुई है।
यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसमें कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) द्वारा की गई थी।
    user_Ashutosh Tiwari
    Ashutosh Tiwari
    Computer Programmer Ballia, Uttar Pradesh•
    10 hrs ago
  • आरा नगर निगम बन गया है गटर निगम मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार बिहार न्यूज़ 24 आरा बिहार :- निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु
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    आरा नगर निगम बन गया है गटर निगम मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार
बिहार न्यूज़ 24 आरा बिहार :- निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु
    user_Bihar News 24
    Bihar News 24
    Journalist Bhojpur, Bihar•
    16 hrs ago
  • हरियाणा का मंजीत ने नया फ़ोन गिफ्ट किया... मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी को
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    हरियाणा का मंजीत ने नया फ़ोन गिफ्ट किया... मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी को
    user_Misty Helping Foundation
    Misty Helping Foundation
    Voice of people Garhani, Bhojpur•
    12 hrs ago
  • Nalin jaam Ho Gaya Hai Koi Sun nahin raha hai iske upar sabse shakhs kaarvayi ki jaaye Dildarnagar Gazipur Nagar Panchayat Fatehpur bajar
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    Nalin jaam Ho Gaya Hai Koi Sun nahin raha hai iske upar sabse shakhs kaarvayi ki jaaye
Dildarnagar Gazipur Nagar Panchayat Fatehpur bajar
    user_AKHILESH KUMAR KHARWAR
    AKHILESH KUMAR KHARWAR
    सेवरई, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • नगर थाना क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन भी चोरी की वारदात हुई। चोरों द्वारा फिर एक बंद घर का ताला तोड़कर नगदी और जेवर सहित लाखों का सामना उड़ा लिया गया
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    नगर थाना क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन भी चोरी की वारदात हुई। चोरों द्वारा फिर एक बंद घर का ताला तोड़कर नगदी और जेवर सहित लाखों का सामना उड़ा लिया गया
    user_Neha Gupta
    Neha Gupta
    Reporter hai reporting karte Hain आरा, भोजपुर, बिहार•
    1 hr ago
  • गया से धनबाद जा रहे सिंगर अभिषेक तहलका जी और दादा पापा साथ ही प्रत्रकार सुशील कुमार शर्मा बक्सर बिहार से
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    गया से धनबाद  जा रहे सिंगर अभिषेक तहलका जी और दादा पापा साथ  ही प्रत्रकार सुशील कुमार शर्मा बक्सर बिहार से
    user_Sushil kumar sharma संपादक
    Sushil kumar sharma संपादक
    Interior designer केसाठ, बक्सर, बिहार•
    23 hrs ago
  • गड़हनी प्रखंड मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार बिहार न्यूज़ 24 /गडहनी। गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की मौजूदा स्थिति किसी साधारण प्रशासनिक लापरवाही की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संकट का प्रतीक बन चुकी है जिसमें व्यवस्था धीरे-धीरे ढहती नजर आ रही है। सोमवार और शुक्रवार को सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनता दरबार का आयोजन नहीं होना केवल एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं, बल्कि यह आम लोगों के अधिकारों और उम्मीदों पर सीधे प्रहार जैसा साबित हो रहा है।प्रतिदिन सुबह से ही विभिन्न पंचायतों और गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचते हैं। किसी को राशन से जुड़ी शिकायत है, तो किसी को जमीन विवाद का समाधान चाहिए था, तो कोई पेंशन, आवास या प्रमाणपत्र के लिए भटक रहा है। लेकिन जैसे-जैसे कार्यालय का समय बीतता जाता, लोगों की उम्मीदें निराशा में बदलती चली जाती है। *जनता दरबार बना ‘कागजी हकीकत’* सरकार की मंशा साफ है कि जनता दरबार के माध्यम से प्रशासन सीधे लोगों की समस्याएं सुने और त्वरित समाधान दे। लेकिन गड़हनी में यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई है। सोमवार और शुक्रवार को न तो जनता दरबार की कोई तैयारी होता और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी इसे लेकर गंभीर नजर आता है। स्थानीय जनता ने बताया कि हमलोग कई बार पहले भी यहां जनता दरबार के नाम पर आए, लेकिन अक्सर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।विगद सोमवार को भी वही हुआ घंटों इंतजार, लेकिन न सुनवाई, न कोई व्यवस्था। *अधिकारी-कर्मचारियों की गैरहाजिरी ने खोली पोल* बुधवार को स्थिति तब और चिंताजनक दिखी जब दोपहर तक कई विभागो में सन्नाटा पसरा रहा। प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में दो दिनो से मौजूद नहीं रही वहीं बुधवार को दिन के 12:30 बजे कार्यालय पहुंची। इस बीच प्रतियोगी परीक्षा के फार्म भरने वाले छात्र छात्राएं ईडब्ल्यूएस, क्रिमिलेयर, जाति, आय, आवासीय बनवाने को लेकर कार्यालय का चक्कर लगाते रहे।वहीं ऋषि कुमार का कहना है कि 28 फरवरी तक रेलवे ग्रुप डी का हमे फार्म भरना है क्रिमिलेयर के लिए सोमवार से कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूँ लेकिन अभी तक नही बना।क्रिमिलेयर के अभाव मे फार्म नही भरा पा रहा है।करनौल चांदी गांव निवासी हरेराम, बलिगांव पंचायत अंतर्गत लालगंज गांव निवासी स्वर्गीय सत्यनारायण पाल के पत्नी सीता कुंअर, बडौरा पंचायत अंतर्गत शिवपुर डिहरी निवासी तपेश्वर तिवारी के पत्नी सहित दर्जनो ग्रामीण जनता ने कहा कि हमलोग पेंशन बनवाने के लिए और अन्य कई कार्यो को लेकर कई दिनो से दौड रहे हैं ना तो बीडीओ से भेंट हो रहा है और ना ही काम। कई महत्वपूर्ण कक्ष बंद पड़े मिले। कई कर्मियों की अनुपस्थिति ने आम लोगों के काम पूरी तरह ठप कर रखा है। केवल आरटीपीएस काउंटर पर कर्मी मौजूद थे, जहां लोगों की लंबी कतार लगी रही।विदित हो कि राजस्व कर्मचारियों के हडताल पर जाने के कारण पंचायत सचिवों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनके उपर कार्य की अधिकता के कारण अतिरिक्त कार्य करने मे वे सभी असमर्थता जता रहे हैं।वहीं कुछ पंचायत सचिव का कहीं अता-पता नहीं रहता। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदारियां तय होने के बावजूद निगरानी और जवाबदेही पूरी तरह नदारद है। *घोर अव्यवस्था का प्रतीक बना कार्यालय परिसर* प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रवेश करते ही जो दृश्य सामने आता है, वह प्रशासनिक संवेदनहीनता की कहानी खुद बयान करता है। सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है- गंदगी, दुर्गंध और बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा।वहीं कार्यालय के अंदर स्थित शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। वहीं कुछ लोगो का कहना है कि यहां आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। गंदगी का यह आलम केवल सफाई की कमी नहीं, बल्कि यह उस मानसिकता को दर्शाता है जहां आम नागरिक की गरिमा और सुविधा को महत्व ही नहीं दिया जा रहा। *ठप पड़ी सेवाएं, भटकते रहे लोग* पदाधिकारी व कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण कई लोग सुबह से फाइल लेकर भटकते रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। वहीं कुछ विभागो मे लोगों को बार-बार अगले दिन आने की सलाह दी जाती रही, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। उस दौरान जनता में बढ़ता आक्रोश लोगों की नाराजगी साफ तौर पर देखी जा सकती थी। कई लोगों ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही अब रोजमर्रा की बात हो गई है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना दबाव या सिफारिश के यहां काम होना बेहद मुश्किल है। इससे आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है। *जवाबदेही का अभाव-सबसे बड़ा संकट* गड़हनी प्रखंड की स्थिति यह संकेत देती है कि यहां सबसे बड़ी समस्या जवाबदेही की कमी है। जब अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं आते, जनता दरबार महज खानापूर्ति हो और कोई पूछने वाला नहीं होता, तो पूरी व्यवस्था अपने-आप ढीली पड़ जाती है। सरकार की योजनाएं कागजों पर चलती रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नहीं दिखता। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है। *स्थानीय लोगों की मांग* स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी भोजपुर एवं बिहार सरकार से मांग की है कि जनता दरबार को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।वहीं सफाई व्यवस्था को तत्काल सुधार मे लाते हुए लापरवाही पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे। *व्यवस्था सुधार की जरूरत क्यों जरूरी* प्रखंड स्तर का प्रशासन आम लोगों के लिए सरकार का सबसे नजदीकी चेहरा होता है। यहीं से लोगों को राहत, योजनाओं का लाभ और समस्याओं का समाधान मिलता है। अगर यही स्तर कमजोर पड़ जाए तो पूरी शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। गड़हनी की मौजूदा स्थिति इसी खतरे की ओर इशारा कर रही है। गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की बदहाली केवल एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से जमा हो रही प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम प्रतीत होती है। जनता दरबार का न लगना, अधिकारियों की अनुपस्थिति, गंदगी और ठप सेवाएं ये सभी संकेत हैं कि अब स्थिति सामान्य शिकायतों से आगे बढ़ चुकी है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह असंतोष बड़े जनआक्रोश में बदल सकता है। प्रशासन के लिए यह समय चेतावनी की घंटी है या तो व्यवस्था सुधारी जाए, या जनता का विश्वास पूरी तरह टूटने का जोखिम उठाया जाए।वहीं इस संबंध मे गडहनी बीडीओ अर्चना कुमारी से संपर्क किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नही उठाया गया।
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    गड़हनी प्रखंड मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार
बिहार न्यूज़ 24 /गडहनी।
गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की मौजूदा स्थिति किसी साधारण प्रशासनिक लापरवाही की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संकट का प्रतीक बन चुकी है जिसमें व्यवस्था धीरे-धीरे ढहती नजर आ रही है। सोमवार और शुक्रवार को सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनता दरबार का आयोजन नहीं होना केवल एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं, बल्कि यह आम लोगों के अधिकारों और उम्मीदों पर सीधे प्रहार जैसा साबित हो रहा है।प्रतिदिन सुबह से ही विभिन्न पंचायतों और गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचते हैं। किसी को राशन से जुड़ी शिकायत है, तो किसी को जमीन विवाद का समाधान चाहिए था, तो कोई पेंशन, आवास या प्रमाणपत्र के लिए भटक रहा है। लेकिन जैसे-जैसे कार्यालय का समय बीतता जाता, लोगों की उम्मीदें निराशा में बदलती चली जाती है।
*जनता दरबार बना ‘कागजी हकीकत’*
सरकार की मंशा साफ है कि जनता दरबार के माध्यम से प्रशासन सीधे लोगों की समस्याएं सुने और त्वरित समाधान दे। लेकिन गड़हनी में यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई है। सोमवार और शुक्रवार को न तो जनता दरबार की कोई तैयारी होता और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी इसे लेकर गंभीर नजर आता है। स्थानीय जनता ने बताया कि हमलोग कई बार पहले भी यहां जनता दरबार के नाम पर आए, लेकिन अक्सर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।विगद सोमवार को भी वही हुआ घंटों इंतजार, लेकिन न सुनवाई, न कोई व्यवस्था।
*अधिकारी-कर्मचारियों की गैरहाजिरी ने खोली पोल*
बुधवार को स्थिति तब और चिंताजनक दिखी जब दोपहर तक कई विभागो में सन्नाटा पसरा रहा। प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में दो दिनो से मौजूद नहीं रही वहीं बुधवार को दिन के 12:30 बजे कार्यालय पहुंची। इस बीच प्रतियोगी परीक्षा के फार्म भरने वाले छात्र छात्राएं ईडब्ल्यूएस, क्रिमिलेयर, जाति, आय, आवासीय बनवाने को लेकर कार्यालय का चक्कर लगाते रहे।वहीं ऋषि कुमार का कहना है कि 28 फरवरी तक रेलवे ग्रुप डी का हमे फार्म भरना है क्रिमिलेयर के लिए सोमवार से कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूँ लेकिन अभी तक नही बना।क्रिमिलेयर के अभाव मे फार्म नही भरा पा रहा है।करनौल चांदी गांव निवासी  हरेराम, बलिगांव पंचायत अंतर्गत लालगंज गांव निवासी स्वर्गीय सत्यनारायण पाल के पत्नी सीता कुंअर, बडौरा पंचायत अंतर्गत शिवपुर डिहरी निवासी तपेश्वर तिवारी के पत्नी सहित दर्जनो ग्रामीण जनता ने कहा कि हमलोग पेंशन बनवाने के लिए और अन्य कई कार्यो को लेकर कई दिनो से दौड रहे हैं ना तो बीडीओ से भेंट हो रहा है और ना ही काम। कई महत्वपूर्ण कक्ष बंद पड़े मिले। कई कर्मियों की अनुपस्थिति ने आम लोगों के काम पूरी तरह ठप कर रखा है। केवल आरटीपीएस काउंटर पर कर्मी मौजूद थे, जहां लोगों की लंबी कतार लगी रही।विदित हो कि राजस्व कर्मचारियों के हडताल पर जाने के कारण पंचायत सचिवों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनके उपर कार्य की अधिकता के कारण अतिरिक्त कार्य करने मे वे सभी असमर्थता जता रहे हैं।वहीं कुछ पंचायत सचिव का कहीं अता-पता नहीं रहता। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदारियां तय होने के बावजूद निगरानी और जवाबदेही पूरी तरह नदारद है।
*घोर अव्यवस्था का प्रतीक बना कार्यालय परिसर*
प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रवेश करते ही जो दृश्य सामने आता है, वह प्रशासनिक संवेदनहीनता की कहानी खुद बयान करता है। सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है- गंदगी, दुर्गंध और बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा।वहीं कार्यालय के अंदर स्थित शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। वहीं कुछ लोगो का कहना है कि यहां आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। गंदगी का यह आलम केवल सफाई की कमी नहीं, बल्कि यह उस मानसिकता को दर्शाता है जहां आम नागरिक की गरिमा और सुविधा को महत्व ही नहीं दिया जा रहा।
*ठप पड़ी सेवाएं, भटकते रहे लोग*
पदाधिकारी व कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण  कई लोग सुबह से फाइल लेकर भटकते रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। वहीं कुछ विभागो मे लोगों को बार-बार अगले दिन आने की सलाह दी जाती रही, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। उस दौरान जनता में बढ़ता आक्रोश लोगों की नाराजगी साफ तौर पर देखी जा सकती थी। कई लोगों ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही अब रोजमर्रा की बात हो गई है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना दबाव या सिफारिश के यहां काम होना बेहद मुश्किल है। इससे आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
*जवाबदेही का अभाव-सबसे बड़ा संकट* 
गड़हनी प्रखंड की स्थिति यह संकेत देती है कि यहां सबसे बड़ी समस्या जवाबदेही की कमी है। जब अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं आते, जनता दरबार महज खानापूर्ति हो और कोई पूछने वाला नहीं होता, तो पूरी व्यवस्था अपने-आप ढीली पड़ जाती है। सरकार की योजनाएं कागजों पर चलती रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नहीं दिखता। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है।
*स्थानीय लोगों की मांग*
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी भोजपुर एवं बिहार सरकार से मांग की है कि जनता दरबार को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।वहीं 
सफाई व्यवस्था को तत्काल सुधार मे लाते हुए 
लापरवाही पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
*व्यवस्था सुधार की जरूरत क्यों जरूरी*
प्रखंड स्तर का प्रशासन आम लोगों के लिए सरकार का सबसे नजदीकी चेहरा होता है। यहीं से लोगों को राहत, योजनाओं का लाभ और समस्याओं का समाधान मिलता है।
अगर यही स्तर कमजोर पड़ जाए तो पूरी शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। गड़हनी की मौजूदा स्थिति इसी खतरे की ओर इशारा कर रही है। गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की बदहाली केवल एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से जमा हो रही प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम प्रतीत होती है। जनता दरबार का न लगना, अधिकारियों की अनुपस्थिति, गंदगी और ठप सेवाएं ये सभी संकेत हैं कि अब स्थिति सामान्य शिकायतों से आगे बढ़ चुकी है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह असंतोष बड़े जनआक्रोश में बदल सकता है। प्रशासन के लिए यह समय चेतावनी की घंटी है या तो व्यवस्था सुधारी जाए, या जनता का विश्वास पूरी तरह टूटने का जोखिम उठाया जाए।वहीं इस संबंध मे गडहनी बीडीओ अर्चना कुमारी से संपर्क किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नही उठाया गया।
    user_Bihar News 24
    Bihar News 24
    Journalist Bhojpur, Bihar•
    17 hrs ago
  • भोजपुर जिला प्रशासन की पहल, पंचायत खेल मैदानों में ‘खेल उत्सव’ का आयोजन जिला पदाधिकारी भोजपुर, श्री तनय सुल्तानिया के निर्देशानुसार एवं उप विकास आयुक्त भोजपुर, श्रीमती गुंजन सिंह के मार्गदर्शन में आज दिनांक 27 फरवरी को भोजपुर जिला की विभिन्न पंचायतों में मनरेगा द्वारा निर्मित खेल मैदानों में खेल दिवस का आयोजन किया गया। प्रथम चरण में जिले के कुल 80 पंचायत खेल मैदानों में खेल गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस अवसर पर वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन एवं एथलेटिक्स जैसे खेलों का सफल आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण युवाओं एवं खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना, युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना तथा उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। जिला प्रशासन द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के खेल आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की योजना है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
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    भोजपुर जिला प्रशासन की पहल, पंचायत खेल मैदानों में ‘खेल उत्सव’ का आयोजन
जिला पदाधिकारी भोजपुर, श्री तनय सुल्तानिया के निर्देशानुसार एवं उप विकास आयुक्त भोजपुर, श्रीमती गुंजन सिंह के मार्गदर्शन में आज दिनांक 27 फरवरी को भोजपुर जिला की विभिन्न पंचायतों में मनरेगा द्वारा निर्मित खेल मैदानों में खेल दिवस का आयोजन किया गया।
प्रथम चरण में जिले के कुल 80 पंचायत खेल मैदानों में खेल गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस अवसर पर वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन एवं एथलेटिक्स जैसे खेलों का सफल आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण युवाओं एवं खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना, युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना तथा उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। जिला प्रशासन द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के खेल आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की योजना है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
    user_Neha Gupta
    Neha Gupta
    Reporter hai reporting karte Hain आरा, भोजपुर, बिहार•
    2 hrs ago
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