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गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया।

1 hr ago
user_Gurugram UPDATE
Gurugram UPDATE
Voice of people गुरुग्राम, गुरुग्राम, हरियाणा•
1 hr ago

गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया।

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  • गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया।
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    गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया।
    user_Gurugram UPDATE
    Gurugram UPDATE
    Voice of people गुरुग्राम, गुरुग्राम, हरियाणा•
    1 hr ago
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को लेकर एक बार फिर एक बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान को सुनकर हर कोई हैरान है।
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    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को लेकर एक बार फिर एक बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान को सुनकर हर कोई हैरान है।
    user_ATISH KUMAR
    ATISH KUMAR
    वसंत विहार, नई दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
  • नई दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी मार्केट में एमसीडी द्वारा संचालित सार्वजनिक बाथरूम बेहद गंदी और खराब हालत में है। जानकारी के अनुसार, इसकी बाहर से तो थोड़ी-बहुत साफ-सफाई कर दी जाती है, लेकिन अंदर से यह पूरी तरह से गंदा और टूटा-फूटा है, जिससे अंदर जाने पर लोगों को बहुत बुरा महसूस होता है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बावजूद, इस बाथरूम की देखरेख और साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में, यहां के पार्षदों, सांसदों, विधायकों और एमसीडी के आला अधिकारियों से इस बाथरूम को तुरंत साफ करवाने की अपील की गई है।
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    नई दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी मार्केट में एमसीडी द्वारा संचालित सार्वजनिक बाथरूम बेहद गंदी और खराब हालत में है। जानकारी के अनुसार, इसकी बाहर से तो थोड़ी-बहुत साफ-सफाई कर दी जाती है, लेकिन अंदर से यह पूरी तरह से गंदा और टूटा-फूटा है, जिससे अंदर जाने पर लोगों को बहुत बुरा महसूस होता है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बावजूद, इस बाथरूम की देखरेख और साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में, यहां के पार्षदों, सांसदों, विधायकों और एमसीडी के आला अधिकारियों से इस बाथरूम को तुरंत साफ करवाने की अपील की गई है।
    user_Ravi Kashyap
    Ravi Kashyap
    Video Creator साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने 'बीमा सखी' नामक एक विशेष योजना शुरू की है, जो 10वीं पास महिलाओं के लिए कमाई का एक शानदार अवसर प्रदान करती है। यह योजना उन महिलाओं के लिए फायदेमंद है जो घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना चाहती हैं। इसमें महिलाओं को न केवल बीमा क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है, बल्कि उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण के साथ मासिक स्टाइपेंड भी दिया जाता है। इस योजना से जुड़ने के लिए ग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट होना अनिवार्य नहीं है, जिससे यह विशेष रूप से 10वीं पास महिलाओं के लिए सुलभ हो जाती है। 'बीमा सखी' बनने के लिए आवेदक की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए, और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है। यह योजना खासतौर पर उन महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो अपने स्थानीय क्षेत्र में रहकर ही काम करना चाहती हैं। चयनित महिलाओं को बीमा से संबंधित जानकारी लोगों तक पहुंचाने, विभिन्न बीमा योजनाओं के बारे में बताने और नई पॉलिसियां करवाने में मदद करने का कार्य सौंपा जाता है। इस कार्य के लिए उन्हें पहले पूरी ट्रेनिंग दी जाती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें शुरुआती तीन साल तक हर महीने स्टाइपेंड प्रदान किया जाता है, जिसकी राशि 7000 रुपये तक हो सकती है।
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    भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने 'बीमा सखी' नामक एक विशेष योजना शुरू की है, जो 10वीं पास महिलाओं के लिए कमाई का एक शानदार अवसर प्रदान करती है। यह योजना उन महिलाओं के लिए फायदेमंद है जो घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना चाहती हैं। इसमें महिलाओं को न केवल बीमा क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है, बल्कि उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण के साथ मासिक स्टाइपेंड भी दिया जाता है।

इस योजना से जुड़ने के लिए ग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट होना अनिवार्य नहीं है, जिससे यह विशेष रूप से 10वीं पास महिलाओं के लिए सुलभ हो जाती है। 'बीमा सखी' बनने के लिए आवेदक की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए, और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है। यह योजना खासतौर पर उन महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो अपने स्थानीय क्षेत्र में रहकर ही काम करना चाहती हैं।

चयनित महिलाओं को बीमा से संबंधित जानकारी लोगों तक पहुंचाने, विभिन्न बीमा योजनाओं के बारे में बताने और नई पॉलिसियां करवाने में मदद करने का कार्य सौंपा जाता है। इस कार्य के लिए उन्हें पहले पूरी ट्रेनिंग दी जाती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें शुरुआती तीन साल तक हर महीने स्टाइपेंड प्रदान किया जाता है, जिसकी राशि 7000 रुपये तक हो सकती है।
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Vasant Vihar, New Delhi•
    5 hrs ago
  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार इस परियोजना को ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और रक्षा परियोजना के रूप में पेश कर रही है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य एक बड़े कारोबारी को लाभ पहुँचाना है। राहुल गांधी ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया जाने के बावजूद देश की विरासत को बर्बाद करने वाला करार दिया। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो में, जो उनके अप्रैल में किए गए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दौरे पर आधारित है, राहुल गांधी ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना से पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। इसमें पेड़ों की कटाई और कोरल रीफ को क्षति पहुँचेगी, साथ ही इलाके में रहने वाले जनजातीय समुदायों को विस्थापित होना पड़ेगा। उनका आरोप है कि सरकार रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देकर अपने असली मकसद को छिपाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस भारतीय नौसेना के आईएनएस बाज़ बेस के विस्तार का पूरी तरह समर्थन करती है, क्योंकि यह सुरक्षा के लिए आवश्यक है और नौसेना कई सालों से इसकी मांग कर रही है। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि ऐसी परियोजना में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनाने की जरूरत पर जोर दे रही है जब देश में पहले से ही इंटरनेशनल सी-पोर्ट विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे और कई महत्वपूर्ण कोरल रीफ्स को आधिकारिक दस्तावेजों से हटा दिया गया है। निकोबार के उन समुदायों को भी वहाँ से हटाया जाएगा जिन्हें कभी भारत सरकार ने बसाया था, ताकि वहाँ होटल, कैसीनो और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट बनाए जा सकें। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि ग्रेट निकोबार भारत के सबसे संवेदनशील और समृद्ध क्षेत्रों में से एक है, लेकिन इस परियोजना से समुद्री जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति को भारी नुकसान पहुँचेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ग्रेट निकोबार को नष्ट करने के बजाय इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जाए।
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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार इस परियोजना को ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और रक्षा परियोजना के रूप में पेश कर रही है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य एक बड़े कारोबारी को लाभ पहुँचाना है। राहुल गांधी ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया जाने के बावजूद देश की विरासत को बर्बाद करने वाला करार दिया।

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो में, जो उनके अप्रैल में किए गए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दौरे पर आधारित है, राहुल गांधी ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना से पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। इसमें पेड़ों की कटाई और कोरल रीफ को क्षति पहुँचेगी, साथ ही इलाके में रहने वाले जनजातीय समुदायों को विस्थापित होना पड़ेगा। उनका आरोप है कि सरकार रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देकर अपने असली मकसद को छिपाने की कोशिश कर रही है।

राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस भारतीय नौसेना के आईएनएस बाज़ बेस के विस्तार का पूरी तरह समर्थन करती है, क्योंकि यह सुरक्षा के लिए आवश्यक है और नौसेना कई सालों से इसकी मांग कर रही है। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि ऐसी परियोजना में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनाने की जरूरत पर जोर दे रही है जब देश में पहले से ही इंटरनेशनल सी-पोर्ट विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे और कई महत्वपूर्ण कोरल रीफ्स को आधिकारिक दस्तावेजों से हटा दिया गया है। निकोबार के उन समुदायों को भी वहाँ से हटाया जाएगा जिन्हें कभी भारत सरकार ने बसाया था, ताकि वहाँ होटल, कैसीनो और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट बनाए जा सकें। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि ग्रेट निकोबार भारत के सबसे संवेदनशील और समृद्ध क्षेत्रों में से एक है, लेकिन इस परियोजना से समुद्री जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति को भारी नुकसान पहुँचेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ग्रेट निकोबार को नष्ट करने के बजाय इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जाए।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    6 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक सोसाइटी की 12वीं मंजिल पर आग लगने की घटना सामने आई है। इस आग को बुझाने के लिए मौके पर पहुँची फायर ब्रिगेड के पास पर्याप्त इंतज़ाम नहीं थे, जिसमें सबसे प्रमुख कमी 12वीं मंजिल तक पहुँचने और आग बुझाने के लिए आवश्यक सीढ़ी का न होना था। इस घटना के बाद बीजेपी सरकार पर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर जान बचाने वाली फायर ब्रिगेड जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को मज़बूत क्यों नहीं किया जा रहा है और लोगों की जान बचाने के समय भी व्यवस्था इतनी लाचार क्यों नज़र आती है।
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    उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक सोसाइटी की 12वीं मंजिल पर आग लगने की घटना सामने आई है। इस आग को बुझाने के लिए मौके पर पहुँची फायर ब्रिगेड के पास पर्याप्त इंतज़ाम नहीं थे, जिसमें सबसे प्रमुख कमी 12वीं मंजिल तक पहुँचने और आग बुझाने के लिए आवश्यक सीढ़ी का न होना था। इस घटना के बाद बीजेपी सरकार पर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर जान बचाने वाली फायर ब्रिगेड जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को मज़बूत क्यों नहीं किया जा रहा है और लोगों की जान बचाने के समय भी व्यवस्था इतनी लाचार क्यों नज़र आती है।
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    Court reporter द्वारका, दक्षिण पश्चिम दिल्ली, दिल्ली•
    11 hrs ago
  • देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
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    देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं।

यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है।

मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    11 hrs ago
  • आम निवेशकों के लिए राजेश एक्सपोर्ट्स की अनियमितताएँ चौंकाने वाली हैं, जहाँ ₹3,000 करोड़ की मार्केट कैप वाली कंपनी पर ₹15 लाख करोड़ के हेरफेर का आरोप है। बाजार नियामक SEBI ने जून 2026 में कंपनी और उसके CMD राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस बड़े accounting fraud का खुलासा हुआ है। यह ₹15 लाख करोड़ की राशि भारत के कुल सालाना एक्सपोर्ट के लगभग 20 फीसदी के बराबर है। यह मामला बैंकों से पैसा लेकर भागने का नहीं, बल्कि लेखांकन में हेराफेरी का है। सेबी की गहन जांच में सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, जो मुख्य रूप से सोने की रिफाइनिंग और ज्वेलरी के व्यवसाय में है और जिसके शेयरों में गुरुवार को 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा, ने वर्षों तक एक सुनियोजित खेल खेला। कंपनी कागजों पर हर साल ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कारोबार दिखा रही थी, जबकि असल में सोने के बिजनेस में मार्जिन बहुत कम 0.5% से 1% तक ही होता है। सेबी ने पाया कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 तक, यानी पाँच साल की अवधि में, कंपनी ने अपनी वित्तीय रिपोर्टों में भारी गड़बड़ी की है। ₹15 लाख करोड़ की यह राशि कोई अचानक गायब हुई नकदी नहीं है, बल्कि पिछले पाँच वर्षों में दिखाए गए कुल अर्जित राजस्व का लगभग 99.8% है, जिसे सेबी ने अपनी जांच के बाद फर्जी और भ्रामक घोषित किया है। जांच में पाया गया कि ये आंकड़े केवल कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे, और वास्तविक बिक्री नहीं हुई थी। सेबी और फोरेंसिक ऑडिटर BDO India की जांच के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन भ्रामक आंकड़ों को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए, जो इस पूरे खेल में कंपनी के 'बेहद शातिर दिमाग' का संकेत देते हैं।
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    आम निवेशकों के लिए राजेश एक्सपोर्ट्स की अनियमितताएँ चौंकाने वाली हैं, जहाँ ₹3,000 करोड़ की मार्केट कैप वाली कंपनी पर ₹15 लाख करोड़ के हेरफेर का आरोप है। बाजार नियामक SEBI ने जून 2026 में कंपनी और उसके CMD राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस बड़े accounting fraud का खुलासा हुआ है। यह ₹15 लाख करोड़ की राशि भारत के कुल सालाना एक्सपोर्ट के लगभग 20 फीसदी के बराबर है।

यह मामला बैंकों से पैसा लेकर भागने का नहीं, बल्कि लेखांकन में हेराफेरी का है। सेबी की गहन जांच में सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, जो मुख्य रूप से सोने की रिफाइनिंग और ज्वेलरी के व्यवसाय में है और जिसके शेयरों में गुरुवार को 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा, ने वर्षों तक एक सुनियोजित खेल खेला। कंपनी कागजों पर हर साल ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कारोबार दिखा रही थी, जबकि असल में सोने के बिजनेस में मार्जिन बहुत कम 0.5% से 1% तक ही होता है। सेबी ने पाया कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 तक, यानी पाँच साल की अवधि में, कंपनी ने अपनी वित्तीय रिपोर्टों में भारी गड़बड़ी की है।

₹15 लाख करोड़ की यह राशि कोई अचानक गायब हुई नकदी नहीं है, बल्कि पिछले पाँच वर्षों में दिखाए गए कुल अर्जित राजस्व का लगभग 99.8% है, जिसे सेबी ने अपनी जांच के बाद फर्जी और भ्रामक घोषित किया है। जांच में पाया गया कि ये आंकड़े केवल कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे, और वास्तविक बिक्री नहीं हुई थी। सेबी और फोरेंसिक ऑडिटर BDO India की जांच के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन भ्रामक आंकड़ों को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए, जो इस पूरे खेल में कंपनी के 'बेहद शातिर दिमाग' का संकेत देते हैं।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    9 hrs ago
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