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देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।

3 hrs ago
user_Vipin Singh
Vipin Singh
Delhi Cantonment, New Delhi•
3 hrs ago

देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।

  • user_Sapna Chandpuriya
    Sapna Chandpuriya
    Chhindwara, Madhya Pradesh
    lagwana h ji radhe radhe
    47 min ago
  • user_Roshan Paswan
    Roshan Paswan
    Medininagar(Daltonganj), Palamu
    🙏
    1 hr ago
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  • आम निवेशकों के लिए राजेश एक्सपोर्ट्स की अनियमितताएँ चौंकाने वाली हैं, जहाँ ₹3,000 करोड़ की मार्केट कैप वाली कंपनी पर ₹15 लाख करोड़ के हेरफेर का आरोप है। बाजार नियामक SEBI ने जून 2026 में कंपनी और उसके CMD राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस बड़े accounting fraud का खुलासा हुआ है। यह ₹15 लाख करोड़ की राशि भारत के कुल सालाना एक्सपोर्ट के लगभग 20 फीसदी के बराबर है। यह मामला बैंकों से पैसा लेकर भागने का नहीं, बल्कि लेखांकन में हेराफेरी का है। सेबी की गहन जांच में सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, जो मुख्य रूप से सोने की रिफाइनिंग और ज्वेलरी के व्यवसाय में है और जिसके शेयरों में गुरुवार को 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा, ने वर्षों तक एक सुनियोजित खेल खेला। कंपनी कागजों पर हर साल ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कारोबार दिखा रही थी, जबकि असल में सोने के बिजनेस में मार्जिन बहुत कम 0.5% से 1% तक ही होता है। सेबी ने पाया कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 तक, यानी पाँच साल की अवधि में, कंपनी ने अपनी वित्तीय रिपोर्टों में भारी गड़बड़ी की है। ₹15 लाख करोड़ की यह राशि कोई अचानक गायब हुई नकदी नहीं है, बल्कि पिछले पाँच वर्षों में दिखाए गए कुल अर्जित राजस्व का लगभग 99.8% है, जिसे सेबी ने अपनी जांच के बाद फर्जी और भ्रामक घोषित किया है। जांच में पाया गया कि ये आंकड़े केवल कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे, और वास्तविक बिक्री नहीं हुई थी। सेबी और फोरेंसिक ऑडिटर BDO India की जांच के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन भ्रामक आंकड़ों को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए, जो इस पूरे खेल में कंपनी के 'बेहद शातिर दिमाग' का संकेत देते हैं।
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    आम निवेशकों के लिए राजेश एक्सपोर्ट्स की अनियमितताएँ चौंकाने वाली हैं, जहाँ ₹3,000 करोड़ की मार्केट कैप वाली कंपनी पर ₹15 लाख करोड़ के हेरफेर का आरोप है। बाजार नियामक SEBI ने जून 2026 में कंपनी और उसके CMD राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस बड़े accounting fraud का खुलासा हुआ है। यह ₹15 लाख करोड़ की राशि भारत के कुल सालाना एक्सपोर्ट के लगभग 20 फीसदी के बराबर है।

यह मामला बैंकों से पैसा लेकर भागने का नहीं, बल्कि लेखांकन में हेराफेरी का है। सेबी की गहन जांच में सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, जो मुख्य रूप से सोने की रिफाइनिंग और ज्वेलरी के व्यवसाय में है और जिसके शेयरों में गुरुवार को 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा, ने वर्षों तक एक सुनियोजित खेल खेला। कंपनी कागजों पर हर साल ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कारोबार दिखा रही थी, जबकि असल में सोने के बिजनेस में मार्जिन बहुत कम 0.5% से 1% तक ही होता है। सेबी ने पाया कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 तक, यानी पाँच साल की अवधि में, कंपनी ने अपनी वित्तीय रिपोर्टों में भारी गड़बड़ी की है।

₹15 लाख करोड़ की यह राशि कोई अचानक गायब हुई नकदी नहीं है, बल्कि पिछले पाँच वर्षों में दिखाए गए कुल अर्जित राजस्व का लगभग 99.8% है, जिसे सेबी ने अपनी जांच के बाद फर्जी और भ्रामक घोषित किया है। जांच में पाया गया कि ये आंकड़े केवल कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे, और वास्तविक बिक्री नहीं हुई थी। सेबी और फोरेंसिक ऑडिटर BDO India की जांच के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन भ्रामक आंकड़ों को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए, जो इस पूरे खेल में कंपनी के 'बेहद शातिर दिमाग' का संकेत देते हैं।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
  • देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
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    देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं।

यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है।

मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    3 hrs ago
  • दक्षिण दिल्ली के शाहपुर जाट इलाके में एक व्यक्ति शराब के नशे में धुत होकर स्थानीय लोगों को लगातार परेशान कर रहा है। यह व्यक्ति मूल रूप से साबुन डिकर में रहता है और हमेशा दारू के नशे में रहता है, जिसकी वजह से वह रेहड़ी-पटरी वालों, दुकानदारों, ऑटो चालकों और अधीक्षक चालक वालों को लगातार परेशान करता रहता है। नशे की हालत में यह व्यक्ति अक्सर उनसे मारपीट करने और जबरन पैसे ऐंठने की कोशिश करता है। स्थानीय लोगों ने इस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग की है, ताकि उसे सबक सिखाया जा सके और उसकी इन हरकतों पर लगाम लगाई जा सके।
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    दक्षिण दिल्ली के शाहपुर जाट इलाके में एक व्यक्ति शराब के नशे में धुत होकर स्थानीय लोगों को लगातार परेशान कर रहा है। यह व्यक्ति मूल रूप से साबुन डिकर में रहता है और हमेशा दारू के नशे में रहता है, जिसकी वजह से वह रेहड़ी-पटरी वालों, दुकानदारों, ऑटो चालकों और अधीक्षक चालक वालों को लगातार परेशान करता रहता है।

नशे की हालत में यह व्यक्ति अक्सर उनसे मारपीट करने और जबरन पैसे ऐंठने की कोशिश करता है। स्थानीय लोगों ने इस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग की है, ताकि उसे सबक सिखाया जा सके और उसकी इन हरकतों पर लगाम लगाई जा सके।
    user_Ravi Kashyap
    Ravi Kashyap
    Video Creator साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • Available for Sale - Smartphone Brand : afsharraja YouTube channel Bihar Asking Price (₹) : 8797671094 Model : social media Bihar Saharsa jila Raja sonbarsa City / Locality : Nagar Panchayat Raja sambarsa Device Category : Smartphone Variant (RAM / Storage) : 3GB / 32GB Body Condition : Like new Device Age : Less than 1 year Network Connectivity : 4जी VoLTE,5जी,2G/3G (बेसिक),सिर्फ वाई-फ़ाई,कोई इंटरनेट नहीं Raja sonbarsa 12 number ward jila Saharsa 852129 independence studio Raja Singh Saharsa
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    Available for Sale - Smartphone
Brand : afsharraja YouTube channel Bihar 
Asking Price (₹) : 8797671094
Model : social media Bihar Saharsa jila Raja sonbarsa
City / Locality : Nagar Panchayat Raja sambarsa
Device Category : Smartphone
Variant (RAM / Storage) : 3GB / 32GB
Body Condition : Like new
Device Age : Less than 1 year
Network Connectivity : 4जी VoLTE,5जी,2G/3G (बेसिक),सिर्फ वाई-फ़ाई,कोई इंटरनेट नहीं
Raja sonbarsa 12 number ward jila Saharsa 852129 independence studio Raja Singh Saharsa
    user_Afshar Raja
    Afshar Raja
    Artist कोतवाली, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • खराब मौसम के चलते राहुल गांधी एक रैली में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि, इस घटना के बाद राहुल गांधी ने कुछ कहा है, जिसके बारे में रिपोर्ट में आगे जानकारी दी गई है।
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    खराब मौसम के चलते राहुल गांधी एक रैली में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि, इस घटना के बाद राहुल गांधी ने कुछ कहा है, जिसके बारे में रिपोर्ट में आगे जानकारी दी गई है।
    user_SURENDRA KUMAR
    SURENDRA KUMAR
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    7 hrs ago
  • बीमा विशेषज्ञ ऋषभ हुड्डा, जिन्हें 'बीमा गुरु' के रूप में जाना जाता है, अपनी बीमा संबंधी सेवाएँ प्रदान करने के लिए उपलब्ध हैं। बीमा से संबंधित किसी भी सहायता या विशेषज्ञ सलाह के लिए, इच्छुक व्यक्ति सीधे उनसे उनके दिए गए संपर्क नंबर 80767444712 पर संपर्क कर सकते हैं। वह बीमा क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के साथ सहयोग देने को तत्पर हैं।
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    बीमा विशेषज्ञ ऋषभ हुड्डा, जिन्हें 'बीमा गुरु' के रूप में जाना जाता है, अपनी बीमा संबंधी सेवाएँ प्रदान करने के लिए उपलब्ध हैं। बीमा से संबंधित किसी भी सहायता या विशेषज्ञ सलाह के लिए, इच्छुक व्यक्ति सीधे उनसे उनके दिए गए संपर्क नंबर 80767444712 पर संपर्क कर सकते हैं। वह बीमा क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के साथ सहयोग देने को तत्पर हैं।
    user_Rishabh hooda
    Rishabh hooda
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    12 hrs ago
  • जब हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था, तब एक आम आदमी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बार-बार मौत के खतरे के बीच जाकर 8 लोगों की जान बचाई। उसकी असाधारण बहादुरी और सूझबूझ के कारण ही ये जिंदगियां बच पाईं। इस साहसी शख्स ने यह साबित कर दिया कि असली नायक बनने के लिए किसी सुपरपावर की नहीं, बल्कि केवल हिम्मत और इंसानियत की जरूरत होती है। घटना के बाद, लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं और उसे 'असली नायक' बता रहे हैं। जब सब अपनी जान बचाकर भाग रहे थे, तब इस शख्स का मौत के मुंह में जाकर लोगों को बचाने की बहादुरी भरी कहानी ने सबको भावुक कर दिया। यह घटना आज समाज में ऐसे गुमनाम नायकों की याद दिलाती है, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
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    जब हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था, तब एक आम आदमी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बार-बार मौत के खतरे के बीच जाकर 8 लोगों की जान बचाई। उसकी असाधारण बहादुरी और सूझबूझ के कारण ही ये जिंदगियां बच पाईं।

इस साहसी शख्स ने यह साबित कर दिया कि असली नायक बनने के लिए किसी सुपरपावर की नहीं, बल्कि केवल हिम्मत और इंसानियत की जरूरत होती है। घटना के बाद, लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं और उसे 'असली नायक' बता रहे हैं। जब सब अपनी जान बचाकर भाग रहे थे, तब इस शख्स का मौत के मुंह में जाकर लोगों को बचाने की बहादुरी भरी कहानी ने सबको भावुक कर दिया। यह घटना आज समाज में ऐसे गुमनाम नायकों की याद दिलाती है, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
  • नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।
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    नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।
    user_Gaurav verma
    Gaurav verma
    Graphic designer करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
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