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नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।

2 hrs ago
user_Gaurav verma
Gaurav verma
Graphic designer करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
2 hrs ago

नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।

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  • जब हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था, तब एक आम आदमी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बार-बार मौत के खतरे के बीच जाकर 8 लोगों की जान बचाई। उसकी असाधारण बहादुरी और सूझबूझ के कारण ही ये जिंदगियां बच पाईं। इस साहसी शख्स ने यह साबित कर दिया कि असली नायक बनने के लिए किसी सुपरपावर की नहीं, बल्कि केवल हिम्मत और इंसानियत की जरूरत होती है। घटना के बाद, लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं और उसे 'असली नायक' बता रहे हैं। जब सब अपनी जान बचाकर भाग रहे थे, तब इस शख्स का मौत के मुंह में जाकर लोगों को बचाने की बहादुरी भरी कहानी ने सबको भावुक कर दिया। यह घटना आज समाज में ऐसे गुमनाम नायकों की याद दिलाती है, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
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    जब हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था, तब एक आम आदमी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बार-बार मौत के खतरे के बीच जाकर 8 लोगों की जान बचाई। उसकी असाधारण बहादुरी और सूझबूझ के कारण ही ये जिंदगियां बच पाईं।

इस साहसी शख्स ने यह साबित कर दिया कि असली नायक बनने के लिए किसी सुपरपावर की नहीं, बल्कि केवल हिम्मत और इंसानियत की जरूरत होती है। घटना के बाद, लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं और उसे 'असली नायक' बता रहे हैं। जब सब अपनी जान बचाकर भाग रहे थे, तब इस शख्स का मौत के मुंह में जाकर लोगों को बचाने की बहादुरी भरी कहानी ने सबको भावुक कर दिया। यह घटना आज समाज में ऐसे गुमनाम नायकों की याद दिलाती है, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    16 min ago
  • दिल्ली की हर्ष विहार मंडोली जेल में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मृतक के परिवार वालों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके प्रियजन को जहर देकर मारा गया है।
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    दिल्ली की हर्ष विहार मंडोली जेल में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मृतक के परिवार वालों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके प्रियजन को जहर देकर मारा गया है।
    user_भारत हिंदी खबर
    भारत हिंदी खबर
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    55 min ago
  • केंद्र सरकार ने उन मेधावी छात्रों की सहायता के लिए पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना शुरू की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करते हैं। यह योजना बढ़ते पढ़ाई के खर्चों के बीच छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित यह छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) वर्ग के छात्रों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि हजारों परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम हो और बच्चे अपने सपनों को पूरा कर सकें। योजना के तहत, 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अधिकतम ₹75,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ाई का बढ़ता खर्च देखते हुए हर साल ₹1.25 लाख तक की सहायता मिलती है, जिससे वे अपनी उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश के हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिलेंगे।
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    केंद्र सरकार ने उन मेधावी छात्रों की सहायता के लिए पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना शुरू की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करते हैं। यह योजना बढ़ते पढ़ाई के खर्चों के बीच छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित यह छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) वर्ग के छात्रों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि हजारों परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम हो और बच्चे अपने सपनों को पूरा कर सकें।

योजना के तहत, 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अधिकतम ₹75,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ाई का बढ़ता खर्च देखते हुए हर साल ₹1.25 लाख तक की सहायता मिलती है, जिससे वे अपनी उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश के हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिलेंगे।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    1 hr ago
  • देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
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    देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं।

यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है।

मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    2 hrs ago
  • दिल्ली के करावल नगर स्थित प्रकाश विहार में एक चार मंजिला मकान ढहने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रभावित परिवारों का स्पष्ट आरोप है कि यह हादसा नाले के निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान हुआ, जब उनके मकान में दरारें आ गईं और बाद में पूरी इमारत ढह गई। इस घटना के कारण मकान मालिक और कई किरायेदार बेघर हो गए हैं, जिससे यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आए या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मामले की जांच अभी जारी है। रोज़ाना टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों की पूरी बात सामने आई है।
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    दिल्ली के करावल नगर स्थित प्रकाश विहार में एक चार मंजिला मकान ढहने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रभावित परिवारों का स्पष्ट आरोप है कि यह हादसा नाले के निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान हुआ, जब उनके मकान में दरारें आ गईं और बाद में पूरी इमारत ढह गई।

इस घटना के कारण मकान मालिक और कई किरायेदार बेघर हो गए हैं, जिससे यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आए या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मामले की जांच अभी जारी है। रोज़ाना टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों की पूरी बात सामने आई है।
    user_Rtn.1 News
    Rtn.1 News
    Local News Reporter यमुना विहार, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • एक मित्र ने जानकारी दी है कि उनके गांव में भारी बारिश के साथ भीषण आंधी और तूफान आया था। इस भयंकर आंधी-तूफान ने गांव में घरों को पूरी तरह से उड़ा दिया है, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
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    एक मित्र ने जानकारी दी है कि उनके गांव में भारी बारिश के साथ भीषण आंधी और तूफान आया था। इस भयंकर आंधी-तूफान ने गांव में घरों को पूरी तरह से उड़ा दिया है, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
    user_Suphal
    Suphal
    Farmer सरस्वती विहार, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।
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    नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।
    user_Gaurav verma
    Gaurav verma
    Graphic designer करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
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