ग्राम सेमाढाना में चल रही नर्मदा महापुराण कथा से पूर्व निकाली कलश यात्रा लोकेशन :-बीना रिपोर्टर :-राकेश सेन बीना :-ग्राम सेमाढाना में चल रही श्री नर्मदा महापुराण कथा के प्रथम दिवस में कलश यात्रा समस्त ग्राम वासियों ने बड़े धूमधाम से निकाली सेमाधाना से कलश यात्रा होते हुए सिद्ध बाबा धाम में पहुंची जहां पर नर्मदा महापुराण की कथा प्रारंभ हुई कथा व्यास पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा श्री सिद्ध बाबा धाम की महिमा का वर्णन करते हुए भक्तों को केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नहीं है, बल्कि यह ऋषि-मुनियों की तपोभूमि भी रही है, जहाँ सदियों से साधना, भक्ति और धर्म की गंगा प्रवाहित होती आ रही है। इस पावन भूमि की धूल भी मन को शुद्ध करने वाली मानी जाती है। नर्मदा पुराण श्रवण से मनुष्य के पापों का क्षय होता है और उसका मन शुद्ध एवं पवित्र बनता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से कथा सुनता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और वह धीरे-धीरे भगवान की भक्ति में लीन होकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए, ताकि जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो सके। जीवन में अपने बच्चों को भगवान श्रीराम के चरित्र से शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि श्रीराम का जीवन आदर्श, मर्यादा और धर्म का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने हर परिस्थिति में सत्य, कर्तव्य और धर्म का पालन किया—चाहे वह पुत्र धर्म हो, भाई का प्रेम हो, पति का समर्पण हो या राजा का दायित्व। जब बच्चों को श्रीराम के जीवन की कथाएं सुनाई जाती हैं, तो उनके भीतर सच्चाई, आज्ञाकारिता, विनम्रता और सम्मान जैसे गुण स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। जब भी संतान कोई अच्छा कार्य करती है, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलती है, तो सबसे अधिक प्रसन्न उसके पितर होते हैं। जब संतान अच्छे संस्कारों के साथ जीवन जीती है, सत्य बोलती है, दूसरों की सहायता करती है और भगवान की भक्ति में लीन रहती है, तो यह सब देखकर पितर संतुष्ट होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। जहाँ सत्संग होता है, वहाँ नेगेटिव एनर्जी का वास नहीं होता। सत्संग अर्थात् “सत्” यानी सत्य और “संग” यानी संगति – अर्थात् सच्चाई, धर्म, और ईश्वर के साथ जुड़ना। जब घर में सत्संग होता है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं, भगवान की महिमा का श्रवण और मनन होता है, तो वहाँ का वातावरण अपने आप ही पवित्र और सकारात्मक हो जाता है। बच्चों के लिए सत्संग अमृत के समान है। जब वे बचपन से ही धार्मिक वातावरण में पलते हैं, तो उनमें संस्कार, संयम, सेवा और सत्य की भावना अपने आप विकसित होती है। ऐसे बच्चे नशे, बुरी संगति या कुसंस्कारों की ओर नहीं भटकते, बल्कि जीवन में आगे चलकर समाज और देश के लिए आदर्श बनते हैं। सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना। सत्य ही धर्म का मूल है। जो व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता है, वह कभी हारता नहीं। भले ही समय कठिन हो, परंतु अंततः सत्य की ही विजय होती है। इसलिए हमें सदैव सच बोलने का प्रयास करना चाहिए, चाहे परिस्थिति जैसी भी हो। कथा दिनांक 3 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक समय: दोप. 2बजे से 5 तक है कथा के आयोजक समस्त ग्रामवासी है ग्राम वासियो का सभी से आग्रह है अधिक से अधिक संख्या में पधारे
ग्राम सेमाढाना में चल रही नर्मदा महापुराण कथा से पूर्व निकाली कलश यात्रा लोकेशन :-बीना रिपोर्टर :-राकेश सेन बीना :-ग्राम सेमाढाना में चल रही श्री नर्मदा महापुराण कथा के प्रथम दिवस में कलश यात्रा समस्त ग्राम वासियों ने बड़े धूमधाम से निकाली सेमाधाना से कलश यात्रा होते हुए सिद्ध बाबा धाम में पहुंची जहां पर नर्मदा महापुराण की कथा प्रारंभ हुई कथा व्यास पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा श्री सिद्ध बाबा धाम की महिमा का वर्णन करते हुए भक्तों को केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नहीं है, बल्कि यह ऋषि-मुनियों की तपोभूमि भी रही है, जहाँ सदियों से साधना, भक्ति और धर्म की गंगा प्रवाहित होती आ रही है। इस पावन भूमि की धूल भी मन को शुद्ध करने वाली मानी जाती है। नर्मदा पुराण श्रवण से मनुष्य के पापों का क्षय होता है और उसका मन शुद्ध एवं पवित्र बनता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से कथा सुनता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और वह धीरे-धीरे भगवान की भक्ति में लीन होकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए, ताकि जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो सके। जीवन में अपने बच्चों को भगवान श्रीराम के चरित्र से शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि श्रीराम का जीवन आदर्श, मर्यादा और धर्म का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने हर परिस्थिति में सत्य, कर्तव्य और धर्म का पालन किया—चाहे वह पुत्र धर्म हो, भाई का प्रेम हो, पति का समर्पण हो या राजा का दायित्व। जब बच्चों को श्रीराम के जीवन की कथाएं सुनाई जाती हैं, तो उनके भीतर सच्चाई, आज्ञाकारिता, विनम्रता और सम्मान जैसे गुण स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। जब भी संतान कोई अच्छा कार्य करती है, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलती है, तो सबसे अधिक प्रसन्न उसके पितर होते हैं। जब संतान अच्छे संस्कारों के साथ जीवन जीती है, सत्य बोलती है, दूसरों की सहायता करती है और भगवान की भक्ति में लीन रहती है, तो यह सब देखकर पितर संतुष्ट होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। जहाँ सत्संग होता है, वहाँ नेगेटिव एनर्जी का वास नहीं होता। सत्संग अर्थात् “सत्” यानी सत्य और “संग” यानी संगति – अर्थात् सच्चाई, धर्म, और ईश्वर के साथ जुड़ना। जब घर में सत्संग होता है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं, भगवान की महिमा का श्रवण और मनन होता है, तो वहाँ का वातावरण अपने आप ही पवित्र और सकारात्मक हो जाता है। बच्चों के लिए सत्संग अमृत के समान है। जब वे बचपन से ही धार्मिक वातावरण में पलते हैं, तो उनमें संस्कार, संयम, सेवा और सत्य की भावना अपने आप विकसित होती है। ऐसे बच्चे नशे, बुरी संगति या कुसंस्कारों की ओर नहीं भटकते, बल्कि जीवन में आगे चलकर समाज और देश के लिए आदर्श बनते हैं। सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना। सत्य ही धर्म का मूल है। जो व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता है, वह कभी हारता नहीं। भले ही समय कठिन हो, परंतु अंततः सत्य की ही विजय होती है। इसलिए हमें सदैव सच बोलने का प्रयास करना चाहिए, चाहे परिस्थिति जैसी भी हो। कथा दिनांक 3 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक समय: दोप. 2बजे से 5 तक है कथा के आयोजक समस्त ग्रामवासी है ग्राम वासियो का सभी से आग्रह है अधिक से अधिक संख्या में पधारे
- CMO CmoMadhya Pradesh😡3 hrs ago
- User9972Madhya Pradesh😤5 hrs ago
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- लोकेशन :-बीना रिपोर्टर :-राकेश सेन बीना :-ग्राम सेमाढाना में चल रही श्री नर्मदा महापुराण कथा के प्रथम दिवस में कलश यात्रा समस्त ग्राम वासियों ने बड़े धूमधाम से निकाली सेमाधाना से कलश यात्रा होते हुए सिद्ध बाबा धाम में पहुंची जहां पर नर्मदा महापुराण की कथा प्रारंभ हुई कथा व्यास पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा श्री सिद्ध बाबा धाम की महिमा का वर्णन करते हुए भक्तों को केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नहीं है, बल्कि यह ऋषि-मुनियों की तपोभूमि भी रही है, जहाँ सदियों से साधना, भक्ति और धर्म की गंगा प्रवाहित होती आ रही है। इस पावन भूमि की धूल भी मन को शुद्ध करने वाली मानी जाती है। नर्मदा पुराण श्रवण से मनुष्य के पापों का क्षय होता है और उसका मन शुद्ध एवं पवित्र बनता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से कथा सुनता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और वह धीरे-धीरे भगवान की भक्ति में लीन होकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए, ताकि जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो सके। जीवन में अपने बच्चों को भगवान श्रीराम के चरित्र से शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि श्रीराम का जीवन आदर्श, मर्यादा और धर्म का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने हर परिस्थिति में सत्य, कर्तव्य और धर्म का पालन किया—चाहे वह पुत्र धर्म हो, भाई का प्रेम हो, पति का समर्पण हो या राजा का दायित्व। जब बच्चों को श्रीराम के जीवन की कथाएं सुनाई जाती हैं, तो उनके भीतर सच्चाई, आज्ञाकारिता, विनम्रता और सम्मान जैसे गुण स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। जब भी संतान कोई अच्छा कार्य करती है, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलती है, तो सबसे अधिक प्रसन्न उसके पितर होते हैं। जब संतान अच्छे संस्कारों के साथ जीवन जीती है, सत्य बोलती है, दूसरों की सहायता करती है और भगवान की भक्ति में लीन रहती है, तो यह सब देखकर पितर संतुष्ट होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। जहाँ सत्संग होता है, वहाँ नेगेटिव एनर्जी का वास नहीं होता। सत्संग अर्थात् “सत्” यानी सत्य और “संग” यानी संगति – अर्थात् सच्चाई, धर्म, और ईश्वर के साथ जुड़ना। जब घर में सत्संग होता है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं, भगवान की महिमा का श्रवण और मनन होता है, तो वहाँ का वातावरण अपने आप ही पवित्र और सकारात्मक हो जाता है। बच्चों के लिए सत्संग अमृत के समान है। जब वे बचपन से ही धार्मिक वातावरण में पलते हैं, तो उनमें संस्कार, संयम, सेवा और सत्य की भावना अपने आप विकसित होती है। ऐसे बच्चे नशे, बुरी संगति या कुसंस्कारों की ओर नहीं भटकते, बल्कि जीवन में आगे चलकर समाज और देश के लिए आदर्श बनते हैं। सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना। सत्य ही धर्म का मूल है। जो व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता है, वह कभी हारता नहीं। भले ही समय कठिन हो, परंतु अंततः सत्य की ही विजय होती है। इसलिए हमें सदैव सच बोलने का प्रयास करना चाहिए, चाहे परिस्थिति जैसी भी हो। कथा दिनांक 3 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक समय: दोप. 2बजे से 5 तक है कथा के आयोजक समस्त ग्रामवासी है ग्राम वासियो का सभी से आग्रह है अधिक से अधिक संख्या में पधारे1
- Post by शंभू दयाल सेन1
- आपसी विवाद बना खूनी सघर्ष की वजह, पीड़ित परिवार ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार1
- Post by Dharmendra sahu1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- सोहागपुर- सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त एसडीओ व समाजसेवी श्री महेश कुमार जी सोनी द्वारा अपनी मिलने वाली शत प्रतिशत पेंशन की राशि जरूरतमंद वृद्ध एवं बेसहारा लोगों में व्यय कर दी जाती है। विदित होवे कि श्री सोनी हनुमान जी के परम भक्त हैं, वह हमेशा ही स्कूल में पढ़ने वाले निर्धन छात्र जो अपनी फीस जमा करने में असमर्थ हैं, उनकी फीस आपके द्वारा जमा की जाती है, यदि कोई गरीब व्यक्ति गंभीर बीमारी से परेशान है और उसके पास इलाज कराने के लिए पैसा नहीं है तो श्री सोनी जी द्वारा उसकी पूरी मदद की जाती है इसके साथ ही आपके द्वारा गरीब कन्याओं के विवाह में भी योगदान किया जाता है। आपके द्वारा हमेशा ही दान पुण्य किया जाता है, आपके इस सेवाभाव एवं दयाभाव की सराहना की जा रही है। आपके इस सेवाभाव को नमन करते हैं।1
- साईं खेड़ा में बड़ी धूमधाम से मनाया गया हनुमानजी का जन्मोत्सव प्रथम पंक्ति में क्षेत्र के घोड़ों के नृत्य ने मन मोहा तत् पश्चात डी जे की धुन पर हनुमान भक्तो का डांस फिर अखाड़े के कौशल फिर भी थे और ढोल पर मात्र शक्ति के नृत्य के साथ जय घोष और हनुमान लला की आरती के पश्चात भंडारा प्रसादी के साथ चल समारोह का समापन श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर पर संपन्न हुआ।1
- Post by Dharmendra sahu1