पलिया में रोडवेज बस अड्डे पर जनता की चुप्पी सवालों के घेरे में पलिया का भविष्य पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में रोडवेज बस अड्डे की वर्षों पुरानी मांग आज भी केवल खबरों और चर्चाओं तक सीमित रह गई है। लगातार समाचार प्रकाशित होने और जनसमस्याओं को उजागर किए जाने के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही आमजन इस मुद्दे पर संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं। जनता की इस चुप्पी से ऐसा प्रतीत होता है मानो पलिया को रोडवेज बस अड्डे की आवश्यकता ही नहीं है। स्थिति यह है कि नगर में रोडवेज की बसें तो संचालित हो रही हैं, लेकिन उनके ठहराव और यात्रियों की सुविधा के लिए कोई स्थायी बसड्डा नहीं है। सभी बसें पुलिस चौकी के आसपास सड़क किनारे खड़ी की जाती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर सुबह और शाम के समय राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते जनता ने संगठित होकर रोडवेज बस अड्डे की मांग नहीं उठाई, तो भविष्य में पलिया से रोडवेज बसों का संचालन भी रेल सेवाओं की तरह ठप हो सकता है। जिस प्रकार पलिया में रेल लाइन होते हुए भी यात्री ट्रेनों का संचालन न के बराबर है, उसी तरह रोडवेज बसों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। विडंबना यह है कि जब ट्रेनों के संचालन की बात आती है, तो जनता एकजुट होकर आवाज बुलंद करती है, लेकिन रोडवेज बसड्डे जैसे बुनियादी मुद्दे पर उदासीनता साफ नजर आती है। यदि जनआंदोलन के रूप में यह मांग उठाई जाए, तो शासन-प्रशासन पर दबाव बनेगा और पलिया में रोडवेज बस अड्डे का निर्माण निश्चित रूप से संभव हो सकेगा। अब जरूरत इस बात की है कि नगरवासी राजनीति से ऊपर उठकर अपने हित में एकजुट हों और रोडवेज बस अड्डे की मांग को मजबूती से उठाएं। अन्यथा पलिया नगर रोडवेज सुविधा से वंचित होकर विकास की दौड़ में और पीछे छूट सकता है।
पलिया में रोडवेज बस अड्डे पर जनता की चुप्पी सवालों के घेरे में पलिया का भविष्य पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में रोडवेज बस अड्डे की वर्षों पुरानी मांग आज भी केवल खबरों और चर्चाओं तक सीमित रह गई है। लगातार समाचार प्रकाशित होने और जनसमस्याओं को उजागर किए जाने के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही आमजन इस मुद्दे पर संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं। जनता की इस चुप्पी से ऐसा प्रतीत होता है मानो पलिया को रोडवेज बस अड्डे की आवश्यकता ही नहीं है। स्थिति यह है कि नगर में रोडवेज की बसें तो संचालित हो रही हैं, लेकिन उनके ठहराव और यात्रियों की सुविधा के लिए कोई स्थायी बसड्डा नहीं है। सभी बसें पुलिस चौकी के आसपास सड़क किनारे खड़ी की जाती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर सुबह और शाम के समय राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते जनता ने संगठित होकर रोडवेज बस अड्डे की मांग नहीं उठाई, तो भविष्य में पलिया से रोडवेज बसों का संचालन भी रेल सेवाओं की तरह ठप हो सकता है। जिस प्रकार पलिया में रेल लाइन होते हुए भी यात्री ट्रेनों का संचालन न के बराबर है, उसी तरह रोडवेज बसों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। विडंबना यह है कि जब ट्रेनों के संचालन की बात आती है, तो जनता एकजुट होकर आवाज बुलंद करती है, लेकिन रोडवेज बसड्डे जैसे बुनियादी मुद्दे पर उदासीनता साफ नजर आती है। यदि जनआंदोलन के रूप में यह मांग उठाई जाए, तो शासन-प्रशासन पर दबाव बनेगा और पलिया में रोडवेज बस अड्डे का निर्माण निश्चित रूप से संभव हो सकेगा। अब जरूरत इस बात की है कि नगरवासी राजनीति से ऊपर उठकर अपने हित में एकजुट हों और रोडवेज बस अड्डे की मांग को मजबूती से उठाएं। अन्यथा पलिया नगर रोडवेज सुविधा से वंचित होकर विकास की दौड़ में और पीछे छूट सकता है।
- पलिया क्षेत्र में हाथियों का आतंक चौखड़ा फार्म व बसन्तापुर में दर्जनों किसानों की उजाड़ी गेहूं की फसल पलियाकलां-खीरी। पलिया क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रही घटनाओं से किसानों में भय और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पहले हाथियों ने गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया, वहीं रखवाली करने पहुंचे किसानों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। अब हाथियों ने गेहूं की खड़ी फसल को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बीती रात क्षेत्र के ग्राम चौखड़ा एवं बसन्तापुर के दर्जनों किसानों के खेतों में घुसकर हाथियों ने गेहूं की फसल रौंद डाली। एक ही रात में कई बीघा फसल नष्ट होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित किसानों ने बताया कि लगातार हो रहे हमलों के बावजूद वन विभाग की ओर से हाथियों की रोकथाम के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है। कई बार सूचना देने के बाद भी मौके पर समय से टीम नहीं पहुंचती, जिससे नुकसान बढ़ता जा रहा है। किसानों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा फसलों के हुए नुकसान का शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की है। क्षेत्र में बढ़ते हाथियों के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने जंगल किनारे लगाई बाड़ को तहस-नहस कर दिया। लोग रात के समय खेतों की रखवाली करने से भी कतरा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में फसल का अधिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।1
- U G C रेगुलेशन के समर्थन में निकला मार्च, विधानसभा कूच के दौरान झड़प लखनऊ में पुलिस और पल्लवी पटेल के बीच आज झड़प हो गई। पल्लवी U G C इक्विटी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में सैकड़ों लोगो के साथ पैदल मार्च निकाल रही थी उनके साथ सैकड़ों महिलाएं इस मार्च में शामिल थी। महिलाओं के संघ it चौराहे सै निकली यहां से विधानसभा तक जाना था मार्च जब पुलिस बड़ी बड़ी भी आगे कारवाही चल रही1
- 🔴 गोला से अपडेट गोला कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत कुंधवा रेलवे क्रॉसिंग से करीब 100 मीटर दूर जंगल में एक अज्ञात व्यक्ति का शव फांसी के फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी रेलवे क्रॉसिंग पर तैनात कर्मचारी ने गोला पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस के अनुसार शव की स्थिति देखकर कई दिनों पुराना प्रतीत हो रहा है। मृतक की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है। फिलहाल गोला पुलिस शव की शिनाख्त में जुटी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है।1
- Post by खीरी न्यूज़ अपडेट1
- sad shayari 💔🥹😢1
- लखीमपुर खींरी ब्रेकिंग -संदिग्ध अवस्था में खून से लथपथ नहर किनारे मिला युवक का शव, ग्राम लालोहा निवासी मनीष राठौर के रूप में पहचान हुए है मृतक के हाथ, घर वालों के मुताबिक घर से मितौली बाजार गया हुआ था में अवैध तमंचा भी मिला है -मृतक के हाथ में मिला अवैध तमंचा -युवक के गले मे लगी गोली मिली। -ग्राम ललौहा निवासी मनीष राठौर के रूप में मृतक की हुई शिनाख्त -परिजनों के मुताबिक घर से मितौली बाजार सामान लेने के लिए निकला था मनीष -सीओ मितौली यदुवेंद्र यादव के मुताबिक मनीष के जबडे के निचले हिस्से से काफ़ी खून बह रहा था -परिजनों ने किसी दुश्मनी से किया इनकार -पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा -जांच में जुटी पुलिस -मितौली थाना इलाके के ललौहा गांव का मामला।1
- Post by डॉ अनिल सिंह राणा1
- सवालों के घेरे में पलिया का भविष्य पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में रोडवेज बस अड्डे की वर्षों पुरानी मांग आज भी केवल खबरों और चर्चाओं तक सीमित रह गई है। लगातार समाचार प्रकाशित होने और जनसमस्याओं को उजागर किए जाने के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही आमजन इस मुद्दे पर संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं। जनता की इस चुप्पी से ऐसा प्रतीत होता है मानो पलिया को रोडवेज बस अड्डे की आवश्यकता ही नहीं है। स्थिति यह है कि नगर में रोडवेज की बसें तो संचालित हो रही हैं, लेकिन उनके ठहराव और यात्रियों की सुविधा के लिए कोई स्थायी बसड्डा नहीं है। सभी बसें पुलिस चौकी के आसपास सड़क किनारे खड़ी की जाती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर सुबह और शाम के समय राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते जनता ने संगठित होकर रोडवेज बस अड्डे की मांग नहीं उठाई, तो भविष्य में पलिया से रोडवेज बसों का संचालन भी रेल सेवाओं की तरह ठप हो सकता है। जिस प्रकार पलिया में रेल लाइन होते हुए भी यात्री ट्रेनों का संचालन न के बराबर है, उसी तरह रोडवेज बसों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। विडंबना यह है कि जब ट्रेनों के संचालन की बात आती है, तो जनता एकजुट होकर आवाज बुलंद करती है, लेकिन रोडवेज बसड्डे जैसे बुनियादी मुद्दे पर उदासीनता साफ नजर आती है। यदि जनआंदोलन के रूप में यह मांग उठाई जाए, तो शासन-प्रशासन पर दबाव बनेगा और पलिया में रोडवेज बस अड्डे का निर्माण निश्चित रूप से संभव हो सकेगा। अब जरूरत इस बात की है कि नगरवासी राजनीति से ऊपर उठकर अपने हित में एकजुट हों और रोडवेज बस अड्डे की मांग को मजबूती से उठाएं। अन्यथा पलिया नगर रोडवेज सुविधा से वंचित होकर विकास की दौड़ में और पीछे छूट सकता है।1