logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

**झांसी: कुकर गांव में अवैध खनन के आरोप, पीड़ित ने टहरौली SDM से लगाई न्याय की गुहार** झांसी जिले के टहरौली तहसील अंतर्गत कुकर गांव में अवैध खनन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के एक पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लगातार नियमों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है और जमीन पर लगें पेड़ों को काट कर भारी नुकसान हो रहा है पीड़ित ने मामले को गंभीर बताते हुए टहरौली एसडीएम के कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी और न्याय की गुहार लगाई। उसका कहना है कि कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, अवैध खनन के चलते खेतों की उपजाऊ मिट्टी हटाई जा रही है और आसपास के इलाकों में गड्ढे बन गए हैं, जो हादसों को न्योता दे रहे हैं। साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में इस मुद्दे को लेकर लोगों में आक्रोश है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि अवैध खनन पर रोक लग सके और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।

17 hrs ago
user_Ankit Gotam
Ankit Gotam
रिपोर्टर टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
17 hrs ago

**झांसी: कुकर गांव में अवैध खनन के आरोप, पीड़ित ने टहरौली SDM से लगाई न्याय की गुहार** झांसी जिले के टहरौली तहसील अंतर्गत कुकर गांव में अवैध खनन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के एक पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लगातार नियमों को ताक पर रखकर खनन

किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है और जमीन पर लगें पेड़ों को काट कर भारी नुकसान हो रहा है पीड़ित ने मामले को गंभीर बताते हुए टहरौली एसडीएम के कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी और न्याय की गुहार लगाई। उसका कहना है कि कई बार

स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, अवैध खनन के चलते खेतों की उपजाऊ मिट्टी हटाई जा रही है और आसपास के इलाकों में गड्ढे बन गए हैं, जो हादसों को न्योता दे रहे हैं। साथ ही भारी

वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में इस मुद्दे को लेकर लोगों में आक्रोश है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि अवैध खनन पर रोक लग सके और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • Post by Ankit Gotam
    4
    Post by Ankit Gotam
    user_Ankit Gotam
    Ankit Gotam
    रिपोर्टर टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • ओरछा में बवाल! आंदोलन के आगे झुका प्रशासन #OrchhaNews #BreakingNews #MPNews #NiwariNews #YouthCongress #Andolan #ChandraShekharAzad #IndiraGandhi #PoliticalNews #ViralNews #GroundReport #HindiNews #BundelkhandNews #Protest #LocalNews
    1
    ओरछा में बवाल! आंदोलन के आगे झुका प्रशासन
#OrchhaNews
#BreakingNews
#MPNews
#NiwariNews
#YouthCongress
#Andolan
#ChandraShekharAzad
#IndiraGandhi
#PoliticalNews
#ViralNews
#GroundReport
#HindiNews
#BundelkhandNews
#Protest
#LocalNews
    user_NB17 न्यूज़ चैनल
    NB17 न्यूज़ चैनल
    निवाड़ी, निवाड़ी, मध्य प्रदेश•
    51 min ago
  • निवाड़ी जिले के नगर परिषद जेरोन खालसा के अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव में आया नया मोड़ 3 पार्षद अविश्वास के खिलाफ,,,
    1
    निवाड़ी जिले के नगर परिषद जेरोन खालसा के अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव में आया नया मोड़ 3 पार्षद अविश्वास के खिलाफ,,,
    user_Hemant verma
    Hemant verma
    South Indian restaurant Niwari, Madhya Pradesh•
    8 hrs ago
  • Post by Kshatr Pal shivhare
    1
    Post by Kshatr Pal shivhare
    user_Kshatr Pal shivhare
    Kshatr Pal shivhare
    Actor मोठ, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • रिंकू लक्ष्कार तुर्का लहचूरा जिला झांसी तहसील टहरौली जिला झांसी तहसील टहरौली प्रधान प्रदीप कुमार दीक्षित लहचूरा जिला झांसी
    4
    रिंकू लक्ष्कार तुर्का लहचूरा जिला झांसी तहसील टहरौली जिला झांसी तहसील टहरौली प्रधान प्रदीप कुमार दीक्षित लहचूरा जिला झांसी
    user_Rinkuu lakshkar
    Rinkuu lakshkar
    Farmer गरौठा, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भांडेर तहसील के सालोन ए गांव के पावर हाउस के पास अनियंत्रित होकर खंती में पलटा चार पहिया वाहन बड़ा हादसा टला भांडेर तहसील के सालोंन ए गांव के पास दोपहर 3:00 से 4:00 के आसपास पलटा वाहन मौके पर पहुंचे बिजली कर्मचारियों व राहगीरो की लगी भीड़ वाहन चालक को नींद का झोंका आने के कारण अनियंत्रित होकर खंभे से टकराकर खंती में गिरा वाहन वाहन चालक को आई मामूली चोटें वाहन चालक उत्तर प्रदेश के चिरगांव का रहने वाला भांडेर से चिरगांव जाते समय दोपहर के समय हुआ हादसा।।
    1
    भांडेर तहसील के सालोन ए गांव के पावर हाउस के पास अनियंत्रित होकर खंती में पलटा चार पहिया वाहन बड़ा हादसा टला 
भांडेर तहसील के सालोंन ए गांव के पास दोपहर 3:00 से 4:00 के आसपास पलटा वाहन
मौके पर पहुंचे बिजली कर्मचारियों व राहगीरो की लगी भीड़
वाहन चालक को नींद का झोंका आने के कारण अनियंत्रित होकर खंभे से टकराकर खंती में गिरा वाहन
वाहन चालक को आई मामूली चोटें
वाहन चालक उत्तर प्रदेश के चिरगांव का रहने वाला
भांडेर से चिरगांव जाते समय दोपहर के समय हुआ हादसा।।
    user_पत्रकार जितेंद्र सिंह कोरव
    पत्रकार जितेंद्र सिंह कोरव
    Voice of people भांडेर, दतिया, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • 🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी “नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है। जब आम के पैर ही नहीं होते… तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔 जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की… जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है। 📍 कहानी की शुरुआत कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे… जो चलने में लंगड़े थे। उनके पास एक छोटा सा बगीचा था… जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था। लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था… उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे। धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे… और हर कोई बस एक ही बात कहता— “ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!” 📍 नाम कैसे पड़ा? अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़… क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था… लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे। और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया। 👉 लोग कहने लगे— “लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”… और धीरे-धीरे वो बन गया— 👉 “लंगड़ा आम” 📍 समय बदला, नाम नहीं बदला समय बीतता गया… साधु इस दुनिया में नहीं रहे… लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है… जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं। 📍 क्या है इसकी खासियत? अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…? तो आपको बता दें— ✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है ✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है ✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए ✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल! 📍 आज की पहचान आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं… बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है। देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है… और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है। 📍 एक सीख भी इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है… कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती… बल्कि काम और खासियत से बनती है। एक साधारण से पेड़ ने… और एक अनजाने साधु ने… इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। 🎤 समापन तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी… अगर आपको ये खबर पसंद आई हो… तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें… और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ। मैं हूँ रितेश रावत… कैमरा पर्सन के साथ… नमस्कार!”
    1
    🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी
“नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट।
आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर…
जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है।
जब आम के पैर ही नहीं होते…
तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔
जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की…
जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है।
📍 कहानी की शुरुआत
कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे…
जो चलने में लंगड़े थे।
उनके पास एक छोटा सा बगीचा था…
जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था।
लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था…
उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे।
धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे…
और हर कोई बस एक ही बात कहता—
“ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!”
📍 नाम कैसे पड़ा?
अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़…
क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था…
लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे।
और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया।
👉 लोग कहने लगे—
“लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”…
और धीरे-धीरे वो बन गया—
👉 “लंगड़ा आम”
📍 समय बदला, नाम नहीं बदला
समय बीतता गया…
साधु इस दुनिया में नहीं रहे…
लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है…
जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं।
📍 क्या है इसकी खासियत?
अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…?
तो आपको बता दें—
✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है
✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है
✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए
✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल!
📍 आज की पहचान
आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं…
बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है।
देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है…
और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है।
📍 एक सीख भी
इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है…
कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती…
बल्कि काम और खासियत से बनती है।
एक साधारण से पेड़ ने…
और एक अनजाने साधु ने…
इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।
🎤 समापन
तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी…
अगर आपको ये खबर पसंद आई हो…
तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें…
और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ।
मैं हूँ रितेश रावत…
कैमरा पर्सन के साथ…
नमस्कार!”
    user_Ritesh Reporter
    Ritesh Reporter
    Mandi Agent मऊरानीपुर, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by Ankit Gotam
    3
    Post by Ankit Gotam
    user_Ankit Gotam
    Ankit Gotam
    रिपोर्टर टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.