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हरदोई में अधिवक्ताओं ने ई-स्टाम्प के विरोध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी। यात्रा समाप्त होने पर, अधिवक्ताओं ने अर्थी सहित प्रतीकात्मक शव पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए सौंपा था। अब तीसरे दिन अधिवक्ता उस प्रतीकात्मक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए शाहाबाद सीओ से शव लेने पहुंचे हैं।

4 hrs ago
user_संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
Hardoi, Uttar Pradesh•
4 hrs ago

हरदोई में अधिवक्ताओं ने ई-स्टाम्प के विरोध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी। यात्रा समाप्त होने पर, अधिवक्ताओं ने अर्थी सहित प्रतीकात्मक शव पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए सौंपा था। अब तीसरे दिन अधिवक्ता उस प्रतीकात्मक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए शाहाबाद सीओ से शव लेने पहुंचे हैं।

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  • हरदोई के कासिमपुर थाना क्षेत्र में बुधवार शाम करीब 7 बजे बाइक सवार चार बदमाशों ने एक स्वर्ण व्यवसायी से लूटपाट की। हसनापुर निवासी मो. नसीम पुत्र नसीर, कासिमपुर घुघेरा चौराहे पर अपनी सोने-चांदी की दुकान बंद कर घर जा रहे थे। इसी दौरान जमुनिया बाग और रसूलपुर के बीच रास्ते में दो अज्ञात मोटरसाइकिलों पर सवार चार व्यक्तियों ने उनसे मारपीट की और एक थैला छीन लिया। इस थैले में करीब दो किलो चांदी, लगभग सौ ग्राम सोने के आभूषण और एक मोबाइल फोन था, जिसे बदमाश लूटकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही एसपी अशोक कुमार मीणा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस मामले के खुलासे के लिए अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गई हैं। पुलिस ने व्यवसायी की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। एसपी ने जल्द से जल्द इस घटना का अनावरण करने का आश्वासन दिया है।
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    हरदोई के कासिमपुर थाना क्षेत्र में बुधवार शाम करीब 7 बजे बाइक सवार चार बदमाशों ने एक स्वर्ण व्यवसायी से लूटपाट की। हसनापुर निवासी मो. नसीम पुत्र नसीर, कासिमपुर घुघेरा चौराहे पर अपनी सोने-चांदी की दुकान बंद कर घर जा रहे थे। इसी दौरान जमुनिया बाग और रसूलपुर के बीच रास्ते में दो अज्ञात मोटरसाइकिलों पर सवार चार व्यक्तियों ने उनसे मारपीट की और एक थैला छीन लिया। इस थैले में करीब दो किलो चांदी, लगभग सौ ग्राम सोने के आभूषण और एक मोबाइल फोन था, जिसे बदमाश लूटकर फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही एसपी अशोक कुमार मीणा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस मामले के खुलासे के लिए अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गई हैं। पुलिस ने व्यवसायी की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। एसपी ने जल्द से जल्द इस घटना का अनावरण करने का आश्वासन दिया है।
    user_संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
    संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
    Hardoi, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • कानपुर साइबर क्राइम पुलिस ने देशभर के लोगों से शादी कराने के नाम पर ऑनलाइन लाखों की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइट चलाने वाले तीन कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य आरोपी रंजिश को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाता था। आरोपी, खासकर महिला कॉलर्स बनकर, पीड़ितों का विश्वास जीतते थे और उनसे रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल बनाने, मीटिंग कराने और अन्य शुल्कों के नाम पर लाखों रुपये वसूल करते थे। पुलिस ने मौके से 43 मोबाइल फोन, 40 रजिस्टर, 8 चेकबुक, 10 एटीएम कार्ड, 5 क्यूआर कोड और कंप्यूटर बरामद किए हैं। पुलिस अब गिरोह के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की सही संख्या का पता लगाया जा सके। पुलिस कमिश्नर कानपुर रघुबीर लाल ने बताया कि यह शादी के नाम पर की जा रही साइबर ठगी का एक बड़ा खुलासा है। आशंका है कि इस गिरोह ने कई राज्यों के लोगों को अपना निशाना बनाया था।
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    कानपुर साइबर क्राइम पुलिस ने देशभर के लोगों से शादी कराने के नाम पर ऑनलाइन लाखों की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइट चलाने वाले तीन कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य आरोपी रंजिश को गिरफ्तार किया है।

यह गिरोह सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाता था। आरोपी, खासकर महिला कॉलर्स बनकर, पीड़ितों का विश्वास जीतते थे और उनसे रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल बनाने, मीटिंग कराने और अन्य शुल्कों के नाम पर लाखों रुपये वसूल करते थे। पुलिस ने मौके से 43 मोबाइल फोन, 40 रजिस्टर, 8 चेकबुक, 10 एटीएम कार्ड, 5 क्यूआर कोड और कंप्यूटर बरामद किए हैं। पुलिस अब गिरोह के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की सही संख्या का पता लगाया जा सके। पुलिस कमिश्नर कानपुर रघुबीर लाल ने बताया कि यह शादी के नाम पर की जा रही साइबर ठगी का एक बड़ा खुलासा है। आशंका है कि इस गिरोह ने कई राज्यों के लोगों को अपना निशाना बनाया था।
    user_ज्ञानेश मिश्रा
    ज्ञानेश मिश्रा
    Traditional Storyteller हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • बिलग्राम पुलिस ने जुआ खेलते हुए 13 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के दौरान, पुलिस ने मौके से आठ गाड़ियां, दो मोटरसाइकिलें, एक स्कूटी, 43,220 रुपये नकद और ताश के पत्ते बरामद किए हैं। इस पूरी कार्रवाई और बरामदगी के संबंध में क्षेत्राधिकारी बिलग्राम, श्री रवि प्रकाश सिंह ने एक बयान जारी किया है।
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    बिलग्राम पुलिस ने जुआ खेलते हुए 13 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के दौरान, पुलिस ने मौके से आठ गाड़ियां, दो मोटरसाइकिलें, एक स्कूटी, 43,220 रुपये नकद और ताश के पत्ते बरामद किए हैं। इस पूरी कार्रवाई और बरामदगी के संबंध में क्षेत्राधिकारी बिलग्राम, श्री रवि प्रकाश सिंह ने एक बयान जारी किया है।
    user_रिपोर्टर गौरव कश्यप सहानुभूति
    रिपोर्टर गौरव कश्यप सहानुभूति
    Animal control and welfare service हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • स्थानीय ग्रामीणों ने अपने गांव की सड़क की दयनीय हालत पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि गांव की सड़कें बेहद खराब और खतरनाक स्थिति में हैं, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद, कोई भी प्रधान सड़क की मरम्मत कराने या इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई है।
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    स्थानीय ग्रामीणों ने अपने गांव की सड़क की दयनीय हालत पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि गांव की सड़कें बेहद खराब और खतरनाक स्थिति में हैं, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद, कोई भी प्रधान सड़क की मरम्मत कराने या इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई है।
    user_Zuber
    Zuber
    हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • हरदोई जिले के गुलरीपुरवा गांव में लगा 26 साल पुराना एक हैंडपंप पूरी तरह से खराब हो चुका है, जिससे मोहल्ले के निवासियों को पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि हैंडपंप की बोरिंग भी खराब हो गई है और इससे निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है, बल्कि एकदम गंदा निकलता है। एक स्थानीय निवासी के अनुसार, उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नल के खराब होने की वजह से मोहल्ले के सभी सदस्यों को पीने का पानी लाने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
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    हरदोई जिले के गुलरीपुरवा गांव में लगा 26 साल पुराना एक हैंडपंप पूरी तरह से खराब हो चुका है, जिससे मोहल्ले के निवासियों को पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि हैंडपंप की बोरिंग भी खराब हो गई है और इससे निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है, बल्कि एकदम गंदा निकलता है।

एक स्थानीय निवासी के अनुसार, उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नल के खराब होने की वजह से मोहल्ले के सभी सदस्यों को पीने का पानी लाने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
    user_Sandeep Kumar
    Sandeep Kumar
    हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • हरदोई में अधिवक्ताओं ने ई-स्टाम्प के विरोध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी। यात्रा समाप्त होने पर, अधिवक्ताओं ने अर्थी सहित प्रतीकात्मक शव पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए सौंपा था। अब तीसरे दिन अधिवक्ता उस प्रतीकात्मक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए शाहाबाद सीओ से शव लेने पहुंचे हैं।
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    हरदोई में अधिवक्ताओं ने ई-स्टाम्प के विरोध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी। यात्रा समाप्त होने पर, अधिवक्ताओं ने अर्थी सहित प्रतीकात्मक शव पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए सौंपा था।

अब तीसरे दिन अधिवक्ता उस प्रतीकात्मक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए शाहाबाद सीओ से शव लेने पहुंचे हैं।
    user_संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
    संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक
    Hardoi, Uttar Pradesh•
    4 hrs ago
  • ई-रजिस्ट्रेशन एवं निबंधन मित्र व्यवस्था के विरोध में हरदोई के शाहाबाद में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं का आंदोलन ज़िले के चर्चित आंदोलनों में से एक बन गया है। पहले 15 से 17 जून तक घोषित कलमबंद हड़ताल को अब 20 जून तक बढ़ा दिया गया है, जिसका समर्थन ज़िले की अन्य तहसीलों में भी किए जाने की बात कही जा रही है। बार एसोसिएशन शाहाबाद ने 12 जून को आम सभा में इस व्यवस्था के विरोध में संघर्ष का ऐलान किया था। आंदोलन के दूसरे दिन, 16 जून को अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली, जो तहसील से निबंधन कार्यालय तक नगर के प्रमुख मार्गों से गुज़री। इस दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए गए और बाद में प्रतीकात्मक शव पुलिस को सौंप दिया गया। इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिसकर्मी प्रतीकात्मक शव को सीओ कार्यालय की ओर ले जाते हुए दिखाई दिए, जिससे पुलिस की भूमिका और विरोध प्रदर्शन को लेकर उसके कथित उदार रुख पर बहस छिड़ गई। तीसरे दिन, 17 जून को मामले ने तब और दिलचस्प मोड़ ले लिया जब बार एसोसिएशन संयुक्त मोर्चा सीधे सीओ कार्यालय पहुँच गया। उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक को संबोधित एक आधिकारिक मांग-पत्र में अनुरोध किया कि 16 जून को पुलिस को सौंपा गया 'उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी का प्रतीकात्मक शव' अंतिम संस्कार के लिए वापस किया जाए। इस पत्र में व्यंग्यात्मक रूप से उल्लेख किया गया कि पुलिस ने उस समय 'शव का पोस्टमार्टम कराने की बात' कही थी, जबकि अब अधिवक्ता उसका अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। इस मांग-पत्र ने आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शाहाबाद क्षेत्राधिकारी आलोक राज नारायण की भूमिका पर भी सवाल उठे। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और तस्वीरों को लेकर स्थानीय लोगों ने यह सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री की प्रतीकात्मक शव यात्रा जैसे संवेदनशील विरोध कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा 'नीरज' ने भी इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री की शव यात्रा निकालना निंदनीय है, क्योंकि मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने आईपीएस आलोक राज नारायण की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और भाजपा से जुड़े लोगों की ऐसी गतिविधियों में शामिल होने को भी अनुचित बताया। बार एसोसिएशन, दस्तावेज लेखक संघ और स्टाम्प विक्रेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 20 जून तक कलमबंद हड़ताल और विरोध कार्यक्रम जारी रखने की घोषणा की गई है। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को ज़िला ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।
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    ई-रजिस्ट्रेशन एवं निबंधन मित्र व्यवस्था के विरोध में हरदोई के शाहाबाद में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं का आंदोलन ज़िले के चर्चित आंदोलनों में से एक बन गया है। पहले 15 से 17 जून तक घोषित कलमबंद हड़ताल को अब 20 जून तक बढ़ा दिया गया है, जिसका समर्थन ज़िले की अन्य तहसीलों में भी किए जाने की बात कही जा रही है। बार एसोसिएशन शाहाबाद ने 12 जून को आम सभा में इस व्यवस्था के विरोध में संघर्ष का ऐलान किया था।

आंदोलन के दूसरे दिन, 16 जून को अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली, जो तहसील से निबंधन कार्यालय तक नगर के प्रमुख मार्गों से गुज़री। इस दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए गए और बाद में प्रतीकात्मक शव पुलिस को सौंप दिया गया। इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिसकर्मी प्रतीकात्मक शव को सीओ कार्यालय की ओर ले जाते हुए दिखाई दिए, जिससे पुलिस की भूमिका और विरोध प्रदर्शन को लेकर उसके कथित उदार रुख पर बहस छिड़ गई।

तीसरे दिन, 17 जून को मामले ने तब और दिलचस्प मोड़ ले लिया जब बार एसोसिएशन संयुक्त मोर्चा सीधे सीओ कार्यालय पहुँच गया। उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक को संबोधित एक आधिकारिक मांग-पत्र में अनुरोध किया कि 16 जून को पुलिस को सौंपा गया 'उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी का प्रतीकात्मक शव' अंतिम संस्कार के लिए वापस किया जाए। इस पत्र में व्यंग्यात्मक रूप से उल्लेख किया गया कि पुलिस ने उस समय 'शव का पोस्टमार्टम कराने की बात' कही थी, जबकि अब अधिवक्ता उसका अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। इस मांग-पत्र ने आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शाहाबाद क्षेत्राधिकारी आलोक राज नारायण की भूमिका पर भी सवाल उठे। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और तस्वीरों को लेकर स्थानीय लोगों ने यह सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री की प्रतीकात्मक शव यात्रा जैसे संवेदनशील विरोध कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा 'नीरज' ने भी इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री की शव यात्रा निकालना निंदनीय है, क्योंकि मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने आईपीएस आलोक राज नारायण की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और भाजपा से जुड़े लोगों की ऐसी गतिविधियों में शामिल होने को भी अनुचित बताया।

बार एसोसिएशन, दस्तावेज लेखक संघ और स्टाम्प विक्रेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 20 जून तक कलमबंद हड़ताल और विरोध कार्यक्रम जारी रखने की घोषणा की गई है। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को ज़िला ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।
    user_OmdevDixit (Pappu Dixit)
    OmdevDixit (Pappu Dixit)
    Farmer हरदोई, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
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