जिला कारागार हरिद्वार में गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा की दिव्य ध्वनि, प्रथम नवरात्रि पर कलश यात्रा के साथ हुआ सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ जिला कारागार हरिद्वार में गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा की दिव्य ध्वनि प्रथम नवरात्रि पर कलश यात्रा के साथ हुआ सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ कैदियों के जीवन में परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देगा धार्मिक आयोजन स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन जिला कारागार हरिद्वार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। यह आयोजन श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस अवसर पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री केसरी अपने श्रीमुख से सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। कथा आरंभ होने से पहले श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों ने भक्ति भाव के साथ कलश यात्रा निकालकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नव प्रथम नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि प्रथम नवरात्रि का दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था और महाराज युधिष्ठिर का भी राजतिलक इसी शुभ अवसर पर हुआ था। उन्होंने बताया कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने भी इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए यह दिन हिंदू नववर्ष और आध्यात्मिक आरंभ का प्रतीक माना जाता है। कैदियों के जीवन में बदलाव का संदेश कार्यक्रम के आयोजक पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि हर वर्ष हिंदू नववर्ष के अवसर पर जिला कारागार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है। उन्होंने कहा कि जेल में सजा काट रहे बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उनके मन को भगवान की भक्ति से जोड़ने के उद्देश्य से यह धार्मिक आयोजन किया जाता है। उनका मानना है कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी दिव्य कथा है जो मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से जीवन में गलतियां हो गई हों, तो भगवान की भक्ति और सत्संग के माध्यम से वह अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है। भागवत कथा से मिलती है जीवन बदलने की प्रेरणा इस अवसर पर पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत से एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्राचीन काल में एक व्यक्ति था जो जीवन में अनेक गलत कार्य करता था। वह लोगों को परेशान करता और पाप के मार्ग पर चलता था। लेकिन एक दिन संयोग से उसने संतों के मुख से भगवान की कथा सुनी। उस कथा ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी। उसने अपने गलत कार्यों का त्याग किया, भगवान का स्मरण किया और बाद में वही व्यक्ति समाज में एक आदर्श और सम्मानित व्यक्ति बन गया। कथा व्यास ने कहा कि यही श्रीमद्भागवत कथा का संदेश है— भक्ति और सत्संग मनुष्य के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। धार्मिक आयोजनों से मिलते हैं सकारात्मक परिणाम इस अवसर पर जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने सभी को हिंदू नववर्ष और नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कारागार में हर वर्ष आयोजित होने वाली भागवत कथाओं से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और वे अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम बंदियों के जीवन में सुधार लाने की दिशा में एक सार्थक पहल हैं। कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित इस धार्मिक आयोजन में स्वामी कार्तिक गिरी, बलविंदर चौधरी, अमित पुंडीर, बृजमोहन शर्मा, कुलदीप शर्मा, जलज कौशिक, संजू अग्रवाल, संजय शर्मा, रूपेश कौशिक और यशपाल शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। निष्कर्ष जिला कारागार हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का आध्यात्मिक प्रयास है। यह संदेश देती है कि यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान की शरण में आ जाए, तो उसका जीवन अंधकार से निकलकर प्रकाश के मार्ग पर चल सकता है। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार – रामेश्वर गौड़
जिला कारागार हरिद्वार में गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा की दिव्य ध्वनि, प्रथम नवरात्रि पर कलश यात्रा के साथ हुआ सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ जिला कारागार हरिद्वार में गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा की दिव्य ध्वनि प्रथम नवरात्रि पर कलश यात्रा के साथ हुआ सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ कैदियों के जीवन में परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देगा धार्मिक आयोजन स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन जिला कारागार हरिद्वार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। यह आयोजन श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस अवसर पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री केसरी अपने श्रीमुख से सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। कथा आरंभ होने से पहले श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों ने भक्ति भाव के साथ कलश यात्रा निकालकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नव प्रथम नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि प्रथम नवरात्रि का दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना
जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था और महाराज युधिष्ठिर का भी राजतिलक इसी शुभ अवसर पर हुआ था। उन्होंने बताया कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने भी इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए यह दिन हिंदू नववर्ष और आध्यात्मिक आरंभ का प्रतीक माना जाता है। कैदियों के जीवन में बदलाव का संदेश कार्यक्रम के आयोजक पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि हर वर्ष हिंदू नववर्ष के अवसर पर जिला कारागार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है। उन्होंने कहा कि जेल में सजा काट रहे बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उनके मन को भगवान की भक्ति से जोड़ने के उद्देश्य से यह धार्मिक आयोजन किया जाता है। उनका मानना है कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी दिव्य कथा है जो मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से जीवन में गलतियां हो गई हों, तो भगवान की भक्ति और सत्संग के माध्यम से
वह अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है। भागवत कथा से मिलती है जीवन बदलने की प्रेरणा इस अवसर पर पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत से एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्राचीन काल में एक व्यक्ति था जो जीवन में अनेक गलत कार्य करता था। वह लोगों को परेशान करता और पाप के मार्ग पर चलता था। लेकिन एक दिन संयोग से उसने संतों के मुख से भगवान की कथा सुनी। उस कथा ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी। उसने अपने गलत कार्यों का त्याग किया, भगवान का स्मरण किया और बाद में वही व्यक्ति समाज में एक आदर्श और सम्मानित व्यक्ति बन गया। कथा व्यास ने कहा कि यही श्रीमद्भागवत कथा का संदेश है— भक्ति और सत्संग मनुष्य के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। धार्मिक आयोजनों से मिलते हैं सकारात्मक परिणाम इस अवसर पर जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने सभी को हिंदू नववर्ष और नवरात्रि की शुभकामनाएं
दीं। उन्होंने कहा कि कारागार में हर वर्ष आयोजित होने वाली भागवत कथाओं से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और वे अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम बंदियों के जीवन में सुधार लाने की दिशा में एक सार्थक पहल हैं। कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित इस धार्मिक आयोजन में स्वामी कार्तिक गिरी, बलविंदर चौधरी, अमित पुंडीर, बृजमोहन शर्मा, कुलदीप शर्मा, जलज कौशिक, संजू अग्रवाल, संजय शर्मा, रूपेश कौशिक और यशपाल शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। निष्कर्ष जिला कारागार हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का आध्यात्मिक प्रयास है। यह संदेश देती है कि यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान की शरण में आ जाए, तो उसका जीवन अंधकार से निकलकर प्रकाश के मार्ग पर चल सकता है। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार – रामेश्वर गौड़
- चैत्र नवरात्रि में उमड़ी आस्था की अपार धारा जय माता दी के जयकारों से गूंजा मनसा देवी पर्वत, हजारों श्रद्धालुओं ने किए मां के दर्शन मनोकामनाओं के धागों, भक्ति गीतों और श्रद्धा के साथ भक्तों ने चढ़ाया आस्था का प्रसाद स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पावन चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। मां शक्ति की आराधना के इस पावन पर्व पर मनसा देवी मंदिर में हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मनसा देवी पर्वत की ओर जाने वाले पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। “जय माता दी, जोर से बोलो जय माता दी, प्रेम से बोलो जय माता दी” के जयकारों के साथ भक्त माता के दरबार की ओर बढ़ते नजर आए। भक्ति और उत्साह के साथ चढ़ते रहे भक्त मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पैदल मार्ग से पहाड़ की चढ़ाई करते हुए मां के दरबार तक पहुंच रहे थे। कई श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए और कई स्पीकर पर माता के भजन सुनते हुए माता के दरबार की ओर बढ़ रहे थे। भक्ति का यह दृश्य इतना मनमोहक था कि हर तरफ केवल श्रद्धा, आस्था और भक्ति की ही झलक दिखाई दे रही थी। कुछ श्रद्धालु पहाड़ी रास्तों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हुए मां के दर्शन के लिए जा रहे थे, तो कई श्रद्धालु रोपवे (उड़न खटोला) के माध्यम से भी माता के दरबार तक पहुंच रहे थे। प्रसाद और श्रद्धा के साथ मां के चरणों में अर्पित हुईं मनोकामनाएं माता के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित किया। कोई नारियल और चुनरी चढ़ा रहा था, तो कोई पेड़ा, बर्फी और फल माता के चरणों में अर्पित कर रहा था। भक्तों के मन में केवल एक ही भावना थी— “हे मां, हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करें।” किसी ने अपने व्यापार में उन्नति की कामना की, किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि मांगी, तो कोई संतान प्राप्ति की प्रार्थना करता दिखाई दिया। कई युवा अपने विवाह और भविष्य की खुशियों के लिए भी मां से प्रार्थना करते नजर आए। चामुंडा माता मंदिर में बांधे गए मनोकामना के धागे मनसा देवी मंदिर परिसर में स्थित चामुंडा माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। यहां भक्त अपनी मनोकामनाओं के साथ लाल धागा बांधते हुए दिखाई दिए। श्रद्धालु धागा बांधते समय माता का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामना बोलते और संकल्प लेते हुए कहते— “हे मां, जब हमारी मनोकामना पूर्ण होगी, तब हम वापस आकर यह धागा खोलेंगे और आपका प्रसाद अर्पित करेंगे।” नवरात्र के पहले ही दिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां धागा बांधते हुए दिखाई दिए। मनसा देवी क्यों कहलाती हैं ‘मनोकामना पूर्ण करने वाली’ इस अवसर पर महंत डॉ. रवींद्र पुरी, जो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि मां का नाम मनसा देवी इसलिए है कि वह मन बात जान लेती है वह भक्तों की मनसा अर्थात मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और श्रद्धा से माता के दरबार में आता है, मां उसकी हर प्रार्थना अवश्य सुनती हैं। भाव की भूखी हैं मां मनसा देवी महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि माता केवल भाव की भूखी हैं। उन्होंने बताया कि जरूरी नहीं कि भक्तों को सभी मंत्र या विधि-विधान आते हों। यदि कोई भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से माता को याद करता है, तो मां उसकी हर पुकार सुनती हैं और उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से नवरात्रों के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और अपने भाव से माता की पूजा करने का आह्वान किया। हर दिन उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि नवरात्रों के दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से भी हजारों भक्त हरिद्वार पहुंचते हैं और मां मनसा देवी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि मनसा देवी मंदिर आस्था और विश्वास का एक विशाल केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम चैत्र नवरात्रि के पहले ही दिन मनसा देवी पर्वत पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि मां शक्ति में लोगों की आस्था आज भी अटूट है। माता के दरबार में गूंजते जयकारे, भक्ति गीतों की धुन और श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखाई देता विश्वास यह संदेश देता है कि जब मन सच्चा हो और श्रद्धा अटूट हो, तो मां शक्ति की कृपा से हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार – रामेश्वर गौड़4
- हरिद्वार पुलिस ने आमजन को एक खास तोहफा दिया है। खोए हुए मोबाइल फोन वापस दिलाकर पुलिस ने निराश चेहरों पर फिर से मुस्कान बिखेर दी। मोबाइल खोने से परेशान लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है कि पुलिस ने कुल 120 मोबाइल फोन सफलतापूर्वक बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹50 लाख बताई जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर जनपद के सभी थानों की पुलिस टीमें लगातार इस अभियान में जुटी रहीं। मोबाइल फोन की तलाश के लिए CEIR पोर्टल की मदद ली गई, जिससे अलग-अलग स्थानों पर मोबाइल ट्रेस कर उन्हें बरामद किया गया। कोतवाली नगर हरिद्वार पुलिस की मेहनत और तकनीकी सहयोग के चलते यह बड़ी सफलता हासिल हुई। आज कोतवाली परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में एसपी क्राइम निशा यादव और अन्य पुलिस अधिकारियों ने बरामद मोबाइल उनके असली मालिकों को सौंपे। अपने खोए हुए मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। इस सराहनीय पहल से हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर साबित किया है कि वह जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।1
- Post by Dpk Chauhan1
- हरिद्वार में आगामी वर्ष पड़ने वाले अर्धकुंभ का आयोजन सरकार कुंभ की तर्ज पर कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने 1527 करोड़ के महाबजट की व्यवस्था की है। यदि इस धन का सही उपयोग हुआ तो निश्चित ही इस मेले के बाद हरिद्वार में अवस्थापना से जुड़ी कोई समस्या नहीं दिखाई देगी। सिर्फ इतना ही नहीं केंद्र के विभाग भी अपने स्तर पर मेले की तैयारियों में जुटे हैं।एक दिन पूर्व संसद में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी कुंभ के दृष्टिगत केंद्रीय रेल मंत्री से देहरादून से सहारनपुर के बीच शटल ट्रेन सहित कुछ आरओबी बनाने,लक्सर–रुड़की एवं रुड़की–सहारनपुर रेल खंड पर छोटे स्टेशनों के पास रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण हरिद्वार- देहरादून रेल लाइन पर रायवाला (सैनिक छावनी) व विधानसभा भवन, देहरादून से डिफेंस कॉलोनी के मध्य बढ़ते ट्रैफिक दबाव के दृष्टिगत RUB निर्माण, हरिद्वार–लक्सर–सहारनपुर रेल खंड पर सटल/पैसेंजर ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग की। (-कुमार दुष्यंत)1
- 📍 देहरादून से खबर 🎉 त्यौहारों को लेकर दून पुलिस अलर्ट मोड में नवरात्र, अलविदा जुम्मा और ईद के मद्देनज़र देहरादून पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। पूरे जनपद को 3 सुपर ज़ोन, 6 ज़ोन और 17 सेक्टर में बांटकर अधिकारियों की तैनाती की गई है। 👮♂️ संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, PCR और मोबाइल टीमें लगातार गश्त पर रहेंगी। 📱 सोशल मीडिया पर भी 24×7 निगरानी—अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। 🙏 पुलिस की अपील: त्यौहार खुशियों से मनाएं, लेकिन शांति और सौहार्द बनाए रखें। हुड़दंग करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई।1
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त कदम उठाते हुए घरेलू गैस के नियमों में किया बदलाव1
- Post by Rajkumar mehra press reporter1
- जिला कारागार हरिद्वार में गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा की दिव्य ध्वनि प्रथम नवरात्रि पर कलश यात्रा के साथ हुआ सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ कैदियों के जीवन में परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देगा धार्मिक आयोजन स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन जिला कारागार हरिद्वार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। यह आयोजन श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस अवसर पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री केसरी अपने श्रीमुख से सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। कथा आरंभ होने से पहले श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों ने भक्ति भाव के साथ कलश यात्रा निकालकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नव प्रथम नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि प्रथम नवरात्रि का दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था और महाराज युधिष्ठिर का भी राजतिलक इसी शुभ अवसर पर हुआ था। उन्होंने बताया कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने भी इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए यह दिन हिंदू नववर्ष और आध्यात्मिक आरंभ का प्रतीक माना जाता है। कैदियों के जीवन में बदलाव का संदेश कार्यक्रम के आयोजक पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि हर वर्ष हिंदू नववर्ष के अवसर पर जिला कारागार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है। उन्होंने कहा कि जेल में सजा काट रहे बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उनके मन को भगवान की भक्ति से जोड़ने के उद्देश्य से यह धार्मिक आयोजन किया जाता है। उनका मानना है कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी दिव्य कथा है जो मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से जीवन में गलतियां हो गई हों, तो भगवान की भक्ति और सत्संग के माध्यम से वह अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है। भागवत कथा से मिलती है जीवन बदलने की प्रेरणा इस अवसर पर पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत से एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्राचीन काल में एक व्यक्ति था जो जीवन में अनेक गलत कार्य करता था। वह लोगों को परेशान करता और पाप के मार्ग पर चलता था। लेकिन एक दिन संयोग से उसने संतों के मुख से भगवान की कथा सुनी। उस कथा ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी। उसने अपने गलत कार्यों का त्याग किया, भगवान का स्मरण किया और बाद में वही व्यक्ति समाज में एक आदर्श और सम्मानित व्यक्ति बन गया। कथा व्यास ने कहा कि यही श्रीमद्भागवत कथा का संदेश है— भक्ति और सत्संग मनुष्य के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। धार्मिक आयोजनों से मिलते हैं सकारात्मक परिणाम इस अवसर पर जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने सभी को हिंदू नववर्ष और नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कारागार में हर वर्ष आयोजित होने वाली भागवत कथाओं से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और वे अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम बंदियों के जीवन में सुधार लाने की दिशा में एक सार्थक पहल हैं। कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित इस धार्मिक आयोजन में स्वामी कार्तिक गिरी, बलविंदर चौधरी, अमित पुंडीर, बृजमोहन शर्मा, कुलदीप शर्मा, जलज कौशिक, संजू अग्रवाल, संजय शर्मा, रूपेश कौशिक और यशपाल शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। निष्कर्ष जिला कारागार हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का आध्यात्मिक प्रयास है। यह संदेश देती है कि यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान की शरण में आ जाए, तो उसका जीवन अंधकार से निकलकर प्रकाश के मार्ग पर चल सकता है। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार – रामेश्वर गौड़4