वल्लभनगर में जमराबिज पर इलाजी बावजी के द्वार चढ़ेगी किन्नरों की बारात, सालो से चली आरही परंपरा आज भी कायम उदयपुर जिले के वल्लभनगर में होली के त्यौहार पर कई वर्षों से चली आरही परम्परा का आज भी कायम है। जमरा बिज पर वल्लभनगर के कबूतर चौक में सालो से चली परम्परा के रूप में इलाजी बावजी के द्वार पर किन्नरों की बारात चढ़ने की परंपरा है। दरसल मान्यता के अनुसार बावजी के मन्दिर परिसर में क्षेत्र के किन्नर बारात के रूप में आकर नृत्य करके लोगो का मनोरंजन करते है। जिसको देखने के लिए कबूतर चौक में हजारों की तादाद में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ती है। जमरा बिज पर रात्रि 9बजे सर्व समाज के लोग गाजे बाजे और ढोल लेकर राणी बाई के निवास स्थान पर पहुंचते है। उनको कबूतर चौक में इलाजी बावजी के यहां लोक गीतों पर नृत्य करने का निमंत्रण दिया जाता है। लेकिन परम्परा के अनुसार पहले निमंत्रण में किन्नर बारात लेकर नही आते है इसके बाद पुनः ग्रामवासी निमंत्रण देते है इसी तरह यह सिलसिला तीन बार तक चलता है। तीसरा और अंतिम निमंत्रण देने के बाद किन्नर राणी बाई अपने सहयोगी कई किन्नरों के साथ विशेष वेशभूषा पहनकर होली के गीतों की प्रस्तुति देने कबूतर चौक स्थित इलाजी बावजी के मन्दिर के पास पहुंचते है। यहाँ पर सबसे पहले इलाजी बावजी की विशेष पूजा अर्चना करने के बाद बावजी पर गुलाल, अभिर व फूलो से वर्षा कर फाग खेलाई जाएगी। इसके बाद किन्नरों द्वारा इलाजी बावजी को नमन करते हुए होली के लोक गीतों एवं बॉलीवुड गीतों पर नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएगी।
वल्लभनगर में जमराबिज पर इलाजी बावजी के द्वार चढ़ेगी किन्नरों की बारात, सालो से चली आरही परंपरा आज भी कायम उदयपुर जिले के वल्लभनगर में होली के त्यौहार पर कई वर्षों से चली आरही परम्परा का आज भी कायम है। जमरा बिज पर वल्लभनगर के कबूतर चौक में सालो से चली परम्परा के रूप में इलाजी बावजी के द्वार पर किन्नरों की बारात चढ़ने की परंपरा है। दरसल मान्यता के अनुसार बावजी के मन्दिर परिसर में क्षेत्र के किन्नर बारात के रूप में आकर नृत्य करके लोगो का मनोरंजन करते है। जिसको देखने के लिए कबूतर चौक में हजारों की तादाद में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ती है। जमरा बिज पर रात्रि 9बजे सर्व समाज के लोग गाजे बाजे और ढोल लेकर राणी बाई के निवास स्थान पर पहुंचते है। उनको कबूतर चौक में इलाजी बावजी के यहां लोक गीतों पर नृत्य करने का निमंत्रण दिया जाता है। लेकिन परम्परा के अनुसार पहले निमंत्रण में किन्नर बारात लेकर नही आते है इसके बाद पुनः ग्रामवासी निमंत्रण देते है इसी तरह यह सिलसिला तीन बार तक चलता है। तीसरा और अंतिम निमंत्रण देने के बाद किन्नर राणी बाई अपने सहयोगी कई किन्नरों के साथ विशेष वेशभूषा पहनकर होली के गीतों की प्रस्तुति देने कबूतर चौक स्थित इलाजी बावजी के मन्दिर के पास पहुंचते है। यहाँ पर सबसे पहले इलाजी बावजी की विशेष पूजा अर्चना करने के बाद बावजी पर गुलाल, अभिर व फूलो से वर्षा कर फाग खेलाई जाएगी। इसके बाद किन्नरों द्वारा इलाजी बावजी को नमन करते हुए होली के लोक गीतों एवं बॉलीवुड गीतों पर नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएगी।
- उदयपुर जिले के भटेवर सहित आसपास के विभिन्न गांवों में होली दहन के बाद धूलंडी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पर्व को लेकर के गांवों में परंपरा के अनुसार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। युवाओं बुजुर्गों महिलाओं एवं छोटे-छोटे बच्चों ने अलग-अलग टोलियां बनाकर धुलण्डी खेलने का आनंद लिया। ग्रामीणों ने एक दूसरे के कलर लगाकर होली की शुभकामनाएं दी। वहीं महिलाओं ने भी होली खेलने का जमकर लुफ्त उठाया। ढोल की थाप पर होली चौक में ग्रामीणों ने पारंपरिक गैर एवं लोक नृत्य करने का आनंद लिया। गांव के वरिष्ठ पंच पटेल की मौजूदगी में ग्रामीणों ने गमी वाले परिवारों में भी जाकर के तिलक लगाकर होली खेलने का न्योता दिया। ग्रामीणों ने ढोल की थाप पर गांव के हर घर में जाकर लोगों के कलर लगाया और होली की शुभकामनाएं दी। वही छोटे बच्चों और युवाओं ने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर के रंगो उत्सव मनाया। इस दौरान जगह-जगह पर डीजे साउंड की धुन पर लोगों ने गुलाल उड़ाते हुए लोक गीतों पर नाचने गाने का लुफ्त उठाया। सोशल मीडिया पर भी परिवार के लोगों ने एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं देकर संदेश भेजें। इधर मावली के समीपवर्ती खेमपुर व लदानी सहित कई गांवो में गाजे बाजे के साथ लोगो ने प्रेमभाव व उल्लास का रंग लगाया। लदानी के प्रमुख चौराहों पर युवाओ व बुजुर्गों के साथ महिलाओं व छोटे बच्चों ने एक दूसरे के रंग लगाकर खुशियां मनाई1
- udaipur: मंगलवार को रंगों के पर्व होली के मद्देनज़र पुलिस थाना घंटाघर की मांग पर अतिरिक्त जिला कलेक्टर उदयपुर श्री दीपेंद्र सिंह राठौर के निर्देशन में राजस्थान नागरिक सुरक्षा विभाग के जवानों की तैनाती की गई। पिछले चार वर्षों में पानी में डूबने की घटनाओं को देखते हुए इस बार गंगौर घाट पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। किसी भी अनहोनी से बचाव के लिए मौके पर गोताखोरों की टीम तैनात की गई है। ड्यूटी पर तैनात टीम में विपुल चौधरी, नरेश चौधरी, भवानी शंकर, विजय नकवाल, कैलाश मेनारिया, प्रकाश राठौड़ सहित अन्य जवान मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। Hashtags: #होली2026 #उदयपुर #गंगौरघाट #राजस्थानपुलिस #नागरिकसुरक्षा #होलीसुरक्षा #घंटाघरथाना #प्रशासनमुस्तैद #सुरक्षितहोली #LakeCityNews #RajasthanNews #UdaipurNews #जनसुरक्षा1
- Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान4
- गांव बेड़ास मे गैर नृत्य करते हुए1
- आवरगढ़ की पहाड़ियों में परंपरागत होलिका दहन, 1577 से चली आ रही विरासत का निर्वहन1
- “खुले मंच से बड़ा बयान: श्रीचंद कृपलानी ने भाईसाहब पर भ्रष्टाचार स्वीकारा, सियासत में मचा घमासान” होली के रंगों के बीच सियासी पारा चढ़ा, जब भारतीय जनता पार्टी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने खुले मंच से कहा—“मेरे बड़े भाईसाहब ने किया भ्रष्टाचार।” बयान के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज। #श्रीचंदकृपलानी #उदयलाल_आंजना #भ्रष्टाचार_बयान #राजनीतिक_हलचल #होली_में_सियासत #BJP #Congress #BreakingNews1
- Post by Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉस्पिटल1
- उदयपुर जिले के वल्लभनगर में होली के त्यौहार पर कई वर्षों से चली आरही परम्परा का आज भी कायम है। जमरा बिज पर वल्लभनगर के कबूतर चौक में सालो से चली परम्परा के रूप में इलाजी बावजी के द्वार पर किन्नरों की बारात चढ़ने की परंपरा है। दरसल मान्यता के अनुसार बावजी के मन्दिर परिसर में क्षेत्र के किन्नर बारात के रूप में आकर नृत्य करके लोगो का मनोरंजन करते है। जिसको देखने के लिए कबूतर चौक में हजारों की तादाद में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ती है। जमरा बिज पर रात्रि 9बजे सर्व समाज के लोग गाजे बाजे और ढोल लेकर राणी बाई के निवास स्थान पर पहुंचते है। उनको कबूतर चौक में इलाजी बावजी के यहां लोक गीतों पर नृत्य करने का निमंत्रण दिया जाता है। लेकिन परम्परा के अनुसार पहले निमंत्रण में किन्नर बारात लेकर नही आते है इसके बाद पुनः ग्रामवासी निमंत्रण देते है इसी तरह यह सिलसिला तीन बार तक चलता है। तीसरा और अंतिम निमंत्रण देने के बाद किन्नर राणी बाई अपने सहयोगी कई किन्नरों के साथ विशेष वेशभूषा पहनकर होली के गीतों की प्रस्तुति देने कबूतर चौक स्थित इलाजी बावजी के मन्दिर के पास पहुंचते है। यहाँ पर सबसे पहले इलाजी बावजी की विशेष पूजा अर्चना करने के बाद बावजी पर गुलाल, अभिर व फूलो से वर्षा कर फाग खेलाई जाएगी। इसके बाद किन्नरों द्वारा इलाजी बावजी को नमन करते हुए होली के लोक गीतों एवं बॉलीवुड गीतों पर नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएगी।1