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रास्ते में आवागमन में बाधा डालने हेतु हमारे गांव ठठावता में गांव से जो गोगाण जोड़ा रास्ता है उस पर एक घर का घरेलू पानी आने से आने जाने में परेशानी रहती है छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं

2 hrs ago
user_J r
J r
रतनगढ़, चूरू, राजस्थान•
2 hrs ago

रास्ते में आवागमन में बाधा डालने हेतु हमारे गांव ठठावता में गांव से जो गोगाण जोड़ा रास्ता है उस पर एक घर का घरेलू पानी आने से आने जाने में परेशानी रहती है छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं

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  • ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है। घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है। ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है। घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है।
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    ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है।

घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है।
ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है।
घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है।
    user_Vishnaram saini
    Vishnaram saini
    Police Officer रियान बड़ी, नागौर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • क्षतिग्रस्त टांके व शौचालय निर्माण की मांग, संस्थाप्रधान ने सीबीईओ को सौंपा ज्ञापन क्षतिग्रस्त टांके व शौचालय निर्माण की मांग, संस्थाप्रधान ने सीबीईओ को सौंपा ज्ञापन पाली, 3 अगस्त। राजकीय प्राथमिक विद्यालय गांधी नगर में विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर सोमवार को संस्थाप्रधान ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) को ज्ञापन सौंपकर विद्यालय परिसर में स्थित क्षतिग्रस्त पानी के टांके की मरम्मत तथा नए शौचालय निर्माण की मांग की। संस्थाप्रधान ओम प्रकाश भाटी ने ज्ञापन में बताया कि विद्यालय परिसर में स्थित पानी का टांका लंबे समय से खुला एवं क्षतिग्रस्त अवस्था में है। टांके के आसपास प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए टांके की तत्काल मरम्मत कर उसे सुरक्षित कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि टांके के सामने स्थित शौचालय भी जर्जर एवं अनुपयोगी स्थिति में है। विद्यालय परिसर में बच्चे प्रतिदिन खेलकूद एवं अन्य गतिविधियां करते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। साथ ही विद्यालय में पर्याप्त एवं सुरक्षित शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संस्थाप्रधान ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि आगामी दिनों में विद्यालय को मतदान केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में मतदान कर्मियों एवं मतदाताओं का विद्यालय परिसर में आवागमन रहेगा। ऐसे में क्षतिग्रस्त टांका एवं शौचालय की जर्जर स्थिति प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकती है तथा मतदान व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहेगी। उन्होंने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से विद्यार्थियों की सुरक्षा, विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त टांके की तत्काल मरम्मत करवाने एवं नए शौचालय के निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृति एवं बजट उपलब्ध कराने की मांग की है। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि विद्यार्थियों के हित एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभाग शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगा, जिससे विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
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    क्षतिग्रस्त टांके व शौचालय निर्माण की मांग, संस्थाप्रधान ने सीबीईओ को सौंपा ज्ञापन


क्षतिग्रस्त टांके व शौचालय निर्माण की मांग, संस्थाप्रधान ने सीबीईओ को सौंपा ज्ञापन
पाली, 3 अगस्त। राजकीय प्राथमिक विद्यालय गांधी नगर में विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर सोमवार को संस्थाप्रधान ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) को ज्ञापन सौंपकर विद्यालय परिसर में स्थित क्षतिग्रस्त पानी के टांके की मरम्मत तथा नए शौचालय निर्माण की मांग की।
संस्थाप्रधान ओम प्रकाश भाटी ने ज्ञापन में बताया कि विद्यालय परिसर में स्थित पानी का टांका लंबे समय से खुला एवं क्षतिग्रस्त अवस्था में है। टांके के आसपास प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए टांके की तत्काल मरम्मत कर उसे सुरक्षित कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि टांके के सामने स्थित शौचालय भी जर्जर एवं अनुपयोगी स्थिति में है। विद्यालय परिसर में बच्चे प्रतिदिन खेलकूद एवं अन्य गतिविधियां करते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। साथ ही विद्यालय में पर्याप्त एवं सुरक्षित शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संस्थाप्रधान ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि आगामी दिनों में विद्यालय को मतदान केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में मतदान कर्मियों एवं मतदाताओं का विद्यालय परिसर में आवागमन रहेगा। ऐसे में क्षतिग्रस्त टांका एवं शौचालय की जर्जर स्थिति प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकती है तथा मतदान व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहेगी।
उन्होंने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से विद्यार्थियों की सुरक्षा, विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त टांके की तत्काल मरम्मत करवाने एवं नए शौचालय के निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृति एवं बजट उपलब्ध कराने की मांग की है।
विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि विद्यार्थियों के हित एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभाग शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगा, जिससे विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
    user_Shyam Saini
    Shyam Saini
    Local News Reporter रायपुर, पाली, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • रायपुर में बीते 24 घंटे में हो रही बारिश से कई स्थानों के जल भराव हो गया रायपुर बाईपास में जल भराव गंभीर स्थिति को देखकर नगर पालिका टीम मोके पर पहुंची पानी की निकासी सुचारू की
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    रायपुर में बीते 24 घंटे में हो रही बारिश से कई स्थानों के जल भराव हो गया
रायपुर बाईपास में जल भराव  गंभीर स्थिति को देखकर नगर पालिका टीम मोके पर पहुंची पानी की निकासी सुचारू की
    user_Rakesh
    Rakesh
    Farmer रायपुर, पाली, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • अजमेर राजस्थान मदारपुरा गांव रोड की स्थिति ऐसी खराब हो रही है प्रशासन से निवेदन करता है इस रोड का कार्य जल्दी कराया जाए तुरंत जल्द काम करना चाहिए सीसीटीवी कैमरा पर ध्यान देना चाहिए अजमेर जिले के पास में गांव में मदारपुरा उसकी रोड की हालत यह हो रही है सरकार और प्रशासन से आग्रह करता है आम जनता पर ध्यान देना चाहिए रोड का काम करवाना चाहिए जगह-जगह पानी भर रहे हैं और एक्सीडेंट हो रहे हैं
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    अजमेर राजस्थान मदारपुरा गांव रोड की स्थिति ऐसी खराब हो रही है प्रशासन से निवेदन करता है इस रोड का कार्य जल्दी कराया जाए तुरंत जल्द काम करना चाहिए सीसीटीवी कैमरा पर ध्यान देना चाहिए 
अजमेर जिले के पास में गांव में मदारपुरा उसकी रोड की हालत यह हो रही है सरकार और प्रशासन से आग्रह करता है आम जनता पर ध्यान देना चाहिए रोड का काम करवाना चाहिए जगह-जगह पानी भर रहे हैं और एक्सीडेंट हो रहे हैं
    user_Deepak Singh Rawat
    Deepak Singh Rawat
    Taxi Driver Ajmer, Rajasthan•
    57 min ago
  • तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन मांगलियावास : तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले पीसांगन उपखंड अधिकारी को तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में कार्मिक विभाग ने तृतीय श्रेणी शिक्षक लेवल । व लेवल ॥, PTI, प्रबोधक व प्रयोगशाला सहायक छोड़कर सभी कार्मिकों के स्थानांतरणों से प्रतिबन्ध हटाकर तबादले किए गए हैं। जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण और अतार्किक है। तृतीय श्रेणी संवर्ग पिछले 8 वर्षों से इस अन्याय का शिकार हो रहा है। 2008 से नियुक्त शिक्षक तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। हम सभी 18 वर्षों से गृह जिले जाने के लम्बे इंतजार में है।
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    तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन
तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन
तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
मांगलियावास : तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले पीसांगन उपखंड अधिकारी को तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में कार्मिक विभाग ने तृतीय श्रेणी शिक्षक लेवल । व लेवल ॥, PTI, प्रबोधक व प्रयोगशाला सहायक छोड़कर सभी कार्मिकों के स्थानांतरणों से प्रतिबन्ध हटाकर तबादले किए गए हैं। जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण और अतार्किक है। तृतीय श्रेणी संवर्ग पिछले 8 वर्षों से इस अन्याय का शिकार हो रहा है। 2008 से नियुक्त शिक्षक तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। हम सभी 18 वर्षों से गृह जिले जाने के लम्बे इंतजार में है।
    user_नरेंद्र कुमार आचार्य
    नरेंद्र कुमार आचार्य
    Agricultural service पीसांगन, अजमेर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।
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    तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु

कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं।

मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं।

मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।

मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है।

मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है।

मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं।

पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।
तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु
कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं।
मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।
मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है।
मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है।
मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं।
पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।
    user_Vishnaram saini
    Vishnaram saini
    Police Officer रियान बड़ी, नागौर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • पाली में गूंजेगा हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली का शौर्यगान पाली में गूंजेगा हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली का शौर्यगान 108वें बलिदान दिवस पर 23 सितंबर को होगा महा सम्मेलन, रावणा राजपूत समाज ने सौंपी विभिन्न दायित्वों की जिम्मेदारी पाली में अमर शहीद हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली के 108वें बलिदान दिवस के अवसर पर आगामी 23 सितंबर को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित हाइफा हीरो सर्किल पर आयोजित होने वाले भव्य महा सम्मेलन की तैयारियों को लेकर रविवार को सर्वोदय नगर स्थित रावणा राजपूत समाज भवन में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों ने सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की तथा विभिन्न समितियों एवं टोली प्रभारियों को जिम्मेदारियां सौंपी। मीडिया प्रभारी विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि बैठक से पूर्व "आओ पाली अभियान" पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर अधिकाधिक लोगों को सम्मेलन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि बलिदानी वीर मेजर दलपत सिंह देवली को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की जा सके। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री मूल सिंह गहलोत ने कहा कि अमर शहीद मेजर दलपत सिंह देवली केवल रावणा राजपूत समाज के गौरव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण छत्तीस कौम के प्रेरणास्रोत हैं। उनका अद्वितीय शौर्य, राष्ट्रभक्ति और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से सम्मेलन को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। महिला प्रदेश अध्यक्ष अनिता चौहान ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से सामाजिक, शैक्षणिक और संगठनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। युवा प्रदेश अध्यक्ष सुधीर सिंह ने युवाओं को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि युवा संगठित होकर सामाजिक चेतना, शिक्षा, संस्कार और एकता को मजबूत करें तथा समाज हित के प्रत्येक कार्यक्रम में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। वहीं युवा प्रदेश महामंत्री अनिल सिंह बडगुजर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और रूढ़िवादी सोच को समाप्त करने का आह्वान करते हुए सामाजिक सुधार को समय की आवश्यकता बताया। पाली जिला संरक्षक मूल सिंह भाटी एवं जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि 23 सितंबर को आयोजित होने वाले महा सम्मेलन को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग टोलियों का गठन किया गया है। प्रत्येक टोली को प्रचार-प्रसार, आमंत्रण, स्वागत, व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सम्मेलन में अधिकाधिक समाजबंधुओं की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। बैठक को प्रदेश संगठन मंत्री बलवंत सिंह, सुनीता गोयल तथा प्रदेश प्रचार मंत्री रेखा भाटी , महिला जिलाध्यक्ष सिंधु कंवर,ने भी संबोधित करते हुए संगठन की मजबूती, सामाजिक समरसता और एकजुटता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करते हैं। बैठक में सोजत तहसील अध्यक्ष किशोर सिंह, ढलसिंह चौहान, एडवोकेट विक्रम सिंह भैंसाना, जगदीश सिंह इंदा, मांगू सिंह गोयल, सुरेंद्र सिंह परिहार, संतु सिंह सोलंकी, पूनम सिंह राठौड़, शैतान सिंह राठौड़, नरपत सिंह सोलंकी, गणपत सिंह दइया, ओम सिंह सोढ़ा, राजेंद्र सिंह, जब्बर सिंह देवल, शैतान सिंह राठौड़,राजू सिंह, राकेश सिंह आउवा, लाल सिंह पंवार, कल्याण सिंह सोलंकी, बाबू सिंह परिहार, नारायण सिंह गहलोत,अर्जुन सिंह भाटी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। बैठक का संचालन दलपत सिंह भाटी ने किया तथा अंत में सम्मेलन की सफलता के लिए सभी समाजबंधुओं से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
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    पाली में गूंजेगा हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली का शौर्यगान


पाली में गूंजेगा हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली का शौर्यगान
108वें बलिदान दिवस पर 23 सितंबर को होगा महा सम्मेलन, रावणा राजपूत समाज ने सौंपी विभिन्न दायित्वों की जिम्मेदारी
पाली में अमर शहीद हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली के 108वें बलिदान दिवस के अवसर पर आगामी 23 सितंबर को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित हाइफा हीरो सर्किल पर आयोजित होने वाले भव्य महा सम्मेलन की तैयारियों को लेकर रविवार को सर्वोदय नगर स्थित रावणा राजपूत समाज भवन में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों ने सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की तथा विभिन्न समितियों एवं टोली प्रभारियों को जिम्मेदारियां सौंपी।
मीडिया प्रभारी विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि बैठक से पूर्व "आओ पाली अभियान" पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर अधिकाधिक लोगों को सम्मेलन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि बलिदानी वीर मेजर दलपत सिंह देवली को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की जा सके।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री मूल सिंह गहलोत ने कहा कि अमर शहीद मेजर दलपत सिंह देवली केवल रावणा राजपूत समाज के गौरव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण छत्तीस कौम के प्रेरणास्रोत हैं। उनका अद्वितीय शौर्य, राष्ट्रभक्ति और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से सम्मेलन को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
महिला प्रदेश अध्यक्ष अनिता चौहान ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से सामाजिक, शैक्षणिक और संगठनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
युवा प्रदेश अध्यक्ष सुधीर सिंह ने युवाओं को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि युवा संगठित होकर सामाजिक चेतना, शिक्षा, संस्कार और एकता को मजबूत करें तथा समाज हित के प्रत्येक कार्यक्रम में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। वहीं युवा प्रदेश महामंत्री अनिल सिंह बडगुजर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और रूढ़िवादी सोच को समाप्त करने का आह्वान करते हुए सामाजिक सुधार को समय की आवश्यकता बताया।
पाली जिला संरक्षक मूल सिंह भाटी एवं जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि 23 सितंबर को आयोजित होने वाले महा सम्मेलन को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग टोलियों का गठन किया गया है। प्रत्येक टोली को प्रचार-प्रसार, आमंत्रण, स्वागत, व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सम्मेलन में अधिकाधिक समाजबंधुओं की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
बैठक को प्रदेश संगठन मंत्री बलवंत सिंह, सुनीता गोयल तथा प्रदेश प्रचार मंत्री रेखा भाटी , महिला जिलाध्यक्ष सिंधु कंवर,ने भी संबोधित करते हुए संगठन की मजबूती, सामाजिक समरसता और एकजुटता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करते हैं।
बैठक में सोजत तहसील अध्यक्ष किशोर सिंह, ढलसिंह चौहान, एडवोकेट विक्रम सिंह भैंसाना, जगदीश सिंह इंदा, मांगू सिंह गोयल, सुरेंद्र सिंह परिहार, संतु सिंह सोलंकी, पूनम सिंह राठौड़, शैतान सिंह राठौड़, नरपत सिंह सोलंकी, गणपत सिंह दइया,  ओम सिंह सोढ़ा, राजेंद्र सिंह, जब्बर सिंह देवल, शैतान सिंह राठौड़,राजू सिंह, राकेश सिंह आउवा, लाल सिंह पंवार, कल्याण सिंह सोलंकी, बाबू सिंह परिहार,  नारायण सिंह गहलोत,अर्जुन सिंह भाटी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
बैठक का संचालन दलपत सिंह भाटी ने किया तथा अंत में सम्मेलन की सफलता के लिए सभी समाजबंधुओं से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
    user_Shyam Saini
    Shyam Saini
    Local News Reporter रायपुर, पाली, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • अजमेर: लगातार दो दिनों की बारिश से भरभराकर गिरी जर्जर स्कूल की दीवार, बड़ा हादसा टला अजमेर में लगातार हो रही बारिश का असर अब सरकारी भवनों पर भी दिखाई देने लगा है। तोपदड़ा स्थित राजकीय विद्यालय की जर्जर चारदीवारी का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसकी चपेट में एक प्राइवेट बस आ गई और उसे भारी नुकसान हुआ। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई छात्र, कर्मचारी या राहगीर मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों ने दीवार की जर्जर हालत पर सवाल उठाते हुए पूरे परिसर की तकनीकी जांच और जल्द मरम्मत की मांग की है।
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    अजमेर: लगातार दो दिनों की बारिश से भरभराकर गिरी जर्जर स्कूल की दीवार, बड़ा हादसा टला
अजमेर में लगातार हो रही बारिश का असर अब सरकारी भवनों पर भी दिखाई देने लगा है। तोपदड़ा स्थित राजकीय विद्यालय की जर्जर चारदीवारी का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसकी चपेट में एक प्राइवेट बस आ गई और उसे भारी नुकसान हुआ। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई छात्र, कर्मचारी या राहगीर मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों ने दीवार की जर्जर हालत पर सवाल उठाते हुए पूरे परिसर की तकनीकी जांच और जल्द मरम्मत की मांग की है।
    user_Prime News Ajmer
    Prime News Ajmer
    Local News Reporter अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    1 hr ago
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