तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन मांगलियावास : तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले पीसांगन उपखंड अधिकारी को तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में कार्मिक विभाग ने तृतीय श्रेणी शिक्षक लेवल । व लेवल ॥, PTI, प्रबोधक व प्रयोगशाला सहायक छोड़कर सभी कार्मिकों के स्थानांतरणों से प्रतिबन्ध हटाकर तबादले किए गए हैं। जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण और अतार्किक है। तृतीय श्रेणी संवर्ग पिछले 8 वर्षों से इस अन्याय का शिकार हो रहा है। 2008 से नियुक्त शिक्षक तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। हम सभी 18 वर्षों से गृह जिले जाने के लम्बे इंतजार में है।
तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन मांगलियावास : तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले पीसांगन उपखंड अधिकारी को तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में कार्मिक विभाग ने तृतीय श्रेणी
शिक्षक लेवल । व लेवल ॥, PTI, प्रबोधक व प्रयोगशाला सहायक छोड़कर सभी कार्मिकों के स्थानांतरणों से प्रतिबन्ध हटाकर तबादले किए गए हैं। जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण और अतार्किक है। तृतीय श्रेणी संवर्ग पिछले 8 वर्षों से इस अन्याय का शिकार हो रहा है। 2008 से नियुक्त शिक्षक तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। हम सभी 18 वर्षों से गृह जिले जाने के लम्बे इंतजार में है।
- मांगलियावास पुलिस ने 2500 रुपये के इनामी आरोपी को किया गिरफ्तार, नाबालिग प्रकरण में फरार चल रहा था मांगलियावास पुलिस ने 2500 रुपये के इनामी आरोपी को किया गिरफ्तार, नाबालिग प्रकरण में फरार चल रहा था मांगलियावास...मांगलियावास थाना पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में एक महीने से फरार चल रहे 2500 रुपये के इनामी आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। जिला पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को ब्यावर से दबोचा। पुलिस के अनुसार थाने में 3 जुलाई 2026 को एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने, दुष्कर्म करने और जेवरात हड़पने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण में पॉक्सो एक्ट के तहत अनुसंधान प्रारंभ किया गया। थानाधिकारी हरीश चौधरी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों की सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 1 अगस्त 2026 को ब्यावर के बिचडली मोहल्ला, गुजरान हथाई निवासी सुरेश गुर्जर पुत्र स्व. नारू गुर्जर, उम्र 28 वर्ष को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उसे प्रकरण में गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को माननीय पॉक्सो कोर्ट अजमेर में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड अवधि पर लिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में थानाधिकारी हरीश चौधरी, राजेंद्र कुमार, शोभाराम, मुकेश ओलण और प्रकाश जाखड़ शामिल थे। पुलिस ने टीम की इस तत्परता की सराहना की है। फोटो कैप्शन _गिरफ्तार आरोपी1
- शिवभक्त पहुचे जेठाना,कावड़ियों का जेठानानके ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत... सावन के पहले सोमवार के पावन अवसर पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए जेठाना गांव के शिव भक्तों का एक जत्था पवित्र तीर्थ राज पुष्कर पहुंचा। श्रद्धालुओं ने वहां पवित्र सरोवर से जल भरा और कांवड़ यात्रा शुरू की।कांवड़ियों का यह दल जब पुष्कर से पवित्र जल लेकर वापस जेठाना गांव पहुंचा, तो पूरे गांव में उत्सव का माहौल हो गया। ग्रामीणों ने शिव भक्तों और कांवड़ियों का पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया।कांवड़ियों द्वारा लाए गए इस पवित्र जल से कल यानी सावन के पहले सोमवार को जेठाना के शिवालय में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोचार के साथ भगवान भोलेनाथ का महा-जलाभिषेक किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों और शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।2
- तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।1
- अजमेर को मिली बड़ी सौगात आयुर्वेद रसायनशाला का हुआ ऑटोमेशन विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा हुए कार्यक्रम में शामिल1
- पीसांगन उपखंड क्षेत्र गुर्जर समाज के जनप्रतिनिधियों सहित सैकड़ो लोगों ने उपखंड अधिकारी पीसांगन को ज्ञापन सौंप बख्तावर पूरा हत्याकांड का खुलासा करवाने और हत्यारों को गिरफ्तार करवाने की मांग करी पीसांगन उपखंड क्षेत्र गुर्जर समाज के जनप्रतिनिधियों सहित सैकड़ो लोगों ने उपखंड अधिकारी पीसांगन को ज्ञापन सौंप बख्तावर पूरा हत्याकांड का खुलासा करवाने और हत्यारों को गिरफ्तार करवाने की मांग करी2
- पीसांगन पुलिस ने नाबालिक को शादी का झांस दे ,साथ ले जाने और एक माह तक लगातार कई बार दुष्कर्म करने के आरोपी को गिरफ्तार का न्यायालय में पेश किया और लिया पुलिस रिमांड पर पीसांगन पुलिस ने नाबालिक को शादी का झांस दे ,साथ ले जाने और एक माह तक लगातार कई बार दुष्कर्म करने के आरोपी को गिरफ्तार का न्यायालय में पेश किया और लिया पुलिस रिमांड पर1