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मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में वंशकार समाज के एक व्यक्ति ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का प्रयास किया। यह घटना तब सामने आई जब पुलिस ने युवक की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की, जिसके बाद परेशान होकर उसने आत्मदाह करने की कोशिश की।
Jamil khan
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में वंशकार समाज के एक व्यक्ति ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का प्रयास किया। यह घटना तब सामने आई जब पुलिस ने युवक की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की, जिसके बाद परेशान होकर उसने आत्मदाह करने की कोशिश की।
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- टीकमगढ़ के ग्रामीण युवाओं और क्षेत्रवासियों से लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर अपने खेतों से पानी की निकासी (ड्रेनेज) पर विशेष ध्यान देने की अपील की गई है। खेतों में लंबे समय तक जलभराव बने रहने से फसलों को भारी नुकसान होने और पैदावार प्रभावित होने की पूरी संभावना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते पानी की उचित निकासी सुनिश्चित करें ताकि उनकी मेहनत से उगाई गई फसल सुरक्षित रह सके। 'सतर्क किसान, सुरक्षित फसल' का संदेश देते हुए सभी को अपनी कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए सक्रिय रहने का आग्रह किया गया है।1
- टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चंदेरा में सड़कों की हालत बेहद खराब है, जहां कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। सालों से इन सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिससे करीब एक से दो किलोमीटर तक की सड़क पूरी तरह से गड्ढों में बदल चुकी है। इस गंभीर समस्या के बावजूद, विभागीय अधिकारियों को यह स्थिति दिखाई नहीं दे रही है और न ही कोई ध्यान दिया जा रहा है। टीकमगढ़ जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने के बावजूद, चंदेरा की खराब सड़कों की तरफ न तो कोई जनप्रतिनिधि और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी ध्यान देते हैं, जिसके कारण ये सड़कें कई सालों से बदहाल पड़ी हैं।3
- टीकमगढ़ जिले में अपर्याप्त मूंग खरीदी को लेकर किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इसी विरोध में, भारतीय किसान संघ के प्रांतीय आह्वान पर जिले की सभी नौ तहसीलों में तहसीलदार के माध्यम से भारत सरकार के माननीय केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने की तत्काल अनुमति देने की मांग की गई है। किसानों ने विशेष रूप से खरीदी सीमा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है, जहाँ ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी मात्र 1.25 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। किसानों का तर्क है कि यह सीमा न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि उनका वास्तविक उत्पादन 4 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ होता है। उन्होंने अनुरोध किया है कि खरीदी की इस सीमा को बढ़ाकर न्यूनतम 5 क्विंटल प्रति एकड़ करने का आदेश जारी किया जाए। साथ ही, मांग की गई है कि किसान भाइयों की सुविधा के अनुसार खरीदी केंद्र बनाए जाएं, क्योंकि वर्तमान केंद्र असुविधाजनक हैं। ज्ञापन में उन किसानों के पंजीयन का मुद्दा भी उठाया गया है, जिनकी गिरदावरी या पंजीयन नहीं हुए हैं, जिससे वे खरीदी से वंचित हो रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए ऐसे किसानों के लिए पंजीयन की एक नई तिथि निर्धारित करने का आग्रह किया गया है। भारतीय किसान संघ ने शत-प्रतिशत उपार्जन की स्वीकृति की भी मांग की है, ताकि किसानों की पूरी 100 प्रतिशत मूंग और उड़द समर्थन मूल्य पर खरीदी जा सके। विशेष रूप से, टीकमगढ़ जिले को ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन से वंचित रखा गया है, जबकि यहाँ पर्याप्त उत्पादन हुआ है; इसलिए जिले में भी इसकी खरीदी शुरू करने की मांग की गई है। मुख्य ज्ञापन के बाद, तहसीलों की स्थानीय समस्याओं को लेकर एक और ज्ञापन तहसीलदारों को सौंपा गया, जिसमें कृषि विभाग, राजस्व विभाग, जल संसाधन विभाग और विद्युत विभाग से संबंधित विभिन्न शिकायतें शामिल थीं। इन सभी ज्ञापन कार्यक्रमों में भारतीय किसान संघ के जिला, तहसील और ग्राम स्तर के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान बंधु मौजूद रहे।1
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में वंशकार समाज के एक व्यक्ति ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का प्रयास किया। यह घटना तब सामने आई जब पुलिस ने युवक की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की, जिसके बाद परेशान होकर उसने आत्मदाह करने की कोशिश की।1